resistance electrical component diagram in hindi
resistance electrical component

रेजिस्टेंस (Resistance) क्या होता है? रेजिस्टेंस का कार्य, प्रकार और उपयोग

रेजिस्टेंस (Resistance) विद्युत विज्ञान का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जो किसी चालक द्वारा विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करने की क्षमता को दर्शाता है। यह न केवल इलेक्ट्रॉनिक सर्किट की कार्यप्रणाली को नियंत्रित करता है, बल्कि उपकरणों की सुरक्षा और कार्यक्षमता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। रेजिस्टेंस के कार्य, इसके विभिन्न प्रकार और व्यावहारिक उपयोगों को समझना इलेक्ट्रॉनिक्स और विद्युत तकनीक की बुनियादी जानकारी प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। यह लेख सरल भाषा में रेजिस्टेंस की अवधारणा को स्पष्ट करता है.

रेजिस्टेंस क्या होता है?

रेजिस्टेंस (Resistance) एक महत्वपूर्ण विद्युत अवयव (Electrical Component) है, जिसका मुख्य कार्य किसी विद्युत परिपथ (Circuit) में प्रवाहित हो रही विद्युत धारा (Electric Current) का विरोध करना या उसे नियंत्रित करना होता है। जब किसी चालक (Conductor) में करंट प्रवाहित होता है, तो रेजिस्टेंस उस धारा के प्रवाह में रुकावट उत्पन्न करता है, जिससे करंट सीमित रहता है और सर्किट सुरक्षित रूप से कार्य करता है।

रेजिस्टेंस को हिंदी में प्रतिरोध कहा जाता है। यह एक Passive Electrical Component होता है, अर्थात यह स्वयं कोई ऊर्जा उत्पन्न नहीं करता, बल्कि धारा के प्रवाह को नियंत्रित करता है। जिस अवयव के माध्यम से यह प्रतिरोध प्राप्त किया जाता है, उसे रेसिस्टर (Resistor) कहा जाता है और इसे विद्युत परिपथ में R से दर्शाया जाता है। रेजिस्टेंस की SI इकाई ओम (Ohm – Ω) होती है।

इस सिद्धांत को वैज्ञानिक जॉर्ज साइमन ओम (Georg Simon Ohm) ने परिभाषित किया था, जिनके नाम पर ओम का नियम (Ohm’s Law) आधारित है।

ओम का नियम (Ohm’s Law)

रेजिस्टेंस को सही तरीके से समझने के लिए ओम का नियम (Ohm’s Law) अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह नियम वोल्टेज, करंट और रेजिस्टेंस के बीच के संबंध को सरल गणितीय रूप में स्पष्ट करता है।

ओम का नियम:

V = I × R

जहाँ—
V = वोल्टेज (Volt)
I = विद्युत धारा / करंट (Ampere)
R = रेजिस्टेंस / प्रतिरोध (Ohm)

इस नियम के अनुसार, किसी भी विद्युत परिपथ में बहने वाली धारा का मान वोल्टेज के सीधे अनुपात में और रेजिस्टेंस के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional) होता है। अर्थात:

  • यदि रेजिस्टेंस बढ़ता है, तो करंट कम हो जाता है
  • यदि रेजिस्टेंस घटता है, तो करंट बढ़ जाता है
  • और यदि वोल्टेज बढ़ाया जाए, तो समान रेजिस्टेंस पर करंट भी बढ़ेगा.

