स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) क्या है
स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) क्या है

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) क्या है और इसकी कार्यप्रणाली क्या है?

इलेक्ट्रिक मोटर उद्योग, कारखानों और मशीनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि लगभग हर औद्योगिक प्रक्रिया किसी-न-किसी मोटर पर निर्भर करती है। अलग-अलग कार्यों जैसे भारी भार उठाना, गति नियंत्रण या उच्च टॉर्क की आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग प्रकार की मोटरें उपयोग में लाई जाती हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण मोटर (Slip Ring Induction Motor) स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर है, जिसे वाउंड रोटर इंडक्शन मोटर (Wound Rotor Induction Motor) भी कहा जाता है।

यह मोटर विशेष रूप से उन अनुप्रयोगों के लिए उपयोगी होती है जहाँ स्टार्टिंग टॉर्क अधिक चाहिए और स्टार्टिंग करंट को नियंत्रित करना आवश्यक होता है। इसकी डिज़ाइन और कार्यप्रणाली इसे साधारण स्क्विरल-केज मोटर से अलग बनाती है।

इस लेख में हम सरल और क्रमबद्ध तरीके से समझेंगे कि स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर क्या होती है, इसकी संरचना कैसी होती है, यह कैसे काम करती है, इसके मुख्य फायदे और नुकसान क्या हैं तथा किन-किन स्थानों पर इसका व्यावहारिक उपयोग किया जाता है।

Table of Contents

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर क्या है? (What is Slip Ring Induction Motor)

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor), जिसे वाउंड रोटर इंडक्शन मोटर (Wound Rotor Induction Motor) भी कहा जाता है, एक प्रकार की AC इंडक्शन मोटर है। इस मोटर में रोटर साधारण नहीं होता, बल्कि उसमें 3-फेज वाइंडिंग लगी होती है। रोटर की इन वाइंडिंग्स के सिरे स्लिप रिंग और कार्बन ब्रश के माध्यम से बाहर निकाले जाते हैं।

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर क्या है (What is Slip Ring Induction Motor)
स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर क्या है (What is Slip Ring Induction Motor)

इस मोटर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रोटर सर्किट में बाहरी प्रतिरोध (External Resistance) जोड़ा जा सकता है। इससे मोटर को स्टार्ट करते समय स्टार्टिंग करंट कम किया जा सकता है और साथ ही स्टार्टिंग टॉर्क बहुत अधिक प्राप्त किया जाता है।

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर को अतुल्यकालिक (Asynchronous) मोटर कहा जाता है क्योंकि इसकी रोटर गति कभी भी स्टेटर की तुल्यकालिक गति (Synchronous Speed) के बराबर नहीं होती। इसका रोटर लैमिनेटेड स्टील कोर से बना होता है, जिसमें अर्ध-बंद स्लॉट्स में वाइंडिंग डाली जाती है। रोटर शाफ्ट से जुड़ा होता है, जो मोटर द्वारा उत्पन्न यांत्रिक शक्ति को बाहर की मशीन तक पहुँचाता है।

सरल शब्दों में: स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) वह मोटर है जिसमें स्टार्टिंग के समय गति और टॉर्क को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। इसी कारण यह क्रेन, लिफ्ट, होइस्ट, कन्वेयर और भारी मशीनरी जैसे कार्यों में उपयोग की जाती है, जहाँ शुरुआत में ज़्यादा ताकत और नियंत्रित करंट की आवश्यकता होती है।

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स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर के मुख्य भाग (Main Parts of Slip Ring Induction Motor)

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) कई महत्वपूर्ण भागों से मिलकर बनी होती है। प्रत्येक भाग का अपना विशिष्ट कार्य होता है, और ये सभी मिलकर मोटर को न केवल हाई स्टार्टिंग टॉर्क प्रदान करते हैं बल्कि स्टार्टिंग के दौरान करंट को नियंत्रित रखते हुए स्मूद और कंट्रोल्ड स्टार्टिंग भी सुनिश्चित करते हैं।

स्टेटर (Stator) – मोटर का स्थिर भाग

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) में स्टेटर मोटर का बाहरी और स्थिर भाग होता है, जो मोटर को चलाने के लिए आवश्यक चुंबकीय क्षेत्र बनाता है। यह लैमिनेटेड सिलिकॉन स्टील शीट्स से बनाया जाता है ताकि एडी करंट और हिस्टेरेसिस जैसी लोहे की हानियाँ कम हों और मोटर की दक्षता बढ़े। स्टेटर के स्लॉट्स में तीन-फेज वाइंडिंग लगी होती है।

जब इसमें थ्री-फेज एसी सप्लाई दी जाती है, तो एक घूर्णनशील चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यही चुंबकीय क्षेत्र स्लिप रिंग रोटर में करंट पैदा करता है, जिससे मोटर को हाई स्टार्टिंग टॉर्क और स्मूद स्टार्टिंग मिलती है। सरल शब्दों में, स्टेटर वह भाग है जो ऊर्जा को चुंबकीय शक्ति में बदलकर रोटर को घुमाने की प्रक्रिया शुरू करता है।

