Kirchhoff Law इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के सबसे महत्वपूर्ण, आधारभूत और व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले नियमों में से एक है। इन नियमों की सहायता से किसी भी इलेक्ट्रिक सर्किट में धारा (Current) और वोल्टेज (Voltage) के व्यवहार को तार्किक, व्यवस्थित और सटीक तरीके से समझा जा सकता है। विशेष रूप से जटिल सर्किट्स के विश्लेषण में Kirchhoff Law in Hindi छात्रों और इंजीनियरों के लिए एक अत्यंत उपयोगी विषय है।
किर्चहॉफ़ के नियम किसी भी इलेक्ट्रिक नेटवर्क में ऊर्जा और आवेश के संरक्षण (Conservation of Energy and Charge) के सिद्धांत पर आधारित होते हैं। इन्हीं सिद्धांतों के कारण ये नियम न केवल सैद्धांतिक अध्ययन में बल्कि व्यावहारिक अनुप्रयोगों में भी अत्यधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
किर्चहॉफ़ के नियम मुख्य रूप से दो भागों में बाँटे गए हैं:
- Kirchhoff’s Current Law (KCL)
- Kirchhoff’s Voltage Law (KVL)
इन दोनों नियमों को सन् 1845 में जर्मन वैज्ञानिक Gustav Robert Kirchhoff द्वारा प्रतिपादित किया गया था। आज भी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, पावर सिस्टम, और सर्किट एनालिसिस में इन नियमों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है।
Table of Contents
Kirchhoff Law क्या है? (What is Kirchhoff Law in Hindi)
Kirchhoff Law विद्युत परिपथों (Electrical Circuits) को समझने और उनका विश्लेषण करने के लिए बनाए गए ऐसे वैज्ञानिक नियम हैं, जो यह स्पष्ट करते हैं कि किसी सर्किट में धारा (Current) और वोल्टेज (Voltage) किस प्रकार व्यवहार करते हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो Kirchhoff Law यह बताता है कि बिजली किसी सर्किट के अंदर “कैसे बहती है” और “कहाँ कितनी ऊर्जा खर्च होती है।”

Kirchhoff Law in Hindi को समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यही नियम जटिल से जटिल इलेक्ट्रिक सर्किट को भी तार्किक और गणनात्मक रूप से हल करने की नींव प्रदान करते हैं।
किर्चहॉफ़ के नियम इस तथ्य पर आधारित हैं कि:
- धारा न तो पैदा होती है और न ही नष्ट होती है (आवेश संरक्षण का नियम)
- ऊर्जा केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है (ऊर्जा संरक्षण का नियम)
इन्हीं मूलभूत वैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर Kirchhoff ने सन् 1845 में दो नियम प्रस्तुत किए, जिन्हें आज हम Kirchhoff’s Laws के नाम से जानते हैं। ये नियम किसी भी विद्युत परिपथ—चाहे वह सरल हो या अत्यंत जटिल—में करंट और वोल्टेज का सही विश्लेषण करने में मदद करते हैं।
Kirchhoff के नियम क्या बताते हैं?
