आज के आधुनिक युग में बिजली (Electricity) और संचार तकनीक के बिना जीवन की कल्पना करना लगभग असंभव हो चुकी है। चाहे घर की वायरिंग हो, ऑफिस का नेटवर्क सिस्टम, फैक्ट्री और उद्योगों की मशीनें हर जगह केबल (Cable) की अहम भूमिका होती है। केबल के माध्यम से ही बिजली, डेटा और सिग्नल एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित और सुचारु रूप से पहुँचाए जाते हैं।
हालाँकि हम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में केबल का उपयोग करते हैं, लेकिन बहुत से लोगों को यह सही जानकारी नहीं होती कि केबल कितने प्रकार का होता है, कौन-सी केबल किस काम के लिए उपयुक्त है और अलग-अलग परिस्थितियों में सही केबल का चुनाव कैसे किया जाए। यही कारण है कि लोग अक्सर इंटरनेट पर केबल कितने प्रकार का होता है जैसी जानकारी खोजते हैं, ताकि विषय को आसानी से समझा जा सके।
सही केबल का चयन न केवल बिजली और नेटवर्क सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि उपकरणों की कार्यक्षमता, टिकाऊपन और परफॉर्मेंस को भी बेहतर बनाता है। गलत केबल के इस्तेमाल से शॉर्ट सर्किट, डेटा लॉस या उपकरणों को नुकसान जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
इसी उद्देश्य से इस आर्टिकल में केबल से जुड़ी बुनियादी लेकिन महत्वपूर्ण जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है, ताकि पाठक आसानी से समझ सकें कि केबल कितने प्रकार का होता है और उनकी ज़रूरत के अनुसार सही विकल्प कौन-सा है।
Table of Contents
केबल क्या होती है? (What is Cable in Hindi)
केबल एक इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (Electrical / Electronic Medium) होती है, जिसका मुख्य उद्देश्य बिजली (Electric Current) या सिग्नल (Signal) को एक निश्चित स्रोत (Source) से गंतव्य (Load या Device) तक सुरक्षित, नियंत्रित और कुशल तरीके से पहुँचाना होता है। सरल शब्दों में कहा जाए तो केबल ऊर्जा और सूचना के प्रवाह का रास्ता होती है।
केबल के अंदर एक या एक से अधिक कंडक्टर (Conductors) होते हैं, जो आमतौर पर तांबे (Copper) या एल्युमिनियम (Aluminium) से बने होते हैं। इन धातुओं का चयन इसलिए किया जाता है क्योंकि इनमें विद्युत चालकता (Electrical Conductivity) अधिक होती है, यानी ये बिजली को कम रेज़िस्टेंस (Resistance) के साथ प्रवाहित करने में सक्षम होती हैं।
कंडक्टर के चारों ओर इंसुलेशन (Insulation) की परत चढ़ी होती है, जो प्रायः PVC, XLPE या अन्य पॉलिमर सामग्री से बनाई जाती है। इस इंसुलेशन का वैज्ञानिक उद्देश्य कंडक्टर में बहने वाली धारा को बाहर की सतह से अलग रखना होता है, ताकि लीकेज करंट, शॉर्ट सर्किट और इलेक्ट्रिक शॉक जैसी समस्याओं से बचाव किया जा सके। इंसुलेशन तापमान, नमी और यांत्रिक दबाव जैसी बाहरी परिस्थितियों से भी कंडक्टर की रक्षा करता है।
यह समझना ज़रूरी है कि केबल सिर्फ “तार” नहीं होती, बल्कि यह एक डिज़ाइन किया गया सिस्टम होती है। इसकी मोटाई, कंडक्टर का आकार, इंसुलेशन की गुणवत्ता और सामग्री—ये सभी कारक यह तय करते हैं कि केबल कितनी करंट क्षमता (Current Carrying Capacity) रखती है और कितने समय तक सुरक्षित रूप से काम कर सकती है। यही कारण है कि हर प्रकार की केबल को विशेष उपयोग और मानकों के अनुसार बनाया जाता है।
