ट्रांसफार्मर PRV (Pressure Relief Valve) क्या है
ट्रांसफार्मर PRV (Pressure Relief Valve) क्या है

ट्रांसफार्मर में PRV और OSR रिले क्या हैं? संरचना, कार्य विधि और अनुप्रयोग

पावर ट्रांसफार्मर एक अत्यंत महँगा और महत्वपूर्ण उपकरण होता है, जिसका उपयोग बिजली की आपूर्ति को विश्वसनीय बनाए रखने के लिए किया जाता है। इसके खराब होने से भारी आर्थिक नुकसान और बिजली आपूर्ति में रुकावट आ सकती है। इसी कारण ट्रांसफार्मर की सुरक्षा बहुत आवश्यक होती है। इसके सुरक्षित संचालन के लिए इसमें कई प्रकार के प्रोटेक्शन रिले लगाए जाते हैं, जो अलग-अलग प्रकार के फॉल्ट को पहचानकर ट्रांसफार्मर को नुकसान से बचाते हैं।

इन्हीं में से दो बहुत महत्वपूर्ण रिले हैं:

PRV (Pressure Relief Valve) – यह ट्रांसफार्मर के अंदर बनने वाले अत्यधिक दबाव को बाहर निकालकर टैंक को फटने से बचाती है।

OSR (Oil Surge Relay) – यह ट्रांसफार्मर के अंदर होने वाले तेज आंतरिक फॉल्ट के कारण तेल के अचानक बहाव को पहचानकर ट्रांसफार्मर को तुरंत ट्रिप करा देती है।

इस लेख में हम दोनों रिले को सरल भाषा, उदाहरण, और विस्तार से समझेंगे ताकि उनकी कार्यप्रणाली और महत्व आसानी से समझा जा सके।

ट्रांसफार्मर में प्रोटेक्शन की आवश्यकता क्यों होती है?

ट्रांसफार्मर एक ऐसा विद्युत उपकरण है जो लगातार उच्च वोल्टेज और भारी लोड पर कार्य करता है। इसके अंदर तेल, वाइंडिंग और इंसुलेशन होते हैं, जो किसी भी असामान्य स्थिति में जल्दी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। इसी कारण ट्रांसफार्मर को बिना सुरक्षा के चलाना बहुत जोखिम भरा होता है।

ट्रांसफार्मर के अंदर कई प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे आंतरिक शॉर्ट सर्किट, वाइंडिंग में खराबी, इंसुलेशन का कमजोर होना या फेल हो जाना, तथा अत्यधिक आर्किंग। इन खराबियों के कारण ट्रांसफार्मर के अंदर तेल और गैस का तापमान बढ़ जाता है, जिससे तेल का दबाव अचानक बहुत अधिक हो सकता है।

यदि ऐसी स्थिति में समय पर प्रोटेक्शन न मिले, तो ट्रांसफार्मर का टैंक फट सकता है, आग लगने की संभावना बन जाती है और पूरा सबस्टेशन बंद हो सकता है। इन्हीं खतरों से ट्रांसफार्मर को सुरक्षित रखने के लिए PRV और OSR जैसे प्रोटेक्शन रिले लगाए जाते हैं। ये रिले असामान्य स्थितियों को जल्दी पहचानकर दबाव को नियंत्रित करते हैं या ट्रांसफार्मर को सप्लाई से अलग कर देते हैं, जिससे बड़े नुकसान से बचाव होता है।

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ट्रांसफार्मर PRV (Pressure Relief Valve) क्या है?

PRV एक प्रेशर रिलीफ वाल्व है, जिसे Pressure Relief Device (PRD) भी कहा जाता है। यह तरल (तेल) से भरे पावर ट्रांसफार्मर में लगाया जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य ट्रांसफार्मर के आंतरिक टैंक में बनने वाले अत्यधिक दबाव को सुरक्षित रूप से कम करना होता है।

ट्रांसफार्मर PRV (Pressure Relief Valve) क्या है
ट्रांसफार्मर PRV (Pressure Relief Valve) क्या है