1. किसी जंक्शन (Junction) पर धारा का व्यवहार: जब कई तार किसी एक बिंदु पर मिलते हैं, तो वहाँ यह नियम लागू होता है कि जितनी धारा जंक्शन में प्रवेश करती है, उतनी ही धारा जंक्शन से बाहर निकलती है। इसका अर्थ है कि विद्युत आवेश कहीं “इकट्ठा” नहीं होता और न ही अचानक “गायब” होता है।
2. किसी बंद लूप (Closed Loop) में वोल्टेज का व्यवहार: किसी भी बंद विद्युत पथ में सभी वोल्टेज का बीजगणितीय योग शून्य होता है। इसका सीधा वैज्ञानिक अर्थ यह है कि स्रोत से प्राप्त कुल ऊर्जा = सर्किट में खर्च हुई कुल ऊर्जा
इन दोनों नियमों को ही क्रमशः:
- Kirchhoff’s Current Law (KCL) — जिसे जंक्शन नियम या प्रथम नियम भी कहा जाता है
- Kirchhoff’s Voltage Law (KVL) — जिसे लूप नियम या द्वितीय नियम भी कहा जाता है
Kirchhoff Law का वैज्ञानिक महत्व
Kirchhoff के नियम केवल थ्योरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये वास्तविक जीवन के सभी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम—जैसे पावर सप्लाई, एम्पलीफायर, SMPS, नेटवर्क सर्किट और कंट्रोल सिस्टम—का आधार हैं। यही कारण है कि इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में Kirchhoff Law in Hindi को सबसे पहले और सबसे गंभीरता से पढ़ाया जाता है।
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किरचॉफ का धारा नियम (Kirchhoff Current Law – KCL)
किरचॉफ का प्रथम नियम, जिसे किरचॉफ का धारा नियम कहा जाता है, विद्युत परिपथों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधारभूत नियम है। यह नियम यह समझाने में सहायता करता है कि किसी विद्युत परिपथ में किसी जंक्शन या नोड पर धारा का वितरण किस प्रकार होता है। परिपथ विश्लेषण में यह नियम व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
Kirchhoff’s Current Law की परिभाषा (Definition of Kirchhoff Current Law)
किसी भी जंक्शन या नोड में प्रवेश करने वाली कुल धारा उस नोड से बाहर निकलने वाली कुल धारा के बराबर होती है। इसका कारण यह है कि विद्युत आवेश न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
इसी सिद्धांत के कारण इस नियम को आवेश संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Charge) भी कहा जाता है।
दूसरे शब्दों में, यदि किसी नोड में प्रवेश करने वाली और उससे बाहर निकलने वाली सभी धाराओं को ध्यान में रखा जाए, तो उनका बीजगणितीय योग शून्य होता है। इसे गणितीय रूप में ∑ I = 0 द्वारा व्यक्त किया जाता है। इसका अर्थ यह है कि नोड पर धाराओं का संतुलन बना रहता है।
इस नियम को सही ढंग से लागू करने के लिए धारा के चिन्हों (Sign Convention) का ध्यान रखना आवश्यक है। सामान्यतः नोड में प्रवेश करने वाली धारा को धनात्मक (+) माना जाता है, जबकि नोड से बाहर निकलने वाली धारा को ऋणात्मक (−) माना जाता है। यह साइन कन्वेंशन गणनाओं को सरल, स्पष्ट और त्रुटिरहित बनाता है।

Kirchhoff Current Law का उदाहरण (Example)
मान लीजिए किसी विद्युत परिपथ के एक नोड पर तीन धाराएँ जुड़ी हुई हैं। इस नोड में दो धाराएँ प्रवेश कर रही हैं और एक धारा बाहर निकल रही है। यदि पहली धारा I₁= 4A नोड के अंदर आ रही है और दूसरी धारा I₂= 6A भी नोड के अंदर आ रही है, तो नोड में प्रवेश करने वाली कुल धारा 4A+6A=10A होगी।
किरचॉफ के धारा नियम (KCL) के अनुसार, नोड में प्रवेश करने वाली कुल धारा नोड से बाहर निकलने वाली कुल धारा के बराबर होती है। इसलिए बाहर निकलने वाली धारा I₃ का मान 10 ऐम्पियर होगा। अतः
I₃ = I₁ + I₂ = 4A+6A = 10A
यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि धारा न तो नोड पर जमा होती है और न ही नष्ट होती है। यही कारण है कि Kirchhoff’s Current Law को आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित माना जाता है।
नोड (Node) क्या होता है?
