आज के आधुनिक युग में लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस—जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप, सोलर इन्वर्टर, चार्जर, LED ड्राइवर, पावर सप्लाई और कंप्यूटर—के भीतर उच्च दक्षता वाले सेमीकंडक्टर घटकों का उपयोग किया जाता है, जिनमें MOSFET का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। तेज स्विचिंग, कम पावर लॉस और उच्च विश्वसनीयता के कारण MOSFET आज की इलेक्ट्रॉनिक तकनीक की रीढ़ बन चुका है।
यदि आप इलेक्ट्रॉनिक्स सीख रहे हैं या इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग से जुड़े हैं, तो यह जानना आवश्यक है कि MOSFET क्या होता है, क्योंकि इसका उपयोग पावर कंट्रोल, स्विचिंग सर्किट, एम्प्लीफायर और पावर मैनेजमेंट सिस्टम में व्यापक रूप से किया जाता है। MOSFET की सही समझ न केवल सर्किट डिजाइन को आसान बनाती है, बल्कि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कार्य सिद्धांत को भी स्पष्ट करती है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि MOSFET क्या होता है, यह कैसे काम करता है, इसके प्रकार, पिन कॉन्फ़िगरेशन, विशेषताएँ, फायदे, नुकसान और उपयोग क्या हैं।
Table of Contents
MOSFET का पूरा नाम क्या है?
MOSFET का पूरा नाम Metal Oxide Semiconductor Field Effect Transistor है। हिंदी में इसे मेटल ऑक्साइड सेमीकंडक्टर फील्ड इफेक्ट ट्रांजिस्टर कहा जाता है। अब इसे एक अनुभवी दृष्टिकोण और वैज्ञानिक आधार के साथ, बहुत आसान भाषा में समझते हैं।
MOSFET का नाम केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि इसके कार्य सिद्धांत और संरचना को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इसके हर भाग का अपना वैज्ञानिक अर्थ है:
- Metal (मेटल): MOSFET में “Metal” उस चालक (conductive) गेट टर्मिनल को दर्शाता है, जिस पर वोल्टेज लगाया जाता है। आधुनिक MOSFET में भले ही वास्तविक धातु की जगह पॉलीसिलिकॉन उपयोग होता हो, लेकिन कार्य सिद्धांत वही रहता है—एक ऐसा कंट्रोल इलेक्ट्रोड जो करंट को सीधे छुए बिना नियंत्रित करता है।
- Oxide (ऑक्साइड): यह एक अत्यंत पतली इन्सुलेटिंग परत होती है, आमतौर पर सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO₂)। यही परत MOSFET की सबसे बड़ी वैज्ञानिक विशेषता है। यह गेट और सेमीकंडक्टर चैनल के बीच विद्युत प्रवाह को रोकती है, लेकिन विद्युत क्षेत्र (Electric Field) को गुजरने देती है। इसी कारण MOSFET बहुत कम पावर खपत करता है।
- Semiconductor (सेमीकंडक्टर): MOSFET का मुख्य भाग सिलिकॉन जैसे अर्धचालक (Semiconductor) से बना होता है, जिसमें चार्ज कैरियर्स (इलेक्ट्रॉन्स या होल्स) को नियंत्रित किया जाता है। गेट पर वोल्टेज लगाने से सेमीकंडक्टर के भीतर एक चैनल बनता या समाप्त होता है।
- Field Effect (फील्ड इफेक्ट): MOSFET की कार्यप्रणाली “Field Effect” पर आधारित होती है। इसका अर्थ यह है कि इसमें करंट को विद्युत क्षेत्र द्वारा नियंत्रित किया जाता है, न कि सीधे करंट प्रवाह से। यही कारण है कि MOSFET को वोल्टेज-कंट्रोल्ड डिवाइस कहा जाता है।
- Transistor (ट्रांजिस्टर): ट्रांजिस्टर होने के कारण MOSFET का मुख्य कार्य इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को नियंत्रित करना या स्विच करना होता है—चाहे वह ON/OFF स्विचिंग हो या नियंत्रित करंट प्रवाह।
MOSFET का पूरा नाम यह स्पष्ट करता है कि यह एक ऐसा सेमीकंडक्टर डिवाइस है, जिसमें एक इन्सुलेटेड गेट के माध्यम से विद्युत क्षेत्र बनाकर करंट को अत्यंत सटीक, तेज और ऊर्जा-कुशल तरीके से नियंत्रित किया जाता है। यही वैज्ञानिक विशेषता MOSFET को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स का सबसे महत्वपूर्ण घटक बनाती है।
MOSFET क्या होता है? (What is MOSFET?)
