विद्युत शक्ति प्रणाली में ट्रांसफार्मर (Transformer) एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण है। इसका मुख्य कार्य विद्युत ऊर्जा को एक वोल्टेज स्तर से दूसरे वोल्टेज स्तर में परिवर्तित करना है, जिससे विद्युत शक्ति का सुरक्षित और कुशल वितरण संभव हो पाता है। ट्रांसफार्मर के सही, सुरक्षित तथा दीर्घकालिक संचालन के लिए इसके कई सहायक भाग होते हैं, जिनमें कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) का विशेष स्थान होता है।
कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) ट्रांसफार्मर के तेल (Transformer Oil) के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करता है। ट्रांसफार्मर के संचालन के दौरान तापमान में निरंतर परिवर्तन होता रहता है, जिसके कारण तेल का फैलाव (Expansion) और संकुचन (Contraction) होता है। ऐसे में कंजर्वेटर टैंक अतिरिक्त तेल को संग्रहित करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे वापस मुख्य टैंक में भेजने का कार्य करता है। इससे ट्रांसफार्मर के अंदर उचित दबाव बना रहता है और इसके सुरक्षित संचालन में मदद मिलती है।
इस लेख में हम सरल और स्पष्ट भाषा में निम्नलिखित बिंदुओं को समझने का प्रयास करेंगे: कंजर्वेटर टैंक क्या है, इसकी संरचना (Construction), इसका कार्य (Working), तथा ट्रांसफार्मर में इसका महत्व (Importance)
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ट्रांसफार्मर में कंजर्वेटर टैंक क्या है? (What is Conservator Tank in Transformer)
कंजर्वेटर टैंक ट्रांसफार्मर का एक महत्वपूर्ण सहायक भाग होता है। यह बेलनाकार (Cylindrical) धातु का टैंक होता है, जिसे ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक के ऊपर एक सहायक संरचना (Support Structure) पर लगाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रांसफार्मर ऑयल के तापमान में परिवर्तन के कारण होने वाले फैलाव (Expansion) और संकुचन (Contraction) को सुरक्षित रूप से संभालना होता है।
जब ट्रांसफार्मर पर लोड आता है, तो उसके अंदर का तापमान बढ़ जाता है। तापमान बढ़ने पर ट्रांसफार्मर का तेल फैलता है और अतिरिक्त तेल कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) में चला जाता है। इसी प्रकार, जब ट्रांसफार्मर ठंडा होता है, तो तेल सिकुड़ता है और कंजर्वेटर टैंक से वापस मुख्य टैंक में लौट आता है। इस प्रक्रिया से ट्रांसफार्मर के अंदर तेल का स्तर संतुलित बना रहता है और मुख्य टैंक पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता।
सरल शब्दों में कहा जाए तो, कंजर्वेटर टैंक ट्रांसफार्मर तेल के लिए एक अतिरिक्त जलाशय (Reservoir) की तरह कार्य करता है। यह ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक को अधिक दबाव (Over Pressure), वैक्यूम (Vacuum) तथा तेल की कमी जैसी समस्याओं से बचाता है और ट्रांसफार्मर के सुरक्षित तथा सुचारु संचालन में सहायता करता है।
- कंजर्वेटर टैंक के साथ सामान्यतः ब्रीदर (Breather) लगाया जाता है, जो तेल को नमी (Moisture) और धूल (Dust) से बचाता है।
- इसमें ऑयल लेवल इंडिकेटर (Oil Level Indicator – OLI) लगा होता है, जिससे तेल का स्तर आसानी से देखा जा सकता है।
- कंजर्वेटर टैंक ट्रांसफार्मर तेल को सीधे वातावरण के संपर्क में आने से रोकता है, जिससे तेल की गुणवत्ता बनी रहती है।
- बड़े और उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों में कंजर्वेटर टैंक का उपयोग अनिवार्य होता है।
