बिजली हमारे दैनिक जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। आज के समय में घरों की रोशनी, पंखे, फ्रिज, टीवी, मोबाइल चार्जर से लेकर बड़े उद्योगों की मशीनें, वाहन और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण—सभी का संचालन बिजली पर ही निर्भर करता है। जैसे-जैसे बिजली का उपयोग बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे उससे जुड़े जोखिम भी बढ़ते जा रहे हैं। बिजली के उपयोग में सबसे बड़ा खतरा ओवरकरंट (Overcurrent) और शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) का होता है, जो उपकरणों के खराब होने, आग लगने और जान-माल के नुकसान का कारण बन सकता है।
इन्हीं गंभीर खतरों से विद्युत परिपथ और उपकरणों की सुरक्षा के लिए फ्यूज (Fuse) का उपयोग किया जाता है। फ्यूज एक छोटा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण विद्युत सुरक्षा उपकरण है, जो किसी भी असामान्य स्थिति में सर्किट को स्वतः काटकर नुकसान को रोकता है। सही जानकारी के अभाव में कई लोग गलत फ्यूज का उपयोग कर लेते हैं, जिससे सुरक्षा का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता। इसलिए यह जानना आवश्यक हो जाता है कि फ्यूज कितने प्रकार का होता है, वे कैसे काम करते हैं और अलग-अलग परिस्थितियों में कौन-सा फ्यूज उपयुक्त होता है।
इसी उद्देश्य से इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि फ्यूज क्या होता है, फ्यूज कितने प्रकार का होता है, उनके उपयोग, कार्य सिद्धांत, फायदे, नुकसान और सही फ्यूज के चयन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी, ताकि पाठक बिजली से जुड़ी सुरक्षा को बेहतर ढंग से समझ सकें और सही निर्णय ले सकें।
Table of Contents
फ्यूज क्या होता है? (What is Fuse in Hindi)
फ्यूज क्या होता है? (What is Fuse in Hindi) फ्यूज एक विद्युत सुरक्षा उपकरण है, जिसे विद्युत परिपथ (Electrical Circuit) के श्रृंखला क्रम (Series) में जोड़ा जाता है। इसका मुख्य कार्य परिपथ और उससे जुड़े विद्युत उपकरणों को अधिक धारा (Overcurrent) से होने वाले नुकसान से बचाना होता है।
जब सर्किट में सामान्य सीमा से अधिक करंट बहने लगता है—जैसे शॉर्ट सर्किट या ओवरलोडिंग की स्थिति में—तो फ्यूज में लगा कम गलनांक वाली धातु का पतला तार अत्यधिक गर्म होकर पिघल जाता है। तार के पिघलते ही परिपथ टूट जाता है और विद्युत प्रवाह रुक जाता है। इस प्रकार फ्यूज उपकरणों को जलने, तारों के क्षतिग्रस्त होने और आग लगने से सुरक्षित करता है। इसलिए वैज्ञानिक रूप से कहा जा सकता है कि फ्यूज वह सुरक्षात्मक उपकरण है जो अधिक विद्युत धारा की स्थिति में स्वयं नष्ट होकर पूरे परिपथ की रक्षा करता है।
फ्यूज की सटीक परिभाषा (Definition of Fuse)
फ्यूज वह विद्युत सुरक्षा उपकरण है, जिसे परिपथ के श्रृंखला क्रम में जोड़ा जाता है और जो निर्धारित सीमा से अधिक धारा प्रवाहित होने पर पिघलकर परिपथ को स्वतः तोड़ देता है, जिससे केबलों और विद्युत उपकरणों को क्षति से बचाया जा सके।
फ्यूज का कार्य सिद्धांत (Working Principle of Fuse)