MOSFET एक उन्नत प्रकार का सेमीकंडक्टर डिवाइस है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक स्विच और एम्पलीफायर के रूप में किया जाता है। तकनीकी रूप से MOSFET को वोल्टेज-कंट्रोल्ड डिवाइस कहा जाता है, क्योंकि इसमें करंट का नियंत्रण सीधे करंट से नहीं, बल्कि गेट टर्मिनल पर लगाए गए वोल्टेज से होता है। यही कारण है कि MOSFET को संचालित करने के लिए बहुत कम इनपुट पावर की आवश्यकता होती है।

वैज्ञानिक दृष्टि से MOSFET की कार्यप्रणाली Electric Field (विद्युत क्षेत्र) पर आधारित होती है। जब गेट (Gate) टर्मिनल पर उपयुक्त वोल्टेज लगाया जाता है, तो यह सेमीकंडक्टर सामग्री के भीतर एक नियंत्रित चैनल बनाता है या समाप्त करता है। इस चैनल के बनने या न बनने से सोर्स (Source) और ड्रेन (Drain) के बीच करंट का प्रवाह नियंत्रित होता है। चूँकि गेट और चैनल के बीच एक ऑक्साइड इन्सुलेशन परत होती है, इसलिए गेट में लगभग कोई करंट नहीं बहता—यही MOSFET की उच्च दक्षता का मूल वैज्ञानिक कारण है।
MOSFET में तीन मुख्य टर्मिनल होते हैं—Gate, Drain और Source। गेट पर लगाया गया वोल्टेज यह निर्धारित करता है कि ड्रेन और सोर्स के बीच करंट (Current) प्रवाहित होगा या नहीं। इस विशेषता के कारण MOSFET बहुत तेज गति से ON और OFF हो सकता है, जिससे यह हाई-स्पीड और हाई-एफिशिएंसी अनुप्रयोगों के लिए आदर्श बन जाता है।
अनुभवजन्य और व्यावहारिक स्तर पर देखें तो MOSFET को इसलिए प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि यह
- कम पावर खपत करता है,
- उच्च स्विचिंग स्पीड प्रदान करता है, और
- बड़े पावर लेवल को भी सटीक रूप से नियंत्रित कर सकता है।
इन्हीं वैज्ञानिक गुणों के कारण MOSFET का उपयोग एकीकृत सर्किट (ICs), डिजिटल लॉजिक सर्किट, हाई-फ्रीक्वेंसी सिस्टम, PWM आधारित सर्किट, स्विचिंग रेगुलेटर और डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग जैसे उन्नत इलेक्ट्रॉनिक अनुप्रयोगों में व्यापक रूप से किया जाता है।
MOSFET के टर्मिनल (MOSFET Terminals Pins)
MOSFET के टर्मिनल इसकी कार्यप्रणाली को समझने की आधारशिला होते हैं। एक अनुभवी इलेक्ट्रॉनिक्स दृष्टिकोण से देखें तो MOSFET को प्रभावी रूप से उपयोग करने के लिए इसके हर पिन का वैज्ञानिक उद्देश्य स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है। संरचनात्मक रूप से MOSFET में तीन मुख्य टर्मिनल होते हैं—Gate, Drain और Source। यद्यपि आंतरिक रूप से एक चौथा टर्मिनल Body (या Substrate) भी होता है, लेकिन व्यावहारिक सर्किटों में यह प्रायः Source से जुड़ा होता है, इसलिए MOSFET सामान्यतः 3-पिन डिवाइस के रूप में कार्य करता है।
1. Gate (G) — कंट्रोल टर्मिनल
Gate MOSFET का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील टर्मिनल होता है। यह एक कंट्रोल इलेक्ट्रोड है, जिस पर लगाया गया वोल्टेज MOSFET को ON या OFF करता है।
वैज्ञानिक रूप से Gate और सेमीकंडक्टर चैनल के बीच एक पतली ऑक्साइड इन्सुलेशन परत होती है। इस परत के कारण Gate में लगभग कोई करंट नहीं बहता, बल्कि Gate पर लगाया गया वोल्टेज एक विद्युत क्षेत्र (Electric Field) उत्पन्न करता है। यही विद्युत क्षेत्र ड्रेन और सोर्स के बीच चैनल को बनाता या समाप्त करता है। इसी कारण MOSFET को वोल्टेज-कंट्रोल्ड डिवाइस कहा जाता है।
2. Drain (D) — आउटपुट टर्मिनल
Drain वह टर्मिनल है जहाँ से नियंत्रित करंट सर्किट की ओर प्रवाहित होता है। जब MOSFET ON अवस्था में होता है, तो करंट Drain से Source की दिशा में बहता है (पारंपरिक करंट की दिशा के अनुसार)।
तकनीकी रूप से Drain वह क्षेत्र है जहाँ चार्ज कैरियर चैनल को छोड़ते हैं। उच्च वोल्टेज और पावर एप्लिकेशन में Drain टर्मिनल सबसे अधिक विद्युत तनाव सहन करता है, इसलिए इसका डिज़ाइन विशेष रूप से मजबूत रखा जाता है।
3. Source (S) — रेफरेंस टर्मिनल
Source को MOSFET का रेफरेंस या इनपुट टर्मिनल माना जाता है। यही वह बिंदु होता है जिसके सापेक्ष Gate का वोल्टेज मापा जाता है
वैज्ञानिक दृष्टि से Source वह टर्मिनल है जहाँ से चार्ज कैरियर (इलेक्ट्रॉन या होल) चैनल में प्रवेश करते हैं। अधिकांश सर्किटों में Source को ग्राउंड या रेफरेंस पोटेंशियल से जोड़ा जाता है ताकि MOSFET का संचालन स्थिर और नियंत्रित रहे।
4. Body / Substrate (B) — आंतरिक टर्मिनल
Body MOSFET का आंतरिक सेमीकंडक्टर सब्सट्रेट होता है। व्यावहारिक उपयोग में इसे Source से जोड़ दिया जाता है, जिससे अनचाहे पैरासिटिक प्रभाव कम होते हैं। इसी कारण MOSFET बाहरी रूप से 3-पिन डिवाइस जैसा व्यवहार करता है।
MOSFET कैसे काम करता है? (How Does a MOSFET Work)
