किसी भी विद्युत उपकरण, विशेषकर ट्रांसफॉर्मर, की सुरक्षित और लंबे समय तक कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए तापमान की निगरानी अत्यंत आवश्यक होती है। ट्रांसफॉर्मर के संचालन के दौरान उत्पन्न होने वाली गर्मी यदि नियंत्रित न की जाए, तो यह उपकरण की कार्यक्षमता, विश्वसनीयता और आयु पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसी कारण ट्रांसफॉर्मर में तापमान संकेतक (Temperature Indicators) लगाए जाते हैं, जो असामान्य तापमान स्थिति की समय रहते जानकारी देकर संभावित क्षति को रोकने में सहायता करते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं:
- OTI (Oil Temperature Indicator)
- WTI (Winding Temperature Indicator)
इस लेख में हम OTI और WTI को सरल भाषा और आसान शब्दों में साथ समझेंगे।
Table of Contents
ट्रांसफॉर्मर में तापमान संकेतक क्या होता है? (What Is Temperature Indicator)
ट्रांसफॉर्मर में तापमान संकेतक (Temperature Indicator) वह उपकरण होता है जो ट्रांसफॉर्मर के अंदर उत्पन्न होने वाले तापमान को महसूस करता, मापता और प्रदर्शित करता है। चूँकि ट्रांसफॉर्मर के संचालन के दौरान तेल और वाइंडिंग गर्म होती रहती हैं, इसलिए उनके तापमान पर लगातार नज़र रखना बहुत आवश्यक होता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से तापमान संकेतक ऊष्मा में होने वाले परिवर्तन पर कार्य करता है। जैसे-जैसे ट्रांसफॉर्मर का तापमान बढ़ता या घटता है, संकेतक के अंदर लगे सेंसर की भौतिक या विद्युत विशेषताएँ बदलती हैं, और यह परिवर्तन डायल या डिस्प्ले पर तापमान के रूप में दिखाई देता है। इससे ऑपरेटर को यह स्पष्ट जानकारी मिलती है कि ट्रांसफॉर्मर सुरक्षित सीमा में कार्य कर रहा है या नहीं।
ट्रांसफॉर्मर में लगे तापमान संकेतक समय रहते अधिक तापमान की चेतावनी देकर इंसुलेशन, तेल और वाइंडिंग को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। OTI और WTI जैसे संकेतक इसी उद्देश्य से उपयोग किए जाते हैं और ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा, विश्वसनीयता और आयु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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ट्रांसफॉर्मर में OTI (Oil Temperature Indicator) क्या है?
OTI का पूरा नाम Oil Temperature Indicator है। यह ट्रांसफॉर्मर में लगा एक महत्वपूर्ण तापमान संकेतक उपकरण होता है, जिसका उपयोग ट्रांसफॉर्मर टैंक के अंदर भरे हुए डाइइलेक्ट्रिक तेल (Transformer Oil) के तापमान को मापने और दिखाने के लिए किया जाता है।
ट्रांसफॉर्मर में तेल केवल एक तरल नहीं होता, बल्कि यह दो अत्यंत आवश्यक कार्य करता है—शीतलन (Cooling) और इन्सुलेशन (Insulation)। संचालन के दौरान जब ट्रांसफॉर्मर में विद्युत हानि होती है, तो ऊष्मा उत्पन्न होती है। यह गर्मी सबसे पहले तेल में स्थानांतरित होती है। OTI इसी तापमान परिवर्तन को वैज्ञानिक सिद्धांत के आधार पर महसूस करता है और उसे डायल या डिस्प्ले पर प्रदर्शित करता है।
यदि तेल का तापमान सुरक्षित सीमा से अधिक बढ़ने लगे, तो इसका सीधा अर्थ है कि ट्रांसफॉर्मर पर अधिक भार है या शीतलन (Cooling) व्यवस्था सही ढंग से कार्य नहीं कर रही। ऐसी स्थिति में तेल के इन्सुलेटिंग गुण कमजोर हो सकते हैं, जिससे ट्रांसफॉर्मर की कार्यक्षमता और आयु पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इसलिए (Oil Temperature Indicator) ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता और विश्वसनीय संचालन सुनिश्चित करने के लिए तेल के तापमान की निरंतर निगरानी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ट्रांसफॉर्मर में OTI (Oil Temperature Indicator) कैसे काम करता है?