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ट्रांसफार्मर में कंजर्वेटर टैंक की संरचना (Construction of Conservator Tank)
कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) की संरचना देखने में सरल होती है, लेकिन इसे बहुत ही व्यावहारिक और सुरक्षित ढंग से डिज़ाइन किया गया होता है ताकि ट्रांसफार्मर ऑयल का सही प्रबंधन किया जा सके। यह एक बेलनाकार तेल टैंक होता है, जो दोनों सिरों से बंद रहता है और ट्रांसफार्मर के मुख्य टैंक के ऊपर क्षैतिज (Horizontal) रूप से लगाया जाता है। इसकी संरचना के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
मुख्य कंजर्वेटर टैंक (Main Conservator Tank)
मुख्य कंजर्वेटर टैंक आमतौर पर स्टील या लोहे से बनाया जाता है ताकि यह मजबूत, टिकाऊ और उच्च तापमान सहनशील हो। इसका आकार बेलनाकार होता है और दोनों सिरों पर ढक्कन लगे होते हैं, जो तेल को रिसाव, धूल और नमी से सुरक्षित रखते हैं। टैंक के एक या दोनों ओर बड़ा निरीक्षण ढक्कन (Inspection Cover) दिया जाता है, जिससे टैंक के अंदर की सफाई, तेल की गुणवत्ता जांच और रखरखाव आसानी से किया जा सके।
इसके अलावा, यह ढक्कन आपातकालीन निरीक्षण या तेल स्तर की जांच के लिए भी उपयोगी होता है। मुख्य कंजर्वेटर टैंक ट्रांसफार्मर के तेल के लिए अतिरिक्त भंडारण स्थान प्रदान करता है, जिससे तापमान में बदलाव के कारण तेल के फैलाव और संकुचन को सुचारु रूप से संभाला जा सके। इस प्रकार, यह न केवल तेल की मात्रा को संतुलित रखता है, बल्कि ट्रांसफार्मर की कार्यक्षमता और आयु को भी बढ़ाता है।
कंजर्वेटर कनेक्टिंग पाइप
कनेक्टिंग पाइप मुख्य ट्रांसफार्मर टैंक और कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) को जोड़ता है और ट्रांसफार्मर के तेल के सुचारु प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पाइप सामान्यतः कंजर्वेटर टैंक के निचले हिस्से से अंदर की ओर जुड़ा होता है, ताकि तेल आसानी से मुख्य टैंक में लौट सके और तापमान के अनुसार फैलाव या सिकुड़ाव का प्रभाव संतुलित रह सके। पाइप के सिरे पर एक कैप (Cover) लगी होती है, जो तेल के साथ मौजूद कीचड़, गाद या अन्य अवशेषों को मुख्य टैंक में जाने से रोकती है और तेल की शुद्धता बनाए रखती है।
इसके माध्यम से तेल का लगातार आवागमन होता है, जिससे ट्रांसफार्मर के संचालन के दौरान तेल का स्तर स्थिर रहता है और तेल के बिना ट्रांसफार्मर पर अतिरिक्त दबाव या नुकसान नहीं होता। इस प्रकार, कनेक्टिंग पाइप न केवल तेल के प्रवाह को नियंत्रित करता है, बल्कि ट्रांसफार्मर की सुरक्षा और दीर्घकालिक विश्वसनीयता में भी योगदान देता है।
कंजर्वेटर टैंक ऑयल लेवल इंडिकेटर ( Conservator Tank Oil Level Indicator – OLI)
ऑयल लेवल इंडिकेटर (OLI) कंजर्वेटर टैंक में मौजूद तेल के स्तर को स्पष्ट रूप से दर्शाने के लिए लगाया जाता है। इसमें सामान्यतः Minimum, Normal और Maximum स्तर की निशानियां बनी होती हैं, जो ट्रांसफार्मर के तेल की स्थिति की त्वरित पहचान करने में मदद करती हैं। यह इंडिकेटर ट्रांसफार्मर के सुरक्षित संचालन के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल का स्तर बहुत कम होने पर ट्रांसफार्मर के इन्सुलेशन और कुल प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
वहीं, तेल का अत्यधिक स्तर भी दबाव बढ़ाकर रिसाव या नुकसान का कारण बन सकता है। OLI की सहायता से तकनीशियन या ऑपरेटर तेल के स्तर को नियमित रूप से मॉनिटर कर सकते हैं, समय पर तेल भरने या घटाने का निर्णय ले सकते हैं, और ट्रांसफार्मर की विश्वसनीयता और दीर्घायु सुनिश्चित कर सकते हैं।