जब ट्रांसफार्मर के अंदर कोई गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है, जैसे आंतरिक फॉल्ट, अत्यधिक गर्मी, आंशिक डिस्चार्ज या तेज आर्किंग, तो तेल और गैस का दबाव अचानक बढ़ जाता है। यदि इस दबाव को बाहर न निकाला जाए, तो टैंक के फटने या विस्फोट का खतरा पैदा हो जाता है।

PRV ऐसे समय में स्वतः कार्य करता है। जैसे ही टैंक के अंदर का दबाव पूर्व-निर्धारित सुरक्षित सीमा (Set Point) से अधिक हो जाता है और वाल्व के स्प्रिंग बल को पार कर लेता है, PRV तुरंत खुल जाता है। इसके खुलते ही अतिरिक्त दबाव और गैस वायुमंडल में निकल जाती है, और आंतरिक दबाव को तब तक छोड़ता रहता है जब तक कि वह कम न हो जाए। दबाव कम होने के बाद, दबाव वाल्व क्लैप अपनी मूल स्थिति में वापस आ जाता है और पूरी तरह से बंद हो जाता है। जिससे टैंक का दबाव कम हो जाता है और ट्रांसफार्मर सुरक्षित रहता है।

PRV के सक्रिय होने पर यह तीन महत्वपूर्ण कार्य करता है।

  • सबसे पहले, यह अपने दबाव वाल्व क्लैप को खोलकर दबाव को तेजी से कम करता है।
  • दूसरा, यह एक फ्लैग इंडिकेटर को उठाता है, जिससे यह स्पष्ट दृश्य संकेत मिलता है कि वाल्व ने कार्य किया है।
  • तीसरा, इसमें लगा माइक्रो स्विच ऑपरेट होकर ब्रेकर को ट्रिप कमांड देता है, जिससे ट्रांसफार्मर को सप्लाई से अलग किया जा सके।

इस प्रकार PRV ट्रांसफार्मर को विस्फोट, आग और गंभीर यांत्रिक क्षति से बचाने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण की भूमिका निभाता है।

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ट्रांसफार्मर में PRV (Pressure Relief Valve) कैसे काम करता है? और PRV कहाँ लगाया जाता है?

PRV को ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक के ऊपरी हिस्से में लगाया जाता है, क्योंकि अधिक दबाव और गैस सबसे पहले ऊपर की ओर ही एकत्र होती है। सामान्य रूप से PRV को मेन टैंक की टॉप प्लेट या कवर प्लेट पर फिट किया जाता है। कुछ डिज़ाइनों में इसे टैंक की ऊपरी दीवार या कंज़र्वेटर टैंक के ऊपर भी लगाया जा सकता है, लेकिन इसका प्राथमिक स्थान हमेशा मुख्य टैंक का ऊपरी भाग ही होता है।

Pressure Relief Valve को ट्रांसफार्मर पर लगाने के लिए इसमें डाई-कास्ट एल्युमिनियम फ्लैंज दिया जाता है, जिसके साथ नाइट्राइल रबर गैस्केट लगी होती है। यह व्यवस्था तेल के रिसाव को रोकती है और वाल्व को टैंक पर मजबूती से सील करती है। इसके अंदर स्टेनलेस स्टील का डायाफ्राम होता है, जिसे दो विपरीत दिशा में मुड़े हुए स्प्रिंग सहारा देते हैं। यह डायाफ्राम सामान्य अवस्था में 75 मिमी या 150 मिमी के पोर्ट को पूरी तरह सील करके रखता है।

जब ट्रांसफार्मर के टैंक के अंदर कोई बड़ी आंतरिक खराबी होती है या जब ट्रांसफार्मर पर अधिक भार पड़ता है, तब उसकी वाइंडिंग गर्म हो जाती है। इस गर्मी के कारण ट्रांसफार्मर का तेल फैलता है और ऊपर की ओर जाकर तेल संरक्षक (Conservator) में प्रवेश करता है। इससे संरक्षक में गैस के लिए उपलब्ध स्थान कम हो जाता है और आंतरिक दबाव बढ़ जाता है।

इसी प्रकार, जब ट्रांसफार्मर में अर्थ (Earth) फॉल्ट या फेज़-टू-फेज़ फॉल्ट होता है, तो अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होती है। इस अत्यधिक ताप के कारण पेपर इंसुलेशन और तेल का विघटन होता है, जिससे मीथेन, ईथेन और एसिटिलीन जैसी गैसें बहुत तेजी से बनती हैं। और दबाव पूर्व-निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक बढ़ जाता है, तो डायाफ्राम तुरंत ऊपर उठ जाता है।