OTI (Oil Temperature Indicator) का कार्य सिद्धांत तापमान के कारण द्रव के फैलाव (Thermal Expansion of Liquid) पर आधारित होता है, जो एक सरल लेकिन विश्वसनीय वैज्ञानिक सिद्धांत है।
OTI में एक थर्मल बल्ब लगा होता है, जिसे ट्रांसफॉर्मर के तेल में डुबोकर स्थापित किया जाता है। यह बल्ब एक पतली केशिका ट्यूब (Capillary Tube) के माध्यम से डायल से जुड़ा होता है और इसके अंदर विशेष द्रव भरा रहता है। जब ट्रांसफॉर्मर के संचालन के दौरान तेल का तापमान बढ़ता है, तो यह गर्मी थर्मल बल्ब तक पहुँचती है। तापमान बढ़ने पर बल्ब और ट्यूब के अंदर मौजूद द्रव फैलने लगता है।
इस द्रव के फैलाव से अंदर दबाव बढ़ता है, जिसके कारण OTI के डायल पर लगी सुई आगे की ओर घूमती है। सुई की स्थिति सीधे तेल के तापमान के अनुपात में होती है, और यह तापमान डिग्री सेल्सियस (°C) में प्रदर्शित किया जाता है। इस प्रकार ऑपरेटर को तेल के वास्तविक तापमान की निरंतर जानकारी मिलती रहती है।
व्यावहारिक रूप से ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा के लिए OTI में कुछ मानक तापमान सीमाएँ तय की जाती हैं। सामान्यतः लगभग 80°C पर अलार्म दिया जाता है, जिससे चेतावनी मिल सके, और यदि तापमान और बढ़कर लगभग 90°C तक पहुँच जाए, तो ट्रिपिंग सिस्टम सक्रिय होकर ट्रांसफॉर्मर को संभावित नुकसान से बचा लेता है।
इस प्रकार OTI तापमान परिवर्तन के वैज्ञानिक सिद्धांत पर काम करते हुए ट्रांसफॉर्मर के तेल की निगरानी करता है और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करता है।
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ट्रांसफॉर्मर OTI (Oil Temperature Indicator) के मुख्य भाग
OTI (Oil Temperature Indicator) कई महत्वपूर्ण भागों से मिलकर बना होता है, जो मिलकर ट्रांसफॉर्मर के तेल के तापमान को सही तरीके से मापने, दिखाने और सुरक्षा क्रिया शुरू करने का कार्य करते हैं। इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
1. थर्मल सेंसर (Sensor Bulb)
यह OTI का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है। इसे सीधे ट्रांसफॉर्मर के तेल में लगाया जाता है ताकि यह वास्तविक तेल तापमान को महसूस कर सके। तापमान बढ़ने पर सेंसर के अंदर मौजूद द्रव फैलता है, जो आगे संकेत उत्पन्न करता है। यह भाग सीधे ऊष्मा संवेदन (Heat Sensing) के सिद्धांत पर कार्य करता है।
2. कैपिलरी ट्यूब (Capillary Tube)
कैपिलरी ट्यूब सेंसर बल्ब को डायल इंडिकेटर से जोड़ती है। इसके अंदर भरा द्रव सेंसर में हुए तापमान परिवर्तन को बिना किसी विद्युत शक्ति के डायल तक पहुँचाता है। यह पूरी प्रक्रिया द्रव विस्तार के वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित होती है।
3. डायल इंडिकेटर (Temperature Dial/Gauge)
डायल इंडिकेटर का कार्य तेल के तापमान को स्पष्ट रूप से दिखाना होता है। यह सामान्यतः डिग्री सेल्सियस (°C) में कैलिब्रेट किया जाता है, जिससे ऑपरेटर तुरंत यह समझ सके कि तापमान सुरक्षित सीमा में है या नहीं।
4. अलार्म और ट्रिप कॉन्टैक्ट (Alarm & Trip Contacts)
OTI में सुरक्षा के लिए अलार्म और ट्रिप कॉन्टैक्ट लगाए जाते हैं। जब तेल का तापमान तय सीमा से अधिक हो जाता है, तो अलार्म कॉन्टैक्ट सक्रिय होकर चेतावनी देता है। यदि तापमान और बढ़ता है, तो ट्रिप कॉन्टैक्ट कार्य करके ट्रांसफॉर्मर को बंद कर देता है। यह प्रणाली तापमान-आधारित स्विचिंग के वैज्ञानिक सिद्धांत पर कार्य करती है और गंभीर क्षति से बचाव करती है।
ट्रांसफॉर्मर में OTI (Oil Temperature Indicator) का उपयोग
OTI (Oil Temperature Indicator) का उपयोग ट्रांसफॉर्मर के सुरक्षित और स्थिर संचालन को सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। यह उपकरण तेल के तापमान पर लगातार नज़र रखकर समय रहते आवश्यक क्रियाएँ शुरू करता है। इसके मुख्य उपयोग निम्नलिखित हैं:
1. ओवरहीटिंग का पता लगाना
