जब भी हम इलेक्ट्रॉनिक्स या इलेक्ट्रिकल विषय की बात करते हैं, तो Resistance (प्रतिरोध) एक बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द है। आपने पहले शायद पढ़ा होगा कि Resistance क्या है, लेकिन केवल इसकी परिभाषा जान लेना पर्याप्त नहीं होता। किसी भी विषय की वास्तविक समझ तभी बनती है जब हम यह जान पाते हैं कि वह चीज कैसे काम करती है और क्यों जरूरी है।
असल में यह समझना ज्यादा जरूरी है कि Resistance कैसे काम करता है और यह बिजली के प्रवाह (Electric Current) को किस तरह नियंत्रित करता है। जब बिजली किसी तार या उपकरण से गुजरती है, तो वह बिना किसी रुकावट के नहीं बहती। रास्ते में उसे कुछ विरोध का सामना करना पड़ता है, और यही विरोध Resistance कहलाता है। यही Resistance यह तय करता है कि किसी सर्किट में कितनी करंट बहेगी और कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित तरीके से काम करेगा या नहीं।
बहुत से छात्र Resistance को सिर्फ एक फार्मूला या यूनिट (Ohm) तक सीमित समझ लेते हैं, लेकिन वास्तव में Resistance हर छोटे-बड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की नींव होता है। अगर Resistance न हो, तो न तो बल्ब सुरक्षित तरीके से जल सकेगा और न ही मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर जैसे उपकरण सही ढंग से काम कर पाएंगे।
इस लेख में हम विस्तार से और आसान भाषा में जानेंगे कि Resistance कैसे काम करता है, इसके पीछे का मूल सिद्धांत क्या है, और यह हमारे रोजमर्रा के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इतना जरूरी क्यों है। इस विषय को समझने के बाद Resistance सिर्फ एक शब्द नहीं रहेगा, बल्कि आप इसे व्यावहारिक रूप से महसूस और समझ पाएँगे।
Table of Contents
प्रतिरोध (Resistance) क्या होता है?
प्रतिरोध की परिभाषा
Resistance वह गुण है जो बिजली की धारा (Current) के बहाव का विरोध करता है। Resistance का अर्थ है करंट के प्रवाह को रोकना या उसकी मात्रा को सीमित करना। जिस पदार्थ में Resistance अधिक होती है, उसमें करंट कम बहता है, और जिस पदार्थ में Resistance कम होती है, उसमें करंट अपेक्षाकृत आसानी से बह जाता है।
Resistance को केवल “रोक” के रूप में समझना इसकी वास्तविक गहराई को पूरी तरह व्यक्त नहीं करता। वास्तव में Resistance किसी पदार्थ की वह आंतरिक विशेषता है जो यह तय करती है कि इलेक्ट्रॉन उस पदार्थ के भीतर कितनी आसानी या कठिनाई से गति कर पाएँगे। जब इलेक्ट्रॉन आगे बढ़ते हैं, तो उन्हें पदार्थ के अंदर मौजूद परमाणुओं से टकराना पड़ता है, और यही टकराव Resistance के रूप में दिखाई देता है।
Resistance यह भी निर्धारित करता है कि बिजली की ऊर्जा किस रूप में व्यवहार करेगी। करंट के प्रवाह के दौरान जो ऊर्जा आगे बढ़ने में बाधित होती है, वह उसी पदार्थ में अवशोषित हो जाती है। इस कारण Resistance को ऊर्जा के नियंत्रक के रूप में देखा जा सकता है, न कि केवल एक साधारण बाधा के रूप में। यही नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को स्थिर, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाता है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि Resistance कोई बाहरी प्रभाव नहीं, बल्कि पदार्थ की आंतरिक संरचना से उत्पन्न होने वाला गुण है। अलग-अलग पदार्थों की परमाणु संरचना अलग होती है, इसलिए उनकी Resistance भी अलग-अलग होती है। इसी अंतर के कारण कुछ पदार्थ बिजली के अच्छे चालक होते हैं, जबकि कुछ पदार्थ करंट के प्रवाह का तीव्र विरोध करते हैं।
संक्षेप में कहा जाए तो Resistance वह मूल गुण है जो Electric Current को उपयोगी और नियंत्रित बनाता है। यह करंट को पूरी तरह रोकता नहीं, बल्कि उसे एक निश्चित सीमा में रखता है, जिससे बिजली का सुरक्षित और प्रभावी उपयोग संभव हो पाता है।
और पढ़ें: फेज़ सीक्वेंस (Phase Sequence) क्या होता है?