ब्रिदर (Breather)
ब्रिदर कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) के साथ लगाया जाता है और इसमें सिलिका जेल भरा होता है, जो टैंक में प्रवेश करने वाली हवा से नमी को अवशोषित करता है। ब्रिदर का फिक्सिंग पाइप सामान्यतः टैंक के ऊपर से जुड़ता है, लेकिन यदि इसे नीचे लगाया जाए तो यह तेल के अधिकतम स्तर से काफी ऊपर रखा जाता है, ताकि किसी भी परिचालन स्थिति में तेल ब्रिदर में प्रवेश न कर सके।
ब्रिदर का मुख्य कार्य बाहर से आने वाली हवा को सुखाकर टैंक के अंदर जाने देना है, जिससे ट्रांसफार्मर तेल नमी या धूल से सुरक्षित रहे। यह ट्रांसफार्मर की आयु बढ़ाने, तेल की गुणवत्ता बनाए रखने और भीतर के इन्सुलेशन सिस्टम को खराब होने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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ट्रांसफार्मर में कंजर्वेटर टैंक का कार्य (Working of Conservator Tank)
कंजर्वेटर टैंक का कार्य पूरी तरह ट्रांसफार्मर के संचालन के दौरान होने वाले तापमान परिवर्तन और उससे उत्पन्न तेल के आयतन परिवर्तन पर आधारित होता है। यह टैंक ट्रांसफार्मर के तेल को नियंत्रित करने के लिए एक लचीला स्थान प्रदान करता है, जिससे मुख्य टैंक के भीतर सुरक्षित परिस्थितियाँ बनी रहती हैं।
कार्य प्रक्रिया
जब ट्रांसफार्मर लोड पर कार्य करता है, तो उसकी वाइंडिंग में विद्युत हानि के कारण तापमान बढ़ता है और इसके परिणामस्वरूप ट्रांसफार्मर ऑयल गर्म होकर फैलने लगता है। यह फैला हुआ अतिरिक्त तेल कनेक्टिंग पाइप के माध्यम से स्वतः कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) में प्रवाहित हो जाता है, जिससे मुख्य टैंक के अंदर अतिरिक्त दबाव उत्पन्न नहीं होता। जब ट्रांसफार्मर पर लोड घटता है या ट्रांसफार्मर बंद होकर ठंडा होता है, तब तेल का तापमान कम हो जाता है और तेल सिकुड़ता है। इस स्थिति में कंजर्वेटर टैंक में मौजूद तेल वापस मुख्य टैंक में आ जाता है, जिससे अंदर वैक्यूम बनने से बचाव होता है।
इस पूरी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप
मुख्य ट्रांसफार्मर टैंक के अंदर दबाव और वैक्यूम दोनों की स्थिति नियंत्रित रहती है, तेल का स्तर हमेशा कार्यशील सीमा में बना रहता है, तेल का ऑक्सीकरण कम होता है और ट्रांसफार्मर के आंतरिक इन्सुलेशन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। इस प्रकार, कंजर्वेटर टैंक तापमान परिवर्तन के दौरान तेल के प्राकृतिक फैलाव और संकुचन को प्रभावी रूप से संतुलित करके ट्रांसफार्मर के सुरक्षित, विश्वसनीय और दीर्घकालिक संचालन को सुनिश्चित करता है।
कंजर्वेटर में लो ऑयल लेवल विद्युत संकेत (Low Oil Level Electrical Indication)
आधुनिक ट्रांसफार्मरों में कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) केवल तेल संतुलन (oil balancing) का कार्य ही नहीं करता, बल्कि यह लो ऑयल लेवल की विद्युत संकेत (electrical signal) भी प्रदान करता है, जो ट्रांसफार्मर की सुरक्षा और मॉनिटरिंग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