रोटर (Rotor) – घूमने वाला भाग

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) में रोटर मोटर का अंदरूनी भाग होता है जो घूमता है और सीधे शाफ्ट से जुड़ा रहता है। यह आमतौर पर लैमिनेटेड स्टील कोर से बना होता है, जिसमें तीन-फेज रोटर वाइंडिंग लगी होती है। जब स्टेटर में एसी सप्लाई दी जाती है, तो वहाँ बना घूर्णनशील चुंबकीय क्षेत्र रोटर कंडक्टरों को काटता है, जिससे रोटर में करंट उत्पन्न होता है। इस करंट और चुंबकीय क्षेत्र की आपसी क्रिया से बल पैदा होता है, जिससे रोटर घूमने लगता है।

स्लिप रिंग मोटर की खास बात यह है कि रोटर वाइंडिंग बाहर लगी स्लिप रिंग्स से जुड़ी होती है, जिससे स्टार्टिंग के समय बाहरी रेज़िस्टेंस जोड़ा जा सकता है। इससे मोटर को हाई स्टार्टिंग टॉर्क मिलता है और स्टार्टिंग करंट नियंत्रित रहता है। आसान शब्दों में, रोटर वह भाग है जो चुंबकीय शक्ति को वास्तविक घुमाव में बदलकर मोटर से काम करवाता है।

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर के मुख्य भाग (Main Parts of Slip Ring Induction Motor)
स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर के मुख्य भाग (Main Parts of Slip Ring Induction Motor)

रोटर वाइंडिंग (Rotor Winding)

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) में रोटर वाइंडिंग तीन-फेज इंसुलेटेड वाइंडिंग से बनी होती है, जिसे सामान्यतः स्टार (Star) कनेक्शन में जोड़ा जाता है। यह वाइंडिंग रोटर कोर के स्लॉट्स में लगाई जाती है और पूरी तरह से इंसुलेटेड होती है, ताकि करंट सुरक्षित रूप से प्रवाहित हो सके। स्टेटर में बने घूर्णनशील चुंबकीय क्षेत्र के कारण इन रोटर वाइंडिंग्स में करंट उत्पन्न होता है, जिससे टॉर्क पैदा होता है और रोटर घूमने लगता है।

इस रोटर वाइंडिंग के सिरों को सीधे स्लिप रिंग्स से जोड़ा जाता है, ताकि स्टार्टिंग के समय बाहरी रेजिस्टेंस को रोटर सर्किट में जोड़ा या हटाया जा सके। इससे स्टार्टिंग करंट नियंत्रित रहता है और मोटर को उच्च स्टार्टिंग टॉर्क मिलता है। आसान शब्दों में, रोटर वाइंडिंग वह भाग है जो चुंबकीय ऊर्जा को विद्युत करंट में बदलकर मोटर को घुमाने की वास्तविक शक्ति प्रदान करता है।

Slip Ring Induction Motor शाफ्ट (Shaft)

शाफ्ट स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) का वह ठोस यांत्रिक भाग होता है जो सीधे रोटर से जुड़ा रहता है और मोटर की घूर्णन गति को बाहर की मशीन तक पहुँचाता है। जब स्टेटर के चुंबकीय क्षेत्र के कारण रोटर घूमता है, तो वही घुमाव शाफ्ट के माध्यम से लोड तक ट्रांसफर होता है। शाफ्ट को मजबूत स्टील से बनाया जाता है ताकि यह उच्च टॉर्क और निरंतर घूर्णन को बिना मुड़े या टूटे सहन कर सके।

आसान शब्दों में, शाफ्ट मोटर और मशीन के बीच एक पुल की तरह काम करता है, जो विद्युत ऊर्जा से बनी यांत्रिक शक्ति को उपयोगी कार्य में बदलने का अंतिम माध्यम होता है।

स्लिप रिंग (Slip Rings) – रोटर को बाहर से जोड़ने का माध्यम

स्लिप रिंग्स, स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) का एक महत्वपूर्ण भाग होती हैं, जो शाफ्ट पर लगे हुए चिकने धातु के छल्लों के रूप में होती हैं। ये छल्ले रोटर वाइंडिंग से जुड़े होते हैं और ब्रश की मदद से बाहर के सर्किट से संपर्क बनाए रखते हैं। जब मोटर स्टार्ट होती है, तो स्लिप रिंग्स के माध्यम से रोटर सर्किट में बाहरी रेज़िस्टेंस जोड़ा जाता है।

इससे स्टार्टिंग करंट कम हो जाता है और मोटर को उच्च स्टार्टिंग टॉर्क मिलता है। जैसे-जैसे मोटर गति पकड़ती है, यह बाहरी रेज़िस्टेंस धीरे-धीरे हटाया जाता है और रोटर सामान्य रूप से घूमने लगता है। आसान शब्दों में, स्लिप रिंग्स रोटर और बाहरी कंट्रोल सिस्टम के बीच एक पुल का काम करती हैं, जिससे मोटर की स्टार्टिंग स्मूद, नियंत्रित और सुरक्षित होती है।