केबल का कार्य ओम के नियम (Ohm’s Law) और ऊर्जा हानि (Power Loss) जैसे सिद्धांतों पर आधारित होता है। सही केबल का उपयोग करने से वोल्टेज ड्रॉप कम होता है, ऊर्जा की बचत होती है और सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ती है। इसी वजह से किसी भी इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की नींव के रूप में केबल को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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कंडक्टर के आधार केबल कितने प्रकार का होता है? types of cables based on conductor
किसी भी केबल की गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यक्षमता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उसका कंडक्टर (Conductor) होता है। अनुभव और इंजीनियरिंग सिद्धांतों के अनुसार, जिस धातु से कंडक्टर बनाया जाता है वही यह तय करती है कि केबल कितनी करंट (Current) वहन कर सकती है, कितनी गर्मी उत्पन्न होगी और लंबे समय तक सिस्टम कितना स्थिर रहेगा। इसी आधार पर कंडक्टर के अनुसार केबल को मुख्य रूप से दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।

1. तांबे की केबल (Copper Cable)
तांबे की केबल सबसे अधिक उपयोग में आने वाली और तकनीकी रूप से सबसे विश्वसनीय केबल मानी जाती है। तांबे की विद्युत चालकता (Electrical Conductivity) बहुत अधिक होती है, जिसका वैज्ञानिक कारण इसकी कम इलेक्ट्रिकल रेज़िस्टेंस (Resistance) है। कम रेज़िस्टेंस का मतलब है कि बिजली का प्रवाह आसानी से होता है और ऊर्जा की हानि (Power Loss) न्यूनतम रहती है।
अनुभव के अनुसार, तांबे की केबल में समान करंट पर गर्मी कम उत्पन्न होती है, जिससे केबल का जीवनकाल बढ़ता है और फायर रिस्क भी कम होता है। यही कारण है कि जहाँ निरंतर और स्थिर बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है, वहाँ तांबे की केबल को प्राथमिकता दी जाती है। घरेलू वायरिंग से लेकर इंडस्ट्रियल कंट्रोल पैनल तक, यह केबल भरोसेमंद प्रदर्शन देती है।
उपयोग: घर की वायरिंग, मोटर, इलेक्ट्रिकल पैनल, इन्वर्टर, UPS, SMPS
2. एल्युमिनियम केबल (Aluminium Cable)
एल्युमिनियम केबल का उपयोग मुख्य रूप से वहाँ किया जाता है जहाँ लंबी दूरी तक बिजली पहुँचानी होती है और लागत एक महत्वपूर्ण कारक होती है। वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो एल्युमिनियम की चालकता तांबे की तुलना में कम होती है, इसलिए समान करंट वहन करने के लिए इसकी मोटाई अधिक रखनी पड़ती है।
एल्युमिनियम का सबसे बड़ा लाभ इसका हल्का वजन और कम लागत है। हल्का होने के कारण बड़े पावर नेटवर्क में इसे संभालना और इंस्टॉल करना आसान होता है। हालाँकि इसमें रेज़िस्टेंस अधिक होने के कारण हीट जनरेशन भी अपेक्षाकृत ज्यादा होती है, इसलिए इसका उपयोग उच्च वोल्टेज और खुले वातावरण में योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है।
व्यावहारिक अनुभव बताता है कि सही साइज और उचित टर्मिनेशन के साथ एल्युमिनियम केबल बड़े पावर ट्रांसमिशन सिस्टम के लिए एक प्रभावी और आर्थिक समाधान प्रदान करती है।
उपयोग: ओवरहेड लाइन, ट्रांसफॉर्मर, फैक्ट्री पावर सप्लाई
कोर (Core) के आधार पर केबल के प्रकार (Types Of Cables Based On Core)