व्यावहारिक उदाहरण:
मान लीजिए किसी सर्किट में वोल्टेज 10V है।

  • यदि रेजिस्टेंस 10Ω है, तो करंट होगा: I = 10 ÷ 10 = 1A
  • यदि रेजिस्टेंस 20Ω कर दिया जाए, तो करंट घटकर: I = 10 ÷ 20 = 0.5A हो जाएगा

इससे स्पष्ट होता है कि रेजिस्टेंस करंट को नियंत्रित करने का कार्य करता है। यही कारण है कि इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में रेसिस्टर का उपयोग उपकरणों को अधिक करंट से बचाने, वोल्टेज को नियंत्रित करने और सर्किट की स्थिरता बनाए रखने के लिए किया जाता है।

प्रतिरोध (Resistance) के प्रकार | Types of Resistor in Hindi

इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में उपयोग होने वाले रेजिस्टेंस (Resistor) को उनके कार्य और संरचना के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकार में वर्गीकृत किया जाता है। प्रत्येक प्रकार का अपना अलग उपयोग और महत्व होता है। नीचे इन्हें सरल भाषा में उदाहरण और उपयोग के साथ समझाया गया है।

resistance in a PCB
resistance in a PCB

1. स्थिर रेजिस्टेंस (Fixed Resistor)

फिक्स्ड रेजिस्टेंस वह रेजिस्टर होता है जिसका प्रतिरोध मान (Resistance Value) पहले से निर्धारित होता है और उसे बदला नहीं जा सकता। जब किसी सर्किट में निश्चित मान के रेजिस्टेंस की आवश्यकता होती है, तब फिक्स्ड रेजिस्टर का उपयोग किया जाता है।

यह आमतौर पर 2 पिन (टर्मिनल) वाले होते हैं और निर्माण के समय ही इनका रेजिस्टेंस मान तय कर दिया जाता है।

उदाहरण: मेटल फिल्म रेजिस्टेंस (Metal Film Resistor), वायर वाउंड रेजिस्टेंस (Wire Wound Resistor)

उपयोग: रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल चार्जर, पावर सप्लाई, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बोर्ड,

2. परिवर्तनीय रेजिस्टेंस (Variable Resistor)

वेरिएबल रेजिस्टेंस वे रेजिस्टर होते हैं जिनका प्रतिरोध मान आवश्यकता अनुसार कम या ज्यादा किया जा सकता है। इनमें एक नॉब (Knob) या स्लाइडर होता है, जिसे घुमाकर या खिसकाकर रेजिस्टेंस को एडजस्ट किया जाता है।

ये रेजिस्टर 2 पिन या 3 पिन (टर्मिनल) वाले हो सकते हैं और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में नियंत्रण (Control) के लिए उपयोग किए जाते हैं।

प्रकार (Types Of Variable Resistor): रियोस्टेट (Rheostat), पोटेंशियोमीटर (Potentiometer)

उपयोग: पंखे का रेगुलेटर, टीवी और म्यूजिक सिस्टम में वॉल्यूम कंट्रोल, लाइट डिमर

3. विशेष प्रकार के रेजिस्टेंस (Special Type Resistor)

इन रेजिस्टेंस का मान किसी बाहरी भौतिक कारक पर निर्भर करता है, जैसे तापमान या प्रकाश।

(a) थर्मिस्टर (Thermistor)

थर्मिस्टर वह रेजिस्टेंस होता है जिसका मान तापमान (Temperature) के अनुसार बदलता है। तापमान बढ़ने या घटने पर इसका रेजिस्टेंस भी बदल जाता है।

उपयोग: तापमान मापने वाले उपकरण, ओवरहीट प्रोटेक्शन सर्किट, AC, फ्रिज और हीटर जैसे उपकरण

(b) एलडीआर (LDR – Light Dependent Resistor)

एलडीआर वह रेजिस्टेंस होता है जिसका मान प्रकाश (Light) की तीव्रता पर निर्भर करता है। अधिक प्रकाश में इसका रेजिस्टेंस कम और कम प्रकाश में अधिक हो जाता है।

उपयोग: ऑटोमैटिक स्ट्रीट लाइट, लाइट सेंसर.