कार्बन ब्रश (Carbon Brushes) – विद्युत संपर्क बनाने वाले भाग

कार्बन ब्रश स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) के ऐसे भाग होते हैं जो स्वयं स्थिर (Stationary) रहते हैं, लेकिन घूमती हुई स्लिप रिंग्स के साथ लगातार संपर्क में होते हैं। ये आमतौर पर ग्रेफाइट या फॉस्फर ब्रॉन्ज से बने होते हैं, क्योंकि ये पदार्थ बिजली के अच्छे चालक होते हैं और घर्षण भी कम पैदा करते हैं। जब रोटर घूमता है, तब स्लिप रिंग्स के माध्यम से उत्पन्न करंट इन ब्रशों तक पहुँचता है और फिर बाहर के सर्किट में चला जाता है।

इनका मुख्य कार्य रोटर सर्किट और बाहरी रेज़िस्टेंस के बीच एक भरोसेमंद विद्युत संपर्क बनाए रखना होता है। स्टार्टिंग के समय, यही ब्रश करंट को बाहरी रेज़िस्टेंस तक पहुँचाते हैं, जिससे मोटर का स्टार्टिंग करंट नियंत्रित रहता है और हाई स्टार्टिंग टॉर्क प्राप्त होता है। आसान शब्दों में, कार्बन ब्रश एक चलती हुई रोटर प्रणाली और स्थिर बाहरी सर्किट के बीच बिजली पहुँचाने वाला माध्यम होते हैं, जो मोटर की स्मूद और सुरक्षित स्टार्टिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बाहरी रेजिस्टेंस (External Resistance) – स्टार्टिंग को नियंत्रित करने वाला भाग

बाहरी रेजिस्टेंस स्लिप रिंग और कार्बन ब्रश के माध्यम से सीधे रोटर सर्किट में जोड़ी जाती है और इसका मुख्य उद्देश्य मोटर की स्टार्टिंग को सुरक्षित और नियंत्रित बनाना होता है। जब स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) स्टार्ट होती है, तो रोटर में बहुत अधिक करंट बहने की संभावना होती है। बाहरी रेजिस्टेंस इस करंट को सीमित करती है, जिससे मोटर और पावर सप्लाई पर अचानक लोड नहीं पड़ता।

इसके साथ-साथ, रोटर सर्किट में रेजिस्टेंस बढ़ने से टॉर्क पैदा करने की क्षमता भी बढ़ जाती है, जिससे मोटर को हाई स्टार्टिंग टॉर्क मिलता है। यही कारण है कि यह मोटर भारी लोड को बिना झटके और स्मूद तरीके से घुमा सकती है। जैसे-जैसे मोटर गति पकड़ती है, बाहरी रेजिस्टेंस को धीरे-धीरे हटाया जाता है और मोटर सामान्य स्थिति में काम करने लगती है। आसान शब्दों में, बाहरी रेजिस्टेंस मोटर की स्टार्टिंग को नरम, सुरक्षित और नियंत्रित बनाती है, खासकर तब जब मोटर को भारी लोड के साथ चालू करना हो।

Slip Ring Induction Motor टर्मिनल बॉक्स (Terminal Box)

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) में टर्मिनल बॉक्स वह हिस्सा होता है जहाँ पावर सप्लाई को मोटर से जोड़ा जाता है। यह बॉक्स पूरी तरह से इंसुलेटेड और सुरक्षित बनाया जाता है, ताकि बिजली के संपर्क में आने से कोई जोखिम न हो। इसके अंदर मोटर के स्टेटर वाइंडिंग के सिरों को व्यवस्थित किया जाता है और बाहरी पावर लाइन के साथ सुरक्षित रूप से कनेक्शन सुनिश्चित किया जाता है।

आसान शब्दों में, टर्मिनल बॉक्स मोटर और बिजली सप्लाई के बीच का सुरक्षित और भरोसेमंद कनेक्शन पॉइंट है, जो मोटर को सुरक्षित रूप से चलाने में मदद करता है।

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स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर की कार्यप्रणाली (Working of Slip Ring Induction Motor)

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर AC मोटर है जो विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य है हाई स्टार्टिंग टॉर्क और कम स्टार्टिंग करंट के साथ मोटर को चलाना।

1. स्टेटर में चुंबकीय क्षेत्र बनाना

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर में जब तीन-फेज AC सप्लाई स्टेटर वाइंडिंग में दी जाती है, तो यह एक घूमने वाला चुंबकीय क्षेत्र (Rotating Magnetic Field – RMF) उत्पन्न करता है। यह चुंबकीय क्षेत्र रोटर की वाइंडिंग को काटता है और फैराडे के नियम के अनुसार वहां EMF (Electromotive Force) उत्पन्न होती है। आसान शब्दों में, स्टेटर AC सप्लाई से ऐसा चुंबकीय क्षेत्र बनाता है जो रोटर को “विद्युत रूप से धक्का” देता है और मोटर को चालू करने की प्रक्रिया शुरू करता है।

2. रोटर में करंट प्रेरित होना

स्टेटर द्वारा उत्पन्न घूमता चुंबकीय क्षेत्र रोटर वाइंडिंग को काटता है और इसमें करंट उत्पन्न होता है। रोटर वाइंडिंग ब्रश और स्लिप रिंग्स के माध्यम से बाहरी रेजिस्टेंस से जुड़ी होती है। यह करंट रोटर में बहता है और स्टेटर के RMF के साथ मिलकर टॉर्क पैदा करता है। सरल शब्दों में, रोटर में करंट पैदा होता है, जिससे रोटर घूमने लगता है और मोटर में यांत्रिक शक्ति उत्पन्न होती है।