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में कोर (Core) से तात्पर्य केबल के अंदर मौजूद उस स्वतंत्र कंडक्टर से होता है, जिसके माध्यम से बिजली या सिग्नल प्रवाहित होता है। किसी केबल में कोर की संख्या यह निर्धारित करती है कि वह केबल किस प्रकार के सर्किट, लोड और इंस्टॉलेशन के लिए उपयुक्त होगी। कोर की संख्या के अनुसार केबल को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा जाता है।
1. सिंगल कोर केबल (Single Core Cable)
सिंगल कोर केबल में केवल एक ही कंडक्टर होता है, जिस पर इंसुलेशन चढ़ा होता है। यह केबल संरचना में सरल होती है और इसका उपयोग वहाँ किया जाता है जहाँ प्रत्येक फेज या लाइन को अलग-अलग रूटिंग की आवश्यकता होती है।
सिंगल कोर केबल में हीट डिसिपेशन (Heat Dissipation) बेहतर होता है, क्योंकि प्रत्येक केबल स्वतंत्र रूप से वातावरण के संपर्क में रहती है। यही कारण है कि उच्च करंट या कंट्रोल एप्लिकेशन में इसका प्रदर्शन अधिक स्थिर रहता है। अनुभवी इलेक्ट्रिशियन और इंजीनियर इसे पैनल और कंट्रोल सिस्टम में इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि फॉल्ट ट्रेसिंग और मेंटेनेंस आसान हो जाता है।
2. मल्टी कोर केबल (Multi Core Cable)
मल्टी कोर केबल में दो, तीन, चार या उससे अधिक कोर एक ही बाहरी शीथ (Outer Sheath) के अंदर होते हैं। प्रत्येक कोर अलग-अलग इंसुलेशन से ढका होता है, जिससे एक ही केबल के माध्यम से कई सर्किट या कनेक्शन सुरक्षित रूप से संचालित किए जा सकते हैं।
अनुभव के अनुसार, मल्टी कोर केबल का सबसे बड़ा लाभ कम्पैक्ट इंस्टॉलेशन और सुव्यवस्थित वायरिंग है। एक ही केबल में कई कोर होने से वायरिंग कम बिखरी रहती है और मैकेनिकल प्रोटेक्शन भी बेहतर मिलता है। यही वजह है कि घरेलू और कमर्शियल इंस्टॉलेशन में इसका उपयोग बहुत आम है।
उदाहरण: 2 Core केबल – फेज और न्यूट्रल, 3 Core केबल – फेज, न्यूट्रल और अर्थ
वोल्टेज के आधार पर केबल कितने प्रकार का होता है
इलेक्ट्रिकल सिस्टम में वोल्टेज (Voltage) वह मूल कारक है जो यह निर्धारित करता है कि केबल का इंसुलेशन स्तर, मोटाई और संरचना कैसी होगी। व्यावहारिक अनुभव और वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार, जैसे-जैसे वोल्टेज बढ़ता है, वैसे-वैसे इलेक्ट्रिक स्ट्रेस (Electric Stress) और इंसुलेशन की आवश्यकता भी बढ़ जाती है। इसी आधार पर केबल को वोल्टेज रेटिंग के अनुसार तीन प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।

1. लो वोल्टेज केबल (Low Voltage Cable)
लो वोल्टेज केबल वे होती हैं जिनकी कार्य सीमा 1 वोल्ट से 1 किलोवोल्ट (1kV) तक होती है। यह केबल रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए सबसे अधिक उपयोग में लाई जाती हैं, विशेष रूप से घरेलू और छोटे कमर्शियल सिस्टम में।
इस वोल्टेज रेंज में इंसुलेशन की मोटाई अपेक्षाकृत कम होती है क्योंकि इलेक्ट्रिक फील्ड का प्रभाव सीमित रहता है। सही डिज़ाइन की लो वोल्टेज केबल सुरक्षित करंट फ्लो सुनिश्चित करती है और उपकरणों को स्थिर सप्लाई प्रदान करती है। अनुभवी तकनीशियन इन्हें आसान इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के कारण प्राथमिकता देते हैं।
उपयोग: घर की वायरिंग, लाइटिंग, सॉकेट, छोटे इलेक्ट्रिकल उपकरण
2. मीडियम वोल्टेज केबल (Medium Voltage Cable)
