Buchholz Relay क्या होता है
Buchholz Relay क्या होता है

Buchholz Relay क्या होता है? संरचना, कार्य विधि और अनुप्रयोग

आज के समय में विद्युत शक्ति प्रणाली (Power System) का सबसे महत्वपूर्ण भाग ट्रांसफॉर्मर होता है, क्योंकि यह विद्युत ऊर्जा के वोल्टेज स्तर को बदलकर बिजली के सुरक्षित और कुशल वितरण में सहायता करता है। बड़े पावर ट्रांसफॉर्मर बहुत महंगे होते हैं और इनकी क्षमता भी अधिक होती है, इसलिए इनमें होने वाली छोटी-सी खराबी भी बड़े आर्थिक नुकसान, सप्लाई बाधित होने और सिस्टम फेल होने का कारण बन सकती है।

इसी कारण ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा (Protection) के लिए विभिन्न प्रकार के रिले और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग किया जाता है। इनमें से Buchholz Relay का स्थान सबसे महत्वपूर्ण होता है, विशेषकर ऑयल-फिल्ड (Oil Filled) पावर ट्रांसफॉर्मर में। यह रिले ट्रांसफॉर्मर के अंदर होने वाली प्रारंभिक आंतरिक खराबियों, जैसे गैस का बनना, तेल का स्तर गिरना या आंतरिक फॉल्ट को समय रहते पहचान लेता है।

Buchholz Relay का मुख्य लाभ यह है कि यह बड़ी खराबी होने से पहले ही चेतावनी (Alarm) या ट्रिप सिग्नल देकर ट्रांसफॉर्मर को गंभीर क्षति से बचा सकता है, जिससे उपकरण की उम्र बढ़ती है और सिस्टम की विश्वसनीयता बनी रहती है।

बुचहोल्ज़ रिले (Buchholz Relay) क्या होता है?

Buchholz Relay एक महत्वपूर्ण Gas Operated Protection Relay है, जिसका उपयोग Oil Filled Transformers और Oil Insulated Reactors की सुरक्षा के लिए किया जाता है। यह रिले ट्रांसफॉर्मर के अंदर होने वाली आंतरिक खराबियों (Internal Faults) का प्रारंभिक अवस्था में पता लगाने में सहायक होता है, जिससे ट्रांसफॉर्मर को बड़े और महंगे नुकसान से बचाया जा सके।

यह रिले केवल उन्हीं ट्रांसफॉर्मरों में लगाया जाता है जिनमें Conservator Tank लगा होता है और जिनमें ट्रांसफॉर्मर ऑयल का उपयोग किया जाता है। Buchholz Relay को ट्रांसफॉर्मर के Main Tank और Conservator Tank के बीच की पाइप लाइन में स्थापित किया जाता है, ताकि यह तेल और गैस की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख सके।

जब ट्रांसफॉर्मर के अंदर किसी कारण से Insulation Failure, Overheating, Winding Fault या Internal Short Circuit जैसी खराबियाँ उत्पन्न होती हैं, तो ट्रांसफॉर्मर ऑयल गर्म होकर गैस बनाता है या तेल का बहाव असामान्य हो जाता है। Buchholz Relay इन गैसों के जमा होने और तेल के अचानक तेज प्रवाह को पहचान लेता है।

छोटी या प्रारंभिक खराबी की स्थिति में यह रिले Alarm Signal देता है, जिससे ऑपरेटर समय रहते सावधान हो जाता है। वहीं गंभीर खराबी होने पर यह Trip Signal भेजकर ट्रांसफॉर्मर को मुख्य सप्लाई से अलग कर देता है, जिससे आगे होने वाले बड़े नुकसान को रोका जा सके।

Buchholz Relay का उपयोग सामान्यतः 500 kVA से अधिक रेटिंग वाले ट्रांसफॉर्मरों में किया जाता है। छोटे ट्रांसफॉर्मरों में इसे आर्थिक कारणों से नहीं लगाया जाता। कुल मिलाकर, Buchholz Relay ट्रांसफॉर्मर की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक अत्यंत विश्वसनीय और प्रभावी सुरक्षा उपकरण माना जाता है।

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Buchholz Relay का इतिहास (History of Buchholz Relay)

Buchholz Relay का इतिहास विद्युत शक्ति प्रणाली की सुरक्षा आवश्यकताओं से जुड़ा हुआ है। इस रिले का आविष्कार वर्ष 1921 में Max Buchholz द्वारा किया गया था। उस समय तेल से भरे पावर ट्रांसफॉर्मरों में आंतरिक खराबियों के कारण बड़े स्तर पर नुकसान हो रहा था, जिसे समय रहते पहचानने के लिए किसी प्रभावी सुरक्षा उपकरण की आवश्यकता थी।