MOSFET का कार्य सिद्धांत पूरी तरह से Electric Field (विद्युत क्षेत्र) पर आधारित होता है। इसे सरल लेकिन वैज्ञानिक तरीके से समझें तो MOSFET में करंट को सीधे करंट से नहीं, बल्कि वोल्टेज के प्रभाव से नियंत्रित किया जाता है।
MOSFET में Gate टर्मिनल को सेमीकंडक्टर सतह से एक बहुत पतली ऑक्साइड परत (आमतौर पर सिलिकॉन डाइऑक्साइड) द्वारा अलग किया जाता है। यह परत Gate को पूरी तरह इंसुलेट करती है, इसलिए Gate में लगभग कोई करंट नहीं बहता। यही विशेषता MOSFET को अत्यंत कुशल बनाती है।

MOSFET कार्यप्रणाली को चरणों में (step by step) समझें
1. जब Gate और Source के बीच वोल्टेज नहीं होता:
इस अवस्था में Source और Drain के बीच कोई चालक रास्ता मौजूद नहीं होता। सेमीकंडक्टर के अंदर चार्ज कैरियर व्यवस्थित नहीं होते, इसलिए करंट प्रवाहित नहीं होता और MOSFET बंद रहता है।
2. जब Gate और Source के बीच वोल्टेज दिया जाता है:
Gate पर लगाया गया वोल्टेज ऑक्साइड परत के पार एक विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। यह विद्युत क्षेत्र सेमीकंडक्टर के भीतर चार्ज कणों की स्थिति को बदल देता है।
3. चैनल का निर्माण:
जैसे-जैसे Gate पर वोल्टेज बढ़ता है, Gate के नीचे इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने लगती है। एक निश्चित स्तर के बाद Gate के नीचे एक पतली चालक परत बन जाती है, जो Source और Drain को जोड़ देती है। इसी परत को चैनल कहा जाता है।
4. करंट का प्रवाह:
चैनल बनने के बाद, Drain और Source के बीच लगाए गए वोल्टेज के कारण इलेक्ट्रॉन Source से Drain की ओर प्रवाहित होते हैं और करंट बहने लगता है। Gate पर जितना अधिक वोल्टेज होगा, चैनल उतना मजबूत होगा और करंट उतनी आसानी से बहेगा।
5. Gate वोल्टेज हटाने पर:
जब Gate पर लगाया गया वोल्टेज कम किया जाता है, तो चैनल कमजोर होकर समाप्त हो जाता है और करंट रुक जाता है। इस प्रकार MOSFET फिर से बंद अवस्था में चला जाता है।
MOSFET एक वोल्टेज-नियंत्रित इलेक्ट्रॉनिक स्विच है, जो Gate पर लगाए गए वोल्टेज से विद्युत क्षेत्र बनाकर Source और Drain के बीच चैनल को बनाता या समाप्त करता है। Gate में लगभग कोई करंट न बहने के कारण इसकी पावर लॉस बहुत कम होती है और यही गुण MOSFET को तेज़, कुशल और विश्वसनीय बनाता है।
MOSFET के प्रकार (Types of MOSFET)
MOSFET को वर्गीकृत करने का आधार यह है कि करंट किस प्रकार के चार्ज कैरियर द्वारा प्रवाहित होता है और डिवाइस सामान्य अवस्था में चालू रहता है या बंद। व्यावहारिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से MOSFET को दो मुख्य स्तरों पर समझा जाता है—चैनल के प्रकार के आधार पर और ऑपरेशन मोड के आधार पर।

1. चैनल के आधार पर MOSFET के प्रकार
(A) N-Channel MOSFET
N-Channel MOSFET वह प्रकार है जिसमें इलेक्ट्रॉन करंट के मुख्य वाहक होते हैं। इलेक्ट्रॉन की गति होल्स की तुलना में अधिक होती है, इसलिए यह MOSFET तेज़ी से प्रतिक्रिया करता है और उच्च दक्षता प्रदान करता है। इसी वैज्ञानिक कारण से N-Channel MOSFET में ON अवस्था का प्रतिरोध कम होता है, जिससे पावर लॉस और हीट जनरेशन न्यूनतम रहती है।
व्यावहारिक रूप से N-Channel MOSFET सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला प्रकार है। यह हाई-स्पीड स्विचिंग और हाई-पावर सर्किटों में विश्वसनीय प्रदर्शन देता है। पावर सप्लाई, इन्वर्टर और डिजिटल सर्किटों में इसकी उपस्थिति इसी कारण प्रमुख है। IRF540 और IRFZ44N जैसे MOSFET इसके सामान्य उदाहरण हैं।
(B) P-Channel MOSFET
P-Channel MOSFET में करंट का प्रवाह होल्स (धनात्मक चार्ज कैरियर) के माध्यम से होता है। होल्स की गतिशीलता इलेक्ट्रॉनों से कम होने के कारण यह MOSFET N-Channel की तुलना में थोड़ा धीमा होता है और इसकी दक्षता भी अपेक्षाकृत कम होती है।
हालाँकि, P-Channel MOSFET का अपना व्यावहारिक महत्व है। इसे ऐसे सर्किटों में उपयोग किया जाता है जहाँ सरल कंट्रोल की आवश्यकता होती है या जहाँ N-Channel MOSFET के साथ पूरक डिज़ाइन चाहिए। IRF9540 इसका एक प्रचलित उदाहरण है।
2. ऑपरेशन मोड के आधार पर MOSFET के प्रकार
(A) Enhancement-Mode MOSFET
Enhancement-Mode MOSFET वह प्रकार है जो सामान्य अवस्था में बंद रहता है। जब तक Gate पर उपयुक्त वोल्टेज नहीं लगाया जाता, तब तक इसमें Source और Drain के बीच कोई चैनल मौजूद नहीं होता। गेट वोल्टेज लगाने पर चैनल बनता है और करंट प्रवाहित होने लगता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से यह व्यवहार इसे अत्यंत सुरक्षित और नियंत्रित बनाता है। यही कारण है कि Enhancement-Mode MOSFET का उपयोग डिजिटल सर्किट, स्विचिंग एप्लिकेशन और आधुनिक इंटीग्रेटेड सर्किटों में सबसे अधिक किया जाता है।
