आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स में सुरक्षा (Safety) और आइसोलेशन (Isolation) की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। विशेष रूप से तब, जब एक सर्किट हाई वोल्टेज पर कार्य कर रहा हो और दूसरा सर्किट लो वोल्टेज या संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स पर आधारित हो। ऐसे में दोनों सर्किट्स को सीधे आपस में जोड़ना न केवल सर्किट के लिए बल्कि उपयोगकर्ता की सुरक्षा के लिए भी गंभीर रूप से खतरनाक साबित हो सकता है।
इसी प्रकार की समस्याओं से बचने और सर्किट्स के बीच सुरक्षित सिग्नल ट्रांसफर सुनिश्चित करने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट का उपयोग किया जाता है, जिसे Optocoupler कहा जाता है। कई शुरुआती विद्यार्थियों और इलेक्ट्रॉनिक्स में रुचि रखने वाले लोगों के मन में यह प्रश्न आता है कि Optocoupler Kya Ha और यह आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स में इतना आवश्यक क्यों माना जाता है। Optocoupler का मुख्य उद्देश्य दो अलग-अलग वोल्टेज लेवल वाले सर्किट्स के बीच विद्युत संपर्क को पूरी तरह अलग रखते हुए सुरक्षित संचार स्थापित करना होता है।
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Optocoupler क्या है? Optocoupler Kya Ha
Optocoupler एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट है जिसे विशेष रूप से इस उद्देश्य से बनाया गया है कि दो अलग-अलग सर्किट्स के बीच सिग्नल का आदान-प्रदान सुरक्षित तरीके से किया जा सके, बिना उन्हें सीधे विद्युत रूप से जोड़े। इसी कारण इसे Opto-Isolator भी कहा जाता है। इसका मूल विचार बहुत सरल है—जहाँ सामान्य सर्किट में सिग्नल बिजली के माध्यम से जाता है, वहीं Optocoupler में सिग्नल रोशनी (Light) के माध्यम से ट्रांसफर होता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो Optocoupler में इनपुट और आउटपुट सर्किट के बीच पूर्ण Electrical Isolation होती है। इसका मतलब यह है कि इनपुट साइड पर मौजूद हाई वोल्टेज, स्पाइक्स या इलेक्ट्रिकल नॉइज़ सीधे आउटपुट साइड तक नहीं पहुँच सकते। यही गुण इसे संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स के लिए अत्यंत सुरक्षित बनाता है।
Optocoupler की संरचना को आसान भाषा में समझें
Optocoupler को आम तौर पर इस सूत्र से समझा जा सकता है:
Optocoupler = LED + Light Sensor (एक ही पैकेज में)
इसके अंदर: एक LED (Light Emitting Diode) इनपुट साइड पर होती है और एक Photo-Sensitive Device (अक्सर Photo-Transistor) आउटपुट साइड पर होती है
दोनों एक ही IC पैकेज में बंद होते हैं, लेकिन उनके बीच कोई धातु या तार का संपर्क नहीं होता। उनके बीच केवल एक पारदर्शी इंसुलेटिंग माध्यम होता है, जिससे केवल प्रकाश ही गुजर सकता है, बिजली नहीं।
Optocoupler को अन्य नामों से क्या कहते हैं?
