ac and dc diffrence diagram (प्रत्यावर्ती धारा (AC) और प्रत्यक्ष धारा (DC)
प्रत्यावर्ती धारा (AC) और प्रत्यक्ष धारा (DC)

प्रत्यावर्ती धारा (AC) और प्रत्यक्ष धारा (DC) : परिभाषा, अंतर, उपयोग और महत्व

आज के आधुनिक युग में बिजली हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न और अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। सुबह अलार्म घड़ी से लेकर रात की रोशनी तक, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, घरेलू उपकरण, औद्योगिक मशीनें और इलेक्ट्रिक वाहन—लगभग हर तकनीक विद्युत ऊर्जा पर ही निर्भर करती है। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि यह बिजली वास्तव में किस रूप में हमारे उपकरणों तक पहुँचती है?

वास्तव में, विद्युत धारा मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है—प्रत्यावर्ती धारा (AC) और प्रत्यक्ष धारा (DC)। दोनों धाराओं की प्रकृति, प्रवाह का तरीका और उपयोग अलग-अलग होता है, जिसके कारण आधुनिक विद्युत प्रणाली में इनका अपना-अपना विशेष महत्व है। किसी उपकरण में AC का उपयोग किया जाता है तो किसी में DC का, और यही अंतर विद्युत विज्ञान की बुनियादी समझ का आधार बनता है।

इस लेख में हम प्रत्यावर्ती धारा (AC) और प्रत्यक्ष धारा (DC) को सरल भाषा, उपयुक्त उदाहरणों, तालिकाओं और व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ समझने का प्रयास करेंगे, ताकि पाठक इनके मूल सिद्धांत, अंतर, उपयोग और महत्व को आसानी से समझ सकें।

विद्युत धारा क्या है? (What Is Electric Current)

विद्युत धारा वह भौतिक प्रक्रिया है जिसमें किसी चालक (जैसे तांबे का तार) के भीतर विद्युत आवेशों—मुख्यतः इलेक्ट्रॉनों—का क्रमबद्ध प्रवाह होता है। जब किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर (Voltage) लगाया जाता है, तो इलेक्ट्रॉनों पर विद्युत बल कार्य करता है और वे गति करने लगते हैं। इसी नियंत्रित गति को हम विद्युत धारा (Electric Current) कहते हैं।

explin diagram of Electric Current प्रत्यावर्ती धारा (AC) और प्रत्यक्ष धारा (DC)
What Is Electric Current

वैज्ञानिक दृष्टि से, विद्युत धारा को समय की प्रति इकाई में प्रवाहित होने वाले कुल आवेश की मात्रा के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसी कारण इसका SI मात्रक एम्पीयर (Ampere – A) है।

गणितीय रूप में: यदि 𝑄 आवेश t समय में प्रवाहित होता है, तो धारा:

𝐼= 𝑄 /𝑡

जहाँ—

  • I = विद्युत धारा
  • 𝑄 = विद्युत आवेश
  • 𝑡 = समय

विद्युत धारा का मापन एमीटर (Ammeter) नामक यंत्र से किया जाता है, जिसे परिपथ में श्रेणीक्रम (series) में जोड़ा जाता है ताकि धारा का सही मान प्राप्त हो सके।

एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्य यह है कि वास्तविक रूप से इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक से धनात्मक सिरे की ओर प्रवाहित होते हैं, लेकिन ऐतिहासिक कारणों से धारा की पारंपरिक दिशा धनात्मक से ऋणात्मक मानी जाती है। यही परंपरा आज भी विद्युत सिद्धांतों में उपयोग की जाती है।

विद्युत धारा का प्रवाह दो भिन्न रूपों में पाया जाता है—प्रत्यावर्ती धारा (AC) और प्रत्यक्ष धारा (DC)। इन दोनों के बीच मुख्य अंतर इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा से जुड़ा होता है।

  • AC में इलेक्ट्रॉन आगे–पीछे दिशा बदलते हुए दोलन करते हैं।
  • DC में इलेक्ट्रॉन एक ही दिशा में लगातार प्रवाहित होते हैं।

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प्रत्यावर्ती धारा (AC) क्या है?