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर की कार्यप्रणाली (Working of Slip Ring Induction Motor)
स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर की कार्यप्रणाली (Working of Slip Ring Induction Motor)

3. उच्च प्रारंभिक टॉर्क (High Starting Torque)

स्टार्टिंग के समय रोटर सर्किट में बाहरी रेजिस्टेंस जोड़ा जाता है। इससे रोटर करंट नियंत्रित रहता है और टॉर्क अधिक मिलता है, जबकि स्टार्टिंग करंट कम रहता है। यही कारण है कि मोटर भारी लोड के साथ आसानी से शुरू हो सकती है। आसान शब्दों में, बाहरी रेजिस्टेंस मोटर को “झटका-रहित” और शक्तिशाली स्टार्ट प्रदान करता है।

4. गति और करंट नियंत्रण (Speed & Current Control)

जैसे-जैसे मोटर की गति बढ़ती है, बाहरी रेजिस्टेंस धीरे-धीरे घटाया जाता है। अंत में रोटर पूरी तरह शॉर्ट-सर्किट हो जाता है और मोटर सामान्य रूप से चलती है। इस प्रक्रिया से मोटर की गति नियंत्रित रहती है और करंट स्पाइक्स नहीं होते। सरल शब्दों में, मोटर धीरे-धीरे तेज होती है और करंट सुरक्षित रहता है।

5. स्लिप रिंग और ब्रश का महत्व

स्लिप रिंग रोटर को बाहरी सर्किट से जोड़ती हैं, जबकि ब्रश स्थिर रहते हैं और करंट को स्लिप रिंग के माध्यम से बाहर ले जाते हैं। यह संयोजन स्टार्टिंग टॉर्क बढ़ाने और स्टार्टिंग करंट को कम करने में मदद करता है। आसान शब्दों में, यह मोटर को कंट्रोल्ड और सुरक्षित स्टार्टिंग देता है।

6. फैराडे और लॉरेंज के नियम का योगदान

फैराडे का नियम बताता है कि घूमते चुंबकीय क्षेत्र से रोटर में EMF उत्पन्न होती है, और लॉरेंज का नियम बताता है कि करंट बहने पर रोटर पर बल (Force) लगता है। रोटर करंट और चुंबकीय क्षेत्र का यह मेल ही मोटर को घुमाता है। सरल शब्दों में, मोटर रोटर में करंट पैदा करती है और चुंबकीय बल से यांत्रिक घूर्णन उत्पन्न होता है।

7. स्टार्टिंग से रनिंग तक का प्रोसेस

संपूर्ण प्रक्रिया इस प्रकार होती है: सबसे पहले स्टेटर में AC सप्लाई दी जाती है → घूमता हुआ चुंबकीय क्षेत्र बनता है → रोटर में EMF उत्पन्न होती है → करंट बहता है → बाहरी रेजिस्टेंस के जरिए टॉर्क बढ़ता और करंट नियंत्रित रहता है → मोटर धीरे-धीरे गति पकड़ती है → बाहरी रेजिस्टेंस हटाया जाता है → रोटर शॉर्ट-सर्किट होकर मोटर सामान्य रूप से चलती है। सरल शब्दों में, स्टार्टिंग से लेकर सामान्य गति तक मोटर क्रमिक रूप से नियंत्रण और सुरक्षा के साथ चलती है।

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर (Slip Ring Induction Motor) का स्लिप क्या होता है?

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर में “स्लिप” का मतलब है सिंक्रोनस स्पीड और रोटर की वास्तविक गति (रोटर स्पीड) के बीच का अंतर। सरल शब्दों में, यह वह अनुपात है जो बताता है कि रोटर कितनी तेजी से स्टेटर के घूमते चुंबकीय क्षेत्र के पीछे है। यदि मोटर पूरी तरह स्थिर है, तो रोटर 0 RPM पर होता है और स्लिप 100% के करीब होता है; जबकि जब मोटर सामान्य गति पर काम कर रही होती है, तो स्लिप बहुत कम होता है।

स्लिप को गणितीय रूप से इस सूत्र से व्यक्त किया जाता है:

s = (Ns − Nr) / Ns

जहाँ Ns = सिंक्रोनस स्पीड (स्टेटर का घूमता चुंबकीय क्षेत्र) और Nr = रोटर की वास्तविक गति

स्लिप यह सुनिश्चित करता है कि स्टेटर का घूमता चुंबकीय क्षेत्र रोटर में करंट उत्पन्न कर सके। यदि रोटर और स्टेटर समान गति से घूमने लगें (स्लिप = 0), तो कोई करंट प्रेरित नहीं होगा और मोटर घूमना बंद कर देगी। इसलिए, स्लिप ही इंडक्शन मोटर का मूल सिद्धांत है जो इसे स्टार्टिंग से लेकर रनिंग तक काम करने में सक्षम बनाता है। आसान शब्दों में, स्लिप वह “सांकेतिक अंतर” है जो रोटर को स्टेटर के चुंबकीय क्षेत्र से खींचता है और मोटर को घुमाने की शक्ति देता है।