फ्यूज एक मूलभूत लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है, जिसका कार्य सिद्धांत पूरी तरह से विद्युत धारा के तापीय प्रभाव (Heating Effect of Electric Current) पर आधारित होता है। यह सिद्धांत भौतिकी का एक स्थापित और प्रयोगसिद्ध नियम है, जिसे जूल का ऊष्मा नियम (Joule’s Law of Heating) कहा जाता है।
मूल वैज्ञानिक सिद्धांत
जब किसी चालक (conductor) में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसमें ऊष्मा उत्पन्न होती है। उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा इस समीकरण से व्यक्त की जाती है:
H = I²Rt
जहाँ,
- I = विद्युत धारा
- R = चालक का प्रतिरोध
- t = धारा प्रवाहित होने का समय
इस समीकरण से स्पष्ट है कि ऊष्मा धारा के वर्ग (square) के समानुपाती होती है। अर्थात्, करंट में थोड़ी-सी वृद्धि भी ऊष्मा को बहुत अधिक बढ़ा देती है।
फ्यूज कैसे काम करता है (Step-by-Step वैज्ञानिक व्याख्या)
सामान्य स्थिति
फ्यूज तार पतला होता है और कम गलनांक (Low Melting Point) वाली धातु या मिश्र धातु से बनाया जाता है। जब सर्किट में निर्धारित सीमा (Rated Current) के भीतर करंट बहता है, तो उत्पन्न ऊष्मा सुरक्षित स्तर पर रहती है और फ्यूज सामान्य रूप से कार्य करता रहता है।
अधिक करंट की स्थिति (Overload / Short Circuit)
जैसे ही सर्किट में सामान्य से अधिक करंट प्रवाहित होता है, I² के कारण ऊष्मा तीव्रता से बढ़ती है। फ्यूज तार का तापमान तेजी से बढ़कर उसके गलनांक (Melting Point) तक पहुँच जाता है।
फ्यूज तार का पिघलना
अत्यधिक ऊष्मा के कारण फ्यूज तार पिघल जाता है और टूट जाता है। इससे सर्किट तुरंत खुल (Open Circuit) जाता है।
सुरक्षा सुनिश्चित होना
सर्किट टूटते ही विद्युत प्रवाह रुक जाता है, जिससे आगे जुड़े उपकरण अत्यधिक करंट से क्षतिग्रस्त होने से बच जाते हैं। यही फ्यूज का वास्तविक सुरक्षा कार्य है।
फ्यूज को श्रृंखला (Series) में क्यों जोड़ा जाता है
फ्यूज को हमेशा लाइन (Live Wire) के साथ श्रृंखला में जोड़ा जाता है, ताकि सर्किट में बहने वाली पूरी धारा फ्यूज से होकर ही गुजरे। यदि फ्यूज समानांतर (Parallel) में लगाया जाए, तो वह धारा को रोक नहीं पाएगा और सुरक्षा का उद्देश्य समाप्त हो जाएगा।
- फ्यूज स्वयं को नष्ट करके सर्किट को सुरक्षित करता है, इसलिए इसे “Sacrificial Device” भी कहा जाता है।
- इसका कार्य पूरी तरह स्वचालित होता है, इसमें किसी बाहरी नियंत्रण की आवश्यकता नहीं होती।
- फ्यूज का चयन हमेशा उपकरण की करंट रेटिंग के अनुसार किया जाता है, ताकि वह सही समय पर पिघले—न बहुत जल्दी, न बहुत देर से।
फ्यूज कितने प्रकार के होते हैं? ( Types Of Fuse In Hindi)
फ्यूज को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि अलग-अलग विद्युत परिस्थितियों में करंट का स्तर, वोल्टेज और फॉल्ट एनर्जी अलग होती है। इसी कारण फ्यूज को डिज़ाइन, वोल्टेज लेवल और उपयोग के आधार पर विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है। नीचे सभी प्रमुख प्रकारों का अनुभवजन्य, सरल और वैज्ञानिक विवरण दिया गया है।

रीवायरेबल फ्यूज (Rewirable / Kit-Kat Fuse)