प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current – AC) वह विद्युत धारा है जिसमें विद्युत आवेशों का प्रवाह समय के साथ अपनी दिशा और परिमाण दोनों बदलता रहता है। सरल शब्दों में कहें तो इसमें इलेक्ट्रॉन एक ही दिशा में लगातार नहीं चलते, बल्कि एक निश्चित आवृत्ति पर आगे–पीछे दोलन करते हैं। यही कारण है कि AC को एक गतिशील और आवर्ती (periodic) धारा कहा जाता है।

what is alternating current explain diagram (प्रत्यावर्ती धारा (AC) क्या है)
प्रत्यावर्ती धारा (AC) क्या है

प्रत्यावर्ती धारा को प्रायः साइन तरंग (Sine Wave) के रूप में दर्शाया जाता है। यह तरंग समय के साथ वोल्टेज और धारा के निरंतर परिवर्तन को दर्शाती है। इन परिवर्तनों की दर को आवृत्ति (Frequency) कहा जाता है, जिसे हर्ट्ज़ (Hz) में मापा जाता है।

भारत में AC की मानक आवृत्ति 50 Hz होती है, अर्थात् धारा एक सेकंड में 50 बार अपनी दिशा बदलती है।

प्रत्यावर्ती धारा (AC) की विशेषताएँ

प्रत्यावर्ती धारा (AC) की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं—इसमें धारा और वोल्टेज दोनों का दिशा और परिमाण समय-समय पर बदलता रहता है, जिससे यह निरंतर एक समान नहीं रहती। ट्रांसफॉर्मर की सहायता से AC के वोल्टेज को आसानी से बढ़ाया या घटाया जा सकता है, जो इसके वितरण को सरल और सुरक्षित बनाता है।

उच्च वोल्टेज पर लंबी दूरी तक संचरण करने पर ऊर्जा हानि कम होती है, इसलिए विद्युत शक्ति के ट्रांसमिशन के लिए AC अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। इन्हीं गुणों के कारण घरेलू, व्यावसायिक तथा औद्योगिक क्षेत्रों में प्रत्यावर्ती धारा का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

प्रत्यावर्ती धारा (AC) का स्रोत

प्रत्यावर्ती धारा का उत्पादन मुख्यतः अल्टरनेटर या जनरेटर द्वारा किया जाता है। ये जनरेटर विद्युत संयंत्रों (पावर स्टेशन, बिजली घर) में स्थापित होते हैं, जहाँ यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। माइकल फैराडे के विद्युत-चुंबकीय प्रेरण सिद्धांत पर आधारित यही तकनीक आज की आधुनिक विद्युत प्रणाली की नींव है।

प्रत्यावर्ती धारा AC का महत्व

बिजली ग्रिड में AC का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि इसे उच्च वोल्टेज पर भेजना और फिर उपभोक्ता स्तर पर सुरक्षित वोल्टेज में बदलना सरल होता है। घरेलू उपकरणों तक पहुँचने से पहले ट्रांसफॉर्मर द्वारा वोल्टेज कम किया जाता है। अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बाद में अपने आंतरिक परिपथ में AC को DC में बदलकर उपयोग करते हैं।

प्रत्यावर्ती धारा (AC) के प्रमुख उपयोग

  • घरों में बिजली की आपूर्ति
  • पंखा, बल्ब, टीवी, फ्रिज जैसे घरेलू उपकरण
  • एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन
  • औद्योगिक मशीनें और मोटर
  • ट्रांसफॉर्मर और विद्युत ग्रिड प्रणाली

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प्रत्यक्ष धारा (DC) क्या है?

प्रत्यक्ष धारा (Direct Current – DC) वह विद्युत धारा है जिसमें विद्युत आवेशों का प्रवाह केवल एक ही दिशा में होता है और जिसका मान समय के साथ लगभग स्थिर बना रहता है। इसमें न तो धारा की दिशा बदलती है और न ही वोल्टेज की ध्रुवता। वैज्ञानिक दृष्टि से कहा जाए तो DC में आवृत्ति शून्य (0 Hz) होती है, क्योंकि इसमें कोई दोलन या आवर्ती परिवर्तन नहीं होता।

what is direct current diagram (प्रत्यक्ष धारा (DC) क्या है)
प्रत्यक्ष धारा (DC) क्या है

DC में इलेक्ट्रॉन एक सिरे से दूसरे सिरे की ओर निरंतर और एकदिशीय गति करते हैं। यदि स्रोत के धनात्मक और ऋणात्मक टर्मिनल बदल दिए जाएँ, तो उपकरण सामान्य रूप से कार्य नहीं करता, क्योंकि DC में ध्रुवता का स्थिर रहना आवश्यक होता है।