ट्रांसफार्मर में PRV (Pressure Relief Valve) कैसे काम करता है
ट्रांसफार्मर में PRV (Pressure Relief Valve) कैसे काम करता है

इसके परिणामस्वरूप गैस और तेल बाहर निकल जाते हैं और टैंक के अंदर का दबाव तेजी से कम हो जाता है। दबाव सामान्य होते ही डायाफ्राम फिर से अपनी मूल स्थिति में वापस आ जाता है।

डायाफ्राम की यह गति केवल दबाव कम करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसी के माध्यम से फ्लैग इंडिकेटर उठता है और माइक्रो स्विच संचालित होता है। माइक्रो स्विच का NO (Normally Open) कॉन्टैक्ट ब्रेकर को ट्रिप कमांड देता है, जिससे ट्रांसफार्मर को तुरंत सप्लाई से अलग किया जा सके।

यदि Pressure Relief Valve सही ढंग से कार्य न करे और कुछ मिलीसेकंड के भीतर दबाव को कम न कर पाए, तो टैंक के फटने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है। इसलिए इसका सही स्थान और सही कार्य करना अत्यंत आवश्यक है।

बड़े क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों में Pressure Relief Valve को तीनों फेज के OLTC डायवर्टर स्विच कम्पार्टमेंट पर भी लगाया जाता है। विशेष रूप से 66 Kilo-Volts श्रेणी के ट्रांसफार्मरों में Pressure Relief Valve को OLTC कम्पार्टमेंट की ऊपरी प्लेट पर स्थापित किया जाता है।

सामान्य रूप से PRV के परिचालन दबाव मान 0.42 kg/cm², 0.49 kg/cm², 0.56 kg/cm² और 0.70 kg/cm² होते हैं, जो ट्रांसफार्मर की रेटिंग और डिज़ाइन के अनुसार चुने जाते हैं।

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ट्रांसफार्मर PRV (Pressure Relief Valve) के प्रकार

ट्रांसफार्मर के डिजाइन और सुरक्षा आवश्यकता के अनुसार PRV को निम्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

1. स्प्रिंग लोडेड PRV (Spring Loaded Pressure Relief Valve)

यह PRV का सबसे सामान्य और व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला प्रकार है। इसमें एक स्प्रिंग मैकेनिज़्म होता है, जो पहले से निर्धारित दबाव (Pre-set Pressure) पर कैलिब्रेट किया जाता है। सामान्य अवस्था में स्प्रिंग वाल्व को बंद रखता है, लेकिन जैसे ही ट्रांसफार्मर के अंदर का दबाव तय सीमा से अधिक होता है, स्प्रिंग दब जाती है और वाल्व खुल जाता है। इससे अंदर जमा गैस और तेल बाहर निकल जाता है और दबाव तुरंत कम हो जाता है। दबाव सामान्य होने पर यह वाल्व स्वतः बंद हो जाता है। यह प्रकार तेज़, भरोसेमंद और कम रख-रखाव वाला माना जाता है।

2. डायफ्राम टाइप PRV (Diaphragm Type Pressure Relief Valve)

डायफ्राम टाइप Pressure Relief Valve में एक पतली धातु या रबर की झिल्ली (Diaphragm) लगी होती है। जब ट्रांसफार्मर के अंदर का दबाव खतरनाक स्तर तक बढ़ता है, तो यह डायफ्राम फट जाता है या खुल जाता है, जिससे गैस और तेल बाहर निकल जाते हैं। यह प्रकार अत्यधिक संवेदनशील होता है और बहुत तेज़ प्रतिक्रिया देता है, लेकिन एक बार ऑपरेट होने के बाद इसे बदलना (Replacement) आवश्यक होता है। इसलिए यह Pressure Relief Valve आमतौर पर उन ट्रांसफार्मरों में लगाया जाता है जहाँ अत्यधिक तेज़ दबाव वृद्धि की संभावना होती है।

3. लीवर ऑपरेटेड PRV (Lever Operated Pressure Relief Valve)