प्रतिरोध Resistance कैसे काम करता है?
अब मुख्य सवाल यही है कि वास्तव में Resistance काम कैसे करता है। इसे समझने के लिए हमें किताबों की भाषा छोड़कर, पदार्थ के अंदर होने वाली वास्तविक प्रक्रिया को समझना होगा।
जब किसी तार या कंडक्टर में बिजली प्रवाहित होती है, तो असल में कोई “बिजली” नहीं दौड़ती, बल्कि इलेक्ट्रॉन एक निश्चित दिशा में धीरे-धीरे खिसकते हैं। ये इलेक्ट्रॉन खाली जगह में नहीं चलते, बल्कि उसी पदार्थ के अंदर मौजूद Atoms और उनके बंधे हुए कणों के बीच से गुजरते हैं।
इलेक्ट्रॉनों की टक्कर और Resistance का जन्म
हर कंडक्टर के अंदर परमाणु लगातार सूक्ष्म स्तर पर कंपन कर रहे होते हैं। जब इलेक्ट्रॉन आगे बढ़ते हैं, तो वे इन कंपन करते परमाणुओं से बार-बार टकराते हैं।
- इन टक्करों के कारण:
- इलेक्ट्रॉनों की गति धीमी हो जाती है
- उनकी ऊर्जा का एक हिस्सा नष्ट नहीं होता, बल्कि ऊष्मा (Heat) में बदल जाता है
- इलेक्ट्रॉनों की यही टकराहट Resistance का मूल कारण है।
- जितनी ज्यादा टक्करें होंगी, उतनी ही ज्यादा Resistance होगी।
आसान उदाहरण से समझिए
- खुली, सीधी सड़क → गाड़ियाँ बिना रुके चलती हैं (कम Resistance)
- भीड़भाड़ वाली सड़क → गाड़ियाँ बार-बार रुकती हैं (ज्यादा Resistance)
इलेक्ट्रॉनों के लिए:
- Copper जैसे पदार्थ = खुली सड़क (कम टक्कर, कम Resistance)
- Nichrome जैसे पदार्थ = भीड़भाड़ वाली सड़क (ज्यादा टक्कर, ज्यादा Resistance)
यही कारण है कि सभी धातुएँ बिजली को एक-सा प्रवाहित नहीं करतीं।
प्रतिरोध (Resistance) के काम करने का वैज्ञानिक सिद्धांत
Resistance कैसे काम करता है, इसे वैज्ञानिक रूप से समझने का सबसे भरोसेमंद और मूल आधार Ohm’s Law है। यह नियम किसी किताब में लिखा हुआ मात्र सूत्र नहीं है, बल्कि हजारों प्रयोगों से सिद्ध किया गया एक व्यवहारिक सत्य है। इसी कारण यह आज भी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की नींव माना जाता है।
Ohm’s Law क्या बताता है?
Ohm’s Law यह स्पष्ट करता है कि किसी भी विद्युत सर्किट में Voltage, Current और Resistance आपस में कैसे जुड़े होते हैं।
इसे एक सरल गणितीय संबंध से व्यक्त किया जाता है:
V=I×R
- V (Voltage) वह ऊर्जा है जो इलेक्ट्रॉनों को आगे बढ़ने के लिए दबाव देती है
- I (Current) इलेक्ट्रॉनों के बहने की दर है
- R (Resistance) वह सीमा है जो इस बहाव को नियंत्रित करती है
- यह सूत्र दिखने में छोटा है, लेकिन इसके पीछे पूरा वैज्ञानिक व्यवहार छिपा हुआ है।
Resistance करंट को कैसे नियंत्रित करता है?
Ohm’s Law के अनुसार, अगर Voltage को स्थिर रखा जाए तो Current पूरी तरह Resistance पर निर्भर हो जाता है। इसका अर्थ यह है कि Resistance कोई passive चीज नहीं, बल्कि करंट के व्यवहार को तय करने वाला प्रमुख कारक है।
- जब Resistance बढ़ती है, तो इलेक्ट्रॉनों को आगे बढ़ने में ज्यादा टकराव झेलना पड़ता है, जिससे उनकी गति धीमी हो जाती है और Current अपने आप कम हो जाता है।
- जब Resistance घटती है, तो इलेक्ट्रॉनों के लिए रास्ता आसान हो जाता है और Current ज्यादा बहने लगता है।
- यही कारण है कि Resistance को करंट का “natural regulator” कहा जाता है।
Resistance ऊष्मा क्यों उत्पन्न करता है?