OTI ट्रांसफॉर्मर के तेल के तापमान में होने वाली असामान्य वृद्धि को तुरंत पहचान लेता है। वैज्ञानिक रूप से, तेल का बढ़ता तापमान यह संकेत देता है कि ट्रांसफॉर्मर में ऊष्मा उत्पादन उसकी शीतलन क्षमता से अधिक हो गया है। इससे ऑपरेटर को समय रहते चेतावनी मिल जाती है।
2. कूलिंग सिस्टम को चालू करना (Fan / Pump Control)
जब तेल का तापमान निर्धारित स्तर तक पहुँचता है, तो OTI अपने कॉन्टैक्ट के माध्यम से कूलिंग फैन या ऑयल पंप को स्वतः चालू कर देता है। यह प्रक्रिया ऊष्मा संतुलन (Heat Balance) के सिद्धांत पर आधारित होती है, जिससे ट्रांसफॉर्मर का तापमान फिर से सुरक्षित सीमा में लाया जा सके।
3. ट्रांसफॉर्मर को सुरक्षित रखना
अधिक तापमान से तेल और इंसुलेशन की गुणवत्ता खराब हो सकती है। OTI अलार्म और ट्रिपिंग क्रिया के माध्यम से ट्रांसफॉर्मर को गंभीर क्षति से बचाता है। इस प्रकार यह उपकरण ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा, विश्वसनीयता और सेवा-आयु बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ट्रांसफॉर्मर में WTI (Winding Temperature Indicator) क्या है?
WTI का पूरा नाम Winding Temperature Indicator है। यह ट्रांसफॉर्मर में लगाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण तापमान संकेतक उपकरण है, जिसका उपयोग ट्रांसफॉर्मर की वाइंडिंग (Copper या Aluminium Coil) के तापमान की निगरानी और प्रदर्शन के लिए किया जाता है। वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर का वह भाग होता है जहाँ विद्युत धारा के प्रवाह के कारण सबसे अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है।
ट्रांसफॉर्मर में WTI (Winding Temperature Indicator) का कार्य
WTI का मुख्य कार्य ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक और द्वितीयक वाइंडिंग के तापमान की लगातार निगरानी करना है। वैज्ञानिक रूप से, वाइंडिंग में उत्पन्न ऊष्मा मुख्यतः I²R हानि (कॉपर लॉस) के कारण होती है। यदि यह तापमान निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक हो जाए, तो वाइंडिंग का इन्सुलेशन कमजोर हो सकता है और कॉइल के जलने की संभावना बढ़ जाती है।
WTI वाइंडिंग के तापमान को डायल या डिस्प्ले पर दिखाता है और तापमान बढ़ने पर अलार्म या ट्रिप सर्किट को सक्रिय करता है। इससे ट्रांसफॉर्मर को ओवरहीटिंग से बचाया जा सकता है और उसका सुरक्षित व विश्वसनीय संचालन सुनिश्चित होता है।
ट्रांसफॉर्मर में WTI (Winding Temperature Indicator) क्यों ज़रूरी है?
ट्रांसफॉर्मर में वाइंडिंग का तापमान सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर माना जाता है, क्योंकि वाइंडिंग ही वह भाग है जहाँ सबसे अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है। वैज्ञानिक रूप से यह ऊष्मा मुख्यतः I²R हानि (Copper Loss) के कारण पैदा होती है। इसी वजह से वाइंडिंग का तापमान सामान्यतः तेल के तापमान से अधिक होता है।
वाइंडिंग का तापमान सीधे तौर पर ट्रांसफॉर्मर की इन्सुलेशन लाइफ और कुल सेवा-आयु को प्रभावित करता है। यदि वाइंडिंग बार-बार अधिक तापमान पर कार्य करती है, तो इन्सुलेशन तेजी से खराब होने लगता है, जिससे ट्रांसफॉर्मर की उम्र कम हो जाती है।
OTI केवल तेल के तापमान की जानकारी देता है, लेकिन वह वाइंडिंग के वास्तविक तापीय तनाव को पूरी तरह नहीं दर्शा सकता। चूँकि वाइंडिंग का तापमान तेल से अधिक और अधिक संवेदनशील होता है, इसलिए केवल OTI पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता।
इसी कारण ट्रांसफॉर्मर में WTI (Winding Temperature Indicator) लगाया जाता है, ताकि वाइंडिंग के तापमान की सटीक निगरानी करके ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा, विश्वसनीयता और दीर्घकालिक संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
ट्रांसफॉर्मर में WTI (Winding Temperature Indicator) कैसे काम करता है?