इस प्रकार के Pressure Relief Valve में दबाव नियंत्रण के लिए लीवर और वेट मैकेनिज़्म का उपयोग किया जाता है। जब अंदर का दबाव निर्धारित सीमा से अधिक होता है, तो लीवर सक्रिय होकर वाल्व को खोल देता है। यह प्रकार अधिकतर पुराने या विशेष डिजाइन वाले ट्रांसफार्मरों में पाया जाता है। यद्यपि यह संरचना में सरल होता है, लेकिन इसकी सटीकता और संवेदनशीलता आधुनिक स्प्रिंग लोडेड Pressure Relief Valve की तुलना में कम होती है।

4. इलेक्ट्रिकल कॉन्टैक्ट युक्त PRV (PRV with Electrical Contact)

यह कोई अलग मैकेनिकल प्रकार नहीं, बल्कि एक उन्नत सुविधा (Feature) वाला PRV होता है। इसमें एक Electrical Contact लगाया जाता है, जो Pressure Relief Valve के ऑपरेट होते ही Alarm या Trip सिग्नल भेज देता है। इससे कंट्रोल रूम को तुरंत जानकारी मिल जाती है कि ट्रांसफार्मर में अत्यधिक दबाव उत्पन्न हुआ है। यह प्रकार आधुनिक पावर ट्रांसफार्मरों में अधिक प्रचलित है और ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए अत्यंत उपयोगी माना जाता है।

5. हाई-स्पीड PRV (High Speed Pressure Relief Device)

यह PRV विशेष रूप से बड़े और उच्च क्षमता वाले पावर ट्रांसफार्मरों के लिए डिज़ाइन किया जाता है। यह बहुत ही कम समय में (milliseconds में) प्रतिक्रिया करता है और अचानक उत्पन्न अत्यधिक दबाव को तुरंत रिलीज़ करता है। इसका उद्देश्य टैंक के विस्फोट (Tank Rupture) को रोकना होता है। यह अक्सर PRD (Pressure Relief Device) के नाम से भी जाना जाता है।

ट्रांसफार्मर PRV (Pressure Relief Valve) की विशेषताएँ

PRV एक मुख्य रूप से मैकेनिकल डिवाइस है, जो ट्रांसफार्मर के अंदर अत्यधिक दबाव को नियंत्रित करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके महत्वपूर्ण कार्य और विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

मैकेनिकल संचालन

PRV का प्राथमिक कार्य मैकेनिकल रूप से होता है। जब टैंक के अंदर दबाव सुरक्षित सीमा से अधिक बढ़ता है, तो डायाफ्राम या वाल्व अपने स्प्रिंग बल को पार करके खुल जाता है और अतिरिक्त दबाव को बाहर निकाल देता है। दबाव सामान्य हो जाने पर वाल्व अपने आप बंद हो जाता है।

इलेक्ट्रिकल कॉन्टैक्ट की सुविधा

कई PRV में माइक्रो स्विच या इलेक्ट्रिकल कॉन्टैक्ट भी लगे होते हैं। ये ट्रांसफार्मर के ब्रेकर या अलार्म सिस्टम को तुरंत सिग्नल भेजते हैं, जिससे सुरक्षा प्रणाली तुरंत सक्रिय हो जाती है।

स्वचालित बंद होना

जब टैंक का दबाव कम हो जाता है और सामान्य स्तर पर पहुँच जाता है, तो PRV स्वतः बंद हो जाता है। इस प्रकार यह बार-बार संचालन के लिए तैयार रहता है और ट्रांसफार्मर को लगातार सुरक्षा प्रदान करता है।

अलार्म और ट्रिप कॉन्टैक्ट

कई PRV में Alarm/Trip Contact भी होते हैं। यदि वाल्व सक्रिय होता है, तो यह तुरंत अलार्म को सूचित करता है और जरूरत पड़ने पर ब्रेकर को ट्रिप कर देता है। इस तरह PRV केवल दबाव कम करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह ट्रांसफार्मर की सुरक्षा को दृश्य और इलेक्ट्रिकल संकेत के माध्यम से सुनिश्चित करता है।

विश्वसनीय और जल्दी प्रतिक्रिया देने वाला

PRV अत्यंत तेज़ प्रतिक्रिया करता है, जिससे अचानक उत्पन्न दबाव या गैस के कारण होने वाले संभावित फटने और आग जैसी घटनाओं से तुरंत सुरक्षा मिलती है।