जब इलेक्ट्रॉन्स conductor के अणुओं से बार-बार टकराते हैं, तो उनकी kinetic energy कम होती है। यह ऊर्जा नष्ट नहीं होती, बल्कि ऊष्मा (heat) में बदल जाती है। इसी प्रक्रिया को Joule Heating Effect कहा जाता है। यही कारण है कि किसी भी conductor में धारा बहने पर गर्मी उत्पन्न होती है। उत्पन्न होने वाली गर्मी की मात्रा सीधे धारा (I) और प्रतिरोध (R) पर निर्भर करती है और इसे सरलता से P = I²R के सूत्र से निकाला जा सकता है।
इसका अर्थ है कि धारा जितनी अधिक होगी और conductor का प्रतिरोध जितना बड़ा होगा, उतनी ही अधिक ऊष्मा उत्पन्न होगी। यही कारण है कि तार और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस काम करते समय गर्म हो जाते हैं।”
Heat का सूत्र:
H = I²Rt
इससे पता चलता है कि: ज्यादा Resistance या ज्यादा Current → ज्यादा Heat
इसी कारण:
- हीटर में High-Resistance तार (जैसे Nichrome)
- और सामान्य वायरिंग में Low-Resistance तार (जैसे Copper) का उपयोग किया जाता है।
Resistance को कौन-कौन से Factors प्रभावित करते हैं?
Resistance हर तार, हर पदार्थ और हर स्थिति में समान नहीं होती। इसका कारण यह है कि Resistance कोई स्थिर संख्या नहीं, बल्कि पदार्थ और परिस्थितियों पर निर्भर करने वाला भौतिक गुण है। वैज्ञानिक रूप से यह समझना आवश्यक है कि किन-किन कारणों से Resistance बदलती है, ताकि किसी सर्किट का व्यवहार सही ढंग से अनुमान लगाया जा सके।
1. पदार्थ का प्रकार (Material / Resistivity)
हर पदार्थ की अपनी एक प्रतिरोधकता (Resistivity, ρ) होती है, जो यह बताती है कि वह पदार्थ इलेक्ट्रॉनों के बहाव का कितना विरोध करता है।
धातुएँ जैसे Copper और Aluminium इलेक्ट्रॉनों को आसानी से गुजरने देती हैं, इसलिए इनमें Resistance कम होती है। इसके विपरीत Rubber, Wood और Plastic जैसे पदार्थ इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह का तीव्र विरोध करते हैं, इसलिए इनकी Resistance बहुत अधिक होती है। यानी Resistance केवल आकार या लंबाई से नहीं, बल्कि पदार्थ की आंतरिक संरचना से भी तय होती है।
2. चालक की लंबाई (Length)
तार जितनी लंबी होगी, इलेक्ट्रॉनों को उतनी ही ज्यादा दूरी तय करनी पड़ेगी। लंबी दूरी का अर्थ है:
- अधिक परमाणुओं से टकराव
- अधिक ऊर्जा हानि
इसीलिए जैसे-जैसे तार की लंबाई बढ़ती है, Resistance भी बढ़ती जाती है। वैज्ञानिक रूप से इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
R∝ L
अर्थात Resistance, लंबाई के सीधे अनुपात में होती है।
3. तार की मोटाई / क्षेत्रफल (Thickness / Cross-sectional Area)
तार की मोटाई यह तय करती है कि इलेक्ट्रॉनों के बहने के लिए कितनी “जगह” उपलब्ध है।
- मोटी तार में इलेक्ट्रॉनों के लिए अधिक रास्ते होते हैं → कम टकराव → कम Resistance
- पतली तार में रास्ता संकरा होता है → अधिक टकराव → ज्यादा Resistance
इसी कारण वैज्ञानिक रूप से कहा जाता है:
R ∝ 1/A
जहाँ: A तार का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल है।
4. तापमान (Temperature)
Temperature का प्रभाव Resistance पर बहुत महत्वपूर्ण और थोड़ा सूक्ष्म होता है।
- धात्विक चालकों (Metals) में तापमान बढ़ने पर परमाणुओं की कंपन गति बढ़ जाती है। इससे इलेक्ट्रॉनों की टक्करें बढ़ती हैं और Resistance बढ़ जाती है।
