OLTC और NLTC क्या है
OLTC और NLTC क्या है

ट्रांसफार्मर के ऑन लोड और नो लोड टैप चेंजर | OLTC और NLTC संरचना, कार्य एवं महत्व

ट्रांसफार्मर बिजली वितरण और पावर सिस्टम का एक अहम हिस्सा है। लेकिन अक्सर यह देखा गया है कि ट्रांसफार्मर के टैप चेंजर (Tap Changer) के बारे में समझ कम होती है। टैप चेंजर ट्रांसफार्मर के वोल्टेज को नियंत्रित करने और सिस्टम की स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस लेख में हम OLTC (On-Load Tap Changer) और NLTC (No-Load Tap Changer) के बारे में विस्तार से जानेंगे – उनकी संरचना, कार्य, महत्व, अंतर और उपयोग। इसके साथ ही, हम समझेंगे कि सही टैप चेंजर का चयन कैसे पावर सिस्टम की दक्षता और विश्वसनीयता को प्रभावित करता है।

ट्रांसफार्मर के टैप चेंजर (Tap Changer) OLTC और NLTC क्या है?

ट्रांसफार्मर में टैप चेंजर एक ऐसा उपकरण है जो ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग में टर्न्स की संख्या बदलकर आउटपुट वोल्टेज को नियंत्रित करता है। आसान शब्दों में, यह वोल्टेज को जरूरत के अनुसार बढ़ाता या घटाता है ताकि बिजली हमेशा स्थिर और सुरक्षित रहे। पावर सिस्टम में लोड बदलने या अचानक उतार-चढ़ाव होने पर टैप चेंजर काम करता है और वोल्टेज को स्थिर रखता है, जिससे ट्रांसफार्मर और जुड़े उपकरण सुरक्षित रहते हैं।

यह खासकर बड़े ग्रिड, उद्योगों और उन जगहों पर महत्वपूर्ण है जहां लगातार और भरोसेमंद बिजली की जरूरत होती है। टैप चेंजर की वजह से बिजली की गुणवत्ता बेहतर होती है, उपकरणों की उम्र बढ़ती है और पूरे पावर सिस्टम की विश्वसनीयता मजबूत होती है।

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ट्रांसफार्मर में टैप चेंजर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:

  • ऑन-लोड टैप चेंजर (OLTC / On-Load Tap Changer): यह ट्रांसफार्मर चालू रहते हुए भी वोल्टेज बदल सकता है। इसका मतलब है कि लोड के दौरान भी वोल्टेज एडजस्ट किया जा सकता है, जिससे पावर सिस्टम हमेशा स्थिर और सुरक्षित रहता है।
  • नो-लोड टैप चेंजर (NLTC / No-Load Tap Changer): इसे वोल्टेज बदलने के लिए ट्रांसफार्मर को पहले बंद करना पड़ता है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब सिस्टम में कोई बड़ा बदलाव करने की जरूरत हो और लोड प्रभावित न हो।

सिंपल शब्दों में कहें, टैप चेंजर ट्रांसफार्मर का “वोल्टेज नियंत्रक (Voltage Control)” है। यह सुनिश्चित करता है कि चाहे बिजली की मांग बढ़े या घटे, आउटपुट वोल्टेज हमेशा सही और स्थिर रहे।

ऑन-लोड टैप चेंजर (OLTC On-Load Tap Changer) क्या है?

ऑन-लोड टैप चेंजर ट्रांसफार्मर का वह उपकरण है जो ट्रांसफार्मर को बंद किए बिना आउटपुट वोल्टेज को नियंत्रित करता है। सरल शब्दों में, जब ट्रांसफार्मर चल रहा होता है और लोड बदलता है, तब On-Load Tap Changer वाइंडिंग के टर्न रेशियो (turns ratio) को बदलकर वोल्टेज को सही स्तर पर बनाए रखता है।

ऑन-लोड टैप चेंजर संरचना (OLTC Structure)