इस प्रकार, PRV एक दोहरी सुरक्षा उपकरण है – यह मैकेनिकल रूप से टैंक का दबाव नियंत्रित करता है और इलेक्ट्रिकल सिग्नल के माध्यम से ट्रांसफार्मर को ट्रिप या अलार्म की जानकारी देता है। यह ट्रांसफार्मर की लंबी उम्र और सुरक्षित संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ट्रांसफार्मर में PRV (Pressure Relief Valve) से मिलने वाली सुरक्षा

PRV (Pressure Relief Valve) ट्रांसफार्मर के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है। इसके इस्तेमाल से कई प्रकार की गंभीर समस्याओं से बचाव होता है:

ट्रांसफार्मर विस्फोट (Explosion) से सुरक्षा

PRV का मुख्य कार्य टैंक के अंदर बढ़ते दबाव को तुरंत कम करना है। जब तेल और गैस का दबाव सुरक्षित सीमा से अधिक बढ़ता है, तो PRV सक्रिय होकर अतिरिक्त दबाव बाहर निकाल देता है। इससे टैंक के फटने या विस्फोट का खतरा समाप्त हो जाता है।

आग (Fire) का जोखिम कम करना

ट्रांसफार्मर में उच्च दबाव और तेल के तेज बहाव के कारण आग लगने का खतरा रहता है। PRV के सक्रिय होने से दबाव और तेल नियंत्रित रहते हैं, जिससे Fire Risk काफी हद तक कम हो जाता है।

Life Saving Device के रूप में महत्व

PRV न केवल ट्रांसफार्मर की संपत्ति को बचाता है, बल्कि इसके कारण ऑपरेटर और आसपास के लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। इसे एक Life Saving Device माना जाता है क्योंकि यह संभावित गंभीर दुर्घटनाओं से सीधे सुरक्षा प्रदान करता है।

ट्रांसफार्मर में OSR (Oil Surge Relay) क्या है?

ट्रांसफार्मर में OSR (Oil Surge Relay) क्या है
ट्रांसफार्मर में OSR (Oil Surge Relay) क्या है

OSR (Oil Surge Relay) एक विशेष सुरक्षा उपकरण है जो पावर ट्रांसफार्मर की सुरक्षा के लिए स्थापित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य तेल के अचानक बहाव (oil surge) या अत्यधिक प्रवाह (rapid flow) का तुरंत पता लगाना है, जो आम तौर पर ट्रांसफार्मर के गंभीर आंतरिक दोषों जैसे शॉर्ट-सर्किट या आर्किंग के कारण उत्पन्न होते हैं। Oil Surge Relay सक्रिय होते ही तुरंत ट्रांसफार्मर को ट्रिप कर देता है, जिससे उपकरण और सिस्टम को महत्वपूर्ण नुकसान और फैलने वाले विद्युत खतरों से बचाया जा सके।

ट्रांसफार्मर में OSR कैसे काम करता है?

Oil Surge Relay, पावर ट्रांसफार्मर की सुरक्षा के लिए एक अत्यंत संवेदनशील उपकरण है, जो विशेष रूप से तेल-डुबोए गए (oil-immersed) ट्रांसफार्मर में अचानक और असामान्य तेल प्रवाह की पहचान करता है। यह आमतौर पर OLTC (On-Load Tap Changer) के आसपास या ट्रांसफार्मर के तेल पथ में लगाया जाता है।

OLTC जैसे घटकों में, यदि भारी आर्किंग (Heavy Arcing) या आंतरिक विद्युत फॉल्ट (Internal Electrical Fault) उत्पन्न होती है, तो ट्रांसफार्मर तेल का दबाव और प्रवाह असामान्य रूप से बढ़ जाता है। यह तेज तेल प्रवाह संकेत देता है कि ट्रांसफार्मर के अंदर गंभीर दोष मौजूद हैं।

Oil Surge Relay इस स्थिति को तुरंत पहचानता है। इसमें एक फ्लोट या Presure-सेंसिंग मेकेनिज़्म होता है जो तेल के अचानक बहाव या उच्च प्रवाह दर के आधार पर प्रतिक्रिया करता है। जब Oil Surge Relay सक्रिय होता है, यह दो प्रमुख कार्य करता है:

  • अलार्म सिग्नल (Alarm Signal): Oil Surge Relay तुरंत एक चेतावनी सिग्नल भेजता है जिससे ऑपरेटर को वास्तविक समय में जानकारी मिलती है और वह तुरंत आवश्यक कदम उठा सकता है।
  • ट्रिप सिग्नल (Trip Signal): यदि तेल प्रवाह का स्तर अत्यधिक हो, Oil Surge Relay ट्रांसफार्मर को स्वचालित रूप से ट्रिप कर देता है। यह ट्रिपिंग OLTC और ट्रांसफार्मर दोनों को गंभीर नुकसान, आग या विस्तारशील फॉल्ट से बचाता है।

इस प्रकार, OSR न केवल त्वरित और सटीक प्रतिक्रिया प्रदान करता है, बल्कि यह ट्रांसफार्मर और इसके संबंधित घटकों की विश्वसनीयता और दीर्घायु सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों में, Oil Surge Relay को अक्सर Buchholz Relay के साथ संयोजित किया जाता है, जिससे यह छोटे गैस उत्पन्न दोषों और बड़े तेल-सर्ज फॉल्ट दोनों की पहचान कर सके, और ट्रांसफार्मर की सुरक्षा के लिए एक संपूर्ण कवरेज प्रदान करे।

ट्रांसफार्मर में OSR कहाँ लगाया जाता है?

Oil Surge Relay को सामान्यतः OLTC (On-Load Tap Changer) और उसके कंज़र्वेटर टैंक के बीच स्थित तेल पाइपलाइन में स्थापित किया जाता है। यह स्थान रणनीतिक रूप से इसलिए चुना जाता है क्योंकि OLTC में उत्पन्न किसी भी गंभीर आंतरिक फॉल्ट, जैसे भारी आर्किंग या शॉर्ट सर्किट, के परिणामस्वरूप तेल का अचानक और तेज़ बहाव सबसे पहले इसी पाइपलाइन में प्रवाहित होता है।

Oil Surge Relay इस असामान्य तेल प्रवाह को तुरंत महसूस कर लेता है और प्रारंभिक स्तर पर ही सुरक्षा क्रिया को सक्रिय कर देता है, जिससे फॉल्ट के प्रभाव को ट्रांसफार्मर के अन्य भागों तक फैलने से रोका जा सके।

बड़े रेटिंग वाले पावर ट्रांसफार्मरों में, जहाँ प्रत्येक फेज का OLTC संचालन और तेल प्रवाह स्वतंत्र रूप से महत्वपूर्ण होता है, तीनों फेज के लिए अलग-अलग Oil Surge Relay लगाए जाते हैं। इससे फेज-वाइज़ सुरक्षा सुनिश्चित होती है और किसी एक फेज में उत्पन्न फॉल्ट को सटीक रूप से पहचान कर अलग किया जा सकता है। इसके विपरीत, छोटे या मध्यम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों में, जहाँ OLTC की संरचना सरल होती है, सामान्यतः एक ही Oil Surge Relay पर्याप्त माना जाता है।

इस प्रकार Oil Surge Relay की सही लोकेशन और संख्या का चयन ट्रांसफार्मर की क्षमता, डिजाइन और सुरक्षा आवश्यकताओं के आधार पर किया जाता है, जो संपूर्ण प्रणाली की विश्वसनीयता और सुरक्षा स्तर को सुनिश्चित करता है।

ट्रांसफार्मर में OSR (Oil Surge Relay) की आवश्यकता और उसका महत्व

OSR की आवश्यकता मुख्य रूप से OLTC (On-Load Tap Changer) के सुरक्षित और विश्वसनीय संचालन को सुनिश्चित करने के लिए होती है। OLTC के भीतर Tap Changing प्रक्रिया के दौरान स्वाभाविक रूप से आर्किंग उत्पन्न होती है, जिसे सामान्य परिस्थितियों में तेल द्वारा नियंत्रित और शीतलित किया जाता है। किंतु यदि OLTC में कोई असामान्य स्थिति या आंतरिक विद्युत फॉल्ट उत्पन्न हो जाए, तो यह आर्किंग अत्यधिक तीव्र हो जाती है, जिससे तेल का दबाव और गति अचानक बढ़ जाती है।

