Motor Current Calculator
3 Phase Motor Ampere Calculator – उपयोग करने की पूरी जानकारी
यह 3 Phase Motor Ampere Calculator आपकी 3 फेज मोटर का करंट (Ampere) तुरंत और सही तरीके से निकालने के लिए बनाया गया है। नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके कोई भी यूज़र आसानी से इसका उपयोग कर सकता है।
Calculator कैसे उपयोग करें
Step 1: मोटर पावर भरें
- मोटर की पावर HP (Horse Power) या kW (Kilowatt) में डालें
- अगर आप HP डालते हैं, तो ध्यान रखें:
1 HP = 746 Watt
Step 2: सप्लाई वोल्टेज डालें
- सामान्यतः 3 फेज मोटर के लिए वोल्टेज 400V होता है
- अगर आपकी मोटर किसी अन्य वोल्टेज पर चलती है, तो वही वैल्यू डालें
Step 3: पावर फैक्टर (Power Factor – PF) डालें
- पावर फैक्टर आमतौर पर 0.8 से 0.9 के बीच होता है
- मोटर नेमप्लेट पर दिया गया PF डालना सबसे सही रहता है
- उदाहरण: 0.85
Step 4: मोटर एफिशिएंसी (Efficiency) डालें
- मोटर की एफिशिएंसी आमतौर पर 0.85 से 0.95 के बीच होती है
- यदि नेमप्लेट पर उपलब्ध हो, तो वही वैल्यू डालें
- उदाहरण: 0.95
Step 5: Calculate बटन दबाएं
- सारी डिटेल भरने के बाद Calculate या Submit बटन पर क्लिक करें
- तुरंत नीचे आपको आउटपुट मिलेगा
Output Ampere
- 3 Phase Motor Current = ___ Ampere
यह वैल्यू आपकी मोटर द्वारा ली जाने वाली वास्तविक करंट (लाइन करंट) होगी।
3 फेज मोटर एम्पियर कैलकुलेटर (3 Phase Motor Ampere Calculator)
इंडस्ट्रियल और कमर्शियल इंस्टॉलेशन में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली मोटर 3 फेज मोटर होती है। सही केबल साइज, सही MCB/MCCB सिलेक्शन और उचित मोटर प्रोटेक्शन के लिए सबसे पहले यह जानना बेहद ज़रूरी होता है कि 3 फेज मोटर कितने Ampere की है।
इसी आवश्यकता का व्यावहारिक और भरोसेमंद समाधान है 3 फेज मोटर एम्पियर कैलकुलेटर, जो मोटर की वास्तविक करंट वैल्यू निकालने में मदद करता है।
3 फेज मोटर एम्पियर क्या होता है?
3 फेज मोटर एम्पियर वह विद्युत करंट (धारा) है जो मोटर तीनों फेज से सप्लाई लेते समय खींचती है। यह करंट मोटर की पावर (kW या HP), सप्लाई वोल्टेज, पावर फैक्टर (PF) और एफिशिएंसी (Efficiency) पर निर्भर करता है।
मोटर पर लोड बढ़ने पर एम्पियर की मात्रा भी बढ़ जाती है, जबकि नो-लोड स्थिति में करंट कम होता है। सही एम्पियर जानना आवश्यक है ताकि उचित केबल साइज, MCB/MCCB, कॉन्टैक्टर और ओवरलोड रिले का सही चयन किया जा सके।
यदि मोटर निर्धारित एम्पियर से अधिक करंट खींचती है, तो इससे ओवरहीटिंग, वाइंडिंग डैमेज और मोटर की आयु कम होने की संभावना बढ़ जाती है।
3 फेज मोटर करंट किन फैक्टर्स पर निर्भर करता है?