नोड वह विशेष बिंदु होता है जहाँ दो या दो से अधिक धारा प्रवाहित मार्ग, जैसे कि तार (Wires), केबल (Cables) या अन्य विद्युत घटक, आपस में जुड़े होते हैं। इसे आप विद्युत परिपथ का “जंक्शन पॉइंट” भी कह सकते हैं। नोड पर यह महत्वपूर्ण विशेषता होती है कि इसमें विभिन्न शाखाओं से आने और जाने वाली धाराएँ एक स्थान पर मिलती हैं। यही कारण है कि किरचॉफ का धारा नियम (KCL) सीधे नोड पर लागू किया जाता है।
KCL कहाँ उपयोग होता है? (Applications of Kirchhoff Current Law)
Kirchhoff’s Current Law (KCL) विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में एक अत्यंत महत्वपूर्ण नियम है, जिसका प्रयोग कई क्षेत्रों में किया जाता है।
1. Node Voltage Method (Nodal Analysis): KCL का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग Node Voltage Method में होता है। इस तकनीक में प्रत्येक नोड पर Kirchhoff’s Current Law का प्रयोग करके समीकरण बनाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, किसी नोड में प्रवेश करने वाली धाराएँ I₁ + I₂ और नोड से निकलने वाली धारा I₃ हैं, तो समीकरण होगा:
I₁ + I₂ − I₃ = 0 या ∑ I = 0
इन समीकरणों को हल करके हम नोड वोल्टेज (Node Voltages) आसानी से ज्ञात कर सकते हैं, चाहे सर्किट सरल हो या जटिल।
2. Complex Network Analysis (जटिल नेटवर्क विश्लेषण): KCL का प्रयोग Complex Electrical Networks में भी किया जाता है। जब कोई सर्किट कई शाखाओं और स्रोतों वाला होता है, तो प्रत्येक जंक्शन पर KCL लागू करके हम सभी branch currents को गणितीय रूप से ज्ञात कर सकते हैं।
∑ I_in = ∑ I_out
इस नियम की सहायता से नेटवर्क का विश्लेषण systematic और error-free होता है।
3. DC और AC Circuits (समानधारा और परिवर्तित धारा परिपथ): KCL केवल DC (Direct Current) सर्किट तक सीमित नहीं है। AC (Alternating Current) सर्किट में भी यह नियम लागू होता है। AC circuits में धाराएँ complex form में होती हैं, लेकिन Kirchhoff’s Current Law का सिद्धांत वही रहता है:
∑ I_phase = 0
इससे पता चलता है कि real और reactive currents दोनों नोड पर संतुलित रहते हैं।
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किरचॉफ का वोल्टेज नियम Kirchhoff’s Voltage Law (KVL)
किरचॉफ का द्वितीय नियम, जिसे Kirchhoff’s Voltage Law (KVL) या किरचॉफ का वोल्टेज नियम भी कहा जाता है, विद्युत परिपथों का एक आधारभूत और अत्यंत महत्वपूर्ण नियम है। यह नियम किसी भी बंद लूप (Closed Loop) में सभी वोल्टेज का बीजगणितीय योग शून्य (V=0) होने का सिद्धांत बताता है। सरल शब्दों में, यह सुनिश्चित करता है कि लूप में कुल ऊर्जा का संतुलन बना रहे, यानी कोई ऊर्जा न तो अचानक उत्पन्न हो और न ही नष्ट हो
किरचॉफ वोल्टेज नियम की परिभाषा (Definition)
KVL के अनुसार, किसी भी बंद लूप में स्रोत वोल्टेज और लूप में होने वाले सभी वोल्टेज ड्रॉप्स का algebraic sum शून्य होता है। इसे निम्नलिखित सूत्र से व्यक्त किया जा सकता है:
V=0
यह नियम ऊर्जा संरक्षण (Law of Conservation of Energy) पर आधारित है। इसका अर्थ यह है कि यदि आप किसी भी लूप के किसी बिंदु से शुरू करके लूप के चारों ओर चलते हैं, तो वोल्टेज की कुल वृद्धि और कुल गिरावट का algebraic sum हमेशा शून्य होगा।

Kirchhoff’s Voltage Law का उदाहरण (Example)
किरचॉफ का वोल्टेज नियम (Kirchhoff’s Voltage Law – KVL) कहता है कि किसी बंद लूप (Closed Loop) में वोल्टेज का कुल योग हमेशा शून्य होता है। इसका मतलब है कि लूप में बैटरी द्वारा दी गई कुल वोल्टेज और लूप में मौजूद सभी घटकों (जैसे रेसिस्टर्स) पर वोल्टेज ड्रॉप का योग बराबर होना चाहिए।
उदाहरण: मान लीजिए एक साधारण परिपथ में:
- बैटरी का वोल्टेज = 10V
- Resistor R₁ पर वोल्टेज ड्रॉप = 2V
- Resistor R₂ पर वोल्टेज ड्रॉप = 8V
KVL के अनुसार, लूप में वोल्टेज का समीकरण होगा:
V(source) − V(R₁) − V(R₂) − … = 0
इसे मानांकित रूप में लिखें:
10V−2V−8V=0
यह उदाहरण स्पष्ट रूप से दिखाता है कि लूप में वोल्टेज “जमा” या “खो” नहीं होती। बैटरी द्वारा प्रदान की गई कुल वोल्टेज 10V पूरी तरह से रेसिस्टर्स पर बंट जाती है।
Kirchhoff’s Voltage Law कहाँ उपयोग होता है?
