Solar Inverter में Anti-Islanding Protection
Solar Inverter में Anti-Islanding Protection

Solar Inverter में Anti-Islanding Protection कैसे काम करती है?

आज के समय में Solar Power System तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और घरों, दुकानों, फैक्ट्रियों से लेकर बड़े सोलर प्लांट्स तक इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है। इस पूरे सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Solar Inverter होता है, जो सोलर पैनल से बनने वाली DC बिजली को उपयोग योग्य AC बिजली में बदलता है। लेकिन केवल पावर कन्वर्ज़न ही Solar Inverter की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि सिस्टम और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक होता है।

इसी सुरक्षा से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर अनदेखा किया जाने वाला फीचर है Anti-Islanding Protection। बहुत से उपयोगकर्ता यह जानते हैं कि Solar Inverter में यह फीचर मौजूद होता है, लेकिन वास्तव में Solar Inverter में Anti-Islanding Protection कैसे काम करती है? और यह ग्रिड, उपकरणों व तकनीशियनों की सुरक्षा के लिए क्यों अनिवार्य है—इस पर जानकारी सीमित होती है। इस लेख में हम इसी महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र की मूल अवधारणा और उसके महत्व को सरल और स्पष्ट रूप में समझने की शुरुआत करेंगे।

Islanding क्या होता है? (What is Islanding)

Islanding एक ऐसी स्थिति को कहा जाता है जब बिजली का मुख्य ग्रिड (DISCOM की सप्लाई) किसी कारणवश बंद या फेल हो जाता है, लेकिन उस ग्रिड से जुड़ा हुआ कोई स्थानीय पावर सोर्स—जैसे Solar Inverter System—फिर भी बिजली बनाता रहता है और आसपास के लोड (घर, बिल्डिंग या फैक्ट्री) को सप्लाई देता रहता है।

सरल शब्दों में समझें तो, जब पूरा इलाका ग्रिड से कट जाता है लेकिन कोई छोटा हिस्सा अपनी खुद की बिजली से चालू रहता है, तो वह हिस्सा ग्रिड से अलग होकर एक “द्वीप (Island)” की तरह व्यवहार करने लगता है। इसी वजह से इस स्थिति को Islanding कहा जाता है।

यह स्थिति दो तरह से हो सकती है—

अनजाने में (Unintentional Islanding): जब ग्रिड में फॉल्ट, लाइन ट्रिप या मेंटेनेंस के कारण सप्लाई बंद हो जाए और Solar Inverter को इसका सही तरीके से पता न चले।

जानबूझकर (Intentional Islanding): जैसे माइक्रोग्रिड सिस्टम में, जहाँ सिस्टम को डिज़ाइन ही इस तरह किया जाता है कि वह ग्रिड से अलग होकर भी सुरक्षित रूप से काम कर सके।

हालांकि सामान्य Grid-Tied Solar Systems में अनजाने में होने वाली Islanding बेहद खतरनाक हो सकती है। इससे लाइन पर काम कर रहे बिजली कर्मचारियों को करंट लगने का खतरा होता है और इलेक्ट्रिकल उपकरणों को भी नुकसान पहुँच सकता है। इसी कारण Islanding को समय रहते पहचानना और रोकना बहुत ज़रूरी होता है, और यहीं से Anti-Islanding Protection की भूमिका शुरू होती है।

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Solar Inverter में Anti-Islanding Protection क्या है?

Anti-Islanding Protection एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणाली है, जो Grid-Tied Solar Inverter में दी जाती है। इसका मुख्य काम यह सुनिश्चित करना होता है कि जैसे ही बिजली का मुख्य ग्रिड (DISCOM Supply) बंद हो, Solar Inverter तुरंत अपने आप बंद हो जाए और किसी भी लाइन में बिजली भेजना रोक दे।

Solar Inverter में Anti-Islanding Protection क्या है
Solar Inverter में Anti-Islanding Protection क्या है

सरल और सीधी भाषा में समझें तो:

Grid OFF = Solar Inverter OFF

जब ग्रिड में पावर कट, फॉल्ट या मेंटेनेंस के कारण सप्लाई बंद होती है, उस समय अगर Solar Inverter चालू रहा और बिजली बनाता रहा, तो यह स्थिति Islanding कहलाती है। यही स्थिति लाइनमैन और ग्रिड उपकरणों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होती है। Anti-Islanding Protection इसी खतरे को रोकने के लिए बनाई गई है।

ग्रिड से जुड़े सोलर सिस्टम को बिजली कंपनियाँ Distributed Generator (DG) मानती हैं, क्योंकि ये सोलर पैनल बिजली बनाकर नेट-मीटरिंग के माध्यम से यूटिलिटी ग्रिड में वापस भेजते हैं। अगर ग्रिड बंद होने के बाद भी यह DG सिस्टम बिजली सप्लाई करता रहे, तो लाइन पर काम कर रहे कर्मचारियों को यह अंदाज़ा नहीं होता कि लाइन अभी भी “Live” है, जिससे गंभीर दुर्घटना हो सकती है।