मीडियम वोल्टेज केबल की वोल्टेज रेटिंग 1kV से 33kV तक होती है। इन केबलों का उपयोग वहाँ किया जाता है जहाँ बिजली को नियंत्रित तरीके से अधिक दूरी और अधिक लोड तक पहुँचाना आवश्यक होता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो इस वोल्टेज स्तर पर बेहतर इंसुलेशन सिस्टम और स्क्रीनिंग की आवश्यकता होती है, ताकि वोल्टेज ब्रेकडाउन और लीकेज से बचा जा सके। अनुभव बताता है कि मीडियम वोल्टेज केबल औद्योगिक वातावरण में लंबे समय तक स्थिर प्रदर्शन देती हैं, बशर्ते उनका चयन और इंस्टॉलेशन सही मानकों के अनुसार किया जाए।
उपयोग: इंडस्ट्री, सबस्टेशन, बड़े मोटर और पावर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम
3. हाई वोल्टेज केबल (High Voltage Cable)
हाई वोल्टेज केबल वे होती हैं जिनकी वोल्टेज क्षमता 33kV से अधिक होती है। इनका उपयोग मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर बिजली को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ट्रांसमिट करने के लिए किया जाता है।
उच्च वोल्टेज पर इंसुलेशन फेल्योर और कोरोना डिस्चार्ज का जोखिम अधिक होता है, इसलिए इन केबलों में अत्यंत उन्नत इंसुलेशन और सुरक्षा संरचना अपनाई जाती है। अनुभवी पावर इंजीनियर जानते हैं कि हाई वोल्टेज केबल का चयन और हैंडलिंग अत्यधिक सावधानी और तकनीकी ज्ञान की मांग करता है, क्योंकि यह पूरे पावर नेटवर्क की विश्वसनीयता से जुड़ा होता है।
उपयोग: पावर ट्रांसमिशन लाइन, ग्रिड सिस्टम, बड़े सबस्टेशन
और पढ़ें: ऑटोमैटिक स्टार–डेल्टा स्टार्टर
इंसुलेशन के आधार पर केबल के प्रकार (Types Of Cables Based On Insulation)
किसी भी केबल में इंसुलेशन (Insulation) का कार्य केवल कंडक्टर को ढकना नहीं होता, बल्कि बिजली को यह दिशा देना होता है कि वह सुरक्षित रूप से अपने निर्धारित मार्ग में ही प्रवाहित हो। व्यावहारिक अनुभव और इलेक्ट्रिकल साइंस के अनुसार, इंसुलेशन की गुणवत्ता ही केबल की सुरक्षा, ताप सहन क्षमता और उम्र तय करती है। इसी आधार पर इंसुलेशन के प्रकार के अनुसार केबल को निम्न प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।
1. PVC केबल (PVC Insulated Cable)
PVC यानी पॉलीविनाइल क्लोराइड इंसुलेशन वाली केबल सबसे अधिक प्रचलित और सामान्य उपयोग की केबल मानी जाती है। इसका कारण यह है कि PVC एक इलेक्ट्रिकली सुरक्षित, नमी प्रतिरोधी और किफायती सामग्री है।
PVC इंसुलेशन बिजली के प्रवाह को कंडक्टर तक सीमित रखता है और बाहरी सतह पर करंट आने से रोकता है। सामान्य तापमान परिस्थितियों में यह स्थिर रहता है, इसलिए घरेलू और सामान्य कमर्शियल उपयोग के लिए इसे एक भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। अनुभव के अनुसार, सही ग्रेड की PVC केबल लंबे समय तक बिना किसी बड़ी समस्या के काम करती है।
विशेषताएँ: सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाली, सस्ती और टिकाऊ
2. XLPE केबल (XLPE Insulated Cable)
XLPE यानी क्रॉस-लिंक्ड पॉलीएथिलीन इंसुलेशन आधुनिक और उन्नत तकनीक पर आधारित होता है। इस इंसुलेशन की संरचना ऐसी होती है कि यह उच्च तापमान और अधिक वोल्टेज स्ट्रेस को आसानी से सहन कर सकता है।
वैज्ञानिक रूप से, क्रॉस-लिंकिंग प्रक्रिया इंसुलेशन की थर्मल और मैकेनिकल मजबूती बढ़ा देती है, जिससे हीट जनरेशन के बावजूद इंसुलेशन खराब नहीं होता। अनुभवी इंजीनियर XLPE केबल को इंडस्ट्रियल वातावरण में इसलिए प्राथमिकता देते हैं क्योंकि यह लगातार लोड और ऊँचे तापमान पर भी स्थिर प्रदर्शन देती है।