अनुभव के आधार पर यदि Optocoupler को समझा जाए, तो इसके अलग-अलग नाम उसके काम करने के सिद्धांत और उद्देश्य को दर्शाते हैं। मूल रूप से यह एक ही इलेक्ट्रॉनिक घटक है, लेकिन इसके नाम अलग-अलग संदर्भों में प्रयोग किए जाते हैं।
1. Opto-Isolator (ऑप्टोआइसोलेटर)
यह Optocoupler का सबसे अधिक प्रचलित और तकनीकी रूप से सटीक नाम है। इस नाम में दो बातें स्पष्ट होती हैं:
- Opto → प्रकाश (Light) का उपयोग
- Isolator → विद्युत पृथक्करण (Electrical Isolation)
वैज्ञानिक दृष्टि से यह नाम इस तथ्य को दर्शाता है कि सिग्नल प्रकाश के माध्यम से ट्रांसफर होता है, जिससे इनपुट और आउटपुट सर्किट के बीच कोई सीधा विद्युत संपर्क नहीं रहता। यही कारण है कि हाई वोल्टेज या नॉइज़ वाला सर्किट दूसरे संवेदनशील सर्किट को प्रभावित नहीं कर पाता।
2. Photocoupler (फोटोकपलर / फोटो-कपलर)
यह नाम Optocoupler के कार्य करने के तरीके पर आधारित है।
- Photo → प्रकाश
- Coupler → युग्मन या जोड़ना
इसका अर्थ यह है कि दो सर्किट्स को सीधे बिजली से नहीं, बल्कि प्रकाश द्वारा जोड़ा गया है। इंजीनियरिंग भाषा में जब सिग्नल ट्रांसफर की प्रक्रिया पर जोर देना होता है, तब Photocoupler शब्द अधिक उपयुक्त माना जाता है।
3. Optical Isolator (ऑप्टिकल आइसोलेटर)
यह नाम Opto-Isolator के समान अर्थ रखता है, लेकिन इसमें विशेष रूप से Optical Medium (प्रकाश माध्यम) पर जोर दिया जाता है। यह शब्द यह स्पष्ट करता है कि:
- Isolation का माध्यम बिजली नहीं
- बल्कि Light (Optical Path) है
- इसलिए कई तकनीकी दस्तावेज़ों और इंडस्ट्रियल एप्लिकेशनों में Optical Isolator शब्द का उपयोग किया जाता है।
4. प्रकाश-विलगक (हिंदी नाम)
हिंदी में Optocoupler को वैज्ञानिक रूप से प्रकाश-विलगक कहा जा सकता है।
- प्रकाश → Light
- विलगक → अलग करने वाला
- यह नाम शाब्दिक रूप से वही अर्थ देता है जो Opto-Isolator देता है—अर्थात प्रकाश के माध्यम से सर्किटों को विद्युत रूप से अलग रखना।
Optocoupler की आवश्यकता क्यों होती है?
अनुभव के आधार पर यदि इस प्रश्न का उत्तर दिया जाए, तो Optocoupler की आवश्यकता सर्किट को सुरक्षित, स्थिर और विश्वसनीय बनाने के लिए होती है। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में अक्सर ऐसा होता है कि एक हिस्सा बहुत कम वोल्टेज पर काम करता है, जबकि दूसरा हिस्सा हाई वोल्टेज, हाई पावर या अत्यधिक शोर वाले वातावरण में कार्य करता है। ऐसे में दोनों को सीधे जोड़ना तकनीकी रूप से जोखिम भरा होता है। Optocoupler इसी जोखिम को समाप्त करता है।

1. हाई वोल्टेज से लो वोल्टेज सर्किट की सुरक्षा
Optocoupler की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता Electrical Isolation प्रदान करना है।
जब कोई माइक्रोकंट्रोलर (जैसे Arduino, PIC या ESP32) किसी AC लाइन या हाई पावर सर्किट से जुड़ा होता है, तो वहाँ वोल्टेज स्पाइक्स, फ्लक्चुएशन या फॉल्ट की संभावना बनी रहती है। Optocoupler इनपुट और आउटपुट के बीच विद्युत संपर्क को पूरी तरह तोड़ देता है और केवल प्रकाश के माध्यम से सिग्नल भेजता है।
वैज्ञानिक रूप से इसका अर्थ यह है कि
- इलेक्ट्रॉन्स का प्रवाह एक सर्किट से दूसरे तक नहीं होता
- केवल फोटॉन्स (Light Energy) सिग्नल को आगे बढ़ाते हैं
- इससे हाई वोल्टेज लो वोल्टेज सर्किट तक पहुँच ही नहीं पाता।
2. माइक्रोकंट्रोलर को AC और हाई पावर सर्किट से जोड़ने के लिए
- माइक्रोकंट्रोलर बहुत ही संवेदनशील डिवाइस होते हैं और सामान्यतः 3.3V या 5V पर कार्य करते हैं। दूसरी ओर, AC या पावर सर्किट सैकड़ों वोल्ट और उच्च करंट पर चलते हैं।