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर में रोटर रेजिस्टेंस की गणना

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर में रेजिस्टेंस जोड़ने का मुख्य उद्देश्य मोटर को आसानी, सुरक्षा और नियंत्रण के साथ स्टार्ट करना होता है। स्टार्टिंग के समय मोटर की गति शून्य होती है, इसलिए स्लिप का मान सबसे अधिक होता है। भारी लोड को घुमाने के लिए अधिक टॉर्क चाहिए, लेकिन यदि बिना नियंत्रण के सप्लाई दी जाए तो बहुत अधिक करंट खिंच सकता है।

इसी समस्या को हल करने के लिए रोटर सर्किट में बाहरी रेजिस्टेंस जोड़ी जाती है, जिससे स्टार्टिंग करंट सीमित रहता है और मोटर को अच्छी स्टार्टिंग ताकत मिलती है।

भौतिकी के अनुसार, इंडक्शन मोटर में अधिकतम टॉर्क उस स्थिति में प्राप्त होता है जब रोटर रेजिस्टेंस और रोटर रिएक्टेंस का एक निश्चित संबंध बनता है। यह संबंध सूत्र से व्यक्त किया जाता है:

Maximum Torque Condition: R2 / s = X2

स्टार्टिंग के समय स्लिप का मान होता है:

s = 1

इसलिए स्टार्टिंग पर अधिकतम टॉर्क पाने की शर्त बन जाती है:

R2 = X2

इसका अर्थ यह है कि स्टार्टिंग के समय रोटर का कुल रेजिस्टेंस, रोटर रिएक्टेंस के बराबर होना चाहिए।

व्यवहार में मोटर का अंदरूनी रोटर रेजिस्टेंस कम होता है, इसलिए इस शर्त को पूरा करने के लिए बाहर से अतिरिक्त रेजिस्टेंस जोड़ी जाती है। आवश्यक बाहरी रेजिस्टेंस को इस सरल सूत्र से निकाला जाता है:

External Resistance = X2 − R2

उदाहरण के लिए, यदि रोटर रिएक्टेंस 1.5 ओम है और अंदरूनी रोटर रेजिस्टेंस 0.5 ओम है, तो स्टार्टिंग के समय जोड़ी जाने वाली बाहरी रेजिस्टेंस होगी 1.0 ओम। इससे मोटर को अधिकतम स्टार्टिंग टॉर्क मिलता है और करंट सुरक्षित सीमा में रहता है।

जैसे-जैसे मोटर की गति बढ़ती है, स्लिप कम होती जाती है और बाहरी रेजिस्टेंस को धीरे-धीरे हटा लिया जाता है। अंत में रोटर पूरी तरह शॉर्ट-सर्किट हो जाता है और मोटर सामान्य दक्षता के साथ चलने लगती है। आसान शब्दों में, स्लिप रिंग मोटर में रेजिस्टेंस पहले स्टार्टिंग को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए जोड़ी जाती है और बाद में मोटर को कुशलता से चलाने के लिए हटा दी जाती है।

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर के फायदे (Advantages of a Slip Ring Induction Motor)

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर को विशेष रूप से उन अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है जहाँ स्टार्टिंग के समय अधिक टॉर्क और बेहतर नियंत्रण की आवश्यकता होती है। इसकी संरचना और कार्य सिद्धांत इसे भारी लोड और कठिन स्टार्टिंग परिस्थितियों में भी विश्वसनीय और प्रभावी बनाते हैं।

1. उच्च स्टार्टिंग टॉर्क (High Starting Torque)

स्लिप रिंग मोटर का सबसे बड़ा लाभ इसका उच्च स्टार्टिंग टॉर्क है। स्टार्टिंग के समय रोटर सर्किट में बाहरी रेजिस्टेंस जोड़ी जाती है, जिससे रोटर का प्रभावी रेजिस्टेंस बढ़ जाता है। भौतिकी के अनुसार, टॉर्क 𝑇 ∝ (s × E₂² × R₂) / [ (R₂ / s)² + X₂² ] पर निर्भर करता है। रेजिस्टेंस बढ़ाने से टॉर्क का अधिकतम मान स्टार्टिंग के पास आ जाता है। सरल शब्दों में, मोटर को शुरुआत में ही बहुत ज्यादा घुमाने की शक्ति मिल जाती है, जो भारी मशीनों को चलाने के लिए जरूरी होती है।

2. कम स्टार्टिंग करंट (Low Starting Current)

बाहरी रेजिस्टेंस जोड़ने से रोटर करंट नियंत्रित रहता है। इससे स्टेटर से खींचा जाने वाला करंट भी सीमित हो जाता है। विज्ञान की दृष्टि से, बढ़ा हुआ रोटर रेजिस्टेंस इम्पीडेंस को बढ़ाता है, जिससे ओम के नियम के अनुसार करंट कम होता है। आसान शब्दों में, मोटर स्टार्ट होते समय बिजली लाइन पर अचानक ज्यादा करंट नहीं खींचती।

3. भारी लोड के लिए उपयुक्त (Suitable for Heavy Loads)