(B) Depletion-Mode MOSFET
Depletion-Mode MOSFET इससे विपरीत व्यवहार करता है। इसमें पहले से ही एक कंडक्टिंग चैनल मौजूद होता है, इसलिए यह सामान्यतः चालू रहता है। गेट पर उपयुक्त विपरीत वोल्टेज लगाने से यह चैनल संकुचित होता है और करंट कम या पूरी तरह बंद हो सकता है।
यह प्रकार उन विशेष अनुप्रयोगों में उपयोगी होता है जहाँ डिफ़ॉल्ट ON अवस्था की आवश्यकता होती है और करंट को नियंत्रित रूप से कम करना हो।
कुल चार मुख्य प्रकार
- N-Channel Enhancement MOSFET
- P-Channel Enhancement MOSFET
- N-Channel Depletion MOSFET
- P-Channel Depletion MOSFET
इनमें N-Channel Enhancement MOSFET सबसे अधिक प्रचलित है, क्योंकि यह उच्च गति, उच्च दक्षता और न्यूनतम पावर लॉस प्रदान करता है।
MOSFET के प्रकार यह निर्धारित करते हैं कि करंट कैसे बहेगा, नियंत्रण किस प्रकार होगा और डिवाइस किस स्तर की दक्षता प्रदान करेगा। चार्ज कैरियर की प्रकृति और चैनल की संरचना पर आधारित यह वैज्ञानिक वर्गीकरण ही MOSFET को विभिन्न आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के लिए उपयुक्त बनाता है।
MOSFET के ऑपरेशन मोड (Operating Modes Of A MOSFET)
MOSFET का व्यवहार हर स्थिति में एक जैसा नहीं होता। यह कैसे काम करेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि Gate पर कितना नियंत्रण वोल्टेज लगाया गया है और Drain–Source के बीच क्या स्थिति है। व्यावहारिक और वैज्ञानिक रूप से MOSFET को मुख्यतः तीन ऑपरेशन मोड में समझा जाता है। एक अनुभवी दृष्टिकोण से ये मोड यह तय करते हैं कि MOSFET स्विच की तरह काम करेगा या एम्पलीफायर की तरह।
1. Cut-Off Mode (कट-ऑफ मोड)
Cut-Off मोड में MOSFET पूरी तरह बंद (OFF) रहता है। इस स्थिति में Gate पर दिया गया नियंत्रण वोल्टेज इतना कम होता है कि Source और Drain के बीच कोई कंडक्टिंग चैनल बन ही नहीं पाता। चूँकि चैनल मौजूद नहीं होता, इसलिए Drain से Source तक कोई करंट नहीं बहता।
वैज्ञानिक दृष्टि से यह वह अवस्था है जहाँ सेमीकंडक्टर के भीतर चार्ज कैरियर सक्रिय नहीं हो पाते। यही कारण है कि डिजिटल सर्किट में Cut-Off मोड को OFF स्टेट या लॉजिक ‘0’ के रूप में उपयोग किया जाता है। इस मोड में पावर खपत लगभग शून्य होती है।
2. Triode / Linear Mode (ट्रायोड या लीनियर मोड)
Triode या Linear मोड में MOSFET आंशिक रूप से चालू रहता है। Gate पर दिया गया वोल्टेज चैनल तो बना देता है, लेकिन चैनल पूरी तरह मजबूत नहीं होता। इस अवस्था में MOSFET का व्यवहार एक वोल्टेज-नियंत्रित प्रतिरोधक जैसा होता है।
वैज्ञानिक रूप से देखें तो चैनल की चौड़ाई Gate वोल्टेज पर निर्भर करती है। जैसे-जैसे Gate नियंत्रण बढ़ता है, चैनल चौड़ा होता जाता है और करंट आसानी से बहने लगता है। इसी कारण इस मोड में MOSFET का उपयोग एम्पलीफायर या नियंत्रित करंट प्रवाह वाले सर्किटों में किया जाता है, जहाँ आउटपुट को धीरे-धीरे नियंत्रित करना आवश्यक होता है।
3. Saturation Mode (सैचुरेशन मोड)
Saturation मोड में MOSFET को पूरी तरह चालू (ON) माना जाता है। इस स्थिति में चैनल पूरी तरह विकसित हो चुका होता है और करंट का प्रवाह मुख्य रूप से Gate कंट्रोल पर निर्भर रहता है, न कि Drain–Source की स्थिति पर।
वैज्ञानिक दृष्टि से इस मोड में चैनल का एक सिरा संकुचित हो जाता है, लेकिन करंट स्थिर और नियंत्रित रूप से बहता रहता है। यही कारण है कि Saturation मोड में MOSFET एक स्थिर करंट स्रोत या आदर्श इलेक्ट्रॉनिक स्विच की तरह व्यवहार करता है।
व्यावहारिक रूप से यही मोड डिजिटल सर्किट, पावर स्विचिंग और PWM आधारित सिस्टम में सबसे अधिक उपयोग किया जाता है, जहाँ तेज़ ON–OFF क्रिया और कम पावर लॉस आवश्यक होता है।
MOSFET और BJT में अंतर (Difference between MOSFET and BJT)
इलेक्ट्रॉनिक्स में MOSFET और BJT दोनों ही अत्यंत महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर डिवाइस हैं, लेकिन इनका कार्य सिद्धांत, नियंत्रण तरीका और व्यावहारिक प्रदर्शन एक-दूसरे से काफ़ी अलग होता है। सही सर्किट डिज़ाइन के लिए यह समझना आवश्यक है कि किस स्थिति में MOSFET अधिक उपयुक्त है और किसमें BJT। नीचे दिया गया तुलनात्मक सारणी (Table) इन्हीं वैज्ञानिक और व्यावहारिक अंतरों को स्पष्ट करती है।
| आधार | MOSFET | BJT |
|---|---|---|
| कंट्रोल तरीका | वोल्टेज कंट्रोल्ड डिवाइस | करंट कंट्रोल्ड डिवाइस |
| इनपुट आवश्यकता | बहुत कम इनपुट करंट | लगातार बेस करंट आवश्यक |
| एफिशिएंसी | हाई एफिशिएंसी | अपेक्षाकृत कम एफिशिएंसी |