- Optocoupler इन दोनों के बीच एक सुरक्षित इंटरफेस की तरह काम करता है, जिससे कंट्रोल सिग्नल तो पहुँचता है, लेकिन पावर सर्किट का खतरनाक प्रभाव कंट्रोल साइड तक नहीं आता।
3. नॉइज़ (Noise) और सर्ज (Surge) से सुरक्षा
हाई पावर और इंडक्टिव लोड वाले सर्किट्स में अक्सर इलेक्ट्रिकल नॉइज़ और वोल्टेज सर्ज उत्पन्न होते हैं। ये अवांछित सिग्नल डिजिटल और एनालॉग सर्किट के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकते हैं।
Optocoupler प्रकाश-आधारित सिग्नल ट्रांसफर का उपयोग करता है, जिससे:
- नॉइज़ का विद्युत रूप से आगे जाना संभव नहीं होता
- सिग्नल की अखंडता (Signal Integrity) बनी रहती है
- यह विशेष रूप से इंस्ट्रूमेंटेशन और डिजिटल सिस्टम के लिए आवश्यक है।
4. विभिन्न वोल्टेज स्तरों वाले सर्किट्स के बीच सुरक्षित संचार
अक्सर एक सिस्टम में अलग-अलग वोल्टेज लेवल पर काम करने वाले सर्किट होते हैं, जैसे 5V कंट्रोल सर्किट और 230V पावर सर्किट। Optocoupler इन दोनों के बीच Voltage Level Compatibility सुनिश्चित करता है, बिना किसी डायरेक्ट कनेक्शन के।
यहाँ Optocoupler सिग्नल का “अर्थ” ट्रांसफर करता है, वोल्टेज को नहीं—यही इसकी वैज्ञानिक विशेषता है।
5. ग्राउंड लूप्स को रोकना
अलग-अलग ग्राउंड वाले सर्किट्स को सीधे जोड़ने से ग्राउंड लूप्स बन सकते हैं। Optocoupler दोनों सर्किट्स के ग्राउंड को अलग रखता है, जिससे सिस्टम अधिक स्थिर रहता है।
6. समग्र सुरक्षा और विश्वसनीयता
Optocoupler सिस्टम को न केवल सुरक्षित बनाता है, बल्कि उसकी लंबे समय की विश्वसनीयता भी बढ़ाता है। इसी कारण इसका उपयोग आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और पावर आधारित सिस्टम्स में अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
Optocoupler के मुख्य भाग (Main Components)
अनुभवी दृष्टिकोण से देखें तो Optocoupler की पूरी कार्यप्रणाली केवल दो मुख्य भागों पर आधारित होती है। इन दोनों भागों को इस तरह डिज़ाइन किया जाता है कि वे एक-दूसरे से विद्युत रूप से पूरी तरह अलग रहें, लेकिन प्रकाश के माध्यम से सटीक सिग्नल ट्रांसफर कर सकें।
1. LED (Light Emitting Diode) – Input Side
Optocoupler का पहला और सबसे महत्वपूर्ण भाग LED होती है, जो इनपुट साइड पर स्थित रहती है। जब इनपुट सर्किट से इसमें करंट प्रवाहित होता है, तो यह प्रकाश उत्पन्न करती है। सामान्यतः यह प्रकाश Infrared होता है, क्योंकि यह स्थिर और विश्वसनीय सिग्नल ट्रांसफर में सहायक होता है। वैज्ञानिक रूप से यहाँ विद्युत ऊर्जा को प्रकाश ऊर्जा में बदला जाता है, और यही प्रकाश आगे के सिग्नल की सूचना लेकर चलता है।
2. Light Sensor – Output Side
Optocoupler का दूसरा मुख्य भाग Light Sensor होता है, जो आउटपुट साइड पर लगा होता है। जैसे ही LED से निकलने वाली रोशनी इस सेंसर पर पड़ती है, यह सक्रिय हो जाता है और आउटपुट सर्किट में करंट प्रवाहित होने लगता है। यह Light Sensor कई प्रकार का हो सकता है, जैसे Phototransistor, Photodiode, Photo TRIAC या Photo SCR। किस प्रकार का सेंसर उपयोग होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि सर्किट DC का है या AC का।
3. Isolation Medium – Electrical Separation
LED और Light Sensor के बीच एक विशेष Isolation Medium होता है, जो सामान्यतः कांच, हवा या पारदर्शी एपॉक्सी रेज़िन से बना होता है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों भागों को विद्युत रूप से पूरी तरह अलग रखना है। यह माध्यम बिजली को गुजरने नहीं देता, लेकिन प्रकाश को आसानी से पार होने देता है। इसी कारण Optocoupler सुरक्षित और प्रभावी Electrical Isolation प्रदान करता है।