WTI (Winding Temperature Indicator) का कार्य सिद्धांत इस तथ्य पर आधारित होता है कि वाइंडिंग का वास्तविक तापमान केवल तेल के तापमान से नहीं, बल्कि लोड के कारण उत्पन्न ऊष्मा से भी प्रभावित होता है। इसलिए WTI दो तापमान प्रभावों को मिलाकर कार्य करता है—तेल का तापमान और लोड करंट से पैदा होने वाली गर्मी।
Winding Temperature Indicator में एक हीटर कॉइल लगी होती है, जो करंट ट्रांसफॉर्मर (CT) से जुड़ी रहती है। जैसे-जैसे ट्रांसफॉर्मर पर लोड बढ़ता है, वाइंडिंग में बहने वाली धारा भी बढ़ती है। CT इसी बढ़ी हुई धारा के अनुपात में हीटर कॉइल को करंट देता है, जिससे हीटर गर्म हो जाता है। यह गर्मी वाइंडिंग में उत्पन्न होने वाली I²R हानि का वैज्ञानिक रूप से अनुकरण (simulation) करती है।
इस हीटर से उत्पन्न गर्मी और तेल के वास्तविक तापमान का संयुक्त प्रभाव Winding Temperature Indicator के सेंसर पर पड़ता है। परिणामस्वरूप, WTI डायल पर वही तापमान दिखाता है जो वाइंडिंग का वास्तविक कार्य तापमान होता है। यदि यह तापमान निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है, तो Winding Temperature Indicator अलार्म या ट्रिप सर्किट को सक्रिय कर देता है।
इस प्रकार Winding Temperature Indicator तेल के तापमान और लोड-आधारित ऊष्मा को जोड़कर वाइंडिंग की सही तापीय स्थिति दर्शाता है और ट्रांसफॉर्मर के सुरक्षित व विश्वसनीय संचालन को सुनिश्चित करता है।
ट्रांसफॉर्मर में WTI (Winding Temperature Indicator) के मुख्य भाग
Winding Temperature Indicator कई वैज्ञानिक रूप से डिज़ाइन किए गए भागों से मिलकर बना होता है, जो मिलकर ट्रांसफॉर्मर की वाइंडिंग के वास्तविक तापमान को सही ढंग से दर्शाते हैं। इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
1. तापमान डायल (Temperature Dial / Gauge)
तापमान डायल का कार्य वाइंडिंग के तापमान को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होता है। यह सामान्यतः डिग्री सेल्सियस (°C) में कैलिब्रेट किया जाता है, जिससे ऑपरेटर तुरंत तापमान की स्थिति समझ सके।
2. थर्मल सेंसर (Sensor Bulb)
थर्मल सेंसर वाइंडिंग से उत्पन्न गर्मी के कारण तेल के तापमान में होने वाली वृद्धि को महसूस करता है। इसे ट्रांसफॉर्मर टैंक के ऊपरी भाग में तेल से भरी एक विशेष पॉकेट में लगाया जाता है। यह भाग ऊष्मा संवेदन (Heat Sensing) के सिद्धांत पर कार्य करता है।
3. हीटर कॉइल (Heating Coil / Element)
हीटर कॉइल Winding Temperature Indicator का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो सेंसर बल्ब के चारों ओर लगी होती है। यह कॉइल CT से जुड़े करंट के कारण गर्म होती है और वाइंडिंग में उत्पन्न I²R हानि की ऊष्मा का अनुकरण करती है। इससे वाइंडिंग का तापमान अधिक सटीक रूप से दर्शाया जा सकता है।
4. CT कनेक्शन (Current Transformer Connection)
CT कनेक्शन हीटर कॉइल को ट्रांसफॉर्मर के लोड करंट से जोड़ता है। जैसे-जैसे लोड बढ़ता है, CT के माध्यम से हीटर कॉइल में करंट बढ़ता है, जिससे वास्तविक वाइंडिंग तापमान का सही आकलन संभव होता है।
5. अलार्म और ट्रिप कॉन्टैक्ट (Alarm & Trip Contacts)