On-Load Tap Changer में विशेष प्रकार के मेकिंग, ब्रेकिंग और रिकनेक्टिंग कॉन्टैक्ट्स होते हैं, जो इस तरह डिज़ाइन किए जाते हैं कि टैप बदलते समय सप्लाई में कोई रुकावट न आए। इसमें एक रेगुलेटिंग या टैप वाइंडिंग होती है, जो On-Load Tap Changer से जुड़ी रहती है। स्विचिंग के दौरान “Make-Before-Break” सिद्धांत अपनाया जाता है, यानी नया टैप पहले जुड़ता है और पुराना टैप बाद में अलग होता है।

इससे लोड करंट अचानक नहीं टूटता। टैप बदलते समय करंट को सुरक्षित रखने के लिए ट्रांज़िशन इम्पीडेंस (resistor या reactor) का उपयोग किया जाता है, जो अस्थायी रूप से बनने वाली अतिरिक्त धारा को सीमित करता है।

कार्य (OLTC Working)

On-Load Tap Changer प्राथमिक या द्वितीयक वाइंडिंग में टर्न जोड़कर या घटाकर ट्रांसफार्मर का अनुपात बदलता है। जब पावर ग्रिड में वोल्टेज ऊपर-नीचे होता है, तो On-Load Tap Changer धीरे-धीरे टैप बदलकर आउटपुट वोल्टेज को स्थिर रखता है। सामान्यतः एक टैप से दूसरे टैप के बीच वोल्टेज स्टेप ट्रांसफार्मर के रेटेड वोल्टेज का लगभग 0.8% से 2.5% होता है, जिससे वोल्टेज नियंत्रण स्मूद रहता है।

महत्व (Importance OF OLTC)

On-Load Tap Changer बड़े पावर ट्रांसफार्मर और सब-स्टेशन में अत्यंत आवश्यक होता है क्योंकि यह निरंतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करता है, वोल्टेज स्टेबिलिटी और पावर क्वालिटी बनाए रखता है और बार-बार ट्रांसफार्मर बंद करने की जरूरत समाप्त करता है। इसी कारण यह तकनीकी रूप से विश्वसनीय और आर्थिक रूप से लाभदायक समाधान माना जाता है।

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ऑन-लोड टैप चेंजर (OLTC On-Load Tap Changer) कैसे काम करता है?

ऑन-लोड टैप चेंजर (OLTC) इस तरह काम करता है कि ट्रांसफार्मर चलते समय भी वोल्टेज को सही स्तर पर रखा जा सके। ट्रांसफार्मर की हाई-वोल्टेज (HV) वाइंडिंग में कई टैप (टर्मिनल) बने होते हैं। On-Load Tap Changer इन टैप्स को एक विशेष स्विचिंग मैकेनिज्म के माध्यम से चुनता और बदलता है, जिससे वाइंडिंग के टर्न बढ़ते या घटते हैं और आउटपुट वोल्टेज अपने-आप एडजस्ट हो जाता है।

ऑन-लोड टैप चेंजर (OLTC On-Load Tap Changer) कैसे काम करता है
ऑन-लोड टैप चेंजर (OLTC On-Load Tap Changer) कैसे काम करता है

OLTC की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लोड करंट को रोके बिना टैप बदल सकता है। यानी ट्रांसफार्मर को बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती और बिजली की आपूर्ति लगातार बनी रहती है। टैप बदलते समय अंदर का मैकेनिज्म इस तरह डिज़ाइन होता है कि नया टैप पहले जुड़ता है और पुराना बाद में हटता है, जिससे सप्लाई में झटका नहीं लगता।

आधुनिक On-Load Tap Changer में ऑटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम होता है, जिसे Remote Tap Changer Controller (RTCC) कहा जाता है। यह लगातार आउटपुट वोल्टेज को मॉनिटर करता रहता है। जैसे ही वोल्टेज तय सीमा से ऊपर या नीचे जाता है, RTCC मोटर ड्राइव को सिग्नल भेजता है और टैप अपने-आप बदल जाता है।

इसके मुख्य भागों में टैप सेलेक्टर, डायवर्टर स्विच, स्प्रिंग-एनर्जी स्टोरेज मैकेनिज्म और मोटर ड्राइव शामिल होते हैं। इन सभी के समन्वय से On-Load Tap Changer बिना रुकावट, सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से वोल्टेज को स्थिर बनाए रखता है।