उच्च टॉर्क और नियंत्रित करंट के कारण स्लिप रिंग मोटर भारी लोड को बिना रुके और बिना झटके के शुरू कर सकती है। क्रेन, होइस्ट, रोलिंग मिल और कंप्रेसर जैसी मशीनों में जहाँ शुरुआत में लोड बहुत ज्यादा होता है, वहाँ यह मोटर आदर्श होती है। सरल शब्दों में, यह मोटर वजन से “डरती नहीं”।

4. स्मूद और कंट्रोल्ड स्टार्टिंग (Smooth & Controlled Starting)

बाहरी रेजिस्टेंस को स्टार्टिंग के समय धीरे-धीरे हटाया जाता है। इससे मोटर की गति क्रमिक रूप से बढ़ती है और झटका नहीं लगता। फिजिक्स के अनुसार, टॉर्क और करंट का यह नियंत्रित परिवर्तन यांत्रिक तनाव को कम करता है। आसान शब्दों में, मोटर धीरे-धीरे ताकत पकड़ती है, अचानक नहीं।

5. स्टार्टिंग पर लाइन वोल्टेज ड्रॉप कम (Reduced Line Voltage Drop)

क्योंकि स्टार्टिंग करंट कम होता है, इसलिए सप्लाई लाइन में वोल्टेज ड्रॉप भी कम होता है। यह पूरे पावर सिस्टम के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि अन्य उपकरणों पर वोल्टेज डिस्टर्बेंस नहीं होता। विज्ञान की दृष्टि से, कम करंट का मतलब कम I²R ड्रॉप है। सरल शब्दों में, मोटर चालू होने पर बाकी सिस्टम “डगमगाता” (Unstable) नहीं है।

स्लिप रिंग मोटर के नुकसान (Disadvantages of a Slip Ring Induction Motor)

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर के नुकसान इसके डिज़ाइन और कार्य-विज्ञान (operating physics) से सीधे जुड़े होते हैं। रोटर सर्किट में स्लिप रिंग, कार्बन ब्रश और बाहरी रेजिस्टेंस जैसे अतिरिक्त घटक जोड़ने से मोटर की यांत्रिक और विद्युत संरचना जटिल हो जाती है।

भौतिकी के अनुसार, जितने अधिक मूविंग और संपर्क करने वाले भाग होते हैं, उतनी ही अधिक घर्षण हानियाँ (Friction Losses) और संपर्क हानियाँ (Contact Losses) उत्पन्न होती हैं। यही कारण है कि इस मोटर की निर्माण लागत, आकार और रखरखाव आवश्यकताएँ स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से, कार्बन ब्रश और स्लिप रिंग के बीच निरंतर संपर्क से विद्युत प्रतिरोध और स्पार्किंग की संभावना रहती है, जिससे ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा (Heat) के रूप में नष्ट हो जाता है। इसके अलावा, स्टार्टिंग के समय बाहरी रेजिस्टेंस में I²R हानि होती है, जो सीधे मोटर की दक्षता को कम करती है।

यही कारण है कि स्लिप रिंग मोटर की ओवरऑल एफिशिएंसी स्क्विरल केज इंडक्शन मोटर से कम होती है। साथ ही, ब्रश और स्लिप रिंग की घिसावट के कारण नियमित निरीक्षण, रिप्लेसमेंट और मेंटेनेंस आवश्यक हो जाता है, अन्यथा संपर्क प्रतिरोध बढ़ने से करंट वितरण असंतुलित हो सकता है।

अतिरिक्त विद्युत और यांत्रिक घटकों के कारण मोटर का वजन और भौतिक आकार भी अधिक होता है। इंजीनियरिंग दृष्टि से इसका मतलब यह है कि इंस्टॉलेशन के लिए अधिक स्थान, मजबूत फाउंडेशन और बेहतर कूलिंग की आवश्यकता होती है। सरल शब्दों में कहें तो, स्लिप रिंग मोटर भारी लोड और नियंत्रित स्टार्टिंग के लिए तो बेहतरीन है, लेकिन इसकी यह क्षमता अतिरिक्त ऊर्जा हानियों, कम दक्षता और अधिक रखरखाव की कीमत पर मिलती है।

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर और स्क्विरल केज इंडक्शन मोटर में अंतर (Difference in Slip Ring Motor and Squirrel Cage Motor)

नीचे स्लिप रिंग मोटर और स्क्विरल केज मोटर के बीच सभी महत्वपूर्ण अंतर विस्तारपूर्वक एक तालिका में दिए गए हैं।

विशेषता (Feature)स्लिप रिंग मोटर (Slip Ring Motor)स्क्विरल केज मोटर (Squirrel Cage Motor)
स्टार्टिंग टॉर्क (Starting Torque)उच्च, भारी लोड आसानी से स्टार्ट कर सकता हैकम, हल्के लोड के लिए उपयुक्त
स्टार्टिंग करंट (Starting Current)कम, बाहरी रोटर रेजिस्टेंस से नियंत्रितअधिक, डायरेक्ट स्टार्टिंग में करंट ज्यादा खींचता है
यांत्रिक जटिलता (Mechanical Complexity)अधिक, ब्रश, स्लिप रिंग, बाहरी रेजिस्टेंसकम, सादगीपूर्ण संरचना
लाइन वोल्टेज ड्रॉप (Line Voltage Drop)कम, स्टार्टिंग करंट नियंत्रितअधिक, स्टार्टिंग करंट अधिक होने के कारण
रोटर प्रकार (Rotor Type)रोटर में स्लिप रिंग और बाहरी रेजिस्टेंसरोटर शॉर्ट-सर्किट (सिंगल पीस एल्यूमिनियम/कॉपर बार)
दक्षता (Efficiency)थोड़ी कम, बाहरी रेजिस्टेंस और घर्षण हानि के कारणअधिक, कम हानियाँ