प्रत्यक्ष धारा (DC) की विशेषताएँ

प्रत्यक्ष धारा (DC) की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं—इसमें धारा हमेशा एक ही दिशा में प्रवाहित होती है, जिससे इसका व्यवहार स्थिर और पूर्वानुमेय रहता है। DC का वोल्टेज समय के साथ लगभग समान रहता है, इसलिए यह उन उपकरणों के लिए उपयुक्त है जिन्हें नियंत्रित और समान ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसी कारण संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और सर्किटों में प्रत्यक्ष धारा का व्यापक उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त, ऊर्जा भंडारण के लिए DC आदर्श मानी जाती है, क्योंकि बैटरियों और सेल में विद्युत ऊर्जा प्रत्यक्ष धारा के रूप में ही संग्रहित की जाती है।

प्रत्यक्ष धारा (DC) के स्रोत

प्रत्यक्ष धारा के स्रोत कई सामान्य और व्यावहारिक रूपों में उपलब्ध हैं। इनमें बैटरी और सेल (जैसे ड्राई सेल और लिथियम-आयन बैटरी) प्रमुख हैं, जो पोर्टेबल उपकरणों में व्यापक रूप से उपयोग होते हैं। सोलर पैनल सूर्य के प्रकाश को सीधे प्रत्यक्ष धारा में परिवर्तित करते हैं, जबकि पावर बैंक संग्रहीत DC ऊर्जा को विभिन्न उपकरणों को प्रदान करते हैं। इसके अलावा, रेक्टिफायर ऐसे उपकरण हैं जो प्रत्यावर्ती धारा (AC) को प्रत्यक्ष धारा (DC) में परिवर्तित कर इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के लिए उपयोगी बनाते हैं।

DC का प्रतीक

इलेक्ट्रॉनिक्स में DC को प्रायः सीधी रेखा (—) या सीधी रेखा के साथ बिंदीदार रेखा के संयोजन से दर्शाया जाता है, जो इसके स्थिर और एकदिशीय स्वभाव को प्रदर्शित करता है।

प्रत्यक्ष धारा (DC) के प्रमुख उपयोग

  • मोबाइल फोन, लैपटॉप, वायरलेस चार्जिंग और टैबलेट
  • टॉर्च, रिमोट कंट्रोल और छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और उनकी बैटरियाँ
  • सोलर एनर्जी सिस्टम
  • इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, माइक्रोचिप्स और कंट्रोल सिस्टम

प्रत्यक्ष धारा (DC) एक शांत, स्थिर और भरोसेमंद विद्युत प्रवाह है, जो उन सभी उपकरणों के लिए आवश्यक है जहाँ निरंतर और सटीक ऊर्जा आपूर्ति की जरूरत होती है। यही कारण है कि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की रीढ़ DC को माना जाता है।

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प्रत्यावर्ती धारा (AC) और प्रत्यक्ष धारा (DC) में अंतर

प्रत्यावर्ती धारा (AC) और प्रत्यक्ष धारा (DC) दोनों ही विद्युत धारा के मूल रूप हैं, लेकिन उनकी प्रकृति, व्यवहार और उपयोग में स्पष्ट अंतर होता है। इन अंतरों को समझना विद्युत विज्ञान और दैनिक जीवन में बिजली के सही उपयोग के लिए आवश्यक है। नीचे दी गई तालिका (Table) के माध्यम से AC और DC के बीच के मुख्य अंतरों को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत किया गया है।

AC (प्रत्यावर्ती धारा)DC (प्रत्यक्ष धारा)
एसी को बिना अधिक ऊर्जा हानि के बहुत लंबी दूरी तक, यहाँ तक कि दो शहरों के बीच भी, आसानी से प्रेषित किया जा सकता है।डीसी को बहुत लंबी दूरी तक प्रेषित करना कठिन होता है, क्योंकि इसमें विद्युत शक्ति की हानि अधिक होती है।
घूमने वाले चुंबकों के कारण एसी में विद्युत धारा की दिशा बदलती रहती है।स्थिर चुंबकत्व के कारण डीसी का प्रवाह एक ही दिशा में बना रहता है।
एसी की आवृत्ति देश के अनुसार अलग-अलग होती है, सामान्यतः 50 Hz या 60 Hz।डीसी की आवृत्ति शून्य (0 Hz) होती है, क्योंकि इसमें दिशा परिवर्तन नहीं होता।
एसी में धारा का प्रवाह समय-समय पर आगे और पीछे दिशा बदलता रहता है।डीसी में धारा लगातार एक ही दिशा में प्रवाहित होती है।
एसी में इलेक्ट्रॉन आगे–पीछे गति करते हुए अपनी दिशा बदलते रहते हैं।डीसी में इलेक्ट्रॉन केवल एक ही दिशा में आगे की ओर गति करते हैं।
एसी को ट्रांसफॉर्मर द्वारा वोल्टेज बढ़ा या घटाया जा सकता है।डीसी में वोल्टेज परिवर्तन के लिए विशेष इलेक्ट्रॉनिक परिपथ की आवश्यकता होती है।
एसी का उपयोग मुख्यतः घरेलू और औद्योगिक बिजली आपूर्ति में होता है।डीसी का उपयोग बैटरी आधारित और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में होता है।