Winding Temperature Indicator में सुरक्षा के लिए कई अलार्म और ट्रिप कॉन्टैक्ट होते हैं। ये कॉन्टैक्ट तापमान तय सीमा से अधिक होने पर कूलिंग फैन, ऑयल पंप, अलार्म, या ट्रिप सर्किट को सक्रिय करते हैं। यह प्रणाली तापमान-आधारित नियंत्रण और सुरक्षा के वैज्ञानिक सिद्धांत पर कार्य करती है।
इन सभी भागों के समन्वय से Winding Temperature Indicator ट्रांसफॉर्मर की वाइंडिंग की निरंतर निगरानी करता है और सुरक्षित, कुशल तथा विश्वसनीय संचालन सुनिश्चित करता है।
ट्रांसफॉर्मर OTI और WTI में अंतर
नीचे OTI और WTI के बीच का अंतर सरल और वैज्ञानिक तरीके से, महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करते हुए तालिका (Table) में दिखाया गया है।
| विशेषता | (Oil Temperature Indicator) | (Winding Temperature Indicator) |
|---|---|---|
| मापता है | ट्रांसफॉर्मर के तेल का तापमान | ट्रांसफॉर्मर की वाइंडिंग का वास्तविक तापमान (तेल + लोड हानि) |
| लोड का प्रभाव | नहीं, केवल तेल तापमान पर निर्भर | हाँ, लोड बढ़ने पर वाइंडिंग तापमान को शामिल करता है |
| सुरक्षा स्तर | सामान्य, केवल तेल ओवरहीटिंग का संकेत | उच्च, अलार्म और ट्रिप सर्किट के माध्यम से वाइंडिंग सुरक्षा सुनिश्चित करता है |
| वैज्ञानिक दृष्टिकोण | ऊष्मा केवल तेल में महसूस होती है | ऊष्मा तेल + वाइंडिंग हानि (I²R) का मिश्रण है, वाइंडिंग की वास्तविक गर्मी दर्शाता है |
| सटीकता | मध्यम | उच्च, वाइंडिंग के वास्तविक तापमान का सही अनुमान देता है |
| ऊष्मा हस्तांतरण (Heat Transfer) | वाइंडिंग से तेल में फैलती ऊष्मा के माध्यम से मापता है, इसलिए डिले (delay) होता है | सीधे वाइंडिंग की गर्मी को अनुकरण करता है (हीटर कॉइल + CT) जिससे वास्तविक तापमान तुरंत दिखता है |
| लागत और जटिलता | कम लागत, सरल डिजाइन | अधिक लागत, हीटर कॉइल, CT कनेक्शन और मल्टी स्विच सिस्टम के कारण |
OTI और WTI में अलार्म और ट्रिप सिस्टम
OTI और WTI दोनों ही ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अलार्म और ट्रिप सिस्टम से लैस होते हैं। अलार्म कॉन्टैक्ट तब सक्रिय होता है जब तापमान सुरक्षित सीमा के पास पहुँचता है, जिससे ऑपरेटर को समय रहते चेतावनी मिलती है और आवश्यक कार्रवाई की जा सके। उदाहरण के लिए, OTI में तेल का तापमान लगभग 80°C तक पहुँचने पर अलार्म सक्रिय होता है, जबकि Winding Temperature Indicator में वाइंडिंग का वास्तविक तापमान अलार्म सीमा तक पहुँचते ही संकेत देता है।
ट्रिप कॉन्टैक्ट तब कार्य करता है जब तापमान खतरनाक स्तर पर पहुँच जाता है, और यह ट्रांसफॉर्मर को स्वचालित रूप से बंद कर देता है। OTI में यह ट्रिप तेल के तापमान की ट्रिप सीमा (जैसे 90°C) तक पहुँचने पर सक्रिय होता है, जबकि WTI में वाइंडिंग के वास्तविक तापमान के आधार पर ट्रिप होता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो अलार्म सिस्टम सतर्कता प्रदान करता है, जबकि ट्रिप सिस्टम सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
WTI में ये कॉन्टैक्ट अधिक संवेदनशील और सटीक होते हैं क्योंकि यह वाइंडिंग की वास्तविक ऊष्मा को मापता है, जबकि OTI केवल तेल तापमान पर निर्भर होता है। इस प्रकार, अलार्म और ट्रिप सिस्टम ट्रांसफॉर्मर की विश्वसनीयता, सुरक्षा और दीर्घकालिक संचालन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