Max Buchholz ने यह देखा कि जब ट्रांसफॉर्मर के अंदर कोई आंतरिक दोष उत्पन्न होता है, तो ट्रांसफॉर्मर ऑयल में गैस बनती है या तेल का प्रवाह असामान्य हो जाता है। इसी सिद्धांत पर आधारित एक विशेष सुरक्षा रिले विकसित की गई, जो इन गैसों और तेल के बहाव को पहचान सके। यही उपकरण आगे चलकर Buchholz Relay के नाम से जाना गया।

अपने आविष्कार के बाद Buchholz Relay को धीरे-धीरे बड़े Oil Filled Power Transformers में अपनाया जाने लगा। इसकी विश्वसनीयता और सरल कार्य प्रणाली के कारण यह ट्रांसफॉर्मर सुरक्षा का एक मानक उपकरण बन गया। आज भी, लगभग एक सदी बाद, Buchholz Relay को बड़े और महत्वपूर्ण ट्रांसफॉर्मरों की आंतरिक सुरक्षा के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

Buchholz Relay की संरचना (Construction)

Buchholz Relay की संरचना इस प्रकार से डिज़ाइन की जाती है कि वह ट्रांसफॉर्मर के अंदर उत्पन्न होने वाले गैस गैस और तेल के प्रवाह में होने वाले परिवर्तनों को प्रभावी ढंग से पहचान सके। इसे Main Tank और Conservator Tank के बीच की पाइप लाइन में लगाया जाता है ताकि ट्रांसफॉर्मर की आंतरिक स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा सके और छोटी-सी असामान्य गतिविधि पर तुरंत संकेत मिल सके।

Buchholz Relay की संरचना (Construction)
Buchholz Relay की संरचना (Construction)

1. Outer Casing (बाहरी आवरण)

Buchholz Relay का बाहरी आवरण मजबूत कास्ट आयरन या एल्यूमिनियम से बनाया जाता है। इसका मुख्य कार्य रिले के सभी आंतरिक भागों को सुरक्षित रखना होता है। यह आवरण ट्रांसफॉर्मर के तेल (ऑयल) के संपर्क में रहता है और रिले को बाहरी वातावरण जैसे धूल, नमी और तापमान के प्रभाव से बचाता है।

इसका डिजाइन सामान्यतः बेलनाकार या आयताकार होता है, जिससे ट्रांसफॉर्मर ऑयल का प्रवाह आसानी और बिना रुकावट के हो सके। इसके अलावा, मजबूत बाहरी आवरण रिले की लंबी उम्र और विश्वसनीय कार्यप्रणाली सुनिश्चित करता है।

2. Upper Float (Alarm Float)

Upper Float रिले के ऊपरी भाग में लगाया जाता है और इसका उपयोग ट्रांसफॉर्मर में होने वाली हल्की या प्रारंभिक खराबियों का पता लगाने के लिए किया जाता है। जब ट्रांसफॉर्मर के अंदर किसी छोटी गड़बड़ी के कारण गैस धीरे-धीरे बनती है, तो यह गैस ऊपर की ओर इकट्ठा हो जाती है। गैस जमा होने से तेल का स्तर कम हो जाता है, जिसके कारण Upper Float नीचे की ओर खिसकता है।

इस फ्लोट के नीचे जाने पर उससे जुड़ा अलार्म सर्किट सक्रिय हो जाता है और कंट्रोल रूम में चेतावनी (Alarm) मिल जाती है। इससे बड़ी खराबी होने से पहले समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

3. Lower Float (Trip Float)

Lower Float रिले के निचले भाग में स्थित होता है और यह ट्रांसफॉर्मर में होने वाली गंभीर आंतरिक खराबियों का पता लगाने के लिए उपयोग किया जाता है। जब किसी बड़े दोष, जैसे शॉर्ट सर्किट या भारी फॉल्ट, के कारण ट्रांसफॉर्मर ऑयल का प्रवाह अचानक बहुत तेज हो जाता है, तो यह निचला फ्लोट तुरंत सक्रिय हो जाता है। फ्लोट के सक्रिय होते ही उससे जुड़ा ट्रिप सर्किट चालू हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप ट्रांसफॉर्मर तुरंत मुख्य विद्युत सप्लाई से अलग (Trip) हो जाता है। इससे ट्रांसफॉर्मर को अधिक नुकसान और बड़े हादसे से बचाया जा सकता है।