OLTC (On-Load Tap Changer) के प्रकार

OLTC को इस आधार पर दो मुख्य प्रकारों में बाँटा जाता है कि टैप बदलने का निर्णय कौन लेता है – इंसान या सिस्टम। दोनों का उपयोग अलग-अलग जरूरतों के अनुसार किया जाता है।

1. मैनुअल OLTC (Manual On-Load Tap Changer)

मैनुअल OLTC में टैप बदलने का काम इंसान यानी ऑपरेटर करता है। जब ऑपरेटर को लगता है कि वोल्टेज सही नहीं है, तब वह कंट्रोल पैनल के जरिए टैप बदलता है। इसका उपयोग उन जगहों पर किया जाता है जहाँ वोल्टेज में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता और बार-बार एडजस्टमेंट की जरूरत नहीं पड़ती। यह सिस्टम सरल होता है और छोटे या कम संवेदनशील पावर नेटवर्क के लिए उपयुक्त माना जाता है।

2. ऑटोमैटिक OLTC (Automatic On-Load Tap Changer – AOLTC)

ऑटोमैटिक OLTC खुद ही वोल्टेज को लगातार मॉनिटर करता रहता है। जैसे ही वोल्टेज तय सीमा से ऊपर या नीचे जाता है, यह अपने-आप टैप बदल देता है। इसमें किसी इंसान के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होती। इसी कारण बड़े पावर ट्रांसफार्मर, सब-स्टेशन और पावर ग्रिड में इसका ज्यादा उपयोग होता है, जहाँ लोड बार-बार बदलता रहता है और वोल्टेज को हर समय स्थिर रखना बहुत जरूरी होता है।

OLTC की विश्वसनीयता क्यों ज़रूरी है

OLTC लगे ट्रांसफार्मर बिजली नेटवर्क के बहुत महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं। अगर OLTC ठीक से काम न करे, तो वोल्टेज बिगड़ सकता है और सप्लाई प्रभावित हो सकती है। आधुनिक वैक्यूम-टाइप OLTC पहले से बेहतर होते हैं, लेकिन फिर भी यह एक मैकेनिकल मशीन है, इसलिए थोड़े-बहुत रखरखाव की जरूरत रहती है।

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OLTC (On-Load Tap Changer) के उपयोग

OLTC का उपयोग वहाँ किया जाता है जहाँ बिजली की मांग बार-बार बदलती रहती है और वोल्टेज को लगातार स्थिर रखना बहुत जरूरी होता है। इसके प्रमुख उपयोग इस प्रकार हैं:

बड़े पावर ट्रांसफार्मर में

बड़े ट्रांसफार्मर भारी लोड को संभालते हैं। जैसे-जैसे लोड बढ़ता या घटता है, वोल्टेज भी बदलता है। On-Load Tap Changer ऐसे ट्रांसफार्मरों में वोल्टेज को चलते-चलते नियंत्रित करता है, जिससे सिस्टम सुरक्षित और स्थिर बना रहता है।

सबस्टेशन और हाई वोल्टेज ग्रिड में

सबस्टेशन में बिजली को एक स्तर से दूसरे स्तर पर बदला जाता है। On-Load Tap Changer यहाँ यह सुनिश्चित करता है कि अलग-अलग क्षेत्रों तक जाने वाली बिजली सही वोल्टेज पर पहुंचे, चाहे लोड में कितना भी बदलाव क्यों न हो।

OLTC (On-Load Tap Changer) के उपयोग
OLTC (On-Load Tap Changer) के उपयोग

पावर डिस्ट्रीब्यूशन और ट्रांसमिशन नेटवर्क में

ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में लंबी दूरी तक बिजली भेजी जाती है, जहाँ वोल्टेज गिरने की संभावना होती है। On-Load Tap Changer वोल्टेज को संतुलित रखता है, जिससे उपभोक्ताओं को स्थिर और भरोसेमंद बिजली मिलती है।

OLTC का रखरखाव (Maintenance Of OLTC)