रीवायरेबल फ्यूज सबसे पुराना और पारंपरिक सुरक्षा उपकरण है, जो मुख्य रूप से Heating Effect of Electric Current पर कार्य करता है। इसमें कम गलनांक वाला पतला फ्यूज तार पोर्सिलेन के आधार पर लगाया जाता है। सामान्य करंट पर यह सुरक्षित रहता है, लेकिन जैसे ही करंट सीमा से अधिक होता है,
I²R के कारण उत्पन्न ऊष्मा तार को पिघला देती है और सर्किट टूट जाता है। यह फ्यूज घरेलू वायरिंग में व्यापक रूप से उपयोग होता है क्योंकि इसकी लागत कम होती है और इसे आसानी से रिपेयर किया जा सकता है, हालांकि इसकी सुरक्षा सटीक नहीं मानी जाती।
कार्ट्रिज फ्यूज (Cartridge Fuse)
कार्ट्रिज फ्यूज में फ्यूज एलिमेंट एक सीलबंद ग्लास या सिरेमिक ट्यूब के भीतर होता है, जिससे पिघलने के समय उत्पन्न आर्क बाहर नहीं निकलता। यह डिज़ाइन इसे रीवायरेबल फ्यूज की तुलना में अधिक सुरक्षित बनाता है। D-Type और Link-Type इसके प्रमुख रूप हैं, जिनका उपयोग घरेलू, औद्योगिक और कमर्शियल इंस्टॉलेशन में किया जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह फ्यूज करंट को बेहतर ढंग से नियंत्रित करता है और सटीक समय पर सर्किट को काटता है।
HRC फ्यूज (High Rupturing Capacity Fuse)
HRC फ्यूज उच्च फॉल्ट करंट वाले सर्किट के लिए डिज़ाइन किया गया होता है। इसके अंदर भरा क्वार्ट्ज पाउडर पिघलते समय उत्पन्न आर्क को तुरंत ठंडा कर देता है और सुरक्षित रूप से समाप्त करता है। यही कारण है कि यह फ्यूज बहुत अधिक करंट को भी बिना विस्फोट के काट सकता है। इसका उपयोग पावर प्लांट, सबस्टेशन और भारी उद्योगों में किया जाता है, जहाँ विश्वसनीयता और उच्च ब्रेकिंग क्षमता अनिवार्य होती है।
ब्लेड फ्यूज (Blade Fuse)
ब्लेड फ्यूज आकार में छोटा लेकिन कार्य में अत्यंत सटीक होता है। इसकी प्लास्टिक बॉडी में धातु के ब्लेड लगे होते हैं, जो सर्किट में आसानी से फिट हो जाते हैं। अलग-अलग रंग करंट रेटिंग को दर्शाते हैं, जिससे पहचान सरल हो जाती है। यह फ्यूज मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कार और बाइक में उपयोग किया जाता है, जहाँ सीमित स्थान और त्वरित सुरक्षा आवश्यक होती है।
थर्मल फ्यूज (Thermal Fuse)
थर्मल फ्यूज का कार्य सिद्धांत करंट पर नहीं बल्कि तापमान पर आधारित होता है। जब किसी उपकरण का तापमान सुरक्षित सीमा से ऊपर चला जाता है, तो यह फ्यूज स्थायी रूप से कट जाता है। इसका उपयोग इलेक्ट्रिक आयरन, हीटर और माइक्रोवेव जैसे उपकरणों में किया जाता है, जहाँ ओवरहीटिंग से आग या क्षति का खतरा होता है। यह फ्यूज तापीय सुरक्षा की अंतिम परत के रूप में कार्य करता है।
रीसेटेबल फ्यूज (Resettable / PTC Fuse)
रीसेटेबल फ्यूज आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की आवश्यकता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। ओवरकरंट की स्थिति में इसका रेजिस्टेंस अचानक बढ़ जाता है, जिससे करंट सीमित हो जाता है। ठंडा होने पर यह स्वयं अपनी सामान्य स्थिति में लौट आता है। यही कारण है कि मोबाइल, लैपटॉप, वायरलेस चार्जर और चार्जर जैसे उपकरणों में इसका व्यापक उपयोग होता है, जहाँ बार-बार फ्यूज बदलना व्यावहारिक नहीं होता।
हाई वोल्टेज फ्यूज (High Voltage Fuse)