कंजर्वेटर टैंक के अंदर सामान्यतः ऑयल लेवल इंडिकेटर (OLI) विद इलेक्ट्रिकल कॉन्टैक्ट लगाया जाता है। इसमें एक फ्लोट मैकेनिज़्म (float mechanism) होता है, जो तेल के स्तर के साथ ऊपर-नीचे चलता है। जैसे ही तेल का स्तर निर्धारित सुरक्षित सीमा (Low Oil Level) से नीचे गिरता है, यह फ्लोट अंदर लगे माइक्रो-स्विच या रीड स्विच (micro-switch / reed switch) को सक्रिय कर देता है। इसके परिणामस्वरूप एक विद्युत सिग्नल (electrical alarm signal) उत्पन्न होता है, जो कंट्रोल पैनल, अनाउंसिएटर या SCADA सिस्टम तक भेजा जाता है।
यह लो ऑयल लेवल का विद्युत संकेत ( Voltage Signal) बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि तेल का स्तर कम होना ऑयल लीकेज, अत्यधिक तापमान, सीलिंग फेल्योर या आंतरिक दोष (internal fault) का संकेत हो सकता है। समय पर मिलने वाला यह अलार्म ऑपरेटर को preventive action लेने का अवसर देता है, जैसे लोड कम करना, निरीक्षण करना या आवश्यकता पड़ने पर ट्रांसफार्मर को सुरक्षित रूप से बंद करना। कई महत्वपूर्ण सब-स्टेशनों में इस सिग्नल को प्रोटेक्शन या ट्रिपिंग स्कीम से भी जोड़ा जाता है।
इस प्रकार, लो ऑयल लेवल के लिए विद्युत संकेत प्रदान करके कंजर्वेटर टैंक ट्रांसफार्मर के condition monitoring, protection और reliability को बढ़ाता है तथा ट्रांसफार्मर की service life और operational safety सुनिश्चित करता है।
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ट्रांसफार्मर में कंजर्वेटर टैंक का महत्व (Importance of Conservator Tank In Transformer)
ट्रांसफार्मर के सुरक्षित, स्थिर और दीर्घकालिक संचालन में कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) का महत्व अत्यंत अधिक होता है, क्योंकि यह ट्रांसफार्मर ऑयल के management, protection और monitoring में प्रमुख भूमिका निभाता है।
1. तेल का स्तर बनाए रखता है
कंजर्वेटर टैंक ट्रांसफार्मर ऑयल के expansion और contraction को नियंत्रित करके तेल के स्तर को safe operating range में बनाए रखता है। इससे ट्रांसफार्मर में न तो तेल की कमी (low oil level) होती है और न ही तेल की अधिकता (overfilling) की स्थिति उत्पन्न होती है।
2. ट्रांसफार्मर की सुरक्षा
तेल के तापमान में परिवर्तन के कारण मुख्य टैंक के अंदर excessive pressure या vacuum condition बन सकती है, जो टैंक और इन्सुलेशन सिस्टम के लिए हानिकारक होती है। कंजर्वेटर टैंक इस दबाव को संतुलित करके ट्रांसफार्मर को mechanical और electrical damage से सुरक्षित रखता है।
3. ऑयल की उम्र बढ़ाता है
ब्रिदर (Breather) के साथ मिलकर कंजर्वेटर टैंक(Conservator Tank) बाहर से आने वाली हवा को ट्रांसफार्मर में कंजर्वेटर टैंक क्यों लगाया जाता है? बनाकर ही अंदर जाने देता है, जिससे तेल में moisture contamination और impurity ingress नहीं होता। इससे ट्रांसफार्मर ऑयल की dielectric strength बनी रहती है और उसकी service life बढ़ती है।
4. रखरखाव में सहायक
कंजर्वेटर टैंक पर लगे Oil Level Indicator (OLI) की सहायता से तेल की स्थिति की continuous monitoring की जा सकती है। इससे समय पर preventive maintenance संभव होता है और अचानक होने वाली खराबियों से बचाव किया जा सकता है।
5. ट्रांसफार्मर की लाइफ बढ़ाता है
सही और नियंत्रित तेल प्रबंधन के कारण ट्रांसफार्मर का cooling system और insulation system सुरक्षित रहता है, जिससे ट्रांसफार्मर लंबे समय तक reliable और efficient operation में बना रहता है। इस प्रकार, कंजर्वेटर टैंक ट्रांसफार्मर की overall life expectancy को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाता है।
5. ट्रांसफार्मर की लाइफ बढ़ाता है