विशेषताएँ: हाई टेम्परेचर सहन क्षमता, इंडस्ट्रियल उपयोग के लिए उपयुक्त
3. रबर इंसुलेटेड केबल (Rubber Insulated Cable)
रबर इंसुलेटेड केबल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उच्च लचीलापन (Flexibility) है। यह केबल बार-बार मोड़े जाने और हिलने-डुलने वाली परिस्थितियों में भी सुरक्षित रूप से काम करती है।
वैज्ञानिक दृष्टि से रबर इंसुलेशन में इलास्टिक गुण होते हैं, जो मैकेनिकल स्ट्रेस को अवशोषित कर लेते हैं और कंडक्टर को टूटने से बचाते हैं। अनुभव के आधार पर देखा गया है कि जहाँ केबल को लगातार मूवमेंट सहना पड़ता है, वहाँ रबर इंसुलेटेड केबल सबसे विश्वसनीय विकल्प साबित होती है।
विशेषताएँ: अधिक फ्लेक्सिबल, पोर्टेबल मशीन और उपकरणों में उपयोग
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उपयोग के आधार पर केबल कितने प्रकार का होता है (Types Of Cables Based On Uses)
व्यावहारिक इलेक्ट्रिकल सिस्टम में केबल का चयन केवल उसके कंडक्टर या वोल्टेज पर नहीं, बल्कि उसके वास्तविक उपयोग (Application) पर आधारित होता है। अनुभवी इलेक्ट्रिशियन और इंजीनियर जानते हैं कि हर वातावरण और हर उपकरण की कार्य-प्रकृति अलग होती है, इसलिए केबल को भी उसी उद्देश्य के अनुसार डिज़ाइन किया जाता है। इसी कारण उपयोग के आधार पर केबल को कई महत्वपूर्ण प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।

1. हाउस वायरिंग केबल (House Wiring Cable)
हाउस वायरिंग केबल का उपयोग घरों में लाइट, फैन, सॉकेट और छोटे घरेलू उपकरणों को बिजली सप्लाई देने के लिए किया जाता है। ये केबल सामान्यतः लो वोल्टेज पर काम करती हैं और इनका डिज़ाइन सुरक्षित और सरल होता है।
इन केबलों का इंसुलेशन इस प्रकार बनाया जाता है कि सामान्य तापमान और करंट पर लीकेज करंट और शॉर्ट सर्किट का जोखिम न्यूनतम रहे। अनुभव के अनुसार, सही साइज की हाउस वायरिंग केबल घर की इलेक्ट्रिकल सुरक्षा की बुनियाद होती है।
उपयोग: लाइटिंग, पंखे, प्लग पॉइंट, रेफ्रिजरेटर, घरेलू सर्किट
2. आर्मर्ड केबल (Armoured Cable)
आर्मर्ड केबल के ऊपर लोहे या स्टील की परत (Armour) लगी होती है, जो केबल को बाहरी क्षति से बचाती है। इसका मुख्य उद्देश्य मैकेनिकल प्रोटेक्शन प्रदान करना होता है।
जब केबल को ज़मीन के अंदर या खुले वातावरण में बिछाया जाता है, तो उस पर दबाव, नमी और कीटों का प्रभाव पड़ता है। आर्मर्ड संरचना इन खतरों को कम करती है और केबल की उम्र बढ़ाती है। अनुभवी तकनीशियन इसे अंडरग्राउंड इंस्टॉलेशन के लिए अनिवार्य मानते हैं।
उपयोग: जमीन के अंदर बिछाने के लिए, इंडस्ट्रियल और आउटडोर पावर सप्लाई
3. फ्लेक्सिबल केबल (Flexible Cable)
फ्लेक्सिबल केबल की पहचान इसकी मुलायम और लचीली संरचना है। इसमें बहुत पतले स्ट्रैंड्स वाले कंडक्टर होते हैं, जिससे यह आसानी से मुड़ सकती है।
मल्टी-स्ट्रैंड कंडक्टर मैकेनिकल स्ट्रेस को बेहतर तरीके से सहन करते हैं। अनुभव के अनुसार, जहाँ उपकरणों को बार-बार हिलाया या स्थानांतरित किया जाता है, वहाँ फ्लेक्सिबल केबल सबसे सुरक्षित और टिकाऊ समाधान होती है।
उपयोग: आयरन, मिक्सर, हीटर, पोर्टेबल घरेलू उपकरण
4. कंट्रोल केबल (Control Cable)