Optocoupler कैसे काम करता है? (Working Principle)
Optocoupler की कार्यप्रणाली इनपुट साइड से शुरू होती है। जब इनपुट सर्किट से वोल्टेज या करंट दिया जाता है, तो यह सीधे Optocoupler के अंदर लगी LED को मिलता है। यह LED सामान्यतः Infrared प्रकार की होती है। इनपुट में जितना करंट प्रवाहित होता है, उसी अनुपात में LED प्रकाश उत्पन्न करती है।

इस चित्र में Optocoupler के दो अलग-अलग हिस्से दिखाए गए हैं:
- बाईं तरफ → इनपुट सर्किट
- दाईं तरफ → आउटपुट सर्किट
इन दोनों के बीच कोई भी तार या इलेक्ट्रिकल कनेक्शन नहीं है। बीच में केवल Optocoupler का अंदरूनी भाग है।
LED के ON होते ही वह एक निश्चित तरंगदैर्ध्य (wavelength) की अवरक्त रोशनी उत्सर्जित करती है। यहाँ विद्युत ऊर्जा का रूपांतरण प्रकाश ऊर्जा में होता है। LED में बहने वाली धारा बढ़ने या घटने से प्रकाश की तीव्रता भी उसी अनुपात में बदलती है।
प्रकाश का आउटपुट साइड तक पहुँचना
LED से निकली यह रोशनी एक छोटे से पारदर्शी और इंसुलेटेड माध्यम (जैसे हवा, प्लास्टिक या एपॉक्सी) से होकर आउटपुट साइड पर स्थित फोटो-सेंसर तक पहुँचती है। यह माध्यम बिजली को रोकता है लेकिन प्रकाश को बिना बाधा गुजरने देता है।
फोटो-सेंसर का सक्रिय होना
जैसे ही यह प्रकाश फोटो-सेंसर (फोटोट्रांजिस्टर, फोटोडायोड, फोटो-TRIAC या फोटो-SCR) पर पड़ता है, उसके अंदर फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव के कारण चार्ज कैरियर्स उत्पन्न होते हैं। इसके परिणामस्वरूप फोटो-सेंसर कंडक्ट करने लगता है और आउटपुट सर्किट में करंट प्रवाहित हो जाता है।
आउटपुट सिग्नल का निर्माण
फोटो-सेंसर से उत्पन्न आउटपुट सिग्नल AC या DC हो सकता है, यह आउटपुट सर्किट के प्रकार पर निर्भर करता है। उत्पन्न आउटपुट करंट LED से आने वाली रोशनी की मात्रा के समानुपाती होता है, और आवश्यकता होने पर इसे आगे प्रवर्धित भी किया जा सकता है।
पूर्ण विद्युत पृथक्करण (Electrical Isolation)
पूरी प्रक्रिया के दौरान इनपुट और आउटपुट साइड के बीच कोई भी सीधा विद्युत संपर्क नहीं होता। इनपुट साइड का सिग्नल केवल प्रकाश के माध्यम से आउटपुट को नियंत्रित करता है। यही Optocoupler का मूल कार्य सिद्धांत है, जिसे गैल्वेनिक आइसोलेशन कहा जाता है।
अनुभव के आधार पर कहा जाए तो Optocoupler में इनपुट सिग्नल पहले प्रकाश में बदला जाता है, फिर वही प्रकाश आउटपुट साइड पर दोबारा विद्युत सिग्नल में परिवर्तित होता है—और इस पूरी प्रक्रिया में दोनों सर्किट सुरक्षित रूप से एक-दूसरे से अलग रहते हैं।
Optocoupler में Isolation क्यों ज़रूरी है?
Optocoupler में Isolation इसलिए आवश्यक होती है क्योंकि यह हाई-वोल्टेज और लो-वोल्टेज सर्किट के बीच एक मजबूत सुरक्षा दीवार बनाती है। जब AC या हाई पावर सर्किट में अचानक वोल्टेज स्पाइक या फॉल्ट आता है, तो Isolation उस खतरनाक ऊर्जा को लो-वोल्टेज साइड तक पहुँचने से रोक देती है। इससे न केवल सर्किट सुरक्षित रहता है, बल्कि ऑपरेटर को इलेक्ट्रिकल शॉक से भी सुरक्षा मिलती है।
माइक्रोकंट्रोलर और संवेदनशील घटकों की सुरक्षा
Arduino, PIC या अन्य माइक्रोकंट्रोलर बहुत कम वोल्टेज पर काम करते हैं और थोड़ी सी गड़बड़ी से भी खराब हो सकते हैं। Optocoupler की Isolation यह सुनिश्चित करती है कि हाई वोल्टेज, रिवर्स करंट या सर्ज सीधे माइक्रोकंट्रोलर तक न पहुँचें। वैज्ञानिक रूप से यह Isolation इलेक्ट्रॉन्स के प्रवाह को रोकती है और केवल प्रकाश के माध्यम से सिग्नल को नियंत्रित करती है।
AC और DC सर्किट का अलग रहना