| हीट जनरेशन | कम हीट उत्पन्न होती है | अधिक हीट उत्पन्न होती है |
| स्विचिंग स्पीड | बहुत तेज़ स्विचिंग | स्विचिंग स्पीड धीमी |
| इनपुट इम्पीडेंस | बहुत अधिक (High Input Impedance) | कम (Low Input Impedance) |
| आधुनिक उपयोग | पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल सर्किट में अधिक प्रचलित | पुराने और कुछ एनालॉग एप्लिकेशन में उपयोग |
MOSFET वोल्टेज से नियंत्रित होने के कारण अधिक कुशल, तेज़ और कम पावर लॉस वाला डिवाइस है, जबकि BJT करंट-नियंत्रित होने के कारण अधिक हीट उत्पन्न करता है और अतिरिक्त ड्राइव करंट की आवश्यकता होती है। इसी वजह से आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में MOSFET का उपयोग BJT की तुलना में कहीं अधिक किया जाता है।
MOSFET का परीक्षण कैसे करें? (How to Test a MOSFET)
MOSFET का परीक्षण करना आवश्यक होता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि डिवाइस सही ढंग से ON और OFF हो रहा है और इसका इंटर्नल डायोड भी स्वस्थ है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह परीक्षण MOSFET के स्विचिंग व्यवहार और डायोडिक संरचना की जांच करता है। इसके लिए आपको एक डिजिटल मल्टीमीटर (DMM) और सही परीक्षण प्रक्रिया की आवश्यकता होती है।

आवश्यक उपकरण
इस परीक्षण के लिए आपको केवल कुछ बुनियादी उपकरणों की आवश्यकता होती है। सबसे महत्वपूर्ण उपकरण डिजिटल मल्टीमीटर है, जिसे डायोड और प्रतिरोध मोड में प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, गेट को चार्ज करने के लिए एक छोटी बैटरी या वोल्टेज स्रोत भी उपयोगी होती है।
पिन पहचान
परीक्षण शुरू करने से पहले MOSFET के पिनों की सही पहचान करना बहुत जरूरी है। MOSFET में तीन मुख्य टर्मिनल होते हैं: गेट (Gate – G), ड्रेन (Drain – D) और सोर्स (Source – S)। पिन क्रम निर्माता की डेटाशीट में स्पष्ट रूप से दिया होता है। गलत पिन पहचानने से परीक्षण की रीडिंग विश्वसनीय नहीं होगी और डिवाइस को नुकसान भी पहुंच सकता है।
अंतर्निहित डायोड की जांच
सबसे पहले मल्टीमीटर को डायोड मोड पर सेट करें। ड्रेन और सोर्स के बीच मल्टीमीटर की प्रोब्स लगाएँ। एक दिशा में आपको लगभग 0.4V से 0.9V की रीडिंग मिलेगी, जबकि दूसरी दिशा में “ओपन” यानी कोई रीडिंग नहीं दिखनी चाहिए। यदि दोनों दिशाओं में समान रीडिंग आती है या कोई रीडिंग नहीं आती, तो MOSFET खराब होने की संभावना है। इसके अलावा, तीनों पिनों के बीच शॉर्ट सर्किट की जांच करें। किसी भी दो पिनों के बीच बीप या शून्य रीडिंग नहीं आनी चाहिए। यह चरण MOSFET के बॉडी डायोड और शॉर्ट-सर्किट की स्थिति की वैज्ञानिक पुष्टि करता है।
गेट एक्टिवेशन की जांच
MOSFET की स्विचिंग क्षमता की जांच करने के लिए मल्टीमीटर को प्रतिरोध (Ω) मोड में रखें। गेट को थोड़े समय के लिए चार्ज करें, इसके लिए लाल प्रोब को गेट पर और काले प्रोब को सोर्स पर लगाएँ। इसके बाद लाल प्रोब को ड्रेन पर रखें और काले प्रोब को सोर्स पर। यदि MOSFET ठीक है, तो आपको निम्न प्रतिरोध की रीडिंग मिलेगी, जो बताता है कि यह चालू हो गया है। गेट को डिस्चार्ज करने के बाद, ड्रेन-सोर्स प्रतिरोध फिर से उच्च होना चाहिए, जिससे MOSFET बंद होने की पुष्टि होती है। यह परीक्षण वैज्ञानिक रूप से यह सुनिश्चित करता है कि MOSFET सही ढंग से ON/OFF हो रहा है।
परीक्षण के महत्वपूर्ण सुझाव
MOSFET के प्रकार के अनुसार प्रोब लगाने की दिशा बदलती है। N-चैनल MOSFET में काला प्रोब सोर्स पर और लाल प्रोब गेट पर रखा जाता है। परीक्षण के दौरान गेट पर अत्यधिक चार्ज या स्टैटिक डिस्चार्ज से बचना आवश्यक है, क्योंकि पतली ऑक्साइड परत इसे नुकसान पहुँचा सकती है। परीक्षण के बाद ड्रेन-सोर्स प्रतिरोध की तुलना डेटाशीट के मानों से करें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि डिवाइस सही ढंग से काम कर रहा है।
MOSFET के फायदे और नुकसान (Advantages and Disadvantages of MOSFET)
MOSFET (Metal-Oxide-Semiconductor Field-Effect Transistor) आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में एक अत्यंत महत्वपूर्ण डिवाइस है। इसकी विशेषताएँ इसे BJT और अन्य ट्रांजिस्टरों की तुलना में अधिक कुशल और तेज़ बनाती हैं। इसके फायदे और नुकसान को समझना किसी भी सर्किट डिज़ाइन के लिए जरूरी है।
MOSFET के फायदे (Advantages)
MOSFET की सबसे बड़ी विशेषता इसका वोल्टेज-नियंत्रित होना है। गेट टर्मिनल इंसुलेटेड होता है, इसलिए इसमें लगभग कोई इनपुट करंट नहीं जाता। इस वजह से यह बहुत कम पावर खर्च करता है और संवेदनशील सर्किटों में आदर्श होता है।