कंट्रोल केबल का उपयोग मशीनों के कंट्रोल और सिग्नल ट्रांसमिशन के लिए किया जाता है, न कि भारी पावर सप्लाई के लिए। ये केबल सटीक और स्थिर सिग्नल प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की जाती हैं।
वैज्ञानिक दृष्टि से, कंट्रोल केबल में इंटरफेरेंस कम रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि सिग्नल में गड़बड़ी न हो। अनुभवी इंजीनियर इन्हें ऑटोमेशन सिस्टम की “नर्व सिस्टम” मानते हैं।
उपयोग: PLC सिस्टम, कंट्रोल पैनल, मशीन ऑटोमेशन
5. लीड शीथ्ड केबल (Lead Sheathed Cable)
लीड शीथ्ड केबल में इंसुलेशन के ऊपर सीसे (Lead) की परत होती है। यह परत केबल को नमी, केमिकल और गैस से सुरक्षा प्रदान करती है।
वैज्ञानिक रूप से, लेड एक अत्यंत प्रभावी नमी-रोधी धातु है, इसलिए यह केबल कठोर पर्यावरण में भी सुरक्षित रहती है। अनुभव के अनुसार, जहाँ वातावरण अत्यधिक नम या रासायनिक हो, वहाँ इस प्रकार की केबल विश्वसनीय मानी जाती है।
उपयोग: नमी वाले क्षेत्र, केमिकल प्लांट, अंडरग्राउंड इंस्टॉलेशन
6. शील्डेड केबल (Shielded Cable)
शील्डेड केबल ऐसी केबल होती है जिसमें कंडक्टर और इंसुलेशन के ऊपर एक अतिरिक्त धातु की शील्ड (Shield) लगी होती है। यह शील्ड आमतौर पर कॉपर ब्रेड, एल्यूमिनियम फॉयल या धातु की जाली के रूप में होती है। इसका मुख्य उद्देश्य केबल को बाहरी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (EMI) और नॉइज़ (Electrical Noise) से बचाना होता है।
वैज्ञानिक रूप से समझें तो जब आसपास हाई करंट या हाई फ्रीक्वेंसी उपकरण काम करते हैं, तो उनके कारण इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड उत्पन्न होती है। यह फील्ड सिग्नल के अंदर अवांछित वोल्टेज इंड्यूस कर सकती है, जिससे डेटा या कंट्रोल सिग्नल में गड़बड़ी आती है। शील्ड इस अवांछित ऊर्जा को अर्थ की ओर डायवर्ट कर देती है, जिससे सिग्नल साफ और स्थिर बना रहता है।
अनुभव के अनुसार, जहाँ सटीक और विश्वसनीय सिग्नल बहुत महत्वपूर्ण होता है, वहाँ शील्डेड केबल का उपयोग अनिवार्य माना जाता है। यह केबल औद्योगिक ऑटोमेशन और संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में बेहतर प्रदर्शन देती है।
उपयोग: PLC सिग्नल लाइन, इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम, डेटा और कंट्रोल केबल, नॉइज़-सेंसिटिव मशीनें
7. सबमर्सिबल केबल (Submersible Cable)
सबमर्सिबल केबल विशेष रूप से पानी के अंदर काम करने वाले मोटरों के लिए बनाई जाती है। इसका इंसुलेशन पानी के दबाव और नमी को सहने में सक्षम होता है।
इन केबलों में मल्टी-लेयर वाटरप्रूफ इंसुलेशन होता है, जो करंट लीकेज को रोकता है। अनुभवी तकनीशियन इसे बोरवेल और पंप सिस्टम के लिए अनिवार्य मानते हैं।
उपयोग: सबमर्सिबल पंप, बोरवेल मोटर
इस प्रकार, उपयोग के आधार पर केबल का सही चयन करना सुरक्षा, प्रदर्शन और लंबे समय तक भरोसेमंद संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक होता है।
केबल करंट कैपेसिटी सिंपल फॉर्मूला (Approximation) और टेबल
सिंपल फॉर्मूला (Approximation) I = LK × A × ΔT
जहाँ,
- I = करंट क्षमता (Ampere)
- LK = केबल सामग्री और इंसुलेशन के आधार पर कोएफ़िशिएंट (Copper/PVC, Aluminium/PVC)
- A = कंडक्टर का क्रॉस-सेक्शन (mm²)
- ΔT = इंसुलेशन द्वारा सहा जाने वाला तापमान अंतर (°C)