4. Mercury Switch (मरकरी स्विच)

Mercury Switch एक सीलबंद कांच की ट्यूब होती है, जिसमें थोड़ी मात्रा में पारा भरा होता है। यह स्विच Upper और Lower Float दोनों के साथ जुड़ा रहता है। जब फ्लोट हिलता है या अपनी स्थिति बदलता है, तो मरकरी स्विच झुकता है और इलेक्ट्रिकल सर्किट को ON या OFF कर देता है। Upper Float से जुड़ा Mercury Switch अलार्म सिग्नल भेजने के लिए उपयोग होता है, जिससे हल्की या प्रारंभिक खराबियों की जानकारी मिलती है।

वहीं, Lower Float से जुड़ा Mercury Switch गंभीर दोषों के समय ट्रिप सर्किट सक्रिय करता है, जिससे ट्रांसफॉर्मर को मुख्य सप्लाई से तुरंत अलग किया जा सकता है। यह स्विच रिले की विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

5. Gas Collection Chamber (गैस कलेक्शन चैंबर)

Gas Collection Chamber रिले के ऊपरी हिस्से में स्थित होता है। इसमें ट्रांसफॉर्मर ऑयल के अपघटन या छोटे दोषों के कारण बनी गैसें एकत्र होती हैं। यह चैंबर गैस को सुरक्षित रूप से जमा करने में मदद करता है और जरूरत पड़ने पर उसकी मात्रा और प्रकार का परीक्षण करने की सुविधा देता है। गैस का विश्लेषण करने से ट्रांसफॉर्मर की संभावित खराबियों का जल्दी पता लगाया जा सकता है, जिससे समय रहते मरम्मत या सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।

6. Inlet और Outlet Pipe

Inlet Pipe मुख्य ट्रांसफॉर्मर टैंक से तेल को Buchholz Relay के अंदर लाती है। वहीं, Outlet Pipe तेल को Relay से निकालकर Conservator Tank तक पहुंचाती है। इस व्यवस्था से ट्रांसफॉर्मर में तेल का लगातार और संतुलित प्रवाह सुनिश्चित होता है। इससे तेल का स्तर स्थिर रहता है और रिले सभी फ्लोट और स्विच सही ढंग से काम कर पाते हैं। इसके अलावा, यह प्रणाली तेल में किसी भी अचानक बदलाव या प्रवाह में अनियमितता को नियंत्रित करने में भी मदद करती है।

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Buchholz Relay की कार्य विधि (Working Principle)

Buchholz Relay का कार्य सिद्धांत गैस निर्माण (Gas Formation) और तेल के प्रवाह (Oil Flow) पर आधारित है। यह एक मैकेनिकल रिले है, जो ट्रांसफॉर्मर में होने वाली आंतरिक खराबियों (Internal Faults) के कारण उत्पन्न गैसों और असामान्य तेल प्रवाह को पहचानकर अलार्म या ट्रिप सिग्नल भेजता है। इसे समझने के लिए इसे दो मुख्य परिस्थितियों में देखा जा सकता है।

Buchholz Relay की कार्य विधि (Working Principle)
Buchholz Relay की कार्य विधि (Working Principle)

1. सामान्य स्थिति (Normal Condition)

सामान्य स्थिति में, जब ट्रांसफॉर्मर सही ढंग से काम कर रहा होता है, तो ट्रांसफॉर्मर का तेल Inlet Pipe के माध्यम से Buchholz Relay में प्रवेश करता है और Outlet Pipe के जरिए Conservator Tank में लौट जाता है। इस दौरान Upper और Lower Float तेल में सुरक्षित रूप से तैरते रहते हैं और किसी भी Mercury Switch को सक्रिय नहीं करते।

इसका मतलब है कि न अलार्म सर्किट चालू होता है और न ही ट्रिपिंग सर्किट। यह स्थिति यह दर्शाती है कि ट्रांसफॉर्मर में कोई दोष या अनियमितता नहीं है और सभी सिस्टम सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं।

2. हल्की खराबी (Minor Fault)

जब ट्रांसफॉर्मर में हल्की खराबी होती है, जैसे:

  • इंसुलेशन का कमजोर होना
  • हल्की ओवरहीटिंग (Overheating)
  • आंशिक आर्किंग (Partial Arcing)

तो ट्रांसफॉर्मर के तेल का अपघटन शुरू हो जाता है। इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन (H₂), मीथेन (CH₄), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) जैसी गैसें बनती हैं। ये गैसें ऊपर की ओर उठती हैं और Buchholz Relay के Gas Collection Chamber में जमा हो जाती हैं।

गैस के जमा होने से तेल का स्तर घट जाता है, जिससे Upper Float नीचे की ओर खिसकता है। Upper Float के नीचे जाने पर उससे जुड़ा Mercury Switch सक्रिय हो जाता है और Alarm Circuit चालू हो जाता है। इससे ऑपरेटर को समय रहते चेतावनी मिलती है।