अक्सर एक ही सिस्टम में AC पावर सर्किट और DC कंट्रोल सर्किट होते हैं। यदि इन्हें सीधे जोड़ा जाए तो अस्थिरता और खतरा दोनों बढ़ जाते हैं। Optocoupler की Isolation इन दोनों सर्किट्स को विद्युत रूप से अलग रखती है, जिससे वे एक-दूसरे को प्रभावित किए बिना स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकते हैं।
Noise और Spike के प्रभाव से बचाव
हाई पावर और इंडक्टिव लोड वाले सर्किट्स में इलेक्ट्रिकल Noise और Voltage Spikes सामान्य होते हैं। Isolation इन अवांछित सिग्नलों को एक सर्किट से दूसरे सर्किट में जाने से रोकती है। प्रकाश आधारित सिग्नल ट्रांसफर के कारण EMI और Noise का प्रभाव लगभग समाप्त हो जाता है, जिससे आउटपुट सिग्नल साफ और स्थिर रहता है।
अलग-अलग ग्राउंड वाले सर्किट्स में स्थिरता
जब दो सर्किट अलग-अलग ग्राउंड रेफरेंस पर काम करते हैं, तो सीधे कनेक्शन से Ground Loop बन सकता है। Optocoupler की Isolation दोनों सर्किट्स के ग्राउंड को अलग रखती है, जिससे सिस्टम की स्थिरता और विश्वसनीयता बढ़ती है।
Optocoupler में Isolation केवल एक अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि उसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। यही Isolation सर्किट को सुरक्षित बनाती है, संवेदनशील घटकों को बचाती है और पूरे सिस्टम को लंबे समय तक विश्वसनीय रूप से कार्य करने योग्य बनाती है।
ऑप्टोकप्लर (Optocoupler) के प्रकार और उनकी विशेषताएँ
ऑप्टोकप्लर के प्रकार मुख्य रूप से इसके आउटपुट के आधार पर तय होते हैं।
1. फोटोट्रांजिस्टर ऑप्टोकप्लर
फोटोट्रांजिस्टर ऑप्टोकप्लर सबसे सामान्य और व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला प्रकार है। इसे low और medium speed applications में इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि माइक्रोकंट्रोलर से रिले या छोटे लोड को जोड़ना। इसका काम LED की प्रकाश ऊर्जा को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलना होता है, जिससे सर्किटों के बीच पूरी तरह isolation मिलती है। यह सरल और भरोसेमंद होने के कारण स्विचिंग अनुप्रयोगों में सबसे ज्यादा उपयोगी है।
2. फोटोडार्लिंगटन ऑप्टोकप्लर
फोटोडार्लिंगटन ऑप्टोकप्लर उच्च current gain प्रदान करता है, जिससे छोटे input सिग्नल को बड़े current में परिवर्तित किया जा सकता है। यह DC सर्किट में विशेष रूप से उपयोगी है, जहां load को पर्याप्त करंट की जरूरत होती है। इसकी डिजाइन में डार्लिंगटन कॉन्फ़िगरेशन शामिल होती है, जिससे सिग्नल amplification बढ़ जाती है और यह बड़े इलेक्ट्रिकल लोड को आसानी से drive कर सकता है।
3. फोटो SCR और फोटो TRIAC ऑप्टोकप्लर
AC पावर कंट्रोल और हाई-वोल्टेज applications के लिए फोटो SCR और फोटो TRIAC ऑप्टोकप्लर अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। SCR-based optocouplers इंडस्ट्रियल AC लोड और high-voltage circuits में इस्तेमाल होते हैं, जहां trigger के बाद स्थायी conduction की आवश्यकता होती है। TRIAC optocouplers दोनों दिशाओं में AC current को switch कर सकते हैं, जिससे इन्हें लाइट डिमर, मोटर स्पीड कंट्रोल, और अन्य AC लोड applications के लिए उपयुक्त बनाया गया है।
4. फोटोडायोड ऑप्टोकप्लर
फोटोडायोड आउटपुट वाले optocouplers तेज़ प्रतिक्रिया समय प्रदान करते हैं और high-speed data communication applications के लिए आदर्श हैं। इसमें LED की प्रकाश ऊर्जा को तुरंत current में बदला जाता है, जिससे high-frequency signals को सटीक और तेज़ी से ट्रांसफर किया जा सकता है। यह विशेष रूप से एनालॉग और डिजिटल सिग्नल दोनों के लिए उपयुक्त होता है।
5. MOSFET और लॉजिक आउटपुट ऑप्टोकप्लर