Kirchhoff’s Voltage Law (KVL) विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में एक बुनियादी और अत्यंत महत्वपूर्ण नियम है। यह नियम कहता है कि किसी भी बंद लूप में सभी वोल्टेज का algebraic sum शून्य होता है। यही कारण है कि KVL का प्रयोग विद्युत सर्किटों के विश्लेषण, डिजाइन और simulation में व्यापक रूप से किया जाता है।
1. Loop Analysis (लूप विश्लेषण): KVL का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग loop analysis में होता है। किसी भी बंद लूप में वोल्टेज का संतुलन सुनिश्चित करके हम समझ सकते हैं कि लूप में कितनी ऊर्जा कहाँ खर्च हो रही है। यह engineers और students को circuits की कार्यप्रणाली का स्पष्ट और systematized दृश्य प्रदान करता है, जिससे जटिल circuits भी आसानी से समझे जा सकते हैं।
2. Mesh Current Method (मेश करंट मेथड): Mesh current method में KVL प्रत्येक loop में करंट और वोल्टेज वितरण का विश्लेषण करने में मदद करता है। यह technique विशेष रूप से complex circuits में उपयोगी है।
3. Electrical Design (इलेक्ट्रिकल डिज़ाइन): Electrical design में KVL का प्रयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि circuit के सभी components पर सही वोल्टेज पहुंचे। यह नियम designers को circuits को सुरक्षित, reliable और energy-efficient बनाने में मदद करता है। इसके बिना, components पर overvoltage या undervoltage की समस्या आ सकती है।
4. Circuit Simulation (सर्किट सिमुलेशन): Modern electronics में KVL का उपयोग circuit simulation software जैसे SPICE, Multisim और MATLAB में किया जाता है। Simulation के दौरान यह सुनिश्चित करता है कि सभी loops में वोल्टेज संतुलित रहे। इसके कारण currents और voltages की prediction accurate होती है।
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Kirchhoff Law का हल किया गया उदाहरण
मान लीजिए कि किसी बंद विद्युत परिपथ में तीन प्रतिरोधक और दो बैटरियाँ जुड़ी हुई हैं। यदि प्रतिरोधकों के मान R₁ = 3 Ω, R₂ = 5 Ω और R₃ = 4 Ω हैं तथा परिपथ में लगी बैटरियों के EMF क्रमशः E₁ = 12 V और E₂ = 8 V हैं, तो हमें परिपथ में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा ज्ञात करनी है।

समस्या का समाधान करते समय आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले आपको धारा की एक दिशा चुननी होती है। इस समस्या में हमने धारा की दिशा दक्षिणावर्त (Clockwise) मानी है। KVL में दिशा का चुनाव केवल गणना के लिए होता है; अंतिम परिणाम का चिन्ह यह बताता है कि वास्तविक धारा उसी दिशा में है या उसके विपरीत।
जब धारा किसी प्रतिरोधक से होकर प्रवाहित होती है, तो उसमें विभव में कमी (Voltage Drop) होती है। इसलिए प्रतिरोधक के लिए वोल्टेज संबंध V = IR लिया जाता है और KVL समीकरण लिखते समय इसका चिन्ह ऋणात्मक (−IR) माना जाता है।
EMF स्रोत (बैटरी) के लिए चिन्ह इस बात पर निर्भर करता है कि धारा किस दिशा में प्रवाहित हो रही है। यदि धारा निम्न वोल्ट से उच्च वोल्ट की ओर प्रवाहित होती है, तो EMF स्रोत को धनात्मक (+E) माना जाता है, क्योंकि स्रोत पर ऊर्जा प्रदान की जा रही होती है। इसके विपरीत, यदि धारा उच्च वोल्ट से निम्न वोल्ट की ओर (+ से −) प्रवाहित होती है, तो EMF स्रोत को ऋणात्मक (−E) माना जाता है, क्योंकि उस स्थिति में स्रोत से ऊर्जा का निर्वहन हो रहा होता है।
इस हल में धारा की दिशा दक्षिणावर्त घूर्णन की दिशा के समान मानी गई है। अतः Kirchhoff Voltage Law (KVL) के अनुसार बंद लूप में वोल्टेज का बीजगणितीय योग शून्य होगा, जिसे इनलाइन रूप में ऐसे लिखा जा सकता है:
−IR₁ + E₁ − IR₂ − IR₃ − E₂ = 0
अब यदि दिए गए मान इस समीकरण में रखें जाएँ, तो हमें मिलता है:
−3I + 12 − 5I − 4I − 8 = 0
समान पदों को जोड़ने पर समीकरण सरल होकर बन जाता है:
−12I + 4 = 0
अब धारा का मान निकालते हैं:
−12I = −4
I = −4 / −12 = 0.333 A
अतः परिपथ में प्रवाहित विद्युत धारा 0.333 A है। चूँकि धारा का मान धनात्मक आया है, इसका अर्थ है कि वास्तविक धारा की दिशा वही है जो हमने प्रारंभ में मानी थी, अर्थात् दक्षिणावर्त दिशा। यदि धारा का मान ऋणात्मक आता, तो इसका अर्थ होता कि धारा की वास्तविक दिशा दक्षिणावर्त के विपरीत, यानी वामावर्त होती।
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Kirchhoff Law के पीछे का सिद्धांत
Kirchhoff के नियम केवल धारा और वोल्टेज के गणित तक सीमित नहीं हैं। इनके पीछे मूलभूत भौतिक सिद्धांत काम करते हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी सर्किट में ऊर्जा और आवेश का संतुलन हमेशा बना रहे।
| नियम (Law) | आधारित सिद्धांत (Underlying Principle) | व्याख्या (Explanation) |
|---|---|---|
| KCL (Kirchhoff’s Current Law) | चार्ज संरक्षण (Conservation of Charge) | किसी नोड में प्रवेश और निकास करने वाली कुल धारा बराबर होती है। |
| KVL (Kirchhoff’s Voltage Law) | ऊर्जा संरक्षण (Conservation of Energy) | किसी बंद लूप में कुल वोल्टेज वृद्धि और ड्रॉप का algebraic sum शून्य होता है। |
| KCL (AC Circuits Application) | Charge continuity | Real और reactive currents balance रहते हैं। |
| KVL (Circuit Design Application) | Energy balance | Loops में source energy और total voltage drop बराबर रहते हैं। |
Kirchhoff Law के फायदे (Advantages)
Kirchhoff के नियम (KCL और KVL) विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये जटिल circuits को systematic और manageable तरीके से समझने और विश्लेषण करने में मदद करते हैं।
1. जटिल सर्किट को सरल बनाता है: Kirchhoff Law के द्वारा किसी भी जटिल सर्किट में मौजूद multiple loops और nodes को step-by-step analyze किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, Node Voltage Method और Mesh Current Method KCL और KVL पर आधारित होते हैं। इससे engineers या students आसानी से unknown currents और voltages ज्ञात कर सकते हैं।
2. किसी भी प्रकार के सर्किट पर लागू: KCL और KVL का प्रयोग DC और AC circuits, series और parallel circuits, और complex networks में भी किया जा सकता है। यह नियम सार्वभौमिक हैं क्योंकि ये charge और energy conservation principles पर आधारित हैं।
3. इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के लिए अत्यंत उपयोगी: Kirchhoff Law students को circuits का logical और structured analysis सिखाता है। इससे उन्हें systematic approach और problem-solving skills विकसित करने में मदद मिलती है।
4. Practical और Theoretical दोनों में सहायक: Kirchhoff Law का प्रयोग केवल theoretical calculations तक सीमित नहीं है। यह real-world applications जैसे PCB design, power systems, circuit simulation और electronics design में भी मदद करता है।
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Kirchhoff Law की सीमाएँ (Limitations)
हालांकि Kirchhoff Law बहुत उपयोगी है, फिर भी इसकी कुछ practical और theoretical सीमाएँ हैं:
1. High Frequency Circuits में सटीक नहीं: KCL और KVL को अक्सर lumped element approximation पर आधारित माना जाता है। उच्च आवृत्ति (high frequency) circuits में distributed capacitance और inductance की वजह से ये नियम पूरी तरह सटीक नहीं होते।
2. Non-lumped systems में लागू नहीं: यदि circuit components का आकार wavelength के समानांतर है, तो Kirchhoff Law non-lumped systems में सही prediction नहीं देता।