इस प्रकार, Buchholz Relay हल्की आंतरिक खराबियों को तुरंत पहचानने में मदद करता है, जिससे बड़े नुकसान से पहले आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

3. गंभीर खराबी (Major Fault)

जब ट्रांसफॉर्मर में गंभीर दोष होते हैं, जैसे:

  • भारी शॉर्ट सर्किट (Severe Short Circuit)
  • विंडिंग फेल्योर (Winding Failure)
  • तेल का रिसाव (Oil Leakage)

तो ट्रांसफॉर्मर का तेल असामान्य रूप से तेज़ गति से प्रवाहित होने लगता है। तेज तेल प्रवाह Lower Float को नीचे की ओर धकेल देता है।

Lower Float के सक्रिय होते ही उससे जुड़ा Trip Switch काम करता है और Trip Circuit चालू हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप ट्रांसफॉर्मर तुरंत मुख्य विद्युत सप्लाई से अलग (Trip) हो जाता है।

इस प्रक्रिया से ट्रांसफॉर्मर को गंभीर नुकसान, आग या अन्य खतरनाक परिस्थितियों से सुरक्षित रखा जाता है। Buchholz Relay इस तरह बड़े दोषों के समय तुरंत सुरक्षा प्रदान करता है।

4. गैस विश्लेषण (Gas Analysis)

Buchholz Relay के Gas Collection Chamber में जो गैसें जमा होती हैं, उन्हें Petcock Valve के माध्यम से बाहर निकाला जा सकता है। इन गैसों का रासायनिक विश्लेषण किया जाता है, जिसे Dissolved Gas Analysis (DGA) कहा जाता है।

DGA से पता चलता है कि ट्रांसफॉर्मर में किस प्रकार की खराबी हुई है। उदाहरण के लिए:

  • हाइड्रोजन (H₂) की अधिकता हल्की आर्किंग या ओवरहीटिंग का संकेत देती है।
  • मीथेन (CH₄) या एथेन (C₂H₆) की मात्रा बड़े आर्किंग या इंसुलेशन दोष की ओर इशारा कर सकती है।
  • कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) पर्चेस्ड पेपर इंसुलेशन के नुकसान को दर्शाते हैं।

इस तरह गैस विश्लेषण से ऑपरेटर समय रहते ट्रांसफॉर्मर की संभावित समस्याओं का पता लगा सकता है और आवश्यक मरम्मत या सुरक्षा उपाय कर सकता है। यह ट्रांसफॉर्मर की विश्वसनीयता और जीवनकाल बढ़ाने में मदद करता है।

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बुचहोल्ज़ रिले के संचालन में सावधानियां (Precautions for Operation of Buchholz Relay)

बुचहोल्ज़ रिले ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण है, लेकिन इसके संचालन में कुछ सावधानियां बरतना आवश्यक है, ताकि रिले गलत सक्रिय न हो और ट्रांसफॉर्मर सुरक्षित रहे।

बुचहोल्ज़ रिले के संचालन में सावधानियां (Precautions for Operation of Buchholz Relay)
Operation of Buchholz Relay)

1. तेल भरते समय सावधानी (Precaution During Oil Filling)

ट्रांसफॉर्मर में तेल भरते समय, तेल के साथ हवा या गैस भी अंदर जा सकती है। यह हवा या गैस रिले के Gas Collection Chamber में जमा हो सकती है और Upper Float या Mercury Switch को गलत तरीके से सक्रिय कर सकती है। परिणामस्वरूप रिले बिना किसी वास्तविक दोष के अलार्म या ट्रिप दे सकता है।

समाधान और सावधानी:

  • Buchholz Relay में तेल भरते समय मैकेनिकल लॉक (Mechanical Lock) का उपयोग किया जाता है। यह लॉक Upper और Lower Float तथा Mercury Switch की अनावश्यक गति को रोकता है, ताकि रिले केवल वास्तविक दोष होने पर ही प्रतिक्रिया करे।
  • तेल भरने से पहले रिले के फ्लोट्स और स्विच की स्थिति ठीक से जांच लें।
  • तेल भरने के दौरान धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से तेल डालें, ताकि हवा के बुलबुले कम से कम अंदर जाएँ।
  • तेल भरने के बाद Gas Collection Chamber की गैस को निकालकर परीक्षण करें, ताकि रिले में कोई फंसी हुई हवा या गैस न रहे।
  • नियमित निरीक्षण और रखरखाव से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि तेल भरने के समय भी रिले की विश्वसनीयता बनी रहे।

2. परिवहन के दौरान सुरक्षा (Safety During Transportation)