इसके अलावा, MOSFET की स्विचिंग स्पीड अत्यधिक तेज़ होती है। यह नैनोसेकंड में ON/OFF हो सकता है, जिससे यह हाई-फ्रीक्वेंसी सर्किट, PWM नियंत्रण और डिजिटल लॉजिक के लिए परफेक्ट है।
MOSFET का कम ऑन-प्रतिरोध संचालन के दौरान ऊर्जा हानि को न्यूनतम करता है। इसका छोटा आकार इसे ICs और जटिल सर्किट में एकीकृत करना आसान बनाता है। इसके अलावा, यह उच्च तापमान में भी स्थिर प्रदर्शन देता है और बैटरी-चलित उपकरणों में इसकी ऊर्जा-कुशलता विशेष रूप से लाभदायक होती है।
MOSFET के फायदे निम्नलिखित हैं:
- उच्च इनपुट प्रतिबाधा और कम इनपुट करंट की आवश्यकता
- तेज़ स्विचिंग और उच्च-आवृत्ति अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त
- कम ऑन-प्रतिरोध से न्यूनतम पावर लॉस
- छोटे आकार और IC में आसानी से एकीकृत होने की क्षमता
- उच्च तापमान पर स्थिर प्रदर्शन
- वोल्टेज-नियंत्रित होने से ड्राइवर सर्किट सरल
MOSFET के नुकसान (Disadvantages)
MOSFET अत्यधिक संवेदनशील डिवाइस है और इसकी पतली गेट ऑक्साइड परत इसे इलेक्ट्रोस्टैटिक डिस्चार्ज (ESD) के प्रति संवेदनशील बनाती है। मामूली स्थैतिक बिजली भी इसे स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती है।
इसके अलावा, स्विचिंग और उच्च करंट पर conduction losses हो सकते हैं, जिससे गर्मी पैदा होती है। उच्च-शक्ति अनुप्रयोगों में इसे सुरक्षित चलाने के लिए गेट ड्राइव और हीट मैनेजमेंट की आवश्यकता होती है।
कुछ अन्य नुकसान हैं:
- गेट बहुत संवेदनशील होता है और उच्च वोल्टेज पर सावधानी आवश्यक है
- उच्च आवृत्ति पर स्विचिंग हानि बढ़ सकती है
- उच्च करंट और वोल्टेज पर conduction loss BJT की तुलना में अधिक हो सकता है
- हाई-साइड स्विचिंग में विशेष गेट ड्राइव की जरूरत
- डिप्लेशन मोड MOSFET में सर्किट जटिल हो सकता है
MOSFET का उपयोग कहाँ होता है? (Applications of MOSFET)
MOSFET (Metal-Oxide-Semiconductor Field-Effect Transistor) आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है। इसकी उच्च स्विचिंग गति, कम पावर लॉस और वोल्टेज-नियंत्रित व्यवहार इसे डिजिटल और पावर एप्लीकेशनों दोनों के लिए आदर्श बनाता है। MOSFET का उपयोग कई प्रकार के उपकरणों और सर्किटों में किया जाता है, जो इसके विज्ञान और दक्षता को दर्शाता है।

स्विचिंग रेगुलेटर में MOSFET
स्विचिंग रेगुलेटर में, MOSFET एक तेज़ इलेक्ट्रॉनिक स्विच के रूप में काम करता है। यह उच्च वोल्टेज और धाराओं को कुशलतापूर्वक नियंत्रित करता है, जिससे ऊर्जा की न्यूनतम हानि होती है। MOSFET प्रति सेकंड हजारों बार चालू और बंद हो सकता है, और इंडक्टर्स तथा कैपेसिटर्स के माध्यम से ऊर्जा के प्रवाह को नियमित करता है। इसकी कम ऑन-प्रतिरोध विशेषता इसे कंप्यूटर, वायरलेस चार्जर, लैपटॉप और मोबाइल जैसी डिवाइसों में बिजली आपूर्ति के लिए आदर्श बनाती है।
DC-DC कन्वर्टर्स में MOSFET
DC-DC कन्वर्टर्स एक DC वोल्टेज को दूसरे DC वोल्टेज में परिवर्तित करते हैं। MOSFET इन कन्वर्टर्स में हाई-स्पीड स्विच के रूप में कार्य करता है, जो इनपुट और आउटपुट के बीच ऊर्जा के स्थानांतरण को नियंत्रित करता है। इसकी तेज़ स्विचिंग और कम ऊर्जा हानि के कारण, MOSFET पोर्टेबल उपकरणों जैसे लैपटॉप और मोबाइल में बैटरी दक्षता बनाए रखता है।
पावर इनवर्टर में MOSFET
पावर इनवर्टर DC पावर को AC पावर में बदलने के लिए MOSFET का उपयोग करता है। MOSFET तेज़ और कुशल स्विच के रूप में कार्य करते हैं, जो DC इनपुट को उच्च आवृत्ति में ON/OFF कर AC तरंग बनाने में मदद करता है। उनकी उच्च दक्षता और कम गर्मी हानि उन्हें सौर पैनल, UPS, SMPS और छोटे इनवर्टर सिस्टम में आदर्श बनाती है।
मोटर ड्राइव और रोबोटिक्स में MOSFET
रोबोटिक्स और मोटर नियंत्रण में MOSFET मोटरों को चालू/बंद करने या उनकी गति नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल होता है। उच्च स्विचिंग गति और कम ऊर्जा हानि के कारण MOSFET PWM (Pulse-Width Modulation) तकनीक में मोटर गति और टॉर्क को नियंत्रित करता है। इसके तेज़ और सटीक स्विचिंग गुण इसे रोबोटिक और औद्योगिक ऑटोमेशन सिस्टम में विश्वसनीय बनाते हैं।
ऑडियो और RF एम्पलीफायर में MOSFET
MOSFET का उपयोग ऑडियो और रेडियो-फ़्रीक्वेंसी (RF) एम्पलीफायरों में भी किया जाता है। यह कमजोर सिग्नल को न्यूनतम विरूपण के साथ मजबूत करता है। ऑडियो एम्पलीफायर में MOSFET उच्च गुणवत्ता वाली ध्वनि प्रदान करता है, जबकि RF सर्किट में यह रेडियो संकेतों को प्रभावी रूप से बढ़ाता है। कम शक्ति खपत और कम गर्मी हानि इसे लंबे समय तक टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल बनाती है।
डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स में MOSFET
कंप्यूटर, स्मार्टफोन और माइक्रोप्रोसेसर आधारित सिस्टम में MOSFET अरबों डिजिटल स्विचों के रूप में काम करते हैं। यह डिजिटल सिग्नल को “चालू” और “बंद” स्थिति में बदलकर 1s और 0s उत्पन्न करता है। छोटा आकार और कम ऊर्जा खपत इसे बैटरी-चालित उपकरणों में आदर्श बनाता है। MOSFET की तेज़ स्विचिंग गति आधुनिक डिजिटल तकनीक की रीढ़ है।
एलईडी लाइटिंग में MOSFET
एलईडी लाइटिंग सिस्टम में MOSFET रोशनी को कुशलतापूर्वक स्विच और नियंत्रित करने के लिए प्रयोग होता है। यह PWM तकनीक द्वारा एलईडी को तेज़ी से चालू और बंद करता है, जिससे बिजली की बचत होती है। MOSFET कम गर्मी पैदा करता है, जिससे एलईडी बल्ब की आयु बढ़ती है। इसकी उच्च स्विचिंग गति और उच्च करंट क्षमता इसे आधुनिक एलईडी प्रकाश प्रणाली के लिए आदर्श बनाती है।
MOSFET खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
MOSFET (Metal-Oxide-Semiconductor Field-Effect Transistor) का सही चुनाव आपके सर्किट की दक्षता, विश्वसनीयता और जीवनकाल को सीधे प्रभावित करता है। इसलिए इसे खरीदते समय कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है।
1. प्रकार और चैनल चयन
सबसे पहले यह निर्धारित करें कि आपके एप्लिकेशन में N-चैनल या P-चैनल MOSFET की आवश्यकता है।
- N-चैनल MOSFET: आम तौर पर लो-साइड स्विचिंग के लिए उपयोग किया जाता है, यानी लोड को ग्राउंड से जोड़ने के लिए। इसकी स्विचिंग क्षमता तेज़ और दक्षता अधिक होती है।
- P-चैनल MOSFET: हाई-साइड स्विचिंग के लिए उपयुक्त है, यानी लोड को पॉजिटिव सप्लाई से जोड़ने के लिए। इसका गेट ड्राइव वोल्टेज N-चैनल के विपरीत होता है।
सही प्रकार का चयन करने से सर्किट डिज़ाइन सरल और ऊर्जा कुशल बनता है।
2. वोल्टेज रेटिंग्स
MOSFET का VDS (Drain-Source Voltage) और VGS (Gate-Source Voltage) एप्लिकेशन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- VDS Rating: ड्रेन और सोर्स के बीच अधिकतम वोल्टेज जो MOSFET सह सकता है। इसे आपके सर्किट के अधिकतम वोल्टेज से अधिक चुनना चाहिए ताकि डिवाइस विफल न हो।
- VGS Rating: गेट को पूरी तरह चालू या बंद करने के लिए आवश्यक वोल्टेज। यह आपके गेट ड्राइवर सर्किट से मेल खाना चाहिए।
3. करंट क्षमता
MOSFET का ID (Maximum Drain Current) आपके लोड की आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए।
- यह सुनिश्चित करें कि MOSFET की करंट रेटिंग आपके लोड के अधिकतम करंट से अधिक हो।
- उच्च करंट वाले एप्लिकेशन में RDS(on) कम होना चाहिए, ताकि चालू होने पर कम ऊर्जा गर्मी के रूप में नष्ट हो।
- सही करंट रेटिंग और कम ऑन-रेसिस्टेंस सर्किट की दक्षता और सुरक्षा बढ़ाता है।
4. RDS(on) और स्विचिंग प्रदर्शन
MOSFET का RDS(on) और स्विचिंग प्रदर्शन इसकी दक्षता और गति को निर्धारित करते हैं।
- RDS(on) कम होना: चालू अवस्था में कम प्रतिरोध होने से बिजली की हानि कम होती है और गर्मी उत्पन्न कम होती है।
- गेट कैपेसिटेंस (Ciss/Coss): कम कैपेसिटेंस तेज़ चार्जिंग और डिस्चार्जिंग सुनिश्चित करता है, जिससे स्विचिंग स्पीड बढ़ती है।
- ऑन/ऑफ डिले: जितना कम, उतना बेहतर, क्योंकि यह स्विचिंग लॉस को कम करता है और दक्षता बढ़ाता है।
5. थर्मल मैनेजमेंट
उच्च शक्ति वाले एप्लिकेशन में MOSFET की गर्मी प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- Rth (Thermal Resistance) कम होना चाहिए, ताकि डिवाइस जल्दी गर्मी खो सके।
- यदि पावर अप्लिकेशन उच्च है, तो हीटसिंक का उपयोग करना आवश्यक है।
- सही थर्मल प्रबंधन MOSFET को लंबे समय तक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाता है।
6. पिनआउट और पैकेज
- पिनआउट: डेटाशीट देखकर गेट, ड्रेन और सोर्स पिन की पहचान करना आवश्यक है। गलत कनेक्शन MOSFET को तुरंत नुकसान पहुँचा सकता है।
- पैकेज: अपने PCB लेआउट के अनुसार थ्रू-होल (TO-220) या सरफेस-माउंट (SOT-23, SOT-223) पैकेज चुनें। सही पैकेज चयन सर्किट की थर्मल और मैकेनिकल स्थिरता सुनिश्चित करता है।
MOSFET खरीदते समय प्रकार, वोल्टेज और करंट रेटिंग, RDS(on), स्विचिंग प्रदर्शन, थर्मल मैनेजमेंट और पैकेजिंग को ध्यान में रखना चाहिए। यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण न केवल सर्किट की दक्षता बढ़ाता है बल्कि उपकरण की विश्वसनीयता और लंबी उम्र को भी सुनिश्चित करता है। सही चयन के साथ MOSFET आपके डिजिटल और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोजेक्ट में उच्च प्रदर्शन, कम ऊर्जा हानि और टिकाऊ संचालन प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