रेजिस्टेंस का कार्य और उपयोग (Function & Uses of Resistance in Hindi)

रेजिस्टेंस (Resistance) इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है। इसका मुख्य उद्देश्य सर्किट में बहने वाली विद्युत धारा को नियंत्रित करना और उपकरणों को सुरक्षित व स्थिर रूप से कार्य करने में सहायता करना है। नीचे रेजिस्टेंस के प्रमुख कार्य और व्यावहारिक उपयोगों को विस्तार से समझाया गया है।

resistance electrical component
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रेजिस्टेंस के मुख्य कार्य (Main Functions of Resistance)

1. करंट को नियंत्रित करना

रेजिस्टेंस का सबसे महत्वपूर्ण कार्य सर्किट में बहने वाली विद्युत धारा (Current) की मात्रा को सीमित करना है। यह अत्यधिक करंट को रोककर सर्किट को संतुलित बनाए रखता है।

2. विद्युत उपकरणों की सुरक्षा

यदि किसी डिवाइस में आवश्यकता से अधिक करंट प्रवाहित हो जाए, तो वह खराब हो सकती है। रेजिस्टेंस अतिरिक्त करंट को नियंत्रित कर उपकरणों को जलने या डैमेज होने से बचाता है।

3. वोल्टेज ड्रॉप करना

कई इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में अलग-अलग भागों को अलग वोल्टेज की आवश्यकता होती है। ऐसे में रेजिस्टेंस का उपयोग वोल्टेज को घटाने (Voltage Drop) के लिए किया जाता है।

4. ऊष्मा (Heat) उत्पन्न करना

जब करंट रेजिस्टेंस से होकर गुजरता है, तो ऊष्मा उत्पन्न होती है। इसी सिद्धांत का उपयोग हीटर, आयरन, गीजर जैसे उपकरणों में किया जाता है।

5. टाइमिंग और सिग्नल कंट्रोल

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में रेजिस्टेंस का उपयोग टाइमिंग साइकिल और सिग्नल कंट्रोल करने के लिए किया जाता है, जैसे टाइमर सर्किट और ऑस्सीलेटर।

व्यावहारिक उदाहरण (Practical Example – मोबाइल चार्जर)

मान लीजिए हम एक मोबाइल चार्जर का उपयोग कर रहे हैं। मोबाइल की बैटरी को सुरक्षित चार्ज करने के लिए सीमित करंट और वोल्टेज की आवश्यकता होती है।

चार्जर के अंदर लगे रेजिस्टेंस अतिरिक्त करंट को नियंत्रित करते हैं और आवश्यकतानुसार वोल्टेज को घटाते हैं। यदि रेजिस्टेंस का उपयोग न किया जाए, तो अधिक करंट के कारण मोबाइल की बैटरी जल्दी खराब हो सकती है या फोन गर्म हो सकता है।

Resistor का कार्य सिद्धांत (Working Principle of Resistor)

जब किसी इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में वोल्टेज (Voltage) लगाया जाता है, तो उस वोल्टेज के प्रभाव से इलेक्ट्रॉन्स (Electrons) चालक के माध्यम से एक दिशा में बहने लगते हैं। इसी इलेक्ट्रॉन्स के प्रवाह को विद्युत धारा (Electric Current) कहा जाता है।

रेसिस्टर के अंदर विशेष प्रकार की सामग्री जैसे कार्बन, मेटल फिल्म या वायर का उपयोग किया जाता है, जिनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन्स की संख्या कम होती है। यही कारण है कि ये पदार्थ इलेक्ट्रॉन्स के प्रवाह में रुकावट (Opposition) उत्पन्न करते हैं।

रेसिस्टर के अंदर होने वाली प्रक्रिया

जब इलेक्ट्रॉन्स रेसिस्टर से गुजरते हैं, तो वे उसके परमाणुओं से टकराते हैं. इस टकराव से इलेक्ट्रॉन्स की गति धीमी हो जाती है, परिणामस्वरूप सर्किट में बहने वाला करंट सीमित हो जाता है. इलेक्ट्रॉन्स की ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा (Heat Energy) में परिवर्तित हो जाता है

इसी कारण रेसिस्टर का तापमान बढ़ सकता है और इसे एक निश्चित पावर रेटिंग (Watt Rating) के साथ बनाया जाता है ताकि वह सुरक्षित रूप से कार्य कर सके।

रेसिस्टर वोल्टेज को कैसे प्रभावित करता है?