Buchholz Relay के Mercury Switch कांच से बने होते हैं, जो काफी नाजुक और संवेदनशील होते हैं। रिले के परिवहन के दौरान झटके, धक्के या अनावश्यक हलचल Mercury Switch को नुकसान पहुँचा सकते हैं, जिससे रिले सही ढंग से काम नहीं करेगा।

समाधान और सावधानी:

  • Buchholz Relay में मैकेनिकल लॉक (Mechanical Lock) का उपयोग किया जाता है। यह लॉक Mercury Switch और फ्लोट्स को परिवहन के दौरान स्थिर रखता है, ताकि कोई हलचल या झटका उन्हें सक्रिय न करे।
  • रिले को परिवहन के लिए हमेशा सुरक्षित पैकेजिंग और कुशनिंग के साथ रखें, ताकि किसी बाहरी दबाव या झटके से नुकसान न हो।
  • ट्रांसपोर्टेशन के बाद रिले को इंस्टॉलेशन से पहले जांचें और सुनिश्चित करें कि सभी फ्लोट्स और Mercury Switch स्वतंत्र रूप से सही ढंग से काम कर रहे हैं।
  • विशेष सावधानी से उठाना और रखने से रिले की संवेदनशील कांच की ट्यूब सुरक्षित रहती है और लंबी अवधि तक विश्वसनीयता बनी रहती है।

3. तेज तेल प्रवाह पर ध्यान (Caution for High Oil Flow)

कभी-कभी ट्रांसफॉर्मर में आंतरिक खराबी के बिना भी तेल का प्रवाह असामान्य रूप से तेज़ हो सकता है। इसके उदाहरण हैं:

  • बाहरी शॉर्ट सर्किट के कारण अचानक लोड में वृद्धि
  • अत्यधिक गर्म वाइंडिंग (Overheating)

तेज तेल प्रवाह Lower Float को नीचे धकेल सकता है, जिससे Trip Switch और Trip Circuit बिना वास्तविक दोष के सक्रिय हो सकते हैं। इस स्थिति में ट्रांसफॉर्मर मुख्य सप्लाई से अनावश्यक रूप से कट सकता है, जिससे उत्पादन या सिस्टम संचालन में बाधा आ सकती है।

समाधान और सावधानी:

  • रिले के Inlet और Outlet पाइप्स की नियमित जांच करें, ताकि तेल का प्रवाह सही और संतुलित रहे।
  • तेल भरने और ट्रांसफॉर्मर संचालन के दौरान तेल का स्तर और गति लगातार निगरानी में रखें।
  • यदि तेल प्रवाह असामान्य रूप से तेज़ हो, तो सिस्टम को तुरंत जांचें और आवश्यक सुधार करें।
  • Buchholz Relay को इस तरह इंस्टॉल करें कि फ्लोट और Mercury Switch केवल वास्तविक दोष पर ही प्रतिक्रिया करें।
  • नियमित रखरखाव और टेस्टिंग से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि तेज तेल प्रवाह के बावजूद रिले गलत ट्रिपिंग न करे।

बुचहोल्ज़ रिले के प्रकार (Types of Buchholz Relay)

Buchholz Relay को उसके आंतरिक तत्वों (Internal Elements) और स्विचिंग डिजाइन के आधार पर मुख्य रूप से अलग-अलग प्रकारों में बांटा जाता है। यह रिले ट्रांसफॉर्मर की आंतरिक सुरक्षा के लिए काम करता है और हल्की से गंभीर दोषों तक की पहचान करता है।

1. आंतरिक तत्वों के आधार पर प्रकार (Based on Internal Elements)

गैस संचय तत्व (Gas Accumulation Element)

Buchholz Relay के आंतरिक तत्व इसके काम करने के तरीके को निर्धारित करते हैं। इसमें मुख्य रूप से दो प्रकार के तत्व होते हैं। पहला, गैस संचय तत्व (Gas Accumulation Element / Upper Float), जो रिले के ऊपरी हिस्से में स्थित होता है। इसमें एक तैरने वाला फ्लोट (Float) लगा होता है। जब ट्रांसफॉर्मर में हल्की खराबी जैसे आंशिक डिस्चार्ज या ओवरहीटिंग होती है, तो तेल में गैस बनती है।

यह गैस ऊपर की ओर उठकर रिले के Gas Collection Chamber में जमा हो जाती है, जिससे तेल का स्तर गिरता है और फ्लोट नीचे आता है। फ्लोट के नीचे आने पर उससे जुड़े Mercury या Reed Switch सक्रिय हो जाते हैं और Alarm Circuit चालू हो जाता है।

तेल प्रवाह तत्व (Oil Flow Element)