इसीलिए Anti-Islanding Protection यह सुनिश्चित करती है कि जैसे ही ग्रिड की वोल्टेज या फ़्रीक्वेंसी तय सीमा से बाहर जाए, Solar Inverter तुरंत Grid से डिस्कनेक्ट हो जाए। इससे न केवल बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा होती है, बल्कि ग्रिड और उपभोक्ता के इलेक्ट्रिकल उपकरण भी सुरक्षित रहते हैं।

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Solar Inverter में Anti-Islanding Protection क्यों जरूरी है?

Anti-Islanding Protection किसी भी Grid-Tied Solar System का एक अनिवार्य सुरक्षा फीचर है। इसका उद्देश्य केवल नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि मानव जीवन, ग्रिड और उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नीचे इसे आसान और व्यावहारिक भाषा में समझते हैं।

Line Man की सुरक्षा (सबसे महत्वपूर्ण कारण)

Anti-Islanding Protection का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण उद्देश्य बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा करना है। जब किसी क्षेत्र में Grid Supply बंद हो जाती है, तो लाइनमैन यह मानकर मरम्मत का काम करता है कि लाइन पूरी तरह Dead है। अगर इस स्थिति में Solar Inverter चालू रहा और लाइन में बिजली सप्लाई करता रहा, तो High Voltage के कारण कर्मचारी को करंट लगने का गंभीर और जानलेवा खतरा हो सकता है। Anti-Islanding Protection ग्रिड बंद होते ही Solar Inverter को तुरंत बंद कर देती है, जिससे लाइन पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है।

Grid की सुरक्षा और स्थिरता (Grid Safety)

Islanding की स्थिति में Solar System ग्रिड से अलग होकर अपने हिसाब से काम करने लगता है। इससे Voltage imbalance, Frequency mismatch और Power quality खराब होने जैसी समस्याएँ पैदा होती हैं। जब मुख्य Grid दोबारा चालू होती है, तो यह असंतुलन ग्रिड में बड़े फॉल्ट, ट्रिपिंग और उपकरणों के नुकसान का कारण बन सकता है। Anti-Islanding Protection इस तरह की स्थिति बनने से पहले ही Solar Inverter को Grid से डिस्कनेक्ट कर देती है, जिससे ग्रिड की स्थिरता बनी रहती है।

Inverter और अन्य उपकरणों की सुरक्षा (Equipment Protection)

Anti-Islanding Protection Solar System से जुड़े सभी महत्वपूर्ण उपकरणों की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाती है। अनियंत्रित Islanding के दौरान Solar Inverter, Transformer और Energy Meter जैसे उपकरण असामान्य वोल्टेज और अनिश्चित लोड के कारण खराब हो सकते हैं। यह सुरक्षा प्रणाली Inverter को समय पर बंद करके इन उपकरणों को नुकसान से बचाती है और उनकी कार्यक्षमता व जीवनकाल को बढ़ाती है।

नियम और मानकों का पालन (Regulatory Compliance)

Grid-Tied Solar Systems के लिए Anti-Islanding Protection केवल एक सुरक्षा फीचर नहीं बल्कि एक अनिवार्य नियम भी है। लगभग सभी बिजली वितरण कंपनियाँ (DISCOM) और ग्रिड कोड यह स्पष्ट रूप से मांग करते हैं कि हर Grid से जुड़ा Solar Inverter इस सुरक्षा प्रणाली से लैस हो। इसके बिना न तो सिस्टम को Grid से जोड़ने की अनुमति मिलती है और न ही उसे सुरक्षित माना जाता है।

Solar Inverter में Anti-Islanding Protection कैसे काम करती है?

Anti-Islanding Protection Solar Inverter के अंदर मौजूद एक स्वचालित और निरंतर सक्रिय सुरक्षा प्रणाली होती है। यह प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि Solar Inverter केवल तभी बिजली उत्पन्न करे, जब मुख्य Grid पूरी तरह से मौजूद और स्थिर हो। इसके लिए Inverter हर समय Grid के कुछ मूलभूत विद्युत संकेतों को वैज्ञानिक तरीके से जाँचता रहता है। जैसे ही इन संकेतों में असामान्यता आती है, Inverter बिना किसी देरी के खुद को Grid से अलग कर लेता है।

Solar Inverter में Anti-Islanding Protection कैसे काम करती है?
Solar Inverter में Anti-Islanding Protection कैसे काम करती है?