जब करंट रेसिस्टर से होकर गुजरता है, तो उसके दोनों सिरों के बीच वोल्टेज ड्रॉप उत्पन्न होता है। यही वोल्टेज ड्रॉप सर्किट के अन्य घटकों को आवश्यक वोल्टेज प्रदान करने में सहायक होता है। इसी सिद्धांत का उपयोग वोल्टेज डिवाइडर सर्किट में किया जाता है।

Resistance को कैसे मापते हैं? | How to Measure Resistance in Hindi

रेजिस्टेंस (Resistance) किसी भी इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का एक महत्वपूर्ण मान होता है। किसी रेसिस्टर या सर्किट में रेजिस्टेंस मापने के लिए कई विश्वसनीय तरीके उपलब्ध हैं। सामान्यतः रेजिस्टेंस को कलर कोड, मल्टीमीटर और ओम के नियम की सहायता से मापा जाता है। नीचे इन सभी तरीकों को सरल और व्यावहारिक रूप में समझाया गया है।

1. कलर कोड द्वारा रेजिस्टेंस मापना (Resistor Color Code Method)

अधिकांश रेसिस्टर पर अलग-अलग रंगों की पट्टियाँ (Color Bands) बनी होती हैं। इन रंगों का एक निश्चित मान होता है, जिनकी सहायता से रेसिस्टर का रेजिस्टेंस पहले से ही निर्धारित किया जा सकता है।

  • हर रंग एक संख्या को दर्शाता है
  • शुरुआती दो या तीन रंग अंकों (Digits) को बताते हैं
  • अगला रंग मल्टीप्लायर (Multiplier) होता है
  • अंतिम रंग टॉलरेंस (Tolerance) को दर्शाता है

इस विधि का उपयोग तब किया जाता है जब रेसिस्टर नया हो और उस पर रंग स्पष्ट दिखाई दे रहे हों। यह तरीका तेज और बिना किसी उपकरण के रेजिस्टेंस जानने में सहायक है।

2. मल्टीमीटर से रेजिस्टेंस मापना (Using Multimeter)

रेजिस्टेंस मापने का सबसे सटीक और सामान्य तरीका डिजिटल या एनालॉग मल्टीमीटर का उपयोग करना है।

मल्टीमीटर से रेजिस्टेंस मापने की प्रक्रिया:

  1. मल्टीमीटर को Ω (Ohm) के चिन्ह पर सेट करें
  2. यदि रेंज सिलेक्ट करने का विकल्प हो, तो उपयुक्त रेंज चुनें
  3. रेसिस्टर को सर्किट से अलग करें (बेहतर परिणाम के लिए)
  4. मल्टीमीटर की दोनों प्रोब को रेसिस्टर के दोनों टर्मिनल पर लगाएँ
  5. डिस्प्ले पर दिखाई देने वाला मान ही रेसिस्टर का रेजिस्टेंस होता है

यह तरीका सबसे विश्वसनीय और प्रैक्टिकल माना जाता है, खासकर तब जब कलर कोड मिट चुके हों या पढ़ने में कठिनाई हो।

3. ओम के नियम से रेजिस्टेंस निकालना (Using Ohm’s Law)

जब किसी विद्युत परिपथ में वोल्टेज (V) और करंट (I) का मान दिया गया हो, तब रेजिस्टेंस को ओम के नियम की सहायता से आसानी से निकाला जा सकता है।

ओम का नियम:

R = V ÷ I

जहाँ—

R = रेजिस्टेंस (Ohm)

V = वोल्टेज (Volt)

I = करंट (Ampere)

यह विधि विशेष रूप से थ्योरी, सर्किट एनालिसिस और प्रैक्टिकल कैलकुलेशन के लिए उपयोगी होती है।

रेजिस्टेंस कलर कोड क्या होता है?