MOSFET आउटपुट optocouplers high-power switching और solid-state relays में उपयोग किए जाते हैं। ये उच्च efficiency और linear response प्रदान करते हैं और AC/DC दोनों प्रकार के लोड के लिए अनुकूल होते हैं। वहीं, लॉजिक आउटपुट optocouplers डिजिटल interfacing के लिए बनाए जाते हैं और माइक्रोकंट्रोलर या अन्य डिजिटल ICs के साथ सीधे काम करते हैं। ये fast switching के लिए डिज़ाइन किए गए हैं और सरल डिजिटल integration प्रदान करते हैं।
ऑप्टोकप्लर का चयन हमेशा सर्किट के load type, switching speed और electrical isolation की जरूरत पर आधारित होता है। यह सुनिश्चित करता है कि सिग्नल सुरक्षित, सटीक और प्रभावी तरीके से एक सर्किट से दूसरे सर्किट में ट्रांसफर हो।
Optocoupler का Pin Diagram
ऑप्टोकप्लर का pin configuration इसकी कार्यप्रणाली को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आमतौर पर, एक standard optocoupler में चार pins होते हैं, जिन्हें दो भागों में बांटा जा सकता है: LED side और Output side।

LED side में Pin 1 और Pin 2 होते हैं। Pin 1 LED का anode होता है और Pin 2 cathode। जब LED में current flow करता है, तो यह प्रकाश उत्पन्न करता है। यही प्रकाश optocoupler के output side के photodetector को activate करता है। LED और output side के बीच कोई direct electrical connection नहीं होता, यही optical isolation का मूल सिद्धांत है।
Output side में Pin 3 और Pin 4 होते हैं। Pin 3 emitter होता है और Pin 4 collector। यह आमतौर पर phototransistor या photodarlington configuration होता है। जब LED सक्रिय होती है, तो phototransistor conduct करता है और current collector से emitter के बीच flow होने लगता है। इस तरह, LED का प्रकाश electrical signal में बदलकर output pin पर आता है।
लोकप्रिय Optocoupler ICs की सूची
नीचे दी गई तालिका में कुछ लोकप्रिय ऑप्टोकपलर ICs, उनके सामान्य उपयोग और मुख्य विशेषताएँ दी गई हैं।
| IC नाम | उपयोग (Application) | विशेषताएँ (Features) |
|---|---|---|
| PC817 | सामान्य प्रयोजन (General Purpose) | कम लागत वाला, सिग्नल आइसोलेशन के लिए सामान्य रूप से उपयोग किया जाता है |
| MOC3021 | AC TRIAC नियंत्रण (AC TRIAC Control) | AC लोड में TRIAC ड्राइव करने के लिए उपयुक्त |
| MOC3041 | जीरो क्रॉसिंग (Zero Crossing) | स्विचिंग के दौरान इलेक्ट्रिकल शोर को कम करता |
| 4N35 | शिक्षा और परीक्षण (Education और Testing) | सीखने और प्रोटोटाइपिंग के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है |
| TLP521 | औद्योगिक (Industrial) | उच्च आइसोलेशन वोल्टेज, कठिन पर्यावरण में विश्वसनीय |
| H11L1 | लॉजिक लेवल स्विचिंग (Logic Level Switching) | TTL लॉजिक सर्किट्स को ऑप्टिकल रूप से आइसोलेट करता है |
| ILD213T | उच्च गति स्विचिंग (High-Speed Switching) | औद्योगिक ऑटोमेशन के लिए तेज़ प्रतिक्रिया |
Optocoupler के उपयोग (Applications of Optocoupler)
मुख्य उपयोग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उनका महत्व:
SMPS और Power Supply
- ऑप्टोकपलर पावर सप्लाई में फीडबैक सर्किट को हाई-वोल्टेज आउटपुट से अलग करता है।
- यह सुरक्षा सुनिश्चित करता है और आउटपुट वोल्टेज को स्थिर रखने में मदद करता है।
- विज्ञान की दृष्टि से, यह प्रकाश के माध्यम से सिग्नल ट्रांसफर करता है, जिससे कोई डायरेक्ट इलेक्ट्रिकल कनेक्शन नहीं बनता।
Arduino और Microcontroller
- माइक्रोकंट्रोलर और Arduino सर्किट्स में यह रिले और AC लोड को कंट्रोल करने के लिए इस्तेमाल होता है।