दूसरा तत्व, तेल प्रवाह तत्व (Oil Flow Element / Lower Baffle Plate), रिले के निचले हिस्से में स्थित होता है। इसमें बैफल प्लेट (Baffle Plate) लगी होती है। जब ट्रांसफॉर्मर में गंभीर खराबी, जैसे शॉर्ट सर्किट होती है, तो तेल मुख्य टैंक से कंज़र्वेटर की ओर तेज़ी से बहने लगता है। तेज तेल प्रवाह बैफल प्लेट को हिलाता है, जिससे उससे जुड़े Switch सक्रिय हो जाते हैं। यह Trip Circuit चालू करता है और ट्रांसफॉर्मर की बिजली आपूर्ति तुरंत कट जाती है।

2. स्विचिंग और डिज़ाइन के आधार पर प्रकार (Based on Switching & Design)

Buchholz Relay को उसके स्विचिंग और डिज़ाइन के आधार पर भी विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है।

Mercury Switch Type, जिसमें पारा (Mercury) का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार में फ्लोट या बैफल प्लेट की मूवमेंट से विद्युत संपर्क बनता है, जो अलार्म या ट्रिप सर्किट को सक्रिय करता है।

Reed Switch Type, जिसमें मैग्नेटिक रीड स्विच का इस्तेमाल होता है। यह प्रकार अधिक विश्वसनीय होता है और लंबे समय तक टिकाऊ रहता है, जिससे रखरखाव कम होता है।

Single Contact Type, जिसमें केवल एक कॉन्टैक्ट पॉइंट होता है और इसका डिजाइन सरल होता है, जो छोटी प्रणाली या कम जटिल ट्रांसफॉर्मर में उपयोगी है।

Change-over Contact Type, जिसमें एक ही स्विच एक समय में दो अलग-अलग सर्किट को नियंत्रित कर सकता है, जिससे ऑपरेशन और नियंत्रण में अधिक लचीलापन मिलता है।

3. एलिमेंट आधारित वर्गीकरण (Element-Based Classification)

Buchholz Relay को उसके आंतरिक एलिमेंट या फ्लोट्स की संख्या के आधार पर भी वर्गीकृत किया जा सकता है।

Single Element Buchholz Relay, जिसमें केवल एक फ्लोट या सेंसर होता है। यह आमतौर पर अलार्म देने के लिए उपयोग किया जाता है और छोटे ट्रांसफॉर्मरों के लिए उपयुक्त होता है।

Double Element Buchholz Relay, जिसमें दो फ्लोट्स या सेंसर लगे होते हैं। Upper Float हल्की खराबियों पर अलार्म सक्रिय करता है, जबकि Lower Float गंभीर दोषों पर ट्रिप सर्किट को चालू करता है। यह प्रकार बड़े और महत्वपूर्ण ट्रांसफॉर्मरों में इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि यह अलार्म और ट्रिप दोनों कार्यों को एक साथ संभाल सकता है और ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा को अधिक विश्वसनीय बनाता है।

Buchholz Relay के अनुप्रयोग (Applications)

1. Power Transformers

बड़े पावर ट्रांसफॉर्मरों में Buchholz Relay का उपयोग अनिवार्य है। यह ट्रांसफॉर्मर के Main Tank और Conservator Tank के बीच लगाया जाता है और हल्की या गंभीर खराबी होने पर तुरंत Alarm भेजकर सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

2. बड़े Distribution Transformers

बड़े रेटिंग वाले वितरण ट्रांसफॉर्मरों में भी यह रिले लगाया जाता है। यह नेटवर्क में किसी भी आंतरिक दोष से होने वाले नुकसान को रोकता है और सुनिश्चित करता है कि बिजली आपूर्ति सुरक्षित और लगातार बनी रहे।

3. Generator Transformers

Generator Transformers, जो बिजली उत्पादन इकाइयों से जुड़े होते हैं, में Buchholz Relay लगाया जाता है। यह ट्रांसफॉर्मर को संभावित आंतरिक नुकसान से बचाता है और बिजली उत्पादन प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखता है।

4. Grid Substations

Grid Substations में बड़े ट्रांसफॉर्मरों की सुरक्षा के लिए भी Buchholz Relay का उपयोग होता है। यह न केवल ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा करता है, बल्कि पूरे पावर ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद करता है।

Buchholz Relay के फायदे (Advantages)

Buchholz Relay एक अत्यंत उपयोगी और भरोसेमंद सुरक्षा उपकरण है, जिसे ट्रांसफॉर्मरों में लगाने के कई महत्वपूर्ण फायदे हैं। यह रिले ट्रांसफॉर्मर की आंतरिक सुरक्षा को सुनिश्चित करता है और संभावित नुकसान को समय रहते रोकता है।