रेजिस्टेंस कलर कोड (Resistance Colour Code) रेसिस्टर की वैल्यू पहचानने की एक मानक विधि है। चूँकि रेसिस्टर आकार में बहुत छोटे होते हैं, इसलिए उन पर संख्याओं में वैल्यू लिखना संभव नहीं होता। इसी कारण रेसिस्टर पर रंगीन पट्टियाँ बनाई जाती हैं, जिनसे उसका रेजिस्टेंस मान, टॉलरेंस और कभी-कभी तापमान गुणांक जाना जाता है।

यह कलर कोड प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानक (IEC) पर आधारित होती है, जिससे पूरी दुनिया में रेसिस्टर की पहचान एक समान तरीके से की जा सके।

4 बैंड रेजिस्टेंस कलर कोड नियम

बैंडअर्थ
पहला बैंडपहला अंक
दूसरा बैंडदूसरा अंक
तीसरा बैंडमल्टीप्लायर
चौथा बैंडटॉलरेंस

रेजिस्टेंस कलर कोड चार्ट (Resistance Colour Code Chart)

रंग (Colour)अंक (number)मल्टीप्लायर (multiplier)
काला0×10⁰
भूरा1×10¹
लाल2×10²
नारंगी3×10³
पीला4×10⁴
हरा5×10⁵
नीला6×10⁶
बैंगनी7×10⁷
ग्रे8×10⁸
सफेद9×10⁹

टॉलरेंस: गोल्ड = ±5% , सिल्वर = ±10%

रेजिस्टेंस कलर कोड का उदाहरण

यदि रंग हैं: लाल – बैंगनी – नारंगी – गोल्ड

  • लाल = 2
  • बैंगनी = 7
  • नारंगी = ×1000

रेजिस्टेंस = 27,000 Ω (27kΩ ±5%)

Resistors Connection | रेसिस्टर को जोड़ने के प्रकार (Series और Parallel)

किसी भी इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में रेसिस्टर को मुख्य रूप से दो तरीकों से जोड़ा जाता है—

सीरीज कनेक्शन (Series Connection) और पैरेलल कनेक्शन (Parallel Connection)

दोनों कनेक्शन के नियम, प्रभाव और कुल रेजिस्टेंस (Equivalent Resistance) निकालने के सूत्र अलग-अलग होते हैं।

1. सीरीज कनेक्शन (Series Connection of Resistors)

जब दो या अधिक रेसिस्टर को एक के बाद एक क्रमबद्ध तरीके से जोड़ा जाता है, तो उसे सीरीज कनेक्शन कहते हैं। इसमें सभी रेसिस्टरों से एक ही करंट प्रवाहित होता है।

सीरीज कनेक्शन की विशेषताएँ:

  • सभी रेसिस्टरों में करंट समान होता है
  • वोल्टेज प्रत्येक रेसिस्टर में अलग-अलग बाँटा जाता है
  • कुल रेजिस्टेंस हमेशा सबसे बड़े रेसिस्टर से भी अधिक होता है
  • यदि एक रेसिस्टर खराब हो जाए, तो पूरा सर्किट बंद हो जाता है

सीरीज कनेक्शन का सूत्र: Req = R1 + R2 + R3 + … + Rn

अर्थात, सर्किट में लगे सभी रेसिस्टरों के मान को जोड़ने पर कुल रेजिस्टेंस प्राप्त होता है।

2. पैरेलल कनेक्शन (Parallel Connection of Resistors)

जब सभी रेसिस्टरों के एक सिरे आपस में और दूसरे सिरे आपस में जुड़े होते हैं, तो उसे पैरेलल कनेक्शन कहते हैं। इसमें प्रत्येक रेसिस्टर पर समान वोल्टेज होता है, लेकिन करंट अलग-अलग होता है।

पैरेलल कनेक्शन की विशेषताएँ:

  • सभी रेसिस्टरों पर वोल्टेज समान होता है
  • करंट अलग-अलग रास्तों में विभाजित हो जाता है
  • कुल रेजिस्टेंस हमेशा सबसे छोटे रेसिस्टर से भी कम होता है
  • एक रेसिस्टर खराब होने पर भी बाकी सर्किट काम करता रहता है