Voltage Monitoring (वोल्टेज की निगरानी)

Solar Inverter सबसे पहले Grid के वोल्टेज को लगातार मापता रहता है। Single Phase सिस्टम में Grid Voltage लगभग 230V और Three Phase सिस्टम में लगभग 415V होना चाहिए। Inverter के अंदर लगे वोल्टेज सेंसिंग सर्किट और माइक्रोप्रोसेसर यह तय करते हैं कि वोल्टेज सामान्य उतार-चढ़ाव के दायरे में है या किसी गंभीर Grid फॉल्ट का संकेत है। जैसे ही वोल्टेज तय सुरक्षित सीमा से ऊपर या नीचे जाता है, Anti-Islanding Protection इसे Grid अस्थिरता मान लेती है और Inverter तुरंत बंद हो जाता है, ताकि वह किसी भी लाइन में अनचाही बिजली न भेज सके।

Frequency Monitoring (फ्रीक्वेंसी की निगरानी)

Grid की Frequency Grid की सेहत का एक बहुत अहम संकेत होती है। भारत में यह मानक रूप से 50 Hz रखी जाती है। Solar Inverter अपने अंदर मौजूद डिजिटल कंट्रोल सिस्टम और Phase-Locked Loop (PLL) तकनीक की मदद से Grid Frequency को लगातार ट्रैक करता है। यदि Frequency बहुत अधिक बढ़ जाए या तय सीमा से कम हो जाए, तो इसका मतलब होता है कि Grid में लोड और जनरेशन का संतुलन बिगड़ चुका है या Grid आंशिक रूप से फेल हो चुका है। ऐसी स्थिति में Anti-Islanding Protection तुरंत Inverter को बंद कर देती है।

Grid Presence Detection (Grid की मौजूदगी की पहचान)

केवल Voltage और Frequency ही नहीं, Solar Inverter यह भी जाँचता है कि Grid वास्तव में भौतिक रूप से मौजूद है या नहीं। कई बार ऐसा होता है कि लाइन कट जाने के बाद भी कुछ समय के लिए Voltage दिखाई देता है, जिसे False Signal कहा जाता है। Inverter के अंदर Grid Presence Detection Logic यह पुष्टि करती है कि Grid से मजबूत और स्थिर संदर्भ (Reference Signal) मिल रहा है या नहीं। जैसे ही Grid पूरी तरह गायब होती है, Inverter तुरंत Grid से Disconnect हो जाता है और Islanding बनने से पहले ही रुक जाता है।

Response Time (प्रतिक्रिया समय)

Anti-Islanding Protection की सबसे बड़ी ताकत उसका तेज़ Response Time है। आमतौर पर जैसे ही Inverter को Grid में किसी भी प्रकार की असामान्यता महसूस होती है, वह 0.2 से 2 सेकंड के भीतर खुद को पूरी तरह बंद कर लेता है। यह समय इतना कम रखा जाता है कि लाइनमैन, ग्रिड और उपकरणों को किसी भी प्रकार का खतरा न हो, लेकिन इतना पर्याप्त भी होता है कि Inverter गलत ट्रिपिंग से बचे।

Solar Inverter में Anti-Islanding Detection के प्रकार (Types of Anti-Islanding Methods)

Solar Inverter में Anti-Islanding Detection केवल एक ही तरीके से काम नहीं करता। अलग-अलग परिस्थितियों, लागत और सिस्टम की जटिलता के अनुसार इसमें विभिन्न डिटेक्शन मेथड्स उपयोग की जाती हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो इन सभी तरीकों का उद्देश्य एक ही होता है—यह पक्का करना कि Grid बंद होते ही Solar Inverter सुरक्षित रूप से काम करना बंद कर दे। नीचे इन तरीकों को सरल लेकिन गहराई से समझाया गया है।

Solar Inverter में Anti-Islanding Detection
Solar Inverter में Anti-Islanding Detection

Passive Anti-Islanding Method (निष्क्रिय विधि)

Passive Anti-Islanding Method सबसे बुनियादी और पारंपरिक तरीका है। इसमें Solar Inverter कोई अतिरिक्त क्रिया नहीं करता, बल्कि केवल Grid के प्राकृतिक व्यवहार को observe करता रहता है। Inverter लगातार यह देखता है कि Grid Voltage और Frequency सामान्य सीमा में हैं या नहीं। जैसे ही Over Voltage, Under Voltage, Over Frequency या Under Frequency जैसी स्थिति आती है, Inverter यह मान लेता है कि Grid अस्थिर है या अनुपस्थित है और तुरंत खुद को बंद कर देता है।

इस विधि का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सरल, भरोसेमंद और कम लागत वाली होती है। क्योंकि इसमें कोई अतिरिक्त सिग्नल या हस्तक्षेप नहीं होता, इसलिए यह Grid को प्रभावित भी नहीं करती। लेकिन इसका एक वैज्ञानिक limitation भी है, जिसे Non-Detection Zone (NDZ) कहा जाता है। यदि दुर्लभ स्थिति में Solar Generation और Local Load लगभग बराबर हों, तो Voltage और Frequency में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता और Inverter Islanding को पहचानने में चूक सकता है।