हाई वोल्टेज फ्यूज का उपयोग 11 kV, 33 kV या उससे अधिक वोल्टेज वाले सिस्टम में किया जाता है। यह फ्यूज ट्रांसफॉर्मर और सबस्टेशन की सुरक्षा के लिए अनिवार्य होता है। इसका डिज़ाइन इस प्रकार किया जाता है कि यह उच्च वोल्टेज और अत्यधिक फॉल्ट एनर्जी को सुरक्षित रूप से नियंत्रित कर सके, जिससे पूरे पावर सिस्टम की स्थिरता बनी रहे।
प्रत्येक प्रकार का फ्यूज एक विशिष्ट वैज्ञानिक आवश्यकता को पूरा करता है। सही फ्यूज का चयन सर्किट की सुरक्षा, विश्वसनीयता और उपकरणों की लंबी उम्र सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
सही फ्यूज कैसे चुनें? — वैज्ञानिक और व्यावहारिक मार्गदर्शन
सही फ्यूज का चयन केवल एक इलेक्ट्रिकल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह उपकरणों की सुरक्षा, सर्किट की विश्वसनीयता और उपयोगकर्ता की सेफ्टी से सीधे जुड़ा विषय है। एक अनुभवी विद्युत अभियंता के दृष्टिकोण से फ्यूज का चुनाव हमेशा सर्किट के वास्तविक करंट व्यवहार और संभावित फॉल्ट स्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाता है।

करंट रेटिंग (Current Rating – Ampere)
करंट रेटिंग फ्यूज चयन का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आधार है। यह वह अधिकतम धारा है जिसे फ्यूज बिना पिघले सहन कर सकता है। व्यवहार में, फ्यूज को कभी भी सर्किट की सामान्य स्थिर-अवस्था धारा के बिल्कुल बराबर नहीं चुना जाता, क्योंकि इससे अनावश्यक ट्रिपिंग हो सकती है।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में प्रचलित 135% नियम के अनुसार, फ्यूज की रेटिंग सर्किट की सामान्य धारा से लगभग 1.35 गुना रखी जाती है। उदाहरण के लिए, यदि कोई सर्किट 10A करंट लेता है, तो उसके लिए 13A से 15A का फ्यूज उपयुक्त माना जाता है। यह चयन फ्यूज को सामान्य कार्य के दौरान सुरक्षित रखता है, लेकिन ओवरकरंट की स्थिति में समय पर सर्किट को काट देता है।
वोल्टेज रेटिंग (Voltage Rating)
फ्यूज की वोल्टेज रेटिंग यह दर्शाती है कि वह अधिकतम कितने वोल्ट पर सुरक्षित रूप से आर्क को बुझा सकता है। वैज्ञानिक दृष्टि से, वोल्टेज रेटिंग हमेशा सर्किट के वास्तविक वोल्टेज के बराबर या उससे अधिक होनी चाहिए। यदि कम वोल्टेज रेटिंग वाला फ्यूज उच्च वोल्टेज सर्किट में लगाया जाए, तो पिघलने के बाद भी आर्क बना रह सकता है, जो गंभीर खतरा उत्पन्न करता है। उदाहरण के तौर पर, 230–240V सर्किट के लिए 250V या उससे अधिक रेटिंग वाला फ्यूज चुना जाता है।
फ्यूज की गति (Speed / Time-Current Characteristic)
हर सर्किट का करंट व्यवहार समान नहीं होता। कुछ उपकरण चालू होते समय क्षणिक रूप से अधिक करंट लेते हैं, जिसे In-rush Current कहा जाता है। इसी कारण फ्यूज की गति का चयन आवश्यक होता है।
फास्ट-एक्टिंग फ्यूज अत्यंत संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए उपयुक्त होते हैं, जहाँ थोड़े से ओवरकरंट पर भी तुरंत सुरक्षा चाहिए। इसके विपरीत, स्लो-ब्लो या टाइम-डिले फ्यूज मोटर, ट्रांसफॉर्मर और हीटर जैसे उपकरणों के लिए चुने जाते हैं, ताकि स्टार्टिंग करंट के कारण फ्यूज अनावश्यक रूप से न टूटे।
भौतिक आकार और प्रकार (Physical Size and Type)