मोटर पावर (HP / kW)
मोटर की पावर सीधे-सीधे उसके करंट से जुड़ी होती है। जितनी अधिक HP या kW की मोटर होगी, उतना ही अधिक काम करने की क्षमता उसमें होगी और उसी अनुपात में वह सप्लाई से ज्यादा करंट खींचेगी। छोटी मोटर कम लोड उठाती है, इसलिए उसका करंट भी कम होता है, जबकि बड़ी मोटर भारी लोड के कारण अधिक करंट लेती है।
लाइन वोल्टेज
लाइन वोल्टेज का मोटर करंट पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। यदि मोटर को उसका निर्धारित वोल्टेज, जैसे 415V, पूरा नहीं मिलता और वोल्टेज कम हो जाता है, तो मोटर उसी आउटपुट पावर को बनाए रखने के लिए ज्यादा करंट खींचने लगती है। यही कारण है कि लो वोल्टेज की स्थिति में मोटर गर्म होने लगती है और ओवरलोड ट्रिप की समस्या आती है।
पावर फैक्टर (Power Factor – PF)
पावर फैक्टर यह दर्शाता है कि मोटर द्वारा ली गई बिजली का कितना हिस्सा वास्तव में उपयोगी काम में बदल रहा है। यदि पावर फैक्टर कम है, तो मोटर को समान मैकेनिकल पावर प्राप्त करने के लिए अधिक करंट लेना पड़ता है। सरल शब्दों में, खराब पावर फैक्टर का मतलब है बेकार करंट का बढ़ना, जिससे केबल, स्विचगियर और मोटर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
मोटर एफिशिएंसी (Efficiency)
एफिशिएंसी बताती है कि मोटर इनपुट बिजली का कितना प्रतिशत आउटपुट पावर में बदल पा रही है। कम एफिशिएंसी वाली मोटर ज्यादा ऊर्जा को हीट के रूप में नुकसान करती है, इसलिए उसे वही काम करने के लिए अधिक करंट लेना पड़ता है। उच्च एफिशिएंसी वाली मोटर कम करंट में बेहतर प्रदर्शन करती है और बिजली की बचत भी करती है।
संक्षेप में, 3 फेज मोटर का करंट केवल मोटर की रेटिंग पर नहीं, बल्कि सप्लाई क्वालिटी और मोटर की डिजाइन क्वालिटी पर भी निर्भर करता है। इन फैक्टर्स को समझना मोटर की सुरक्षा, सही उपकरण चयन और ऊर्जा बचत के लिए अत्यंत आवश्यक है।
3 फेज मोटर एम्पियर कैसे निकालें? (Step by Step )
3 फेज मोटर का करंट निकालने के लिए हमें यह समझना जरूरी है कि मोटर जितनी पावर लेती है, उतनी ही बिजली सप्लाई से खींचती है। यह करंट वोल्टेज, पावर फैक्टर और एफिशिएंसी से नियंत्रित होता है। नीचे पूरा प्रोसेस सरल तरीके से समझाया गया है।
Step 1: मोटर पावर को Watt में बदलें
अधिकतर मोटर की रेटिंग HP में दी होती है, जबकि फॉर्मूला Watt में काम करता है। इसलिए सबसे पहले HP को Watt में बदला जाता है।
Power (Watt) = HP × 746
इसका मतलब है कि 1 HP मोटर लगभग 746 Watt पावर लेती है। यदि मोटर 5 HP की है, तो उसकी पावर होगी 5 × 746 = 3730 Watt। यही वह इनपुट पावर है जिस पर आगे गणना की जाती है।
Step 2: करंट निकालने का फॉर्मूला समझें और वैल्यू डालें
3 फेज मोटर के लिए करंट निकालने का स्टैंडर्ड फॉर्मूला होता है:
I = P / (√3 × V × PF × η)
यहाँ P मोटर की पावर (Watt में) है, √3 का मान 1.732 लिया जाता है, V लाइन वोल्टेज होता है (आमतौर पर 415V), PF पावर फैक्टर होता है (जैसे 0.8 या 0.85) और η मोटर की एफिशिएंसी होती है (जैसे 0.9)।
इस फॉर्मूले का अर्थ यह है कि मोटर की वास्तविक पावर को तीनों फेज की संयुक्त सप्लाई क्षमता से भाग देकर यह पता लगाया जाता है कि मोटर प्रति फेज कितना करंट खींच रही है।
Step 3: आसान उदाहरण से समझें
मान लीजिए मोटर 5 HP की है, सप्लाई वोल्टेज 415V है, पावर फैक्टर 0.8 है और एफिशिएंसी 0.9 है।
पहले पावर निकालें: 5 × 746 = 3730 Watt
अब फॉर्मूला में डालें:
I = 3730 / (1.732 × 415 × 0.8 × 0.9)
इसका परिणाम लगभग 7.2 Ampere आएगा।
यानी यह 5 HP की 3 फेज मोटर सामान्य लोड पर लगभग 7 एम्पियर करंट लेगी।
यह निकाला गया करंट फुल लोड करंट के आसपास होता है। स्टार्टिंग के समय मोटर इससे 5 से 7 गुना तक ज्यादा करंट ले सकती है। इसलिए हमेशा केबल, MCB, MCCB और कॉन्टैक्टर का चयन करते समय इसी फुल लोड करंट को आधार माना जाता है।
इस तरीके से आप किसी भी 3 फेज मोटर का एम्पियर आसानी से और सही ढंग से निकाल सकते हैं।
3 फेज मोटर एम्पियर जानना क्यों ज़रूरी है?