Active Anti-Islanding Method (सक्रिय विधि)

Active Anti-Islanding Method एक ज्यादा उन्नत और स्मार्ट तरीका है। इसमें Solar Inverter केवल Grid को देखता नहीं, बल्कि Grid के साथ इंटरैक्ट भी करता है। Inverter जानबूझकर Grid में बहुत छोटी-सी Electrical Disturbance (जैसे हल्का Frequency Shift या Phase बदलाव) डालता है और फिर यह जाँचता है कि Grid की तरफ से कोई प्रतिक्रिया मिलती है या नहीं।

यदि Grid वास्तव में मौजूद होता है, तो उसकी मजबूत संरचना इस Disturbance को तुरंत absorb कर लेती है और Inverter को अपेक्षित Response मिल जाता है। लेकिन अगर Grid बंद होता है, तो कोई Response नहीं मिलता या असामान्य व्यवहार दिखाई देता है। यही Inverter के लिए स्पष्ट संकेत होता है कि Islanding बन चुकी है, और वह तुरंत OFF हो जाता है।

इस विधि का बड़ा फायदा यह है कि यह balanced load-generation की स्थिति में भी Islanding को पकड़ लेती है, जहाँ Passive Method असफल हो सकता है। यही कारण है कि अधिकांश Modern और Advanced Inverters में Active Methods का उपयोग किया जाता है। हालांकि, बहुत अधिक Distributed Generators एक साथ हों तो ये छोटे Disturbance आपस में interfere भी कर सकते हैं, इसलिए डिजाइन में सावधानी रखी जाती है।

Hybrid Anti-Islanding Method (हाइब्रिड विधि)

Hybrid Anti-Islanding Method सबसे ज्यादा भरोसेमंद और व्यावहारिक तरीका माना जाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इसमें Passive और Active दोनों Methods का संयोजन किया जाता है। Inverter पहले Passive Monitoring के जरिए Voltage और Frequency पर नज़र रखता है। जैसे ही उसे कोई संदिग्ध स्थिति दिखती है, वह Active Technique को सक्रिय करके Grid को टेस्ट करता है।

इस वैज्ञानिक संयोजन से Passive Method की कमियाँ और Active Method की सीमाएँ दोनों काफी हद तक समाप्त हो जाती हैं। Hybrid Method खास तौर पर उन स्थितियों में बेहद प्रभावी होती है, जहाँ Grid और Load का संतुलन बहुत नज़दीक होता है। यही कारण है कि आज के अधिकांश Grid-Tied और Hybrid Solar Inverters में Hybrid Anti-Islanding Detection को Standard माना जाता है।

संक्षेप में समझें: Passive Method सरल और किफायती है, लेकिन कुछ दुर्लभ स्थितियों में चूक सकता है। Active Method ज्यादा सटीक है और कठिन परिस्थितियों में भी Islanding पकड़ लेता है। Hybrid Method इन दोनों का संतुलित और वैज्ञानिक रूप से उन्नत रूप है, जो वास्तविक दुनिया की जटिलताओं के लिए सबसे उपयुक्त समाधान प्रदान करता है।

कौन-कौन से Solar Inverters में Anti-Islanding Protection होता है?

Anti-Islanding Protection किसी एक खास ब्रांड या मॉडल की विशेषता नहीं है, बल्कि यह इन्वर्टर के प्रकार और उसके Grid से जुड़ने के तरीके पर निर्भर करती है। वैज्ञानिक और नियामक दृष्टि से यह सुरक्षा केवल वहीं आवश्यक होती है, जहाँ इन्वर्टर का सीधा संपर्क यूटिलिटी ग्रिड से होता है। नीचे अलग-अलग प्रकार के इन्वर्टर में इसकी भूमिका को स्पष्ट रूप से समझते हैं।

Solar Inverters में Anti-Islanding Protection
Solar Inverters में Anti-Islanding Protection

Grid-Tied Solar Inverter

Grid-Tied Solar Inverter में Anti-Islanding Protection पूरी तरह अनिवार्य (Mandatory) होती है। यह इन्वर्टर सीधे DISCOM के ग्रिड से जुड़कर काम करता है और Net-Metering के माध्यम से बिजली ग्रिड में भेजता भी है। इसी कारण इसे तकनीकी रूप से Distributed Generator (DG) माना जाता है।

अगर Grid Supply बंद होने के बाद भी ऐसा इन्वर्टर चालू रहा, तो यह ग्रिड लाइनों को “Live” कर सकता है, जो लाइनमैन और उपकरणों के लिए बेहद खतरनाक है। इसी वजह से बिना Anti-Islanding Protection के किसी भी Grid-Tied Inverter को Grid से कनेक्ट करने की अनुमति नहीं दी जाती।