ट्रांसफार्मर में OSR (Oil Surge Relay) की आवश्यकता
ट्रांसफार्मर में OSR (Oil Surge Relay) की आवश्यकता

तेल का यह तेज़ और अनियंत्रित बहाव, जिसे Oil Surge कहा जाता है, ट्रांसफार्मर के लिए एक अत्यंत खतरनाक संकेत होता है। यह दर्शाता है कि OLTC के भीतर गंभीर ऊर्जा विमोचन (energy release) हो रहा है, जो आगे चलकर तेल विघटन, गैस निर्माण, आग लगने या यांत्रिक क्षति का कारण बन सकता है। OSR इस Oil Surge को तुरंत पहचान कर तत्काल अलार्म और ट्रिप सिग्नल उत्पन्न करता है, जिससे OLTC और मुख्य ट्रांसफार्मर को गंभीर और अपूरणीय क्षति से बचाया जा सके।

इस प्रकार, OSR न केवल गंभीर फॉल्ट की प्रारंभिक पहचान करता है, बल्कि यह ट्रांसफार्मर की ऑपरेशनल सुरक्षा, सिस्टम की स्थिरता और दीर्घकालिक विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में भी एक अनिवार्य सुरक्षा उपकरण के रूप में कार्य करता है।

ट्रांसफार्मर OSR के प्रकार

OSR के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं, जिन्हें उनकी रचना और कार्यप्रणाली के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

1. फ्लोट के साथ OSR (Float Type OSR)

फ्लोट टाइप OSR का कार्य सिद्धांत काफी हद तक Buchholz Relay के समान होता है। इस प्रकार के OSR में एक फ्लोट मैकेनिज़्म और सामान्यतः एक Mercury Switch लगाया जाता है, जो तेल के स्तर और तेल के अचानक बहाव—दोनों पर प्रतिक्रिया करता है। जब OLTC में कोई गंभीर फॉल्ट उत्पन्न होता है, तो तेल का तेज़ प्रवाह फ्लोट को अचानक स्थानांतरित कर देता है, जिससे Mercury Switch सक्रिय होकर ट्रिप या अलार्म सिग्नल देता है।

इसके अतिरिक्त, यह OSR Low Oil Level की स्थिति में भी कार्य करता है। यदि OLTC या उससे जुड़े कंज़र्वेटर में तेल का स्तर खतरनाक सीमा से नीचे गिर जाता है, तो फ्लोट नीचे की ओर खिसक जाता है और सुरक्षा सर्किट को सक्रिय कर देता है। यह विशेषता OLTC को ड्राय रनिंग, ओवरहीटिंग और यांत्रिक क्षति से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

फ्लोट टाइप OSR की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह सामान्यत Self-Resetting होता है, अर्थात् फॉल्ट स्थिति समाप्त होने के बाद यह स्वतः अपनी सामान्य स्थिति में लौट आता है।

साथ ही, इसमें Test / Service Knob प्रदान किया जाता है, जिससे रख-रखाव के दौरान इसकी कार्यक्षमता की जाँच बिना सिस्टम को बाधित किए की जा सकती है। हालांकि, तेल के झटकों या बाहरी कंपन के कारण इसमें False Operation की संभावना अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है।

(B) बिना फ्लोट OSR (Non-Float Type OSR)

Non-Float Type OSR एक अधिक सटीक और फॉल्ट-स्पेसिफिक सुरक्षा उपकरण माना जाता है, जो केवल Oil Surge की स्थिति में ही सक्रिय होता है। इस प्रकार के OSR में कोई फ्लोट मैकेनिज़्म नहीं होता, इसलिए यह Low Oil Level पर प्रतिक्रिया नहीं करता। इसका कार्य सिद्धांत मुख्यतः तेल के अचानक दबाव या प्रवाह परिवर्तन पर आधारित होता है, जो गंभीर OLTC फॉल्ट का स्पष्ट संकेत होता है।