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AC को DC में और DC को AC में कैसे बदला जाता है?

आधुनिक विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में अक्सर ऐसी स्थिति आती है जहाँ AC और DC के बीच रूपांतरण (conversion) आवश्यक होता है। बिजली घरों से हमें AC मिलती है, जबकि अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक उपकरण DC पर कार्य करते हैं। इसी प्रकार, बैटरी में संग्रहीत DC ऊर्जा से घरेलू AC उपकरण चलाने के लिए DC को AC में बदलना पड़ता है। यह कार्य विशेष इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों द्वारा किया जाता है।

AC से DC कैसे बदली जाती है? (Rectification)

AC को DC में बदलने की प्रक्रिया को रेक्टिफिकेशन (Rectification) कहा जाता है और इसके लिए रेक्टिफायर (Rectifier) का उपयोग किया जाता है। मोबाइल चार्जर, लैपटॉप एडॉप्टर और SMPS इसके सामान्य उदाहरण हैं। यह प्रक्रिया निम्न चरणों में होती है:

1. स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर: सबसे पहले उच्च वोल्टेज AC (जैसे 230V) को ट्रांसफॉर्मर की सहायता से कम वोल्टेज AC में बदला जाता है, ताकि इलेक्ट्रॉनिक सर्किट सुरक्षित रूप से काम कर सकें।

2. रेक्टिफायर (Rectifier): इसके बाद डायोड का उपयोग किया जाता है। सामान्यतः ब्रिज रेक्टिफायर (चार डायोड) लगाया जाता है, जो AC के धनात्मक और ऋणात्मक दोनों अर्धचक्रों को एक ही दिशा में मोड़ देता है। इससे स्पंदित DC (Pulsating DC) प्राप्त होती है।

3. फ़िल्टर (Capacitor): रेक्टिफायर से प्राप्त DC पूरी तरह स्थिर नहीं होती। इसे स्मूथ करने के लिए कैपेसिटर लगाया जाता है, जो वोल्टेज के उतार-चढ़ाव को कम करता है।

4. वोल्टेज रेगुलेटर: अंत में, रेगुलेटर का उपयोग करके आउटपुट वोल्टेज को पूरी तरह स्थिर और नियंत्रित किया जाता है।

मोबाइल चार्जर इसी सिद्धांत पर काम करता है—सॉकेट से आने वाली AC को अंदर DC में बदलकर बैटरी को सुरक्षित रूप से चार्ज करता है।

DC से AC कैसे बदली जाती है? (Inversion)

DC को AC में बदलने की प्रक्रिया को इनवर्ज़न (Inversion) कहा जाता है और इसके लिए इनवर्टर (Inverter) का उपयोग किया जाता है। घरों में इस्तेमाल होने वाले बिजली बैकअप सिस्टम (Inverter + Battery) इसका सबसे सामान्य उदाहरण हैं। इस प्रक्रिया का वैज्ञानिक आधार इस प्रकार है:

1. इनवर्टर सर्किट: इनवर्टर एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट होता है जिसमें ट्रांजिस्टर या MOSFET का उपयोग किया जाता है। ये घटक बहुत तेज़ी से ON–OFF स्विच करते हैं।

2. स्विचिंग क्रिया: तेज़ स्विचिंग के कारण DC वोल्टेज की दिशा बार-बार बदलती है, जिससे एक AC जैसी वेवफॉर्म उत्पन्न होती है (स्क्वेयर वेव, मॉडिफाइड साइन वेव या शुद्ध साइन वेव)।

3. ट्रांसफॉर्मर (Step-up): ट्रांसफॉर्मर की मदद से इस AC वोल्टेज को 220V तक बढ़ाया जाता है, ताकि घरेलू उपकरण चल सकें।