  • आंतरिक दोष का प्रारंभिक पता: हल्की खराबियों जैसे आर्किंग या इंसुलेशन फेल्योर को तुरंत पहचानता है।
  • गंभीर दोषों पर त्वरित प्रतिक्रिया: बड़े शॉर्ट सर्किट या तेल प्रवाह की असामान्यता पर ट्रांसफॉर्मर को तुरंत ट्रिप करता है।
  • अलार्म और ट्रिप दोनों सुविधा: हल्की खराबियों पर अलार्म और गंभीर दोषों पर ट्रिपिंग करता है।
  • पूर्णतः ऑटोमैटिक संचालन: रिले बिना किसी मैनुअल हस्तक्षेप के काम करता है।
  • रल रख-रखाव: इसकी संरचना सरल होने के कारण रख-रखाव आसान है।
  • उच्च विश्वसनीयता: लंबे समय तक प्रभावी और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करता है।
  • ट्रांसफॉर्मर को बड़े नुकसान से बचाता है: दोष की प्रारंभिक पहचान और त्वरित ट्रिपिंग से महंगे नुकसान को रोकता है।
  • सिस्टम सुरक्षा में योगदान: पूरे विद्युत नेटवर्क की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाता है।

बुचहोल्ज़ रिले की हानिया ( Disadvantage of Buchholz Relay)

Buchholz Relay एक अत्यंत उपयोगी सुरक्षा उपकरण होने के बावजूद, इसके कुछ सीमाएँ और हानियाँ भी हैं जिन्हें ध्यान में रखना आवश्यक है।

  • केवल तेल-इमर्स्ड ट्रांसफॉर्मरों में कार्य करता है: यह रिले ड्राई टाइप ट्रांसफॉर्मर या छोटे ट्रांसफॉर्मरों में उपयोग नहीं किया जा सकता।
  • मैकेनिकल ऑपरेशन के कारण धीमी प्रतिक्रिया: यांत्रिक फ्लोट और बैफल प्लेट की वजह से इसकी प्रतिक्रिया इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की तुलना में धीमी होती है।
  • केवल आंतरिक दोष पहचान सकता है: यह रिले केवल ट्रांसफॉर्मर के अंदर होने वाले दोष जैसे गैस बनना या तेल प्रवाह में बदलाव को डिटेक्ट करता है, बाहरी दोषों का पता नहीं लगा सकता।
  • उच्च प्रारंभिक लागत: इसे स्थापित करने के लिए अतिरिक्त पाइपिंग और सही प्लेसमेंट की आवश्यकता होती है, जिससे लागत बढ़ जाती है।
  • छोटे ट्रांसफॉर्मरों में अनुपयुक्त: आर्थिक और तकनीकी कारणों से छोटे ट्रांसफॉर्मरों में इसका उपयोग नहीं किया जाता।
  • तेल प्रवाह में अचानक बदलाव से गलत ट्रिपिंग: बाहरी शॉर्ट सर्किट या तेज़ तेल प्रवाह से रिले गलत ट्रिप दे सकता है।
  • परिवहन और स्थापना में सावधानी की आवश्यकता: Mercury Switched रिले नाजुक होते हैं और कांच के बल्ब टूट सकते हैं।

बुचहोल्ज़ रिले का परीक्षण और मेंटेनेंस (Testing and Maintenance of Buchholz Relay)

Buchholz Relay ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसका सही परीक्षण और नियमित रख-रखाव बेहद आवश्यक है। इसके बिना रिले समय पर आंतरिक दोषों का पता नहीं लगा पाएगा, जिससे ट्रांसफॉर्मर को नुकसान हो सकता है।

1. गैस टेस्ट (Gas Test)

Buchholz Relay के ऊपरी हिस्से में गैस कलेक्शन चैंबर होती है, जहाँ ट्रांसफॉर्मर में उत्पन्न गैस जमा होती है। गैस टेस्ट के दौरान इस चैंबर की स्थिति और गैस के स्तर की जांच की जाती है।

  • सबसे पहले रिले का पेटकॉक वाल्व खोलकर गैस को धीरे-धीरे निकाला जाता है।
  • गैस निकालने के बाद जांच की जाती है कि Upper Float (Alarm Float) सही तरीके से नीचे गिर रहा है या नहीं।
  • इस टेस्ट से पता चलता है कि हल्की खराबियों पर रिले अलार्म देने में सक्षम है या नहीं।

2. फंक्शनल टेस्ट (Functional Test)