3. Electromagnetic Radiation को अनदेखा करता है: Kirchhoff Law केवल quasi-static fields को मानता है। EM radiation और wave propagation को इसमें consider नहीं किया जाता। इसलिए, RF circuits और antennas में KCL/KVL पूरी तरह applicable नहीं होते।
इन limitations के बावजूद, Kirchhoff Law का use DC circuits, low-frequency AC circuits, power distribution और electronics design में बहुत reliable और standard method माना जाता है।
Kirchhoff Law और Ohm’s Law में अंतर
विज्ञान और इलेक्ट्रॉनिक्स में, विद्युत सर्किट को समझने और विश्लेषण करने के लिए Kirchhoff Law और Ohm’s Law का उपयोग किया जाता है। जहां Ohm’s Law एक सरल तत्व के लिए विद्युत धारा, वोल्टेज और प्रतिरोध के बीच संबंध बताता है, वहीं Kirchhoff Law पूरे सर्किट में ऊर्जा और चार्ज के संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित नियम प्रदान करता है।
| बिंदु | Kirchhoff Law | Ohm’s Law |
|---|---|---|
| उपयोग | पूरे सर्किट में धारा और वोल्टेज के वितरण का विश्लेषण | किसी एक तत्व (जैसे रेसिस्टेंस) में वोल्टेज और करंट का संबंध |
| नियम | 2 नियम: KCL (Kirchhoff’s Current Law), KVL (Kirchhoff’s Voltage Law) | 1 नियम: V = IR |
| आधार | ऊर्जा और चार्ज संरक्षण | वोल्टेज, करंट और प्रतिरोध का सम्बन्ध |
| प्रकार | पूरे सर्किट के लिए समग्र नियम | व्यक्तिगत तत्व के लिए सरल गणितीय नियम |
| जटिलता | अधिक जटिल, कई नोड और लूप पर लागू | सरल, एक तत्व पर सीधे लागू |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. किरचॉफ का लूप नियम क्या है?
किरचॉफ का लूप नियम (Kirchhoff’s Voltage Law) कहता है कि किसी भी बंद विद्युत लूप में सभी वोल्टेज वृद्धि और वोल्टेज ह्रास का बीजीय योग शून्य होता है। यह नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है और इसका उपयोग परिपथ में वोल्टेज, धारा तथा प्रतिरोध के मान ज्ञात करने के लिए किया जाता है। मेश करंट विधि इसी लूप नियम पर आधारित होती है।
2. किरचॉफ के कितने नियम हैं?
किरचॉफ ने विद्युत परिपथों के विश्लेषण के लिए दो मूलभूत नियम बताए हैं। ये नियम यह समझाने में मदद करते हैं कि किसी परिपथ में धारा और वोल्टेज कैसे व्यवहार करते हैं। पहला नियम आवेश के संरक्षण पर आधारित है और दूसरा नियम ऊर्जा के संरक्षण पर। इन दोनों नियमों का संयुक्त रूप से उपयोग करके जटिल विद्युत परिपथों को सरलता से हल किया जा सकता है।
3. किरचॉफ का वोल्टता नियम क्या है?
किरचॉफ का वोल्टता नियम (Kirchhoff’s Voltage Law) यह बताता है कि किसी भी बंद विद्युत परिपथ या लूप में सभी वोल्टेज वृद्धि और वोल्टेज ह्रास का बीजीय योग शून्य होता है। यह नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है और परिपथ में विभिन्न तत्वों के वोल्टेज को निर्धारित करने में सहायक होता है।
4. किरचॉफ का पहला और दूसरा नियम सूत्र क्या है?
किरचॉफ का पहला नियम, जिसे धारा नियम (KCL) कहा जाता है, परिपथ के जंक्शन पर लागू होता है और यह आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। इस नियम के अनुसार किसी भी जंक्शन पर प्रवेश करने वाली धाराओं का योग, वहाँ से निकलने वाली धाराओं के योग के बराबर होता है। इसका गणितीय सूत्र है: ΣI = 0।
किरचॉफ का दूसरा नियम, जिसे वोल्टता नियम (KVL) कहा जाता है, बंद परिपथ या लूप पर लागू होता है और यह ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। इस नियम के अनुसार किसी बंद लूप में सभी वोल्टेज वृद्धि और वोल्टेज ह्रास का बीजीय योग शून्य होता है। इसका सूत्र है: ΣV = 0।
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