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर के उपयोग (Applications of Slip Ring Induction Motor)

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर का डिज़ाइन विशेष रूप से उन अनुप्रयोगों के लिए किया गया है, जहाँ स्टार्टिंग टॉर्क अधिक, लोड भारी और स्टार्टिंग करंट नियंत्रित होना आवश्यक है। इसकी रोटर सर्किट में बाहरी रेजिस्टेंस जोड़ने की क्षमता इसे भारी और जड़ मशीनों के लिए आदर्श बनाती है।

1. क्रेन (Crane) और होइस्ट (Hoist)

क्रेन और होइस्ट में शुरुआत में भारी वजन उठाने की आवश्यकता होती है। Physics के अनुसार, भारी लोड को शुरू करने के लिए टॉर्क 𝑇=𝐹×𝑟 अधिक चाहिए। स्लिप रिंग मोटर के बाहरी रोटर रेजिस्टेंस की वजह से स्टार्टिंग टॉर्क बढ़ाया जा सकता है, जिससे क्रेन धीरे-धीरे झटके के बिना भारी लोड उठा सकती है। इसके अलावा, नियंत्रित स्टार्टिंग के कारण लाइन करंट कम रहता है और सप्लाई सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।

2. एलीवेटर (Lift)

लिफ्ट में यात्रियों या भारी सामान को ऊपर-नीचे ले जाने के लिए मोटर को स्मूद और कंट्रोल्ड टॉर्क देना जरूरी होता है। स्लिप रिंग मोटर का बाहरी रेजिस्टेंस स्टार्टिंग के समय करंट को सीमित करता है और टॉर्क को नियंत्रित करता है, जिससे लिफ्ट झटके से नहीं चलती। यांत्रिक और विद्युत सिद्धांतों के अनुसार, R-L सर्किट में करंट और टॉर्क का नियंत्रित प्रोफाइल मोटर और लोड दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

3. रोलिंग मिल और भारी मशीनें

रोलिंग मिल जैसे उद्योगों में प्रारंभ में बहुत भारी लोड होता है। Physics के हिसाब से, लोड का जड़त्व (Inertia) मोटर को तुरंत गति में लाने में बाधा डालता है। स्लिप रिंग मोटर में बाहरी रेजिस्टेंस जोड़कर स्टार्टिंग करंट कम और टॉर्क अधिक किया जाता है, जिससे भारी रोलिंग मिल बिना झटके और लाइन डिस्टर्बेंस के चालू हो जाती है।

4. कंप्रेसर और कन्वेयर बेल्ट

कंप्रेसर और कन्वेयर बेल्ट में भी शुरुआत में लोड ज्यादा होता है। स्लिप रिंग मोटर बाहरी रेजिस्टेंस के माध्यम से रोटर करंट नियंत्रित करती है, जिससे स्टार्टिंग टॉर्क स्थिर रहता है और लाइन पर अचानक वोल्टेज ड्रॉप नहीं होता। Physics के नजरिए से, यह मोटर की inductive reactance और बाहरी रेजिस्टेंस का संतुलन बनाकर करंट को नियंत्रित करती है।

संक्षेप में: स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर उन सभी अनुप्रयोगों के लिए आदर्श है जहाँ भारी लोड स्टार्टिंग, स्मूद टॉर्क और कम स्टार्टिंग करंट की आवश्यकता होती है। इसकी रोटर सर्किट में बाहरी रेजिस्टेंस जोड़ने की क्षमता इसे क्रेन, होइस्ट, लिफ्ट, रोलिंग मिल, कंप्रेसर और कन्वेयर बेल्ट जैसी मशीनों के लिए अत्यधिक विश्वसनीय और कुशल बनाती है।

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर का उपयोग कब और कहां करना चाहिए (Where to Use a Slip Ring Induction Motor)

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर का उपयोग तब किया जाता है जब स्टार्टिंग के समय भारी लोड, उच्च टॉर्क और नियंत्रित करंट की आवश्यकता होती है। भौतिक दृष्टि से, मोटर के स्टार्टिंग टॉर्क को नियंत्रित करना इसलिए जरूरी है क्योंकि भारी लोड में मोटर की जड़त्व (Inertia) अधिक होती है। यदि बिना नियंत्रण के सीधे AC सप्लाई दी जाए, तो करंट अचानक बढ़ जाएगा और सप्लाई लाइन पर वोल्टेज ड्रॉप या सिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है।