- अर्धचालकों (Semiconductors) और Insulators में तापमान बढ़ने पर इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती है, जिससे Resistance घट सकती है।
यही कारण है कि हर पदार्थ का तापमान के प्रति व्यवहार अलग होता है, और इसे सर्किट डिजाइन में गंभीरता से लिया जाता है।
Resistance का संयुक्त वैज्ञानिक सूत्र
इन सभी कारकों को मिलाकर Resistance का पूर्ण वैज्ञानिक संबंध इस सूत्र से व्यक्त किया जाता है:
R = ρL/A
जहाँ:
- R = Resistance
- ρ = पदार्थ की Resistivity
- L = चालक की लंबाई
- A = अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल
यह सूत्र केवल गणित नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि Resistance पदार्थ और भौतिक संरचना का संयुक्त परिणाम है।
Resistance किसी एक कारण से नहीं बदलती, बल्कि पदार्थ, आकार और वातावरण के संयुक्त प्रभाव से निर्धारित होती है। इसी कारण एक ही धातु की अलग-अलग लंबाई या मोटाई की तारें अलग व्यवहार करती हैं। यह समझ इलेक्ट्रॉनिक्स को केवल याद करने की बजाय वैज्ञानिक रूप से सोचने की क्षमता विकसित करती है।
और पढ़ें: MPCB कैसे काम करता है?
Electrical Circuit में Resistance कैसे काम करता है?
Resistance (प्रतिरोध) इलेक्ट्रिकल सर्किट में एक ऐसा गुण है जो विद्युत धारा (Current) के प्रवाह को नियंत्रित करता है। इसे समझने के लिए इसे पानी के पाइप की analogy में देख सकते हैं: जैसे पाइप में रुकावट पानी के बहाव को कम करती है, वैसे ही Resistance करंट को सीमित करता है।
Resistance क्यों जरूरी है?
Current को नियंत्रित करना
अगर कोई सर्किट में बहुत ज्यादा Current flow हो रहा है, तो Components (जैसे LED, ICs) damage हो सकते हैं। Resistor डालने से करंट सुरक्षित स्तर पर रहता है। इससे न केवल डिवाइस की उम्र बढ़ती है, बल्कि इलेक्ट्रिकल फायर या शॉर्ट सर्किट का खतरा भी कम होता है।
Components को सुरक्षित रखना
LEDs, wireless charger, microchips और दूसरे sensitive components बिना Resistance के तुरंत नुकसान सह सकते हैं। Resistor का सही चयन करके हम Voltage और Current को नियंत्रित कर सकते हैं।
Heat और energy conversion
Resistance विद्युत ऊर्जा को गर्मी या प्रकाश जैसी ऊर्जा में बदल सकता है। यही कारण है कि Heater, Iron और Toaster में इसे intentional रूप से इस्तेमाल किया जाता है। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में Resistor की शक्ति (Power Rating) और ताप क्षमता को वैज्ञानिक रूप से डिज़ाइन किया जाता है ताकि वे सुरक्षित और प्रभावी रूप से काम करें।
उदाहरण: अगर किसी LED में सीधे बिजली दे दी जाए और उसके साथ Resistor न हो, तो Current बहुत ज्यादा होगा और LED जल जाएगी। इसलिए Resistor डालना जरूरी होता है ताकि करंट नियंत्रित रहे।
Resistance और Conductance में अंतर (Difference)
1. Resistance क्या है?
Resistance (प्रतिरोध) सर्किट में Current के बहाव को रोकने या धीमा करने की क्षमता है। जितना ज्यादा Resistance, उतना कम Current।
इसे ऐसे समझ सकते हैं: जैसे पानी के पाइप में रुकावट होती है और पानी धीरे-धीरे बहता है, वैसे ही Resistance करंट को धीमा करता है।