OLTC को लंबे समय तक सुरक्षित और बिना रुकावट चलाने के लिए समय-समय पर उसकी देखभाल करना ज़रूरी होता है। पुराने ऑयल-टाइप On-Load Tap Changer में कुछ साल बाद या तय संख्या में टैप बदलने के बाद सर्विस करनी पड़ती है। आम तौर पर 7 साल या 50,000 से 100,000 ऑपरेशन के बाद इसका मेंटेनेंस किया जाता है। अगर कोई ट्रांसफार्मर लगभग 40 साल तक चलता है, तो इस दौरान उसके OLTC की लगभग 5 बार सर्विस होती है।

वैक्यूम-टाइप On-Load Tap Changer ज्यादा बेहतर होते हैं क्योंकि इनके कॉन्टैक्ट जल्दी खराब नहीं होते। इनमें लगभग 3 लाख बार टैप बदलने के बाद ही मेंटेनेंस की ज़रूरत पड़ती है। इसलिए अक्सर यह ट्रांसफार्मर के पूरे जीवनकाल में लगभग बिना मेंटेनेंस के काम कर लेते हैं।

OLTC की देखभाल में क्या-क्या किया जाता है

  • कॉन्टैक्ट की सफाई और जांच: ताकि घिसावट या कार्बन जमा होने से कोई दिक्कत न आए।
  • तेल की जांच और सफाई: तेल साफ और सूखा होना चाहिए, इसलिए उसकी टेस्टिंग और फिल्ट्रेशन की जाती है।
  • चलने वाले पार्ट्स की जांच: गियर, स्प्रिंग और मोटर आसानी से और स्मूथ तरीके से चल रहे हों, यह देखा जाता है।

ऑटोमैटिक और वैक्यूम-टाइप On-Load Tap Changer खुद-ब-खुद वोल्टेज को सही रखते हैं, कम खराब होते हैं और बहुत कम मेंटेनेंस माँगते हैं। इसी वजह से आज के पावर सिस्टम में इन्हें सबसे भरोसेमंद और बेहतर विकल्प माना जाता है।

नो-लोड टैप चेंजर NLTC (No-Load Tap Changer) क्या है?

नो-लोड टैप चेंजर, जिसे ऑफ-सर्किट टैप चेंजर (OCTC) या डी-एनर्जाइज्ड टैप चेंजर (DETC) भी कहा जाता है, ट्रांसफार्मर का एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण उपकरण है। इसका मुख्य काम ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग में फेरों (Turns) की संख्या बदलकर वोल्टेज को सही स्तर पर सेट करना होता है।

नो-लोड टैप चेंजर NLTC (No-Load Tap Changer) क्या है
नो-लोड टैप चेंजर NLTC (No-Load Tap Changer) क्या है

आसान शब्दों में समझें तो, No-Load Tap Changer को चलाने के लिए ट्रांसफार्मर को पूरी तरह बंद करना और बिजली सप्लाई से अलग करना जरूरी होता है। यानी जब तक ट्रांसफार्मर चालू है या उस पर लोड लगा है, तब तक वोल्टेज नहीं बदला जा सकता। इसी कारण इसका उपयोग वहाँ किया जाता है जहाँ वोल्टेज में बार-बार बदलाव की जरूरत नहीं होती।

No-Load Tap Changer आमतौर पर इंस्टॉलेशन या मेंटेनेंस के समय वोल्टेज को एक बार सेट करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह सिस्टम सरल, भरोसेमंद और कम खर्चीला होता है, जिससे छोटे ट्रांसफार्मर और स्थिर लोड वाले नेटवर्क में यह एक व्यावहारिक समाधान माना जाता है।

NLTC की बनावट (Construction)

नो-लोड टैप चेंजर ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक के अंदर लगाया जाता है और यह सीधे ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग से जुड़ा होता है। इसकी बनावट सरल लेकिन मजबूत होती है, ताकि लंबे समय तक सुरक्षित रूप से काम कर सके।

NLTC में मुख्य रूप से टैप कॉन्टैक्ट और टैप स्लाइडर होते हैं। टैप कॉन्टैक्ट वाइंडिंग के अलग-अलग टर्न्स से जुड़े होते हैं, जबकि टैप स्लाइडर को अलग-अलग टैप पोज़िशन पर मैनुअली सेट किया जाता है। जब स्लाइडर की पोज़िशन बदली जाती है, तो वाइंडिंग के टर्न्स की संख्या बदल जाती है, जिससे आउटपुट वोल्टेज सेट होता है।