सही और नियंत्रित तेल प्रबंधन के कारण ट्रांसफार्मर का cooling system और insulation system सुरक्षित रहता है, जिससे ट्रांसफार्मर लंबे समय तक reliable और efficient operation में बना रहता है। इस प्रकार, कंजर्वेटर टैंक ट्रांसफार्मर की overall life expectancy को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाता है।
ट्रांसफार्मर के कंजर्वेटर टैंक में ऑयल लेवल की जांच (Oil Level Checking)
कंजर्वेटर टैंक में Oil Level Indicator (OLI) लगाया जाता है, जो टैंक में मौजूद ट्रांसफार्मर ऑयल के स्तर को स्पष्ट रूप से दर्शाता है और ऑपरेटर को निरंतर visual monitoring की सुविधा देता है।
ऑयल लेवल चेक करने का महत्व
- कम तेल (Low Oil Level): ट्रांसफार्मर में उचित cooling और insulation न होने के कारण overheating, insulation deterioration और संभावित failure का खतरा बढ़ जाता है।
- ज्यादा तेल (High Oil Level): टैंक के अंदर excess internal pressure बढ़ सकता है, जिससे oil leakage, gasket failure या संरचनात्मक नुकसान की संभावना होती है।
सामान्य स्थिति (Normal Condition)
सामान्य तापमान (Normal Temperature) पर ऑयल लेवल का OLI में “Normal” या 1/2 mark के पास होना आवश्यक होता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि ट्रांसफार्मर safe operating condition में कार्य कर रहा है।
नियमित जांच से
ऑयल लेवल से संबंधित समस्या को fault occurrence से पहले identify किया जा सकता है, preventive maintenance आसान हो जाता है और ट्रांसफार्मर की reliability, safety और service life बनी रहती है।
कंजर्वेटर टैंक में आने वाली सामान्य समस्याएँ (Common problems in the conservator tank)
कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) से जुड़ी कुछ सामान्य समस्याएँ ट्रांसफार्मर के संचालन और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं। यदि इन समस्याओं की समय पर पहचान और सुधार न किया जाए, तो ट्रांसफार्मर की reliability और service life पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
1. ऑयल लीकेज (Oil Leakage)
ऑयल लीकेज सामान्यतः pipe joints, flange connections या gasket failure के कारण होता है। तेल के रिसाव से ऑयल लेवल कम हो सकता है, जिससे ट्रांसफार्मर की cooling और insulation क्षमता घट जाती है और overheating का खतरा बढ़ जाता है।
2. ब्रिदर का चोक होना (Breather Choking)
जब ब्रिदर में मौजूद silica gel समय पर replace नहीं किया जाता, तो वह नमी से भरकर चोक हो जाता है। इससे बाहर की हवा ठीक से dry नहीं हो पाती और नमी सीधे तेल में प्रवेश कर सकती है, जो तेल की dielectric strength को कम कर देती है।
3. गलत ऑयल लेवल (Improper Oil Level)
Overfilling या underfilling दोनों ही स्थितियाँ हानिकारक होती हैं। अधिक तेल होने पर टैंक में excess pressure और leakage की संभावना बढ़ जाती है, जबकि कम तेल होने पर overheating और insulation failure का जोखिम रहता है।
4. नमी का प्रवेश (Moisture Ingress)
ब्रिदर खराब होने या sealing proper न होने की स्थिति में नमी कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) में प्रवेश कर सकती है। इससे तेल का oxidation rate बढ़ता है और इन्सुलेशन सिस्टम कमजोर हो जाता है।
इन समस्याओं को नजरअंदाज करने से ट्रांसफार्मर में serious faults, unexpected breakdown और eventual transformer failure हो सकता है। इसलिए कंजर्वेटर टैंक की नियमित जांच और समय पर रखरखाव अत्यंत आवश्यक है।