जब बिजली चली जाती है और इनवर्टर चालू होता है, तो वह बैटरी की DC ऊर्जा को AC में बदलकर पंखा, बल्ब और अन्य उपकरणों को चलाता है।

संक्षेप में

  • AC → DC : रेक्टिफायर द्वारा (उदाहरण: मोबाइल चार्जर)
  • DC → AC : इनवर्टर द्वारा (उदाहरण: घरेलू बिजली बैकअप सिस्टम)

इस प्रकार, रेक्टिफायर और इनवर्टर आधुनिक विद्युत प्रणाली के दो अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं, जो AC और DC के बीच सेतु (bridge) का कार्य करते हैं और हमारी रोज़मर्रा की तकनीक को संभव बनाते हैं।

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प्रत्यावर्ती धारा (AC) और प्रत्यक्ष धारा (DC) का तरंग रूप (Waveform)

विद्युत धारा के व्यवहार को समझने का सबसे वैज्ञानिक और सरल तरीका उसका तरंग रूप (Waveform) देखना है। तरंग रूप यह दर्शाता है कि समय के साथ धारा या वोल्टेज कैसे बदल रहा है। AC और DC के तरंग रूप एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न होते हैं, और यही अंतर इनके उपयोग और प्रकृति को स्पष्ट करता है।

ac and dc waveform explain diagram (प्रत्यावर्ती धारा (AC) और प्रत्यक्ष धारा (DC)
प्रत्यावर्ती धारा (AC) और प्रत्यक्ष धारा (DC) का तरंग रूप (Waveform)

AC का तरंग रूप – साइन वेव (Sinusoidal Wave)

प्रत्यावर्ती धारा (AC) का तरंग रूप साइन वेव के रूप में दर्शाया जाता है। यह एक चिकनी, घुमावदार तरंग होती है जो समय के साथ शून्य से धनात्मक, फिर शून्य से ऋणात्मक मानों तक जाती है। इस तरंग से यह स्पष्ट होता है कि AC में:

  • धारा और वोल्टेज की दिशा लगातार बदलती रहती है
  • मान धीरे-धीरे बढ़ता और घटता है, अचानक नहीं
  • प्रत्येक पूर्ण तरंग एक विद्युत चक्र (cycle) को दर्शाती है

छवि में दिखाई गई साइन वेव यह समझाने के लिए पर्याप्त है कि AC एक आवर्ती और दोलनशील धारा है, जो जनरेटर और पावर ग्रिड में उत्पन्न होती है।

DC का तरंग रूप – सीधी रेखा (Straight Line)

प्रत्यक्ष धारा (DC) का तरंग रूप एक सीधी, समतल रेखा के रूप में दिखाया जाता है। यह रेखा समय के साथ ऊपर या नीचे नहीं जाती, जिससे यह स्पष्ट होता है कि:

  • DC में धारा एक ही दिशा में लगातार बहती है
  • वोल्टेज का मान लगभग स्थिर रहता है
  • इसमें कोई दोलन या आवृत्ति नहीं होती

छवि में दिखाई गई सीधी रेखा यह दर्शाती है कि DC एक स्थिर और निरंतर ऊर्जा स्रोत है, जैसा कि बैटरी और सोलर पैनल में पाया जाता है।

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कौन-सी धारा बेहतर है – AC या DC?

यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, लेकिन इसका एक ही सीधा उत्तर नहीं है। AC और DC में से कौन-सी बेहतर है, यह पूरी तरह उसके उपयोग (application) पर निर्भर करता है। दोनों धाराओं की प्रकृति अलग है और इसी कारण आधुनिक विद्युत प्रणालियों में दोनों की आवश्यकता पड़ती है।

जब लंबी दूरी तक बिजली का संचरण करना होता है, तब प्रत्यावर्ती धारा (AC) अधिक उपयुक्त मानी जाती है। AC को ट्रांसफॉर्मर की सहायता से बहुत आसानी से उच्च वोल्टेज में परिवर्तित किया जा सकता है। उच्च वोल्टेज पर विद्युत धारा का मान कम हो जाता है, जिससे तारों में होने वाली ऊर्जा हानि (I²R हानि) काफी घट जाती है।