क्योंकि No-Load Tap Changer का ऑपरेशन केवल तब किया जाता है जब ट्रांसफार्मर बंद होता है, इसलिए इसकी बनावट में जटिल स्विचिंग या आर्क कंट्रोल की जरूरत नहीं होती। इसी कारण यह डिजाइन में सरल, रखरखाव में आसान और लंबे समय तक भरोसेमंद माना जाता है।

बिलकुल। मैं No-Load Tap Changer का काम करने का तरीका साइंस और फिजिक्स के नजरिए से समझाने वाला टेक्स्ट तैयार कर सकता हूँ, ताकि यह सिर्फ सरल न लगे बल्कि तकनीकी और भौतिकी आधारित भी हो

NLTC (No-Load Tap Changer) कैसे काम करता है?

नो-लोड टैप चेंजर (NLTC) ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग में टर्न रेशियो (Turns Ratio) को बदलकर आउटपुट वोल्टेज नियंत्रित करता है। भौतिकी के हिसाब से, ट्रांसफार्मर का आउटपुट वोल्टेज इस फॉर्मूला से निर्धारित होता है:

Vs = Vp × (Ns / Np)

जहाँ Vs और Vp क्रमशः सेकेंडरी और प्राइमरी वोल्टेज हैं, और Ns और Np क्रमशः सेकेंडरी और प्राइमरी वाइंडिंग के टर्न्स हैं। NLTC इन Ns टर्न्स को बदलकर Vs को आवश्यक स्तर पर लाता है।

इस प्रक्रिया में ट्रांसफार्मर को डि-एनर्जाइज्ड (बंद) किया जाता है ताकि करंट प्रवाहित न हो। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि चालू वाइंडिंग में टर्न्स बदलने पर इंडक्टिव करंट और आर्किंग (Sparking) उत्पन्न हो सकता है, जो उपकरण को नुकसान पहुँचा सकता है। जब ट्रांसफार्मर बंद होता है, तो किसी भी चुंबकीय फ्लक्स के कारण करंट नहीं बहता, और टैप को सुरक्षित रूप से बदला जा सकता है।

टैप बदलने के बाद, वाइंडिंग की टर्न्स संख्या बदल जाने पर ट्रांसफार्मर का टर्न रेशियो नया हो जाता है, और आउटपुट वोल्टेज को नई वैल्यू मिलती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह भौतिकी के नियमों पर आधारित है—ओह्म का नियम, फाइंडिंग्स का नियम, और इंडक्शन का सिद्धांत—जो सुनिश्चित करता है कि बिजली सप्लाई स्थिर और सुरक्षित रहे।

इस प्रकार NLTC एक सरल लेकिन फिजिकल प्रिंसिपल आधारित वोल्टेज कंट्रोल डिवाइस है, जो मुख्य रूप से छोटे ट्रांसफार्मर या स्थिर लोड वाले सिस्टम में इस्तेमाल होता है।

नो-लोड टैप चेंजर (NLTC) के प्रकार

नो-लोड टैप चेंजर (NLTC) को मुख्य रूप से दो प्रकार में बांटा जा सकता है, जो इसके संचालन और नियंत्रण के तरीके पर आधारित हैं:

मैनुअल NLTC (Manual No-Load Tap Changer):

  • इसमें टैप बदलने का कार्य ऑपरेटर द्वारा हाथ से किया जाता है।
  • यह केवल तब काम करता है जब ट्रांसफार्मर बंद (Off-Load / De-energized) होता है।
  • आमतौर पर छोटे ट्रांसफार्मर या कम वोल्टेज एडजस्टमेंट वाले सिस्टम में इस्तेमाल किया जाता है।
  • यह सरल, भरोसेमंद और लागत-कुशल विकल्प है।
नो-लोड टैप चेंजर (NLTC) के प्रकार
नो-लोड टैप चेंजर (NLTC) के प्रकार

मोटर चालित या स्वचालित NLTC (Motorized / Automatic No-Load Tap Changer):