फ्यूज का यांत्रिक फिट भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उसका विद्युत मान। फ्यूज का आकार और प्रकार—जैसे ग्लास ट्यूब, कार्ट्रिज या ब्लेड—पूरी तरह होल्डर और इंस्टॉलेशन डिजाइन के अनुरूप होना चाहिए। गलत आकार का फ्यूज न केवल फिटिंग की समस्या पैदा करता है, बल्कि संपर्क खराब होने के कारण अतिरिक्त ऊष्मा भी उत्पन्न कर सकता है।
ब्रेकिंग कैपेसिटी / शॉर्ट-सर्किट क्षमता
ब्रेकिंग कैपेसिटी यह बताती है कि फ्यूज अधिकतम कितने फॉल्ट करंट को सुरक्षित रूप से काट सकता है। औद्योगिक और उच्च-पावर सिस्टम में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वहाँ शॉर्ट सर्किट के समय अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है। एक सही चुना गया फ्यूज फॉल्ट करंट को बिना विस्फोट या आर्क फ्लैश के सुरक्षित रूप से समाप्त कर देता है।
सही फ्यूज वही है जो सामान्य अवस्था में अदृश्य रहे और असामान्य अवस्था में तुरंत कार्य करे। करंट रेटिंग, वोल्टेज रेटिंग, फ्यूज की गति और ब्रेकिंग कैपेसिटी—इन सभी का संतुलित और वैज्ञानिक चयन ही किसी विद्युत प्रणाली को सुरक्षित, विश्वसनीय और दीर्घकालिक बनाता है।
फ्यूज का महत्व — वैज्ञानिक, व्यावहारिक और सुरक्षा-आधारित दृष्टिकोण
विद्युत परिपथों में फ्यूज का महत्व अत्यंत मौलिक और अनिवार्य है। यह एक ऐसा सुरक्षा उपकरण है जो ओवरकरंट और शॉर्ट सर्किट की स्थिति में सबसे पहले प्रतिक्रिया देता है और सर्किट को संभावित गंभीर क्षति से बचाता है। फ्यूज का कार्य सिद्धांत पूरी तरह से विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर आधारित होता है, जिससे इसकी कार्यप्रणाली स्वचालित, विश्वसनीय और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है।
आग से सुरक्षा (Fire Protection)
फ्यूज का सबसे बड़ा महत्व आग से सुरक्षा प्रदान करना है। जब किसी सर्किट में अत्यधिक धारा प्रवाहित होती है, तो I²R के कारण तारों में तीव्र ऊष्मा उत्पन्न होती है। यदि यह ऊष्मा नियंत्रित न की जाए, तो वायरिंग का इन्सुलेशन पिघल सकता है और आग लगने की संभावना उत्पन्न हो जाती है। फ्यूज ओवरकरंट की स्थिति में पहले स्वयं पिघलकर सर्किट को तोड़ देता है, जिससे तापमान खतरनाक स्तर तक पहुँचने से पहले ही विद्युत प्रवाह रुक जाता है। इस प्रकार फ्यूज आग के जोखिम को प्रभावी रूप से कम करता है।
उपकरणों की लंबी उम्र (Increased Life of Electrical Equipment)
आधुनिक विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अत्यधिक करंट के प्रति संवेदनशील होते हैं। फ्यूज उपकरणों को उस स्थिति से बचाता है जहाँ अचानक बढ़ा हुआ करंट उनके आंतरिक सर्किट को क्षतिग्रस्त कर सकता है। जैसे ही करंट सुरक्षित सीमा से ऊपर जाता है, फ्यूज सर्किट को काट देता है और उपकरण पर पड़ने वाला विद्युत तनाव समाप्त हो जाता है। परिणामस्वरूप, उपकरणों की कार्यक्षमता बनी रहती है और उनकी सेवा-आयु (Service Life) में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव (Prevention of Electrical Accidents)