ट्रांसफार्मर के कंजर्वेटर टैंक का रखरखाव (Maintenance of Conservator Tank)
सही और समय पर किया गया कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) का रखरखाव ट्रांसफार्मर की operational reliability और service life को काफी हद तक बढ़ा देता है। कंजर्वेटर टैंक सीधे ट्रांसफार्मर ऑयल से जुड़ा होता है, इसलिए इसकी स्थिति का ट्रांसफार्मर के समग्र प्रदर्शन पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
आवश्यक रखरखाव कार्य
- नियमित रूप से ऑयल लेवल चेक करना: Oil Level Indicator (OLI) के माध्यम से यह सुनिश्चित करना कि तेल का स्तर safe operating range में है।
- सिलिका जेल का निरीक्षण और परिवर्तन: ब्रिदर में लगे सिलिका जेल का रंग बदलने पर उसे समय पर बदलना, ताकि नमी (moisture) तेल में प्रवेश न कर सके।
- लीकेज की जांच: कंजर्वेटर टैंक, पाइप जॉइंट और गैसकेट से किसी भी प्रकार के ऑयल लीकेज की नियमित जांच करना।
- कनेक्टिंग पाइप की सफाई: पाइप के अंदर जमा कीचड़, गाद या अवशेष हटाकर तेल के मुक्त प्रवाह (free oil circulation) को सुनिश्चित करना।
नियमित मेंटेनेंस से: समय से पहले संभावित समस्याओं की पहचान संभव हो जाती है, जिससे sudden breakdown से बचा जा सकता है, ट्रांसफार्मर की maintenance cost कम होती है और सिस्टम की overall reliability बनी रहती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
1. ट्रांसफार्मर में कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) क्यों लगाया जाता है?
ट्रांसफार्मर में कंजर्वेटर टैंक इसलिए लगाया जाता है ताकि तेल के temperature-based expansion और contraction को नियंत्रित किया जा सके, मुख्य टैंक में pressure या vacuum न बने, तेल का स्तर संतुलित रहे और ट्रांसफार्मर की सुरक्षा, विश्वसनीयता और लंबी आयु सुनिश्चित हो।
2. क्या हर ट्रांसफार्मर में कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) होता है?
हर ट्रांसफार्मर में कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) नहीं होता। यह केवल ऑयल-इमर्स्ड (Oil-Immersed) पावर और डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर में लगाया जाता है, जहाँ तेल के expansion और contraction को संभालने और तेल के स्तर को नियंत्रित करने की आवश्यकता होती है। छोटे सील्ड या ड्राई-टाइप ट्रांसफार्मर में कंजर्वेटर टैंक नहीं होता।
3. कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) में ऑयल लेवल कितना होना चाहिए?
कंजर्वेटर टैंक में तेल का स्तर (Oil Level) सामान्य तापमान (Normal Temperature) पर ऑयल लेवल इंडिकेटर (OLI) के “Normal” या 1/2 मार्क के पास होना चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि ट्रांसफार्मर सुरक्षित और सही संचालन (safe and proper operation) में है।
4. कंजर्वेटर टैंक (Conservator Tank) और बुचहोल्ज़ रिले (Buchholz Relay) का क्या संबंध है?
कंजर्वेटर टैंक और बुचहोल्ज़ रिले (Buchholz Relay) ट्रांसफार्मर की सुरक्षा प्रणाली में जुड़े होते हैं। कंजर्वेटर टैंक से मुख्य टैंक तक जाने वाली पाइपलाइन में बुचहोल्ज़ रिले लगाया जाता है, जो ट्रांसफार्मर के अंदर गैस निर्माण या आंतरिक फॉल्ट (internal fault) का पता लगाता है। जैसे ही टैंक में किसी दोष या ऑयल विस्फोट से गैस बनती है, बुचहोल्ज़ रिले यह स्थिति सिग्नल या ट्रिप के रूप में कंट्रोल सिस्टम को भेज देता है, जिससे ट्रांसफार्मर को समय रहते सुरक्षित बंद किया जा सके।