जब OLTC के भीतर भारी आर्किंग या आंतरिक शॉर्ट सर्किट के कारण तेल का तीव्र प्रवाह उत्पन्न होता है, तो Non-Float OSR तुरंत ट्रिप सिग्नल जारी करता है। चूँकि यह केवल तेज़ तेल बहाव पर ही कार्य करता है, इसलिए इसमें False Operation की संभावना बहुत कम होती है और यह उच्च विश्वसनीयता प्रदान करता है।

इस प्रकार के OSR में सामान्यतः Manual Reset की आवश्यकता होती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि ट्रिप होने के बाद सिस्टम को तभी पुनः चालू किया जाए जब फॉल्ट की पूरी जाँच और सुधार कर लिया गया हो। इसके ऊपरी हिस्से में दिया गया Reset/Test Switch रख-रखाव और कार्य परीक्षण को सरल बनाता है।


1.PRV और Explosion Vent में क्या अंतर है?

PRV reusable होता है और pressure normal होने पर बंद हो जाता है, जबकि Explosion Vent एक बार फटने के बाद replace करना पड़ता है।

2. क्या PRV electrical trip देता है?

कुछ PRV (Pressure Relief Valve) में Electrical Contact उपलब्ध होता है, जिसके माध्यम से यह Alarm या Trip सिग्नल दे सकता है। यह संपर्क आमतौर पर तब सक्रिय होता है जब ट्रांसफार्मर के अंदर दबाव खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। हालांकि, सभी PRV में यह सुविधा अनिवार्य नहीं होती—कई PRV केवल मैकेनिकल प्रेशर रिलीज़ के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं और किसी भी प्रकार का विद्युत ट्रिप सिग्नल प्रदान नहीं करते। PRV में Electrical Trip की उपलब्धता ट्रांसफार्मर की डिज़ाइन, रेटिंग और सुरक्षा दर्शन (Protection Philosophy) पर निर्भर करती है।

3. ट्रांसफार्मर PRV (Pressure Relief Valve) का ऑपरेटिंग प्रेशर

ट्रांसफार्मर में PRV (Pressure Relief Valve) का ऑपरेटिंग प्रेशर वह निर्धारित दबाव होता है, जिस पर PRV सक्रिय होकर ट्रांसफार्मर के अंदर बने अत्यधिक दबाव (Excess Internal Pressure) को बाहर निकाल देता है। यह दबाव सामान्यतः आंतरिक फॉल्ट, भारी आर्किंग, या तेल के तीव्र गर्म होने के कारण उत्पन्न होता है।

आमतौर पर PRV को इस प्रकार कैलिब्रेट किया जाता है कि वह लगभग 0.35 से 0.7 kg/cm² (लगभग 5 से 10 psi) के दबाव पर कार्य करे, हालांकि यह मान ट्रांसफार्मर की क्षमता, डिजाइन और निर्माता (manufacturer) पर निर्भर करता है। जैसे ही अंदर का दबाव इस सीमा से अधिक होता है, PRV तुरंत खुल जाता है और तेल या गैस को बाहर निकालकर टैंक के फटने, आग लगने या यांत्रिक क्षति को रोकता है। इस प्रकार PRV ट्रांसफार्मर की एक अंतिम लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणाली के रूप में कार्य करता है।

4. क्या Buchholz Relay और OSR एक साथ लगाए जा सकते हैं?

हाँ, बड़े पावर ट्रांसफार्मरों में Buchholz Relay और OSR (Oil Surge Relay) दोनों एक साथ लगाए जाते हैं। Buchholz Relay को ट्रांसफार्मर के Main Tank और Conservator के बीच स्थापित किया जाता है, जहाँ यह मुख्य टैंक के अंदर होने वाले गैस बनने वाले छोटे फॉल्ट और बड़े आंतरिक फॉल्ट की पहचान करता है। वहीं OSR को विशेष रूप से OLTC और उसके Conservator के बीच लगाया जाता है, ताकि OLTC में उत्पन्न होने वाले तेज़ तेल बहाव (Oil Surge) को तुरंत detect कर ट्रांसफार्मर को ट्रिप किया जा सके।

5. पीआरवी का फुल फॉर्म क्या है?

PRV का फुल फॉर्म:
PRV = Pressure Relief Valve

यह ट्रांसफार्मर के अंदर उत्पन्न होने वाले अत्यधिक दबाव को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण होता है।


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