पैरेलल कनेक्शन का सूत्र: 1 / Req = 1 / R1 + 1 / R2 + 1 / R3 + …

यहाँ प्राप्त Req को Equivalent Resistance कहते हैं।

रेजिस्टेंस को प्रभावित करने वाले कारक | Factors Affecting Resistance

किसी भी चालक (Conductor) या रेसिस्टर का रेजिस्टेंस (Resistance) कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करता है। इसे समझना इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल सर्किट डिजाइन के लिए आवश्यक है।

1. लंबाई (Length)

किसी तार या चालक की लंबाई जितनी अधिक होगी, इलेक्ट्रॉन्स को उस माध्यम से गुजरने में उतनी अधिक रुकावट होगी।

  • इसका अर्थ है, लंबा तार → अधिक रेजिस्टेंस
  • छोटा तार → कम रेजिस्टेंस

2. क्षेत्रफल / मोटाई (Cross-sectional Area)

किसी तार का मोटा क्षेत्रफल (Thicker Wire) इलेक्ट्रॉन्स को आसानी से गुजरने देता है, जबकि पतला तार अधिक रुकावट पैदा करता है।

  • मोटा तार → कम रेजिस्टेंस
  • पतला तार → अधिक रेजिस्टेंस

3. सामग्री (Material)

तार की सामग्री भी रेजिस्टेंस को प्रभावित करती है। अलग-अलग पदार्थ में इलेक्ट्रॉन्स की गति अलग होती है।

  • तांबा (Copper) → कम रेजिस्टेंस
  • एल्यूमिनियम (Aluminium) → मध्यम रेजिस्टेंस
  • नाइक्रोम (Nichrome) → अधिक रेजिस्टेंस

इस वजह से, हीटिंग उपकरण में नाइक्रोम और पावर ट्रांसमिशन में तांबा का उपयोग किया जाता है।

4. तापमान (Temperature)

तापमान बढ़ने पर चालक के अणु अधिक गति करने लगते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन्स के टकराने की संभावना बढ़ जाती है।

  • तापमान बढ़ने → रेजिस्टेंस बढ़ता है
  • तापमान घटने → रेजिस्टेंस कम होता है

कुछ विशेष पदार्थ जैसे थर्मिस्टर में यह प्रभाव अधिक उपयोगी होता है, जिससे तापमान के अनुसार रेजिस्टेंस को नियंत्रित किया जा सकता है।

5. अतिरिक्त कारक

  • मैकेनिकल स्ट्रेस या खिंचाव: तार को खींचने या दबाने से भी रेजिस्टेंस में हल्का बदलाव आ सकता है
  • आर्द्रता और वातावरण (Humidity & Environment): कुछ संवेदनशील रेसिस्टर में वातावरण रेजिस्टेंस को प्रभावित कर सकता है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

1. क्या रेजिस्टेंस (Resistance) और प्रतिरोध (Impedance) एक ही चीज़ हैं?

नहीं, रेजिस्टेंस (Resistance) और प्रतिरोध (Impedance) एक ही चीज़ नहीं हैं, हालांकि दोनों का संबंध विद्युत धारा के प्रवाह को रोकने से है। रेजिस्टेंस एक स्थिर विशेषता होती है, जो केवल सीधे धारा (DC) के लिए होती है और यह सिर्फ रैखिक (linear) रूप से विद्युत प्रवाह का विरोध करती है। वहीं, प्रतिरोध (Impedance) का उपयोग समांतर धारा (AC) के संदर्भ में किया जाता है और इसमें रेजिस्टेंस के अलावा धारा के आवृत्ति (frequency) पर आधारित अन्य प्रभाव, जैसे इंडक्टेंस (inductance) और कैपेसिटेंस (capacitance), भी शामिल होते हैं। इस प्रकार, इंपेडेंस रेजिस्टेंस से व्यापक और अधिक जटिल होता है।

2. क्या रेजिस्टेंस का असर उपकरणों की कार्यक्षमता पर पड़ता है?