1. OTI और WTI में क्या अंतर है?
OTI (Oil Temperature Indicator): ट्रांसफार्मर के तेल का तापमान मापता है। लोड का प्रभाव नहीं होता और सटीकता मध्यम होती है। मुख्य रूप से तेल ओवरहीटिंग की चेतावनी के लिए उपयोग किया जाता है।
WTI (Winding Temperature Indicator): ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग का वास्तविक तापमान मापता है, जिसमें लोड से उत्पन्न गर्मी भी शामिल होती है। सटीकता अधिक होती है और यह वाइंडिंग सुरक्षा के लिए अलार्म और ट्रिप देता है।
2. OTI और WTI में अलार्म और ट्रिप सिस्टम कैसे काम करता है?
OTI और WTI दोनों ही तापमान आधारित सुरक्षा उपकरण हैं, जिनमें अलार्म और ट्रिप कॉन्टैक्ट लगे होते हैं।
अलार्म (Alarm): जब तेल (OTI) या वाइंडिंग (WTI) का तापमान सुरक्षित सीमा के पास पहुँचता है, तो अलार्म सक्रिय होता है और ऑपरेटर को समय रहते चेतावनी देता है। यह सतर्कता प्रदान करता है ताकि आवश्यक क्रियाएँ की जा सकें, जैसे कूलिंग फैन या पंप चालू करना।
ट्रिप (Trip): यदि तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है, तो ट्रिप कॉन्टैक्ट सक्रिय होकर ट्रांसफॉर्मर को स्वतः बंद कर देता है। यह सुरक्षा क्रिया वाइंडिंग या तेल को अत्यधिक गर्मी से होने वाले नुकसान से बचाती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: अलार्म केवल चेतावनी प्रदान करता है, जबकि ट्रिप सिस्टम तापमान आधारित सुरक्षा सुनिश्चित करता है। WTI में ये सिस्टम अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि यह वाइंडिंग के वास्तविक तापमान पर आधारित होते हैं, जबकि OTI केवल तेल तापमान पर निर्भर करता है।
3. ट्रांसफॉर्मर तेल का तापमान कब खतरनाक माना जाता है?
ट्रांसफॉर्मर तेल का तापमान तब खतरनाक माना जाता है जब यह निर्धारित इन्सुलेशन सीमा या तेल के फ्लैश पॉइंट के करीब पहुँच जाए। सामान्यतः ट्रांसफॉर्मर में उपयोग होने वाले तेल का फ्लैश पॉइंट लगभग 140–180°C होता है।
यदि तेल का तापमान OTI ट्रिप सेटिंग (जैसे 90–95°C) से अधिक हो जाए, तो यह तेल और वाइंडिंग के इन्सुलेशन को नुकसान पहुँचाने का संकेत होता है।
अत्यधिक तापमान पर तेल की परावैद्युत क्षमता घटती है, विद्युत गुण प्रभावित होते हैं और विद्युत अपघटन (Dielectric Breakdown) का खतरा बढ़ जाता है।
तेल का तापमान उसके ज्वलन बिंदु तक पहुँचने पर आग या विस्फोट का जोखिम भी बढ़ जाता है।
इसलिए ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा और दीर्घायु के लिए तेल का तापमान हमेशा सुरक्षित सीमा के भीतर रखना आवश्यक है।
4. वाइंडिंग का तापमान कितनी सीमा तक सुरक्षित रहता है?
ट्रांसफॉर्मर की वाइंडिंग का तापमान उसकी इन्सुलेशन क्लास पर आधारित होता है। सामान्यत: प्रत्येक इन्सुलेशन क्लास के लिए अधिकतम अनुमेय तापमान निर्धारित होता है:
क्लास A: अधिकतम 105°C
क्लास E: अधिकतम 120°C
क्लास B: अधिकतम 130°C
क्लास F: अधिकतम 155°C
क्लास H: अधिकतम 180°C
सुरक्षित संचालन के लिए WTI को आमतौर पर इन्सुलेशन क्लास की अधिकतम सीमा से थोड़ा कम तापमान पर अलार्म और ट्रिप सेट किया जाता है। उदाहरण के लिए, क्लास A के लिए अलार्म 95°C और ट्रिप 105°C पर सेट किया जा सकता है।
इस सीमा से अधिक तापमान वाइंडिंग के इन्सुलेशन के नुकसान और ट्रांसफॉर्मर के जलने का खतरा बढ़ा देता है।
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