1. MOSFET और IGBT क्या में अंतर हैं?
MOSFET और IGBT दोनों पावर इलेक्ट्रॉनिक स्विच हैं, लेकिन उनके काम करने के सिद्धांत और उपयोग अलग हैं। MOSFET वोल्टेज-कंट्रोल्ड होता है, तेज़ स्विचिंग करता है, कम चालू हानि (RDS(on)) देता है और मुख्यतः लो से मिड वोल्टेज/करंट एप्लिकेशन जैसे SMPS, LED ड्राइवर और मोटर कंट्रोल में इस्तेमाल होता है। वहीं, IGBT करंट-कंट्रोल्ड होता है, स्विचिंग गति MOSFET से धीमी होती है, चालू होने पर वोल्टेज ड्रॉप ज्यादा होता है, लेकिन यह उच्च वोल्टेज और करंट संभाल सकता है और पावर इनवर्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल ड्राइव और इंडस्ट्रियल मोटर ड्राइव में उपयोगी है। संक्षेप में, MOSFET तेज और ऊर्जा-कुशल लो-पॉवर स्विच है, जबकि IGBT हाई-पावर सिस्टम के लिए आदर्श है।
2. क्या MOSFET दोनों दिशाओं में करंट को चला सकता है?
नहीं, MOSFET करंट को दोनों दिशाओं में स्वतंत्र रूप से प्रवाहित नहीं कर सकता जैसे कोई साधारण वायर। MOSFET को मुख्य रूप से एक दिशा में करंट को नियंत्रित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है—N-चैनल MOSFET में ड्रेन से सोर्स और P-चैनल MOSFET में सोर्स से ड्रेन—जब उपयुक्त गेट वोल्टेज लगाया जाता है। अधिकांश MOSFET में एक अंतर्निहित बॉडी डायोड (Body Diode) होता है, जो कुछ मात्रा में रिवर्स करंट की अनुमति देता है, लेकिन यह सामान्य संचालन के लिए मुख्य conduction मार्ग नहीं है और इसे सामान्य रूप से उपयोग नहीं किया जाता। इसलिए, नियंत्रित और कुशल करंट प्रवाह के लिए MOSFET को एक दिशात्मक (Unidirectional) माना जाता है, और विपरीत दिशा में करंट प्रवाह केवल बॉडी डायोड पर निर्भर करता है।
3. N-चैनल और P-चैनल MOSFET में क्या फर्क होता है?
N-चैनल और P-चैनल MOSFET में मुख्य अंतर उनके करंट प्रवाह और गेट वोल्टेज के प्रकार में होता है। N-चैनल MOSFET में करंट मुख्य रूप से ड्रेन से सोर्स की दिशा में प्रवाहित होता है, और इसे चालू करने के लिए गेट पर सकारात्मक वोल्टेज लगाया जाता है। इसके विपरीत, P-चैनल MOSFET में करंट सोर्स से ड्रेन की दिशा में प्रवाहित होता है, और इसे चालू करने के लिए गेट पर नकारात्मक वोल्टेज लगाया जाता है। तकनीकी रूप से, N-चैनल MOSFET अधिक तेज़ स्विचिंग और कम प्रतिरोध प्रदान करता है, इसलिए यह उच्च-करंट अनुप्रयोगों में अधिक उपयोगी होता है, जबकि P-चैनल MOSFET का उपयोग आम तौर पर पॉवर सप्लाई सर्किट में आसान नियंत्रण के लिए किया जाता है। इस तरह, दोनों प्रकार की MOSFET संरचना और संचालन के आधार पर अलग-अलग परिस्थितियों में उपयोग की जाती हैं।
4. कौन सा MOSFET ज्यादातर इस्तेमाल किया जाता है?
ज्यादातर इस्तेमाल किया जाने वाला MOSFET N-चैनल MOSFET है। इसका मुख्य कारण यह है कि N-चैनल MOSFET में कम ऑन-रेसिस्टेंस (Rds(on)) होता है और यह अधिक तेज़ स्विचिंग कर सकता है, जिससे उच्च करंट और उच्च गति वाले सर्किटों में इसे अधिक कुशल और विश्वसनीय बनाया जा सकता है। इसके अलावा, N-चैनल MOSFET की उत्पादन लागत भी कम होती है और यह उच्च शक्ति वाले अनुप्रयोगों में P-चैनल MOSFET की तुलना में बेहतर प्रदर्शन देता है। इसी वजह से आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, माइक्रोप्रोसेसर, पावर सप्लाई और इंटीग्रेटेड सर्किट में N-चैनल MOSFET का अधिक व्यापक उपयोग किया जाता है।
धन्यवाद! हमें उम्मीद है कि यह पोस्ट ”MOSFET क्या होता है” आपके लिए जानकारीपूर्ण और मददगार रही होगी। अगर आपके कोई विचार, अनुभव या सवाल हैं, तो उन्हें नीचे कमेंट में शेयर करना न भूलें।