3 फेज मोटर का सही संचालन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसका एम्पियर जानना अत्यंत आवश्यक होता है। एम्पियर केवल मोटर द्वारा ली जाने वाली धारा को नहीं दर्शाता, बल्कि उसी के आधार पर सुरक्षा उपकरण, केबल साइज और प्रोटेक्शन सेटिंग्स तय की जाती हैं। इसलिए इस विषय को समझना हर इलेक्ट्रिकल टेक्नीशियन और इंजीनियर के लिए महत्वपूर्ण है।
सही MCB / MCCB सिलेक्शन
मोटर का सही एम्पियर पता होना इसलिए जरूरी है ताकि उसके अनुसार सही रेटिंग का MCB या MCCB लगाया जा सके। यदि ब्रेकर की रेटिंग मोटर के वास्तविक एम्पियर से कम होगी, तो मोटर के स्टार्ट होते ही या हल्का लोड बढ़ने पर बार-बार ट्रिपिंग होगी। वहीं यदि ब्रेकर बहुत ज्यादा रेटिंग का चुन लिया गया, तो फॉल्ट या ओवरलोड की स्थिति में वह समय पर ट्रिप नहीं करेगा, जिससे मोटर और वायरिंग को गंभीर नुकसान हो सकता है।
सही केबल साइज का चयन
केबल साइज सीधे मोटर के एम्पियर पर निर्भर करता है। यदि मोटर जितना करंट खींचती है, उससे पतली केबल लगा दी जाए, तो केबल में हीटिंग शुरू हो जाती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर केबल का इंसुलेशन खराब हो सकता है और शॉर्ट सर्किट या फायर का खतरा बढ़ जाता है। सही एम्पियर जानकर उचित केबल साइज चुनने से वोल्टेज ड्रॉप कम होता है और मोटर को स्थिर व सुरक्षित सप्लाई मिलती है।
ओवरलोड रिले (OLR) की सही सेटिंग
ओवरलोड रिले मोटर की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और इसकी सेटिंग मोटर के फुल लोड करंट (FLC) पर आधारित होती है। आमतौर पर OLR की सेटिंग 1.1 × FLC रखी जाती है ताकि मोटर सामान्य लोड पर बिना ट्रिप किए चल सके, लेकिन ओवरलोड की स्थिति में तुरंत सप्लाई कट हो जाए। यदि एम्पियर का सही मान पता न हो, तो OLR, MPCB या तो जल्दी-जल्दी ट्रिप करेगा या फिर मोटर को ओवरलोड से बचा ही नहीं पाएगा।
मोटर नेमप्लेट एम्पियर क्या बताता है?
मोटर की नेमप्लेट पर दिया गया एम्पियर उस करंट को दर्शाता है जिस पर मोटर को निर्माता द्वारा वास्तविक परिस्थितियों में टेस्ट किया गया होता है। यह वैल्यू मोटर के डिजाइन, वाइंडिंग, कूलिंग, एफिशिएंसी और पावर फैक्टर को ध्यान में रखकर तय की जाती है। इसलिए नेमप्लेट एम्पियर मोटर के लिए सबसे सटीक और सुरक्षित संदर्भ माना जाता है और यह बताता है कि मोटर सामान्य फुल लोड पर वास्तव में कितना करंट लेगी।
कैलकुलेटर एम्पियर का उद्देश्य क्या होता है?