- इसका उपयोग माइक्रोकंट्रोलर को हाई-वोल्टेज AC लोड से सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।
- यह छोटे DC सिग्नल को सुरक्षित रूप से उच्च-वोल्टेज कंट्रोल सिग्नल में बदल देता है।
Industrial Automation
- PLC और औद्योगिक मशीनों में इनपुट/आउटपुट की सुरक्षा के लिए ऑप्टोकपलर अनिवार्य है।
- यह औद्योगिक उपकरणों को शॉर्ट सर्किट, वोल्टेज स्पाइक्स और शोर से बचाता है।
- प्रकाश आधारित ट्रांसफर की वजह से प्रतिक्रिया तेज़ और विश्वसनीय होती है।
Medical Equipment
- ऑप्टोकपलर चिकित्सा उपकरणों में रोगी की सुरक्षा के लिए उपयोग होता है।
- संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक्स को रोगी के संपर्क से अलग रखता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी इलेक्ट्रिकल फॉल्ट का असर सीधे मानव शरीर पर न पड़े।
Solar Inverter और UPS
- कंट्रोल और मॉनिटरिंग सर्किट्स में ऑप्टोकपलर उच्च वोल्टेज से नियंत्रण सर्किट को अलग रखता है।
- यह सिस्टम की स्थिरता बढ़ाता है और शोर से प्रभावित नहीं होने देता।
अन्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और प्रैक्टिकल उपयोग:
- इलेक्ट्रिकल आइसोलेशन: निम्न-वोल्टेज कंट्रोल सर्किट को हाई-वोल्टेज पावर सर्किट से अलग करता है, जैसे सर्वो मोटर कंट्रोल में।
- AC लोड कंट्रोल: ट्रायैक और मोटर नियंत्रण में स्विचिंग के लिए।
- नॉइज़ फ़िल्टरिंग: डिजिटल सेंसिंग सर्किट और कंप्यूटर इनपुट में शोर को कम करता है।
- सिग्नल प्रवर्धन (Signal Amplification): छोटे सिग्नल को सुरक्षित उच्च-वोल्टेज सिग्नल में बदलता है।
- स्विचिंग और रिमोट कंट्रोल: विभिन्न वोल्टेज स्तरों के बीच तेज़ और सुरक्षित स्विचिंग सुनिश्चित करता है।
- सॉलिड स्टेट रिले (SSR): SSR के इनपुट सेक्शन में महत्वपूर्ण, इनपुट को आउटपुट से अलग रखता है।
Optocoupler CTR (Current Transfer Ratio) क्या है?
CTR, यानी Current Transfer Ratio, ऑप्टोकपलर की कुशलता (Efficiency) को मापने का मुख्य पैमाना है। यह दर्शाता है कि ऑप्टोकपलर में इनपुट सिग्नल (Input Current) कितनी प्रभावी तरीके से आउटपुट सिग्नल (Output Current) में बदलता है।
सिद्धांत और गणितीय रूप से: CTR = (Output Current (I_O) / Input Current (I_I)) × 100%
- यहाँ, Input Current (I_I) ऑप्टोकपलर के LED में प्रवाहित धारा है।
- Output Current (I_O) ट्रांजिस्टर या आउटपुट डिवाइस में मिलने वाली धारा है।
विज्ञान की दृष्टि से:
- ऑप्टोकपलर में LED से निकलने वाला प्रकाश आउटपुट ट्रांजिस्टर को सक्रिय करता है।
- CTR जितना अधिक होगा, इसका मतलब है कि छोटा इनपुट करंट भी ज्यादा आउटपुट करंट पैदा कर रहा है, यानी ऑप्टोकपलर अधिक प्रभावी है।
- उच्च CTR वाला ऑप्टोकपलर तेज़ प्रतिक्रिया और बेहतर सिग्नल ट्रांसफर सुनिश्चित करता है।
व्यावहारिक महत्व:
- High CTR: कम इनपुट करंट में भी पर्याप्त आउटपुट करंट। SMPS, AC लोड कंट्रोल और औद्योगिक ऑटोमेशन में बेहतर प्रदर्शन।
- Low CTR: आउटपुट करंट कम, ज्यादा इनपुट करंट की आवश्यकता। कमजोर या धीमे सिग्नल ट्रांसफर, प्रतिक्रिया में देरी।
उदाहरण:
- यदि CTR = 100%, इसका मतलब है कि 1 mA इनपुट करंट से 1 mA आउटपुट करंट प्राप्त हो रहा है।
- यदि CTR = 200%, 1 mA इनपुट से 2 mA आउटपुट करंट मिलेगा।
CTR ऑप्टोकपलर की सिग्नल ट्रांसफर क्षमता और प्रभावशीलता को दर्शाता है। जितना उच्च CTR, उतनी बेहतर कार्यक्षमता और तेज़ प्रतिक्रिया। वैज्ञानिक रूप से, यह LED प्रकाश की दक्षता और ट्रांजिस्टर रिस्पॉन्स का सीधे माप है।
Optocoupler के फायदे (Advantages)
1. High Voltage Protection (उच्च वोल्टेज से सुरक्षा)