बिलकुल, प्रतिरोध (Resistance) का उपकरणों की कार्यक्षमता पर गहरा असर पड़ता है। यह धारा (current) के प्रवाह को नियंत्रित करता है, जिससे वोल्टेज ड्रॉप, गर्मी का उत्पादन, और ऊर्जा का नुकसान हो सकता है। यदि उपकरण में अधिक प्रतिरोध होता है, तो यह अधिक ऊर्जा बर्बाद करने का कारण बनता है, जिससे दक्षता कम होती है और उपकरण जल्दी खराब हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, उच्च प्रतिरोध वाली मोटर कम गति से चल सकती है, या उच्च प्रतिरोध वाला बल्ब कम चमक सकता है। सही प्रतिरोध का उपयोग उपकरण की कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह मोटर की गति, ध्वनि की तीव्रता, और अन्य कार्यों को ठीक से नियंत्रित करने में मदद करता है। इसलिए, सही प्रतिरोध का चयन करना बहुत जरूरी होता है ताकि उपकरण अपनी अधिकतम क्षमता पर काम कर सके।

3. विरोध (Resistance) और रेश (Resistivity) में क्या अंतर है?

प्रतिरोध (Resistance) और प्रतिरोधकता (Resistivity) में अंतर यह है कि:

प्रतिरोध (Resistance) किसी वस्तु, जैसे तार, द्वारा विद्युत धारा के प्रवाह में आने वाली बाधा है, जो उसके आकार (लंबाई और क्षेत्रफल) और सामग्री पर निर्भर करता है। इसका माप ओम (Ω) में होता है।

प्रतिरोधकता (Resistivity) किसी पदार्थ की स्वाभाविक विशेषता है, जो बताती है कि वह पदार्थ धारा का कितना विरोध करता है, चाहे उसका आकार कुछ भी हो। इसका माप ओम-मीटर (Ω·m) में होता है।

सरल शब्दों में, प्रतिरोध वस्तु की गुण है, जबकि प्रतिरोधकता पदार्थ का मौलिक गुण है।

4. विरोध (Resistance) और आंतरविरोध (Inductance) के बीच अंतर क्या है

विरोध (Resistance) और आंतरविरोध (Inductance) दोनों विद्युत धारा के प्रवाह में रुकावट डालते हैं, लेकिन इनके कार्य और प्रभाव अलग होते हैं:

विरोध (Resistance): यह स्थिर होता है और DC (डायरेक्ट करंट) सर्किट में धारा के प्रवाह को रोकता है। इसका असर सीधा होता है—वोल्टेज और धारा के बीच एक समानुपाती संबंध होता है (V = R · I)। इसका माप ओम (Ω) में होता है और यह ऊष्मा में ऊर्जा का रूपांतरण करता है।

आंतरविरोध (Inductance): यह गतिशील गुण होता है और AC (अल्टरनेटिंग करंट) सर्किट में कार्य करता है। यह धारा में बदलाव के प्रति प्रतिरोध करता है, चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है और प्रवाह में बदलाव की दर के समानुपाती प्रेरित वोल्टेज उत्पन्न करता है (V = L · dI/dt)। इसका माप हेनरी (H) में होता है।

संक्षेप में, विरोध DC में धारा को रोकता है, जबकि आंतरविरोध AC में धारा के बदलाव के प्रति प्रतिक्रिया करता है।

5. रेसिस्टर के अंदर क्या होता है?

रेसिस्टर में मुख्य रूप से कार्बन, मेटल ऑक्साइड, या मेटल फॉयल जैसी सामग्री होती है, जो धारा के प्रवाह का विरोध करती है। इसके बाहरी हिस्से में सिरामिक या प्लास्टिक कवर होता है, जो इसे गर्मी और बाहरी प्रभावों से बचाता है। रेसिस्टर के दोनों छोरों पर टर्मिनल होते हैं, जो इसे सर्किट से जोड़ते हैं।


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