कैलकुलेटर से निकाला गया एम्पियर एक थ्योरी आधारित वैल्यू होती है, जिसमें हम औसत पावर फैक्टर और एफिशिएंसी मानकर गणना करते हैं। यह वैल्यू मोटर के साइज का अनुमान लगाने, केबल और प्रोटेक्शन डिवाइस की शुरुआती डिजाइन करने और प्रोजेक्ट प्लानिंग के लिए उपयोगी होती है। हालांकि, यह वैल्यू वास्तविक ऑपरेटिंग कंडीशन जैसे तापमान, लोड प्रोफाइल और मेक-टू-मेक अंतर को पूरी तरह नहीं दर्शा पाती।
नेमप्लेट बनाम कैलकुलेटर: फाइनल निर्णय क्यों नेमप्लेट पर आधारित होना चाहिए
फाइनल इंस्टॉलेशन के समय हमेशा नेमप्लेट एम्पियर को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि वही मोटर का वास्तविक फुल लोड करंट दर्शाता है। यदि कैलकुलेटर वैल्यू को फाइनल मान लिया जाए, तो प्रोटेक्शन डिवाइस की सेटिंग गलत हो सकती है, जिससे या तो अनावश्यक ट्रिपिंग होगी या मोटर ओवरलोड से सुरक्षित नहीं रह पाएगी। इसलिए सुरक्षित और भरोसेमंद संचालन के लिए नेमप्लेट एम्पियर को ही अंतिम और मानक संदर्भ माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
1. 3 फेज मोटर कितने एम्पियर की होती है?
3 फेज मोटर का एम्पियर कोई एक तय मान नहीं होता, बल्कि यह मोटर की HP (या kW), सप्लाई वोल्टेज, पावर फैक्टर और एफिशिएंसी पर निर्भर करता है। जैसे-जैसे मोटर की क्षमता (HP) बढ़ती है, उसका फुल लोड करंट भी बढ़ता जाता है। इसी तरह यदि वोल्टेज कम हो या पावर फैक्टर और एफिशिएंसी खराब हो, तो मोटर अपेक्षाकृत ज्यादा करंट खींचती है।
उदाहरण के तौर पर, सामान्य 415V सप्लाई, 0.8 पावर फैक्टर और लगभग 90% एफिशिएंसी पर चलने वाली 5 HP 3 फेज मोटर का फुल लोड करंट लगभग 7 से 8 Amp होता है। वास्तविक करंट मोटर के लोड और ऑपरेटिंग कंडीशन के अनुसार थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है, इसलिए सटीक मान के लिए हमेशा मोटर की नेमप्लेट वैल्यू को ही प्राथमिकता दी जाती है।
2. 1 HP 3 फेज मोटर का करंट कितना होता है?
415V सप्लाई पर चलने वाली 1 HP 3 फेज मोटर का नॉर्मल फुल लोड करंट आमतौर पर 1.5 से 2 Amp के बीच होता है। यह करंट मोटर के पावर फैक्टर और एफिशिएंसी पर निर्भर करता है, इसलिए अलग-अलग मेक या डिजाइन की मोटरों में इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है। सामान्य लोड पर मोटर इस रेंज में स्थिर रूप से चलती है, जबकि स्टार्टिंग के समय यही मोटर कुछ सेकंड के लिए इससे कई गुना ज्यादा करंट ले सकती है।
सुरक्षा और सही चयन के लिए हमेशा मोटर की नेमप्लेट पर दिए गए करंट को ही अंतिम मान माना जाना चाहिए।
3. 3 फेज मोटर करंट निकालने का फॉर्मूला क्या है?
3 फेज मोटर का करंट निकालने के लिए मानक और सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला फॉर्मूला यह है:
I = P / (√3 × V × PF × η)
इस फॉर्मूले में I मोटर का फुल लोड करंट (Amp) होता है, P मोटर की इनपुट पावर (Watt में) होती है, V लाइन वोल्टेज होता है (जैसे 415V), PF पावर फैक्टर को दर्शाता है और η मोटर की एफिशिएंसी होती है। √3 का मान 1.732 लिया जाता है, जो 3 फेज सिस्टम की विशेषता को दर्शाता है।
4. 3 फेज मोटर के लिए सही MCB कैसे चुनें?
3 फेज मोटर के लिए MCB का चयन मोटर के फुल लोड करंट (FLC) के आधार पर किया जाता है। सामान्यतः MCB की रेटिंग FLC (Full Load Current) से 25–30% अधिक रखी जाती है, ताकि मोटर के स्टार्टिंग करंट के दौरान अनावश्यक ट्रिपिंग न हो और साथ ही ओवरलोड की स्थिति में सुरक्षा बनी रहे।