  • इसमें टैप बदलने के लिए इलेक्ट्रिक मोटर या रिमोट कंट्रोल का उपयोग होता है।
  • यह भी केवल ट्रांसफार्मर ऑफ-लोड होने पर ही ऑपरेट होता है।
  • बड़े ट्रांसफार्मरों में इस्तेमाल किया जाता है ताकि ऑपरेटर को बार-बार मैन्युअली टैप बदलने की जरूरत न पड़े।
  • यह सुविधा और ऑपरेशन की आसानी के लिए अधिक उपयुक्त है।

NLTC (No-Load Tap Changer) के उपयोग

नो-लोड टैप चेंजर (NLTC) का उपयोग मुख्य रूप से उन जगहों पर किया जाता है जहाँ बिजली की मांग स्थिर रहती है और लोड में बड़े उतार-चढ़ाव नहीं होते।

मुख्य उपयोग

  • स्थिर वोल्टेज नियंत्रण: NLTC वितरण ट्रांसफार्मर और ग्रामीण/शहरी बिजली नेटवर्क में वोल्टेज को स्थिर रखता है, जिससे उपकरण सुरक्षित रहते हैं और बिजली आपूर्ति भरोसेमंद बनती है।
  • सिस्टम विश्वसनीयता बढ़ाना: स्थिर वोल्टेज के कारण ट्रांसफार्मर और कनेक्टेड उपकरण कम तनाव में रहते हैं, जिससे उनकी उम्र बढ़ती है और फॉल्ट की संभावना कम होती है।
  • कम परिचालन लागत: वोल्टेज स्थिर रहने से ऊर्जा की बर्बादी कम होती है और रखरखाव आसान होता है, जिससे कुल लागत घटती है।
  • सरल और सुरक्षित डिज़ाइन: NLTC में कम चलने वाले हिस्से होते हैं, इसलिए यह सुरक्षित और कम मेंटेनेंस वाला विकल्प है।
  • आर्थिक समाधान: यह उन क्षेत्रों में सबसे किफायती और प्रभावी तरीका है जहाँ लोड स्थिर रहता है, जैसे डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफार्मर और छोटे औद्योगिक सेटअप।

NLTC छोटे और स्थिर लोड वाले (Electrical System) नेटवर्क के लिए सुरक्षित, भरोसेमंद, सरल और किफायती समाधान है, जो बिजली वितरण और उपकरणों की लंबी उम्र सुनिश्चित करता है।

NLTC रखरखाव (Maintenance of NLTC )

नो-लोड टैप चेंजर (NLTC) एक सरल और भरोसेमंद उपकरण है जो ट्रांसफार्मर के वोल्टेज को समायोजित करता है, लेकिन इसके लिए कम रखरखाव की आवश्यकता होती है और टैप बदलने से पहले सिस्टम बंद करना आवश्यक होता है। इसे विस्तार से समझते हैं:

कम रखरखाव (Low Maintenance)

  • NLTC का डिज़ाइन सरल और मजबूत होता है। इसमें चलने वाले हिस्से (moving parts) कम होते हैं और कोई जटिल स्विचिंग मैकेनिज्म नहीं होता।
  • टैप केवल तब बदले जाते हैं जब ट्रांसफार्मर बंद हो, इसलिए कॉन्टैक्ट्स पर घिसावट कम होती है।
  • इसका मतलब है कि नियमित सर्विस, तेल या ड्राई पार्ट्स की सफाई, और कॉन्टैक्ट्स की जांच सरल और कम बार करनी पड़ती है।
  • इसलिए NLTC लंबे समय तक भरोसेमंद रहता है और रखरखाव में समय और लागत दोनों बचते हैं।

टैप बदलने से पहले सिस्टम बंद करना आवश्यक (Off-Load Operation Required)

  • NLTC को ऑपरेट करने के लिए ट्रांसफार्मर पूरी तरह से डी-एनर्जाइज्ड (De-energized) होना चाहिए।
  • यह सुरक्षा के लिए जरूरी है क्योंकि टैप बदलते समय अगर ट्रांसफार्मर चालू रहे, तो लोड करंट और उच्च वोल्टेज के कारण आर्किंग या उपकरण क्षति का खतरा होता है।
  • इसलिए ऑपरेटर टैप बदलने से पहले ट्रांसफार्मर को पूरी तरह से सिस्टम से अलग कर देता है।
  • यह विशेषता NLTC को सुरक्षित और सरल बनाती है, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि वोल्टेज एडजस्टमेंट के लिए बिजली आपूर्ति को अस्थायी रूप से रोकना पड़ता है।