शॉर्ट सर्किट या ओवरलोड की स्थिति में यदि विद्युत प्रवाह नियंत्रित न किया जाए, तो यह न केवल उपकरणों बल्कि मानव जीवन के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। फ्यूज लाइव तार के साथ श्रृंखला में लगाया जाता है, ताकि किसी भी असामान्य स्थिति में वह सबसे पहले सर्किट को डिस्कनेक्ट कर दे। इससे करंट का अनियंत्रित प्रवाह रुकता है और इलेक्ट्रिक शॉक, स्पार्किंग तथा अन्य दुर्घटनाओं की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
फ्यूज का महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह एक सरल, सस्ता और पूर्णतः स्वचालित सुरक्षा उपकरण है, जो बिना किसी बाहरी नियंत्रण के सर्किट की रक्षा करता है। यह स्वयं को नष्ट करके पूरे विद्युत तंत्र को सुरक्षित रखता है। अनुभव और विज्ञान दोनों यह सिद्ध करते हैं कि किसी भी सुरक्षित विद्युत प्रणाली में फ्यूज की उपस्थिति वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य है।
निष्कर्ष (Conclusion)
फ्यूज आकार में छोटा होने के बावजूद विद्युत सुरक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब यह समझा जाता है कि फ्यूज कितने प्रकार का होता है, तो स्पष्ट हो जाता है कि अलग-अलग विद्युत परिस्थितियों के लिए अलग-अलग प्रकार के फ्यूज विकसित किए गए हैं, ताकि हर सर्किट को उसकी आवश्यकता के अनुसार सटीक और विश्वसनीय सुरक्षा मिल सके। फ्यूज का कार्य सिद्धांत विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर आधारित है, जो इसे एक स्वचालित और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध सुरक्षा उपकरण बनाता है।
अनुभव और व्यवहारिक ज्ञान यह प्रमाणित करते हैं कि यदि सही प्रकार का फ्यूज—उचित करंट रेटिंग, वोल्टेज रेटिंग और उपयोग के अनुसार—चुना जाए, तो यह न केवल विद्युत उपकरणों को ओवरकरंट और शॉर्ट सर्किट से सुरक्षित रखता है, बल्कि वायरिंग में अत्यधिक ताप उत्पन्न होने से रोककर आग और विद्युत दुर्घटनाओं की संभावना को भी कम करता है। इस प्रकार, यह समझना कि फ्यूज कितने प्रकार का होता है और सही फ्यूज का चयन करना, किसी भी सुरक्षित और विश्वसनीय विद्युत प्रणाली की आधारशिला है, जो अंततः जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
1. फ्यूज कितने प्रकार का होता है?
फ्यूज कई प्रकार के होते हैं, जैसे रीवायरेबल फ्यूज, कार्ट्रिज फ्यूज, HRC फ्यूज, ब्लेड फ्यूज, थर्मल फ्यूज, रीसेटेबल फ्यूज और हाई वोल्टेज फ्यूज। प्रत्येक प्रकार अलग-अलग उपयोग और सुरक्षा स्तर के लिए बनाया गया है।
2. फ्यूज को हमेशा श्रृंखला (Series) में क्यों जोड़ा जाता है
फ्यूज को श्रृंखला में इसलिए जोड़ा जाता है ताकि सर्किट की पूरी धारा उसी से होकर गुजरे और ओवरकरंट की स्थिति में वह तुरंत सर्किट को काट सके।
3. घरेलू उपयोग के लिए कौन-सा फ्यूज अधिक उपयुक्त होता है?
घरेलू वायरिंग में सामान्यतः रीवायरेबल फ्यूज या D-Type कार्ट्रिज फ्यूज का उपयोग किया जाता है, जो मध्यम करंट के लिए उपयुक्त होते हैं।
4. फ्यूज का मुख्य कार्य क्या है?
फ्यूज का मुख्य कार्य ओवरकरंट या शॉर्ट सर्किट की स्थिति में विद्युत प्रवाह को रोककर सर्किट और उपकरणों को क्षति से बचाना है। यह स्वयं पिघलकर सर्किट को काट देता है।
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