चाहे वह String Inverter, Micro-Inverter या Central Inverter हो—जैसे ही इन्वर्टर Grid-Connected है, उसमें Anti-Islanding Protection होना कानूनी और तकनीकी दोनों रूप से अनिवार्य है।

Hybrid Solar Inverter

Hybrid Solar Inverter में Anti-Islanding Protection की भूमिका थोड़ी अलग लेकिन उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। जब Hybrid Inverter Grid Mode में काम करता है—यानि Grid और Solar दोनों से जुड़ा होता है—तब Anti-Islanding Protection पूरी तरह Active रहती है। इस स्थिति में यह Grid-Tied Inverter की तरह ही व्यवहार करता है और Grid बंद होते ही खुद को Grid से Disconnect कर लेता है।

हालांकि, जब Hybrid Inverter Battery Mode या Backup Mode में होता है, तब वह जानबूझकर Grid से अलग होकर घर या बिल्डिंग को बिजली देता है। यह स्थिति अनियंत्रित Islanding नहीं, बल्कि Design-Based Controlled Islanding होती है, जिसमें Grid और Backup Output के बीच पूरी तरह Electrical Isolation होती है। इसी वैज्ञानिक Isolation के कारण यह ग्रिड के लिए कोई खतरा नहीं बनता।

Off-Grid Solar Inverter

Off-Grid Inverter सामान्य रूप से यूटिलिटी Grid से जुड़ा ही नहीं होता। यह पूरी तरह Solar Panel और Battery पर आधारित सिस्टम होता है और इसका Grid से कोई Electrical Interface नहीं होता। चूँकि इसमें Grid में बिजली भेजने की कोई संभावना ही नहीं होती, इसलिए इसमें Anti-Islanding Protection की आवश्यकता नहीं पड़ती।

वैज्ञानिक रूप से देखें तो Islanding तभी संभव है, जब कोई सिस्टम Grid से जुड़ा हो। Off-Grid Inverter Grid से पूरी तरह अलग होता है, इसलिए यहाँ Anti-Islanding का प्रश्न ही नहीं उठता।

India में Anti-Islanding से जुड़े Government Rules

भारत में Grid से जुड़े Solar Power Systems को सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से संचालित करने के लिए Anti-Islanding Protection को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया गया है। यह केवल एक तकनीकी फीचर नहीं, बल्कि Grid Safety, मानव सुरक्षा और पावर क्वालिटी से जुड़ा हुआ एक नियामक विषय है। भारत सरकार और बिजली नियामक संस्थाएँ इस विषय को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नियंत्रित करती हैं।

CEA (Central Electricity Authority) Regulations

भारत में Anti-Islanding से जुड़े नियमों की नींव Central Electricity Authority (CEA) द्वारा रखी गई है। CEA की “Technical Standards for Connectivity of Distributed Generation Resources” (2013, संशोधित 2019) के अनुसार, कोई भी Grid-Connected Solar PV System तभी Grid से जुड़ सकता है जब उसके Inverter में Automatic Anti-Islanding Protection मौजूद हो।

इन नियमों के अनुसार, Grid Failure की स्थिति में Inverter को स्वयं ही Grid से Disconnect होना चाहिए और Grid में बिजली भेजना तुरंत बंद करना चाहिए। यह नियम सीधे तौर पर लाइनमैन की सुरक्षा और Grid उपकरणों की रक्षा से जुड़ा हुआ है।

IEC 62116 Standard

IEC 62116 एक अंतरराष्ट्रीय परीक्षण मानक है, जिसे विशेष रूप से Anti-Islanding Detection को परखने के लिए विकसित किया गया है। इस स्टैंडर्ड के तहत यह जाँचा जाता है कि क्या Inverter Grid बंद होने की स्थिति में तय समय सीमा के भीतर Islanding को पहचानकर खुद को बंद कर सकता है या नहीं।

भारत में अधिकांश DISCOM और परीक्षण प्रयोगशालाएँ Inverter Certification के लिए IEC 62116 Compliance को स्वीकार करती हैं। यह स्टैंडर्ड वैज्ञानिक रूप से उन दुर्लभ परिस्थितियों को भी कवर करता है, जहाँ Load और Generation लगभग बराबर होते हैं।

IEEE 1547 Standard

IEEE 1547 एक वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त Grid इंटरकनेक्शन स्टैंडर्ड है, जो Distributed Generators (जैसे Solar Inverters) के Grid के साथ व्यवहार को परिभाषित करता है। इसमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि Grid असामान्य होने पर Inverter को किस वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी सीमा में और कितने समय के भीतर Disconnect होना चाहिए।

भारत में सीधे IEEE 1547 को कानून के रूप में लागू नहीं किया गया है, लेकिन इसके तकनीकी सिद्धांत CEA Regulations और DISCOM Guidelines में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल किए गए हैं।