OLTC और NLTC में अंतर

नो-लोड टैप चेंजर (No-Load Tap Changer) और ऑन-लोड टैप चेंजर (On-Load Tap Changer)। दोनों का उद्देश्य वोल्टेज एडजस्ट करना है, लेकिन काम करने की स्थिति, संरचना और उपयोग में महत्वपूर्ण अंतर होता है।

विशेषताNLTC (No-Load Tap Changer) OLTC (On-Load Tap Changer)
कार्य करने की स्थितिट्रांसफार्मर बंद (Off-Load)। टैप बदलने के लिए ट्रांसफार्मर को पूरी तरह से सिस्टम से डिस्कनेक्ट करना पड़ता है। ट्रांसफार्मर चालू (On-Load)। टैप बदलते समय ट्रांसफार्मर चालू रहता है और लोड पर वोल्टेज एडजस्ट किया जाता है।
संरचना सरल डिज़ाइनकम चलने वाले हिस्से, कॉन्टैक्ट्स और स्लाइडर सीधे और मजबूत। रखरखाव आसान।जटिल डिज़ाइन। इसमें स्पेशल कॉन्टैक्ट्स, डायवर्टर स्विच और संक्रमण प्रतिबाधा (transition reactor/resistor) होते हैं। रखरखाव अधिक।
उपयोगछोटे और मीडियम ट्रांसफार्मर, जैसे वितरण ट्रांसफार्मर और स्थिर लोड वाले नेटवर्क।
बड़े पावर ट्रांसफार्मर, सबस्टेशन और नेटवर्क जहाँ वोल्टेज में लगातार उतार-चढ़ाव होते हैं।
कम लागतसरल डिज़ाइन और कम मेंटेनेंस।अधिक लागत। जटिल और हाई-कॉम्प्लेक्सिटी डिज़ाइन, उच्च भरोसेमंदता के लिए।
वोल्टेज नियंत्रणसीमित। केवल ट्रांसफार्मर बंद होने पर वोल्टेज एडजस्ट होता है।प्रभावशाली और लगातार। चालू ट्रांसफार्मर पर भी वोल्टेज को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे सप्लाई अधिक स्थिर रहती है।

टैप चेंजर (Tap Changer) के फायदे

वोल्टेज स्थिरता (Voltage Stability)

टैप चेंजर ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग के टर्न रेशियो को बदलकर आउटपुट वोल्टेज को नियंत्रित करता है। यह पावर ग्रिड में लोड बदलने या अचानक डिमांड बढ़ने/घटने पर वोल्टेज उतार-चढ़ाव (voltage fluctuations) को कम करता है। स्थिर वोल्टेज से सभी कनेक्टेड उपकरण सही तरीके से काम करते हैं और पावर सिस्टम की स्थिरता बनी रहती है।

ऊर्जा बचत (Energy Efficiency)

जब वोल्टेज नियंत्रित रहता है, तो लाइन में करंट सही स्तर पर रहता है। इससे I²R लॉस (लाइन लॉस) कम होता है और ट्रांसमिशन के दौरान ऊर्जा की बर्बादी घटती है। सही वोल्टेज और करंट के कारण सिस्टम की दक्षता बढ़ती है और बिजली की खपत कम होती है।

ट्रांसफार्मर सुरक्षा (Transformer Protection)

अचानक वोल्टेज बढ़ना या घटना ट्रांसफार्मर की इंसुलेशन और कॉइल्स पर तनाव डाल सकता है। टैप चेंजर इस जोखिम को कम करता है। वोल्टेज को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखने से ट्रांसफार्मर लंबी अवधि तक सुरक्षित रहता है और इसकी जीवन अवधि बढ़ती है।

सिस्टम विश्वसनीयता (System Reliability)

टैप चेंजर के कारण बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होती। OLTC होने पर वोल्टेज एडजस्टमेंट चलते-चलते होता है और NLTC में समय पर सेटिंग करने के बाद स्थिर सप्लाई मिलती है। इससे पावर ग्रिड और उद्योगों में सिस्टम डाउनटाइम कम होता है और उपभोक्ताओं को लगातार भरोसेमंद बिजली मिलती है।


1. ट्रांसफार्मर टैप चेंजर क्या होता है?