- ऑप्टोकपलर दो सर्किट्स के बीच विद्युत संपर्क नहीं होने देता, जिससे संवेदनशील लो-वोल्टेज सर्किट हाई वोल्टेज से सुरक्षित रहते हैं।
- वैज्ञानिक दृष्टि से, LED से निकलने वाला प्रकाश आउटपुट ट्रांजिस्टर को सक्रिय करता है, इसलिए कोई डायरेक्ट करंट का रास्ता नहीं बनता।
2. Complete Electrical Isolation (पूर्ण विद्युत पृथक्करण)
- इनपुट और आउटपुट सर्किट पूरी तरह से अलग होते हैं।
- यह शॉर्ट सर्किट, वोल्टेज स्पाइक्स और अन्य इलेक्ट्रिकल खतरों से सुरक्षा देता है।
3. Noise Free Signal (शोर रहित सिग्नल)
- डिजिटल और एनालॉग सर्किट्स में सिग्नल की विश्वसनीयता बढ़ाता है।
- ऑप्टोकपलर इलेक्ट्रिकल नॉइज़ (Electrical Noise) को ब्लॉक करता है।
4. Compact Size (छोटा आकार)
- छोटे साइज में उच्च प्रदर्शन।
- PCB डिजाइन में स्थान की बचत और बेहतर इंटीग्रेशन की सुविधा।
Optocoupler के नुकसान (Disadvantages)
1. LED Aging से Performance कम हो सकती है
- समय के साथ LED की रोशनी कम हो जाती है।
- इसका परिणाम आउटपुट करंट में गिरावट और CTR में कमी के रूप में दिखाई देता है।
2. Speed Limitations (गति की सीमाएँ)
- ऑप्टोकपलर की प्रतिक्रिया समय LED से प्रकाश निकलने और ट्रांजिस्टर को सक्रिय करने पर निर्भर होती है।
- उच्च-फ्रीक्वेंसी सिग्नल्स के लिए सीमित।
3. Temperature Sensitivity (तापमान पर असर)
- अत्यधिक तापमान LED की रोशनी और ट्रांजिस्टर की प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
- इसका मतलब है कि अत्यधिक गर्म वातावरण में ऑप्टोकपलर की कार्यक्षमता कम हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
1. Optocoupler और Relay में क्या फर्क है?
बहुत लोग सोचते हैं कि Optocoupler और Relay एक ही हैं, लेकिन वास्तविकता में यह अलग हैं। Relay एक electromechanical switch है, जो विद्युत करंट के माध्यम से कॉइल को सक्रिय कर फ़िजिकल संपर्क बनाकर सर्किट को ऑन या ऑफ करता है। वहीं, Optocoupler एक optical isolation device है, जो इनपुट सिग्नल को LED के प्रकाश के माध्यम से आउटपुट ट्रांजिस्टर तक ट्रांसफर करता है, बिना कोई डायरेक्ट इलेक्ट्रिकल कनेक्शन बनाए। इस तरह Relay में मूविंग पार्ट्स और स्पार्क की संभावना होती है, जबकि Optocoupler तेज़, शोर-रहित और सुरक्षित सिग्नल ट्रांसफर प्रदान करता है।
2. Optocoupler का LED Burn होने पर क्या होता है?
यदि Optocoupler का LED Burn हो जाए, तो यह पूरी तरह से काम करना बंद कर देगा क्योंकि LED ही इनपुट सिग्नल को प्रकाश में बदलकर आउटपुट ट्रांजिस्टर को सक्रिय करता है। परिणामस्वरूप, सर्किट का आउटपुट सिग्नल पूरी तरह से खो जाएगा और संबंधित नियंत्रण या स्विचिंग फंक्शन असफल हो जाएगा।
3. Optocoupler का CTR क्यों बदलता रहता है?
Optocoupler का Current Transfer Ratio (CTR) स्थिर नहीं रहता क्योंकि यह इनपुट करंट (Input Current), तापमान (Temperature) और LED/ट्रांजिस्टर की उम्र (Aging) पर निर्भर करता है। इन कारकों के बदलने से आउटपुट करंट में उतार-चढ़ाव आता है, इसलिए CTR समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है।
4. Optocoupler और Isolated Transformer में क्या अंतर है?
Optocoupler मुख्य रूप से लो-पावर सिग्नल आइसोलेशन (Low Power Signal Isolation) के लिए इस्तेमाल होता है, जहां इनपुट और आउटपुट के बीच सुरक्षित सिग्नल ट्रांसफर जरूरी होता है। इसके विपरीत, Isolated Transformer हाई-पावर वोल्टेज आइसोलेशन (High Power Voltage Isolation) के लिए डिज़ाइन किया जाता है, जो उच्च वोल्टेज वाले पावर सर्किट्स को अलग और सुरक्षित रखता है।
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