2. Conductance क्या है?
Conductance (चालकता) Resistance का उल्टा है। यह Current के आसानी से बहने की क्षमता है। जितनी ज्यादा Conductance, उतना आसानी से Current flow करेगा।
इसे पाइप analogy में ऐसे समझ सकते हैं: जैसे पाइप पूरी तरह खुला है और पानी आसानी से बहता है, वैसे ही Conductance करंट को आसानी से बहने देता है।
Resistance और Conductance को निम्नलिखित तरीके से मापा जाता है:
- Resistance (R): R = V/I
- Conductance (G): G = 1/R = I/V
जहाँ:
- 𝑉 = Voltage (वोल्टेज)
- 𝐼 = Current (धारा)
- 𝑅 = Resistance (प्रतिरोध)
आसान Example
- अगर LED सर्किट में Resistor लगाया है और उसकी Resistance ज्यादा है, तो Current सुरक्षित रहेगा और LED damage नहीं होगी।
- अगर वायर अच्छा conductor है (जैसे Copper), तो Conductance ज्यादा होगी और Current आसानी से बह जाएगा।
Practical Importance
- Resistance सर्किट को overcurrent और component damage से बचाता है।
- Conductance बताती है कि कौन-सा material Current को आसानी से पास कर सकता है।
नीचे दी गई तालिका में प्रतिरोध (Resistance) और चालकता (Conductance) के बीच मुख्य अंतर स्पष्ट रूप से दिखाए गए हैं।
| विशेषता | प्रतिरोध (Resistance, R) | चालकता (Conductance, G) |
|---|---|---|
| परिभाषा | वह गुण जो किसी सामग्री में विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है | वह गुण जो किसी सामग्री को विद्युत धारा के प्रवाह की अनुमति देता है |
| प्रतीक | R | G |
| इकाई | ओम (Ω) | सीमेंस (S) |
| संबंध | R = 1 / G | G = 1 / R |
| धारा पर प्रभाव | अधिक प्रतिरोध → निश्चित वोल्टेज पर कम धारा | अधिक चालकता → निश्चित वोल्टेज पर अधिक धारा |
| स्वभाव | धारा को रोकने वाला गुण (Passive property | धारा को प्रवाहित करने वाला गुण (Passive property) |
| निर्भरता | सामग्री, लंबाई, क्षेत्रफल, तापमान पर निर्भर | सामग्री, लंबाई, क्षेत्रफल, तापमान पर निर्भर |
Series और Parallel Circuits में Resistance कैसे निकालें?
1. Resistance का Measurement – Multimeter से
क्या करना है: Resistance measure करने के लिए सबसे आसान तरीका है Digital Multimeter (DMM) का उपयोग करना।
2. Resistance का Value कैसे जांचें?
- Multimeter को Ω (Resistance) mode पर सेट करें।
- Resistor या conductor को multimeter के probes से जोड़ें।
- स्क्रीन पर जो value दिखे, वही उसका resistance है।
- यदि Voltage (V) और Current (I) भी measure करना चाहते हैं, तो अलग-अलग multimeter modes का उपयोग करें।
उदाहरण: एक resistor में 9V battery लगाकर multimeter से current measure करें।
मान लें current 2A है और voltage 9V है। तो Ohm’s Law से:
R = V / I = 9 / 2 = 4.5Ω
Voltage (V) को current (I) से divide करने पर conductor या resistor का प्रतिरोध (R) मिलता है। यह सबसे basic और सबसे उपयोगी तरीका है, real-life circuits में resistance पता करने का।
3. Series Circuit में Resistance का Value कैसे जांचें?
Formula: R_total = R₁ + R₂ + R₃ + …
Example: R₁ = 4Ω, R₂ = 6Ω, R₃ = 2Ω
Total Resistance: R_total = 4 + 6 + 2 = 12Ω
Explanation: Series में resistors सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए total resistance सभी resistors का जोड़ होता है।जितने अधिक resistors, उतना अधिक total resistance।
4. Parallel Circuit में Resistance का Value कैसे जांचें?
Formula: 1 / R_total = 1 / R₁ + 1 / R₂ + 1 / R₃ + …
Example: R₁ = 4Ω, R₂ = 6Ω, R₃ = 12Ω
Calculation: 1 / R_total = 1/4 + 1/6 + 1/12 = 0.25 + 0.1667 + 0.0833 = 0.5
Total Resistance: R_total = 1 / 0.5 = 2Ω
Explanation: Parallel में current अलग-अलग branches में बहती है। इसलिए total resistance हमेशा individual resistances से कम होता है।
5. Tip for Beginners
- Multimeter से resistance directly measure करना सबसे आसान तरीका है।
- Series और parallel circuits में formulas याद रखें।
- Heat (I²R) हमेशा ध्यान में रखें, खासकर high-resistance या high-current circuits में।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
1. क्या कोई ऐसा पदार्थ होता है जिसकी resistance शून्य (0) हो? अगर हाँ, तो क्यों?