ट्रांसफार्मर टैप चेंजर एक ऐसा डिवाइस है जो ट्रांसफार्मर के आउटपुट वोल्टेज को नियंत्रित और समायोजित करता है। यह वाइंडिंग में टर्न्स की संख्या बदलकर वोल्टेज को बढ़ाता या घटाता है, ताकि पावर सिस्टम में वोल्टेज हमेशा स्थिर और सुरक्षित रहे। सरल शब्दों में, यह ट्रांसफार्मर का “वोल्टेज कंट्रोलर” है, जो बिजली की आपूर्ति को विश्वसनीय बनाता है और ट्रांसफार्मर व जुड़े उपकरणों को नुकसान से बचाता है।

2. टैप चेंजर क्यों आवश्यक है?

टैप चेंजर इसलिए आवश्यक है क्योंकि यह पावर ग्रिड में वोल्टेज को स्थिर रखता है। ग्रिड में लोड बदलने या बिजली की मांग बढ़ने/घटने पर वोल्टेज उतार-चढ़ाव कर सकता है। टैप चेंजर इन उतार-चढ़ावों को नियंत्रित करता है, जिससे पावर क्वालिटी बनी रहती है और उपकरण सही ढंग से काम करते हैं।
इसके अलावा, वोल्टेज को सुरक्षित स्तर पर रखने से ट्रांसफार्मर और जुड़े उपकरणों को अचानक बढ़े या घटे वोल्टेज से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। सरल शब्दों में, यह पावर सिस्टम की स्थिरता, सुरक्षा और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करता है।

3. OLTC और NLTC वोल्टेज नियंत्रण में कैसे मदद करते हैं?

OLTC और NLTC दोनों ट्रांसफार्मर के आउटपुट वोल्टेज को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग में टर्न्स की संख्या बदलकर वोल्टेज को बढ़ाते या घटाते हैं।

OLTC (On-Load Tap Changer): यह ट्रांसफार्मर चालू रहते हुए भी वोल्टेज एडजस्ट कर सकता है। जैसे ही ग्रिड में लोड बदलता है या वोल्टेज उतार-चढ़ाव होता है, OLTC अपने आप टैप बदलकर आउटपुट वोल्टेज को स्थिर रखता है। इससे बिजली की आपूर्ति लगातार बनी रहती है और फ्लक्चुएशन कम होते हैं।

NLTC (No-Load Tap Changer): यह टैप तब बदलता है जब ट्रांसफार्मर बंद होता है। इसे मुख्य रूप से वोल्टेज सेटिंग और मेंटेनेंस के लिए उपयोग किया जाता है। NLTC वोल्टेज को एक निश्चित स्तर पर सेट करता है ताकि जब ट्रांसफार्मर चालू हो, आउटपुट वोल्टेज स्थिर रहे।

सिंपल शब्दों में, दोनों ही प्रकार के टैप चेंजर वोल्टेज को सही स्तर पर बनाए रखते हैं, ग्रिड के उतार-चढ़ाव को कम करते हैं और पावर सिस्टम की विश्वसनीयता और सुरक्षा बढ़ाते हैं।

4. क्या OLTC ट्रांसफार्मर को शॉर्ट सर्किट से बचा सकता है?

OLTC सीधे ट्रांसफार्मर को शॉर्ट सर्किट से नहीं बचा सकता। इसका मुख्य काम वोल्टेज को स्थिर रखना और आउटपुट को सही स्तर पर बनाए रखना है। हालांकि, OLTC वोल्टेज को नियंत्रित करके ट्रांसफार्मर पर पड़ने वाले तनाव (stress) को कम करता है। इससे ट्रांसफार्मर की इंसुलेशन और कॉइल्स सुरक्षित रहती हैं और इसकी जीवन अवधि बढ़ती है। सरल शब्दों में, OLTC सीधे शॉर्ट सर्किट को रोकता नहीं है, लेकिन यह ट्रांसफार्मर की सुरक्षा और दीर्घायु में योगदान करता है।


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