Basicly टेबल और IS/IEC स्टैंडर्ड्स के अनुसार करंट कैपेसिटी निकाली जाती है। यही कारण है कि अधिकांश इलेक्ट्रिशियन टेबल डेटा का ही उपयोग करते हैं, क्योंकि फॉर्मूला बहुत सारे environmental और thermal factors पर निर्भर करता है।
केबल करंट कैपेसिटी टेबल 1.5 mm² से 630 mm² तक – Copper और Aluminium
यदि आप जानना चाहते हैं कि किस साइज की केबल कितनी करंट वहन कर सकती है, तो नीचे दी गई टेबल ( Table) आपके लिए सबसे आसान और भरोसेमंद गाइड है। यहाँ 1.5 mm² से 630 mm² तक Copper और Aluminium केबल की करंट कैपेसिटी दिखाई गई है। यह टेबल घर, उद्योग और पावर ट्रांसमिशन के लिए करंट कैलकुलेशन में तुरंत मदद करती है।
इसमें Copper और Aluminium की तुलना भी दी गई है, ताकि आप सही केबल चुनने का निर्णय सुरक्षित और वैज्ञानिक आधार पर ले सकें।
| केबल साइज (mm²) | Copper Cable Current (A) | Aluminium Cable Current (A) |
|---|---|---|
| 1.5mm² | 18 A | 14 A |
| 2.5mm² | 24 A | 19 A |
| 4mm² | 32 A | 26 A |
| 6mm² | 41 A | 32 A |
| 10mm² | 57 A | 45 A |
| 16mm² | 76 A | 61 A |
| 25mm² | 100 A | 80 A |
| 35mm² | 125 A | 99 A |
| 50mm² | 150 A | 120 A |
| 70mm² | 192 A | 153 A |
| 95mm² | 230 A | 184 A |
| 120mm² | 265 A | 212 A |
| 150mm² | 300 A | 240 A |
| 185mm² | 340 A | 272 A |
| 240mm² | 415 A | 332 A |
| 300mm² | 475 A | 380 A |
| 400mm² | 545 A | 435 A |
| 500mm² | 610 A | 488 A |
| 630mm² | 680 A | 544 A |
Copper की conductivity Aluminium से लगभग 60% ज्यादा होती है, इसलिए समान साइज पर Copper अधिक करंट वहन कर सकता है। जबकि Aluminium में रेज़िस्टेंस ज्यादा होने के कारण उसी करंट के लिए इसका साइज बड़ा करना पड़ता है। इसी कारण घर और पैनल जैसी जगहों पर Copper केबल का उपयोग किया जाता है, जबकि लंबी दूरी और पावर ट्रांसमिशन के लिए Aluminium केबल अधिक उपयुक्त होती है।
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केबल का साइज कैसे चुने?
केबल का सही साइज चुनना किसी भी इलेक्ट्रिकल सिस्टम की सुरक्षा और स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है। यह मुख्य रूप से लोड (Load) और करंट क्षमता (Current Carrying Capacity) पर निर्भर करता है। सही साइज का चयन न करने पर केबल में अत्यधिक गर्मी उत्पन्न हो सकती है, जिससे इंसुलेशन खराब हो सकता है और शॉर्ट सर्किट या आग का खतरा बढ़ जाता है।
अनुभवी इलेक्ट्रिशियन और इंजीनियर सामान्य घरेलू लोड के लिए निम्नलिखित साइज का उपयोग करते हैं:
- 1.0 mm² – लाइटिंग सर्किट के लिए उपयुक्त
- 1.5 mm² – पंखे और छोटे फैन के लिए
- 2.5 mm² – सॉकेट और सामान्य पॉवर पॉइंट के लिए
- 4.0 mm² – एयर कंडीशनर, गीजर और अन्य उच्च पावर उपकरणों के लिए
वैज्ञानिक आधार यह है कि प्रत्येक केबल का कंडक्टर क्रॉस-सेक्शन उसके करंट को सुरक्षित रूप से बहाने की क्षमता तय करता है। जैसे-जैसे लोड बढ़ता है, करंट बढ़ता है और उसी के अनुसार केबल का साइज भी बढ़ाना आवश्यक होता है।
सही साइज की केबल का उपयोग करने से न केवल बिजली की आपूर्ति स्थिर रहती है, बल्कि ऊर्जा की हानि भी कम होती है और सिस्टम लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। गलत साइज केबल का उपयोग करने से ओवरहीटिंग, शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
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अच्छी क्वालिटी की केबल कैसे पहचानें?