DISCOM Guidelines और Net Metering Rules

हर राज्य की DISCOM अपने-अपने Net Metering Regulations जारी करती है, लेकिन एक बात सभी में समान होती है—

बिना Anti-Islanding Protection के Net Metering Approval नहीं दिया जाता।

DISCOM यह सुनिश्चित करती है कि:

  • Inverter CEA Approved हो
  • Anti-Islanding Test Certificates उपलब्ध हों
  • Grid Failure पर Inverter स्वतः Disconnect हो

यदि किसी सिस्टम में Anti-Islanding Protection नहीं पाई जाती, तो Grid Connection को Illegal माना जाता है और DISCOM उस सिस्टम को Disconnect करने का अधिकार रखती है।

Safety, Harmonics और Isolation से जुड़े नियम

CEA और DISCOM Guidelines यह भी स्पष्ट करती हैं कि Anti-Islanding के साथ-साथ Inverter को:

  • Harmonics को नियंत्रित करना चाहिए (THD तय सीमा में)
  • Automatic Disconnection के साथ Manual Isolation Switch (4-Pole Isolator) भी होना चाहिए, ताकि रखरखाव के समय Grid से पूर्ण रूप से अलग किया जा सके

यह नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि Anti-Islanding केवल सॉफ्टवेयर पर निर्भर न हो, बल्कि हार्डवेयर स्तर पर भी सुरक्षा मौजूद हो।

अगर Solar System में Anti-Islanding Protection न हो तो क्या होगा?

अगर किसी Grid-Connected Solar System में Anti-Islanding Protection मौजूद नहीं होती, तो इसके परिणाम केवल तकनीकी समस्या तक सीमित नहीं रहते, बल्कि यह मानव जीवन, कानूनी स्थिति, वित्तीय सुरक्षा और सिस्टम की विश्वसनीयता—सभी पर सीधा प्रभाव डालता है। नीचे इसके प्रभावों को सरल भाषा में लेकिन वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टि से समझते हैं।

Electric Shock का गंभीर खतरा

Anti-Islanding Protection के बिना, Grid बंद होने के बाद भी Solar Inverter लाइन में बिजली भेजता रह सकता है। ऐसी स्थिति में लाइनमैन यह मानकर मरम्मत करता है कि लाइन Dead है, जबकि वास्तव में वह Live रहती है। वैज्ञानिक रूप से यह स्थिति बेहद खतरनाक होती है क्योंकि कम पावर पर भी Voltage Presence मानव शरीर के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। यही कारण है कि Islanding को Electrical Safety में सबसे गंभीर जोखिमों में गिना जाता है।

कानूनी कार्यवाही और Penalty

भारत में CEA Regulations और DISCOM Guidelines के अनुसार, Grid से जुड़े हर Solar Inverter में Anti-Islanding Protection अनिवार्य है। यदि निरीक्षण के दौरान यह पाया जाता है कि सिस्टम में यह सुरक्षा मौजूद नहीं है या Disable की गई है, तो उपभोक्ता पर कानूनी जुर्माना (Legal Penalty) लगाया जा सकता है। कई मामलों में यह उल्लंघन बिजली अधिनियम (Electricity Act) के अंतर्गत भी आ सकता है।

Grid से Permanent Disconnection का जोखिम

DISCOM के पास यह पूरा अधिकार होता है कि वह बिना Anti-Islanding वाले Solar System को स्थायी रूप से Grid से Disconnect कर दे। एक बार ऐसा होने पर Net Metering Agreement रद्द किया जा सकता है और दोबारा Grid Connection पाना बेहद कठिन हो जाता है। यह सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि एक प्रशासनिक निर्णय होता है, जिसे चुनौती देना आसान नहीं होता।

महंगे Equipment को नुकसान

Grid के Reference के बिना Solar Inverter अस्थिर Electrical Conditions में काम करता है। इससे Inverter, Transformer, Meter और अन्य Grid-Connected उपकरणों पर असामान्य वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी का दबाव पड़ता है। वैज्ञानिक रूप से इसे Electrical Stress कहा जाता है, जो समय से पहले उपकरणों की विफलता (Premature Failure) का कारण बन सकता है। कई बार यह नुकसान धीरे-धीरे होता है, जिसकी पहचान तब होती है जब उपकरण पूरी तरह खराब हो चुके होते हैं।

Insurance Claim का Reject होना

यह एक कम चर्चित लेकिन बेहद महत्वपूर्ण पहलू है। यदि Solar Plant या उससे जुड़े उपकरणों में किसी दुर्घटना, आग या तकनीकी खराबी के बाद Insurance Claim किया जाता है और जाँच में यह सामने आता है कि सिस्टम में Anti-Islanding Protection नहीं थी या नियमों के अनुसार काम नहीं कर रही थी, तो Insurance Company Claim को Reject कर सकती है। बीमा शर्तों में नियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) एक मूल आवश्यकता होती है।

कैसे पता करें कि आपके Solar Inverter में Anti-Islanding Protection है?