1. भारी लोड से स्टार्ट करना हो

जब मशीन का स्टार्टिंग लोड बहुत अधिक हो, जैसे क्रेन, होइस्ट, रोलिंग मिल या भारी कंप्रेसर, तब स्लिप रिंग मोटर आदर्श होती है। इसकी रोटर सर्किट में बाहरी रेजिस्टेंस जोड़कर स्टार्टिंग टॉर्क बढ़ाया जा सकता है। Physics के अनुसार, स्टार्टिंग टॉर्क T ∝ (s × E₂² × R₂) / [ (R₂ / s)² + X₂² ] पर निर्भर करता है। बाहरी रेजिस्टेंस बढ़ाने से टॉर्क अधिकतम स्टार्टिंग पर मिलता है और मोटर आसानी से लोड को घुमा सकती है।

2. हाई स्टार्टिंग टॉर्क चाहिए

कुछ मशीनों में जैसे लिफ्ट या रोलिंग मिल, स्टार्टिंग टॉर्क स्टार्टिंग करंट से अधिक होना चाहिए ताकि झटका न लगे। स्लिप रिंग मोटर में बाहरी रोटर रेजिस्टेंस को नियंत्रित करके यह टॉर्क हासिल किया जा सकता है। इससे मोटर की गति धीरे-धीरे बढ़ती है और मशीन पर यांत्रिक तनाव कम होता है।

3. स्टार्टिंग करंट को कंट्रोल करना जरूरी हो

स्टार्टिंग करंट को सीमित रखना जरूरी होता है ताकि लाइन वोल्टेज ड्रॉप कम रहे और अन्य उपकरणों पर असर न पड़े। बाहरी रोटर रेजिस्टेंस जोड़ने से करंट नियंत्रित रहता है, क्योंकि करंट और रोटर इम्पीडेंस में प्रत्यक्ष संबंध होता है। आसान शब्दों में, मोटर धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से चालू होती है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

1. स्लिप रिंग मोटर का स्लिप क्या होता है?

स्लिप उस अंतर को कहते हैं जो सिंक्रोनस स्पीड और रोटर स्पीड के बीच होता है और इसे प्रतिशत (%) के रूप में व्यक्त किया जाता है।

2. क्या स्लिप रिंग मोटर स्टार्टिंग करंट को कम कर सकती है?

हाँ, स्लिप रिंग मोटर स्टार्टिंग करंट को कम और नियंत्रित कर सकती है। इसकी वजह यह है कि रोटर सर्किट में बाहरी रेजिस्टेंस जोड़ी जाती है। भौतिकी के अनुसार, रोटर करंट I₂ इस सूत्र से नियंत्रित होता है:

I₂ = E₂ / √(R₂² + X₂²)

जहाँ, E₂ = रोटर EMF R₂ = रोटर रेजिस्टेंस (अंदरूनी + बाहरी) X₂ = रोटर रिएक्टेंस जब स्टार्टिंग पर बाहरी रेजिस्टेंस बढ़ाई जाती है, तो R₂ बढ़ जाता है। ओम के नियम के अनुसार करंट I₂ कम हो जाता है। इसका सीधा लाभ यह है कि स्टार्टिंग के समय लाइन करंट सुरक्षित रहता है, वोल्टेज ड्रॉप कम होता है और मोटर स्मूद तरीके से स्टार्ट होती है।

3. स्लिप रिंग मोटर क्यों भारी लोड के लिए बेहतर है?

स्लिप रिंग मोटर भारी लोड के लिए इसलिए बेहतर है क्योंकि इसकी स्टार्टिंग टॉर्क अधिक होती है और स्टार्टिंग करंट को नियंत्रित किया जा सकता है।

भौतिक दृष्टि से, भारी मशीन को घुमाने के लिए मोटर को शुरुआत में अधिक टॉर्क देना पड़ता है। स्लिप रिंग मोटर में रोटर सर्किट में बाहरी रेजिस्टेंस जोड़कर रोटर करंट नियंत्रित किया जाता है। इसका मतलब यह है कि मोटर झटका-मुक्त और सुरक्षित स्टार्ट देती है।

स्टार्टिंग के समय बाहरी रेजिस्टेंस की वजह से (टॉर्क T) अधिकतम के पास आता है, जबकि करंट सीमित रहता है। जैसे-जैसे मोटर गति पकड़ती है, यह बाहरी रेजिस्टेंस धीरे-धीरे हटाई जाती है और मोटर सामान्य दक्षता के साथ चलने लगती है।

सरल शब्दों में, स्लिप रिंग मोटर भारी लोड को धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से स्टार्ट कर सकती है, जबकि लाइन और मशीन दोनों की सुरक्षा बनी रहती है।

4. स्लिप रिंग और स्क्विरल केज मोटर में क्या अंतर है?

स्लिप रिंग और स्क्विरल केज मोटर में मुख्य अंतर रोटर डिज़ाइन और स्टार्टिंग टॉर्क में होता है। स्लिप रिंग मोटर में रोटर वाइंडिंग और स्लिप रिंग होते हैं, जिससे बाहरी रेजिस्टेंस जोड़कर स्टार्टिंग टॉर्क बढ़ाया और करंट नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए यह भारी लोड वाली मशीनों के लिए उपयुक्त है।
वहीं, स्क्विरल केज मोटर में रोटर शॉर्ट-सर्किट होता है, स्टार्टिंग टॉर्क कम होता है और स्टार्टिंग करंट अधिक होता है, इसलिए यह हल्के और सामान्य लोड के लिए बेहतर है।


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