हाँ, ऐसा पदार्थ संभव है जिसे सुपरकंडक्टर (Superconductor) कहा जाता है, जिसकी प्रतिरोध (Resistance) बिल्कुल शून्य (0) हो जाता है। सुपरकंडक्टर विशेष तापमान से नीचे आने पर अपने अंदर विद्युत धारा को बिना किसी ऊर्जा हानि के प्रवाहित होने देते हैं। यह सामान्य चालक (जैसे ताँबा या एल्युमिनियम) से अलग है, क्योंकि उनमें हमेशा कुछ न कुछ प्रतिरोध रहता है, जिससे धारा के प्रवाह में ऊर्जा खपत होती है। सरल शब्दों में, सुपरकंडक्टर में इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह बिलकुल बाधा रहित होता है, इसलिए इसका प्रतिरोध शून्य माना जाता है।
2. Resistance और resistivity में सरल लेकिन स्पष्ट अंतर क्या है?
Resistance (प्रतिरोध) और Resistivity (प्रतिवाहिता) दोनों जुड़े हुए हैं, लेकिन अलग-अलग चीज़ें हैं।
Resistivity (ρ, प्रतिवाहिता): यह किसी सामग्री की आंतरिक (intrinsic) गुण है, यानी सामग्री खुद कितनी धारा का विरोध करती है। यह सामग्री पर निर्भर करता है, लेकिन आकार या लंबाई पर नहीं।
Resistance (R, प्रतिरोध): यह उस वस्तु का असली प्रतिरोध है, जो उस सामग्री, लंबाई और क्रॉस-सेक्शनल एरिया पर निर्भर करता है। सरल शब्दों में, R = ρ × (L/A), जहाँ L = लंबाई, A = क्षेत्रफल।
3. Resistance ka negative होता है क्या? Negative resistance kya hota hai?
हाँ, Resistance सामान्य रूप से हमेशा positive होता है, क्योंकि यह धारा के प्रवाह में अवरोध (opposition) को दर्शाता है। लेकिन Negative Resistance (ऋणात्मक प्रतिरोध) एक विशेष और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक कॉन्सेप्ट है।
सरल भाषा में समझें:
Negative Resistance का मतलब है कि किसी डिवाइस में जैसे ही वोल्टेज बढ़ता है, धारा कम हो जाती है, यानी यह सामान्य Ohm’s law के विपरीत व्यवहार करता है।
यह सामान्य धातु या तार में नहीं मिलता, बल्कि कुछ विशेष इलेक्ट्रॉनिक घटकों (जैसे tunnel diode, Gunn diode, या certain oscillators) में देखा जाता है।
इसका उपयोग सिग्नल amplification, oscillators और switching circuits में किया जाता है।
संक्षेप में: Negative resistance प्रतिरोध का उल्टा असर है, और यह केवल विशेष इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में ही पाया जाता है।
4. क्या विद्युत resistance के कारण ही सब conductors heat produce करते हैं? अगर हाँ, तो कितना heat produce होगा?
हाँ, सभी सामान्य चालक (conductors) विद्युत प्रतिरोध (Resistance) के कारण ही गरमी (heat) उत्पन्न करते हैं। जब conductor में धारा बहती है, तो इलेक्ट्रॉन्स conductor के अणुओं से टकराते हैं और उनकी गति की ऊर्जा ताप (heat) में बदल जाती है। जितनी अधिक धारा या प्रतिरोध होगा, उतनी ही अधिक गर्मी बनेगी। इस कारण ही सभी तार, बत्तियाँ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस कुछ न कुछ गर्म होते हैं। Heat power निकालने का फार्मूला: P = I²R
R, जहाँ P = heat power (Watts), I = current (Ampere), और R = resistance (Ohm)।
धन्यवाद! हमें उम्मीद है कि यह पोस्ट ”Resistance कैसे काम करता है?” आपके लिए जानकारीपूर्ण और मददगार रही होगी। अगर आपके कोई विचार, अनुभव या सवाल हैं, तो उन्हें नीचे कमेंट में शेयर करना न भूलें।