किसी Solar Inverter में Anti-Islanding Protection मौजूद है या नहीं, यह अनुमान से नहीं बल्कि दस्तावेज़, प्रमाणन और व्यवहारिक संकेतों से स्पष्ट रूप से पता किया जा सकता है। नीचे इसे सरल भाषा में लेकिन तकनीकी समझ के साथ समझाया गया है, ताकि उपभोक्ता स्वयं सही निष्कर्ष निकाल सके।

Inverter Datasheet और User Manual की जाँच

Anti-Islanding की पुष्टि करने का सबसे पहला और भरोसेमंद तरीका है Inverter की Datasheet या User Manual देखना। निर्माता इन दस्तावेज़ों में सुरक्षा फीचर्स को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करता है। आपको इसमें “Anti-Islanding Protection”, “Islanding Detection”, “Grid Monitoring”, “ENS” या “Grid Safety Function” जैसे शब्द देखने को मिल सकते हैं।

वैज्ञानिक रूप से, अगर Inverter Grid के Voltage और Frequency को मॉनिटर करने और असामान्य स्थिति में Disconnect होने की क्षमता रखता है, तो यह फीचर हमेशा Datasheet में घोषित किया जाता है। यदि ऐसा कोई उल्लेख नहीं है, तो Inverter के Grid-Connected होने पर संदेह करना चाहिए।

IEC / IEEE Certification को Verify करें

दूसरा महत्वपूर्ण तरीका है Inverter के Certification और Test Standards की जाँच करना। यदि Inverter IEC 62116, IEC 61727 या IEEE 1547 जैसे मानकों के अनुरूप प्रमाणित है, तो इसका सीधा अर्थ है कि उसमें Anti-Islanding Protection का परीक्षण किया जा चुका है।

ये सर्टिफिकेशन केवल कागज़ी औपचारिकता नहीं होते, बल्कि नियंत्रित लैब परिस्थितियों में Islanding Scenarios को Simulate करके दिए जाते हैं। इसलिए किसी भी Inverter पर यह सर्टिफिकेशन होना एक मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण माना जाता है।

DISCOM Approval List में Inverter Model खोजें

भारत में अधिकांश DISCOM अपने क्षेत्र के लिए Approved Inverter List जारी करती हैं। ये सूचियाँ केवल उन्हीं Inverters की होती हैं जो CEA Regulations और Anti-Islanding जैसे सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं।

यदि आपका Inverter मॉडल DISCOM की Approval List में शामिल है, तो यह लगभग निश्चित है कि उसमें Anti-Islanding Protection मौजूद है। इसके विपरीत, यदि मॉडल सूची में नहीं है, तो Net Metering या Grid Connection के समय समस्या आ सकती है।

Installer या Supplier से लिखित पुष्टि लें

Solar System लगाने वाले Installer या Supplier से केवल मौखिक नहीं, बल्कि स्पष्ट Confirmation लेना भी एक व्यावहारिक तरीका है। एक अनुभवी और प्रमाणित Installer को यह जानकारी होती है कि कौन-सा Inverter Grid-Compliant है और कौन-सा नहीं।

बेहतर यह होता है कि Installer से Datasheet, Test Certificate या DISCOM Approval का संदर्भ माँगा जाए। इससे भविष्य में किसी विवाद या Insurance Claim के समय आपके पास ठोस प्रमाण मौजूद रहता है।

व्यवहारिक संकेत (User-Level Observation)

हालाँकि किसी उपभोक्ता को खुद से तकनीकी परीक्षण नहीं करना चाहिए, फिर भी एक सामान्य संकेत यह होता है कि जब बिजली चली जाती है, तो Grid-Tied या Hybrid Inverter तुरंत Power Generation बंद कर देता है और बिजली आने के बाद भी कुछ समय (Delay) लेकर दोबारा चालू होता है। यह Delay और Shutdown व्यवहार Anti-Islanding Logic का ही हिस्सा होता है।

ध्यान रहे, जानबूझकर Grid को Disconnect करके परीक्षण केवल प्रशिक्षित तकनीशियन को ही करना चाहिए।

निष्कर्ष

सोलर एनर्जी सिस्टम में सुरक्षा और भरोसेमंद संचालन सुनिश्चित करने के लिए Anti-Islanding Protection सबसे महत्वपूर्ण फीचर है। Grid बंद होने पर भी यह सुरक्षा प्रणाली Solar Inverter को तुरंत बंद कर देती है, जिससे न सिर्फ लाइन में काम कर रहे कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है बल्कि Grid और उपकरणों की सुरक्षा भी बनी रहती है। अगर आप अपने Solar System को सुरक्षित, legal और efficient बनाना चाहते हैं, तो हमेशा ऐसा Certified Inverter चुनें जिसमें Anti-Islanding Protection हो।

आख़िर में यह कहना सही होगा कि अगर आप जानना चाहते हैं कि Solar Inverter में Anti-Islanding Protection कैसे काम करती है? तो समझ लें कि यह Protection Grid Voltage और Frequency की लगातार निगरानी करके Inverter को Grid से स्वतः Disconnect कर देता है। यही कारण है कि यह सिस्टम की सुरक्षा और लंबे समय तक reliable performance के लिए अनिवार्य है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

1. क्या Solar Inverter बिना Anti-Islanding Protection के चल सकता है?