इसी वैज्ञानिक कारण से बिजली घरों से शहरों और गाँवों तक, तथा घरों, कार्यालयों और कारखानों में विद्युत आपूर्ति AC के रूप में की जाती है। यही कारण है कि पूरी पावर ग्रिड प्रणाली AC पर आधारित होती है।

वहीं दूसरी ओर, जब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और ऊर्जा भंडारण की बात आती है, तब प्रत्यक्ष धारा (DC) अधिक उपयुक्त होती है। DC स्थिर वोल्टेज और एकदिशीय प्रवाह प्रदान करती है, जो संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक सर्किटों के सही संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक है। माइक्रोचिप, प्रोसेसर और कंट्रोल सर्किट अस्थिर या बदलती धारा पर ठीक से कार्य नहीं कर सकते।

इसी कारण मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टीवी, साथ ही बैटरी, पावर बैंक, सोलर ऊर्जा प्रणाली और इलेक्ट्रिक वाहन सभी DC पर आधारित होते हैं। इसके अतिरिक्त, ऊर्जा को संग्रहीत करने के लिए DC ही व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. AC और DC में मुख्य अंतर क्या है

AC और DC में मुख्य अंतर यह है कि प्रत्यावर्ती धारा (AC) में विद्युत धारा की दिशा और परिमाण समय-समय पर बदलते रहते हैं, जबकि प्रत्यक्ष धारा (DC) में धारा केवल एक ही दिशा में प्रवाहित होती है और इसका वोल्टेज लगभग स्थिर रहता है। AC को ट्रांसफॉर्मर की सहायता से आसानी से उच्च या निम्न वोल्टेज में बदला जा सकता है, इसलिए यह लंबी दूरी तक बिजली के संचरण के लिए उपयुक्त होती है, जबकि DC संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और ऊर्जा भंडारण के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है। इसी कारण बिजली घरों से मिलने वाली सप्लाई AC होती है, जबकि बैटरी, सोलर सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस DC पर कार्य करते हैं

2. DC धारा को सीधे घरों में क्यों नहीं उपयोग किया जाता?

DC धारा को सीधे घरों में उपयोग नहीं किया जाता क्योंकि प्रत्यक्ष धारा का वोल्टेज बदलना कठिन और महँगा होता है। DC के वोल्टेज को बढ़ाने या घटाने के लिए जटिल इलेक्ट्रॉनिक सर्किटों की आवश्यकता पड़ती है, जबकि AC का वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर की सहायता से बहुत आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। यदि DC को लंबी दूरी तक कम वोल्टेज पर भेजा जाए तो धारा अधिक होगी, जिससे तारों में I²R हानि बहुत बढ़ जाती है और ऊर्जा का बड़ा भाग नष्ट हो जाता है। इसके अलावा, बड़े पैमाने पर DC वितरण की संरचना जटिल और खर्चीली होती है। इसी कारण विद्युत उत्पादन, ट्रांसमिशन और घरेलू वितरण के लिए AC अधिक व्यावहारिक, किफायती और सुरक्षित माना जाता है, जबकि घरों के उपकरणों के अंदर आवश्यकतानुसार AC को DC में परिवर्तित कर लिया जाता है।

3. DC को अधिक सुरक्षित क्यों माना जाता है?

DC को अधिक सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें धारा एक ही दिशा में स्थिर रूप से बहती है और वोल्टेज में अचानक परिवर्तन नहीं होता। कम वोल्टेज पर DC से इलेक्ट्रिक शॉक का खतरा अपेक्षाकृत कम होता है, इसलिए यह बैटरी, मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में सुरक्षित रूप से उपयोग की जाती है।

4. सोलर पैनल AC बनाते हैं या DC?

सोलर पैनल प्रत्यक्ष धारा (DC) उत्पन्न करते हैं।
सोलर पैनल में सूर्य के प्रकाश से इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह एक ही दिशा में होता है, इसलिए उससे प्राप्त विद्युत ऊर्जा DC के रूप में होती है। घरेलू या ग्रिड उपयोग के लिए इसी DC को इन्वर्टर की सहायता से AC में बदला जाता है, क्योंकि घरों और पावर ग्रिड में AC की आपूर्ति होती है।


धन्यवाद! हमें उम्मीद है कि यह पोस्ट “प्रत्यावर्ती धारा (AC) और प्रत्यक्ष धारा (DC) ” आपके लिए जानकारीपूर्ण और मददगार रही होगी। अगर आपके कोई विचार, अनुभव या सवाल हैं, तो उन्हें नीचे कमेंट में शेयर करना न भूलें।

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