इलेक्ट्रिकल सुरक्षा और दीर्घकालिक विश्वसनीयता के लिए अच्छी क्वालिटी की केबल का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। व्यावहारिक दृष्टि से, गुणवत्ता वाली केबल में तीन मुख्य तत्व होते हैं: कंडक्टर की शुद्धता, इंसुलेशन की मजबूती और मानक प्रमाणीकरण।
- ISI मार्क – हमेशा यह सुनिश्चित करें कि केबल पर ISI मार्क हो। यह भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा प्रमाणित है और यह दिखाता है कि केबल मानक सुरक्षा और थर्मल टेस्ट पास कर चुकी है।
- शुद्ध तांबा (Pure Copper) – गुणवत्ता वाली केबल में कंडक्टर पूरी तरह शुद्ध तांबे का होता है। तांबे की उच्च चालकता (Conductivity) सुनिश्चित करती है कि करंट कम रेज़िस्टेंस में आसानी से और सुरक्षित रूप से प्रवाहित हो, जिससे ऊर्जा की हानि और हीट जेनरेशन न्यूनतम रहती है।
- मोटी इंसुलेशन (Thick Insulation) – इंसुलेशन केवल सुरक्षा की परत नहीं होती, बल्कि यह हीट, नमी और शॉर्ट सर्किट से कंडक्टर को बचाती है। मोटी और गुणवत्ता वाली इंसुलेशन वाले केबल लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और बाहरी दबाव, घर्षण या तापमान परिवर्तन को सहन कर सकते हैं।
- ब्रांडेड कंपनी – हमेशा विश्वसनीय और प्रमाणित ब्रांडेड कंपनी की केबल का ही उपयोग करें। अनुभवी इंजीनियर और इलेक्ट्रिशियन जानते हैं कि ब्रांडेड केबल सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता पर स्थिर रहती है, जिससे सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ती है।
ये सभी गुण—शुद्ध कंडक्टर, मोटी इंसुलेशन और मानक प्रमाणीकरण—केबल की करंट वहन क्षमता, सुरक्षा और दीर्घकालिक प्रदर्शन सुनिश्चित करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. केबल और वायर में क्या अंतर होता है?
वायर एक एकल कंडक्टर होता है, जबकि केबल में दो या दो से अधिक तार इंसुलेट होकर एक साथ होते हैं। सरल शब्दों में, वायर सिर्फ एक तार है, वहीं केबल कई तारों का समूह होता है जो सुरक्षित रूप से एक ही आवरण में बंद होते हैं और अधिक करंट या सिग्नल ट्रांसमिशन के लिए इस्तेमाल होते हैं।
2. Armoured Cable क्यों उपयोग किया जाता है?
Armoured Cable का उपयोग मुख्य रूप से मशीनी, बाहरी और मैकेनिकल नुकसान से सुरक्षा के लिए किया जाता है। इसका लोहे या स्टील का बाहरी आवरण केबल को दबाव, घिसाव, नमी और अन्य जोखिमों से बचाता है। इसी कारण इसे अक्सर जमीन के अंदर बिछाने या भारी इंडस्ट्रियल कामों में इस्तेमाल किया जाता है, जहाँ केबल को सुरक्षित और लंबे समय तक टिकाऊ रखना जरूरी होता है।
3. घर की वायरिंग के लिए कौनसी केबल ठीक है?
घर में आमतौर पर PVC इंसुलेटेड Copper Cable का ही उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह सुरक्षित, टिकाऊ और अच्छी करंट क्षमता वाली होती है। छोटे सर्किट के लिए 2‑Core और लाइट, पंखे, सॉकेट आदि के लिए 3‑Core केबल सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
4. Power Cable और Communication Cable में क्या फर्क है?
Power Cable का उपयोग बिजली सप्लाई के लिए किया जाता है, यानी यह करंट को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करता है। जबकि Communication Cable का उद्देश्य डेटा या सिग्नल ट्रांसमिट करना होता है, जैसे इंटरनेट, फोन लाइन या मशीन कंट्रोल सिग्नल। सरल शब्दों में, Power Cable ऊर्जा पहुँचाती है और Communication Cable सूचना।
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