वैज्ञानिक और कानूनी दृष्टि से देखा जाए तो Grid-Connected Solar Inverter बिना Anti-Islanding Protection के नहीं चल सकता। इसका कारण यह है कि Anti-Islanding Protection न केवल सुरक्षा का फीचर है, बल्कि Grid-Tied सिस्टम के लिए अनिवार्य नियम और तकनीकी आवश्यकता भी है। अगर इन्वर्टर में यह सुविधा नहीं है, तो Grid बंद होने पर Inverter लाइन में बिजली भेज सकता है, जिससे लाइनमैन को करंट लगने, Grid उपकरणों को नुकसान, और सिस्टम फेल होने का गंभीर खतरा पैदा होता है।
इसके अलावा भारत में CEA Regulations, DISCOM Guidelines और IEC/IEEE मानकों के अनुसार बिना Anti-Islanding वाले इन्वर्टर को Grid से कनेक्ट करना अवैध है, और Net Metering या Grid Connection की अनुमति नहीं मिलती। केवल Off-Grid या पूरी तरह अलग सिस्टम वाले इन्वर्टर ऐसे चल सकते हैं, क्योंकि वे Grid में बिजली नहीं भेजते और Islanding का खतरा उत्पन्न नहीं करते। इसलिए, किसी भी Grid-Connected या Hybrid Inverter को सुरक्षित, कानूनी और प्रभावी रूप से चलाने के लिए Anti-Islanding Protection अनिवार्य है।

2. क्या Anti-Islanding Protection केवल Grid-Tied Inverter में जरूरी है?

हां, Anti-Islanding Protection मुख्य रूप से Grid-Tied Inverter में जरूरी है, क्योंकि ये Grid से जुड़े रहते हैं और बिजली वापस भेजते हैं। Grid फेल होने पर बिना यह सुरक्षा Inverter लाइनमैन और Grid उपकरणों के लिए खतरा बन सकता है। Off-Grid Inverter या Hybrid Inverter के Battery Mode में यह जरूरी नहीं होता, क्योंकि वे Grid में बिजली नहीं भेजते। Hybrid Inverters में Anti-Islanding केवल Grid Mode में सक्रिय रहती है।

3. क्या Anti-Islanding Protection को Manually Disable किया जा सकता है?

कानूनी और तकनीकी दृष्टि से Anti-Islanding Protection को manually disable करना न केवल असुरक्षित है, बल्कि अवैध भी है। Grid-Tied Solar Inverter में यह सुरक्षा CEA Regulations, DISCOM Guidelines और IEC/IEEE मानकों के तहत अनिवार्य होती है। यदि इसे बंद किया जाए, तो Grid फेल होने पर Inverter लाइन में बिजली भेज सकता है, जिससे लाइनमैन, Grid उपकरण और खुद Inverter सभी के लिए गंभीर जोखिम पैदा होता है।
इसके अलावा, बिना सक्रिय Anti-Islanding के Grid से कनेक्शन Illegal माना जाता है और Net Metering या Insurance Claim भी प्रभावित हो सकते हैं। Hybrid या Off-Grid Inverters में Battery Mode में अलग लॉजिक हो सकता है, लेकिन Grid-Connected Mode में Anti-Islanding हमेशा active रहनी चाहिए। वैज्ञानिक और नियामक दोनों दृष्टि से इसे disable करना बिल्कुल सुरक्षित या कानूनी नहीं है।

4. Solar Inverter बार-बार Grid Error दिखाता है, क्या ये Anti-Islanding की वजह से होता है?

हां, कभी-कभी Inverter का बार-बार Grid Error दिखाना Anti-Islanding Protection की वजह से हो सकता है। अगर Grid Voltage या Frequency बार-बार असामान्य होती है, तो Anti-Islanding Logic Inverter को तुरंत Disconnect कर देता है और Error दिखाता है। यह Inverter और Grid दोनों की सुरक्षा के लिए होता है। हालांकि, लगातार Errors होने पर Grid सप्लाई की गुणवत्ता, Loose Connections या Inverter Fault जैसी अन्य तकनीकी समस्याओं की भी जाँच करनी चाहिए।


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