Functional Test में रिले के अलार्म और ट्रिप सर्किट की कार्यशीलता जांची जाती है।

  • ऊपरी फ्लोट को मैन्युअली नीचे धकेलकर देखा जाता है कि Alarm Circuit सही से एक्टिवेट हो रहा है या नहीं।
  • इसी तरह, निचले फ्लोट या बैफल प्लेट को मैन्युअली हिलाकर Trip Circuit की जांच की जाती है।
  • यह टेस्ट सुनिश्चित करता है कि किसी भी गंभीर दोष की स्थिति में रिले तुरंत ट्रांसफॉर्मर को मुख्य सप्लाई से डिस्कनेक्ट कर सकता है।

3. नियमित निरीक्षण का महत्व (Regular Inspection)

Buchholz Relay का प्रदर्शन और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण बेहद जरूरी है। इसमें शामिल हैं:

  • गैस कलेक्शन चैंबर की सफाई और पेटकॉक वाल्व की जांच।
  • फ्लोट्स की स्थिति और Mercury या Reed Switch की कार्यशीलता की जांच।
  • रिले की पाइपिंग और कनेक्शन में कोई लीकेज या अवरोध न हो इसका निरीक्षण।
  • तेल के स्तर और गुणवत्ता की जांच, ताकि हवा या नमी के बुलबुले से झूठे अलार्म से बचा जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

1. Buchholz Relay केवल किस प्रकार के ट्रांसफॉर्मर में उपयोग होता है?

Buchholz Relay केवल oil filled transformer with conservator tank में उपयोग किया जाता है।

2. Buchholz Relay में अलार्म कब आता है?

Buchholz Relay में अलार्म उस समय सक्रिय होता है जब ट्रांसफॉर्मर के अंदर कोई हल्की या प्रारंभिक (Minor Internal Fault) उत्पन्न होती है और उसके कारण गैस धीरे-धीरे बनना शुरू हो जाती है। ऐसी खराबियों में आमतौर पर इंसुलेशन का कमजोर होना, हल्की ओवरहीटिंग, आंशिक डिस्चार्ज या हल्की आर्किंग शामिल होती हैं।

इन स्थितियों में ट्रांसफॉर्मर ऑयल का अपघटन होता है और उससे हाइड्रोजन, मीथेन, CO या CO₂ जैसी गैसें बनती हैं। यह गैसें ऊपर की ओर उठकर Buchholz Relay के Gas Collection Chamber में जमा हो जाती हैं। गैस के जमा होने से तेल का स्तर धीरे-धीरे कम होता है, जिससे Upper Float नीचे आता है और उससे जुड़ा Mercury या Reed Switch सक्रिय हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप Alarm Circuit चालू हो जाता है।

3. Buchholz Relay में कौन-कौन से faults detect होते हैं?

Buchholz Relay ट्रांसफॉर्मर के अंदर होने वाली विभिन्न आंतरिक खराबियों का पता लगाने में सक्षम होता है। यह insulation breakdown की स्थिति को detect करता है, जिसमें इंसुलेशन के कमजोर होने से तेल का अपघटन और गैस का निर्माण शुरू हो जाता है। इसी प्रकार inter-turn fault के दौरान वाइंडिंग के टर्न्स के बीच शॉर्ट सर्किट होने से स्थानीय हीटिंग और आर्किंग होती है, जिससे गैस बनती है जिसे रिले पहचान लेता है।

Core heating के मामले में, कोर के अत्यधिक गर्म होने से तेल टूटने लगता है और गैस उत्पन्न होती है, जो Buchholz Relay को सक्रिय करती है। इसके अलावा, किसी भी कारण से होने वाला oil decomposition भी गैस निर्माण का कारण बनता है, जिसे रिले detect करके अलार्म या ट्रिप के माध्यम से ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

4. Buchholz Relay testing कैसे की जाती है?

Buchholz Relay की testing यह सुनिश्चित करने के लिए की जाती है कि वह अलार्म और ट्रिप दोनों परिस्थितियों में सही ढंग से कार्य कर रहा है। Manual gas injection test में रिले के गैस चैंबर में कृत्रिम रूप से गैस डाली जाती है, जिससे Upper Float नीचे आता है और अलार्म सर्किट के सही तरीके से सक्रिय होने की जाँच की जाती है। Oil surge test में अचानक तेज तेल प्रवाह उत्पन्न किया जाता है, जिससे Lower Float या बैफल प्लेट सक्रिय होकर ट्रिप सर्किट के संचालन की पुष्टि करता है।

इसके अलावा, electrical contact continuity test द्वारा अलार्म और ट्रिप कॉन्टैक्ट्स की विद्युत निरंतरता जाँची जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी स्विच और वायरिंग सही स्थिति में हैं और रिले विश्वसनीय रूप से कार्य कर रहा है।


यदि आपने यह पूरा लेख ध्यान से पढ़ा है, तो हमें उम्मीद है कि Buchholz Relay से जुड़ी आपकी सभी शंकाएँ स्पष्ट हो गई होंगी।

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